वे हीरो अमेरिका से ऐसी दो खबरें आई हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में हंगामा मचा दिया है। एक तरफ अमेरिकी संसद ने आतंकी हमले को नाकाम करने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मिथ मछार को बहादुर बोलते हुए उनके लिए अपनी संसद में सम्मान प्रस्ताव पारित कर दिया। तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पूर्व अमेरिकी सैनिक निदाल हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने का आदेश दिया है।
यानी अमेरिका ने भारतीय पायलट को लोगों की जान बचाने के लिए सम्मान दिया। उसके बाद अमेरिका ने ही एक मुस्लिम सैनिक को 13 लोगों की जान लेने के लिए मौत की सजा सुना दी है। अमेरिका से आई इन दोनों खबरों ने भारत समेत पूरी दुनिया को चौंका दिया है। भारत में तथाकथित वोट चोरी पर हंगामा मचाने वाले जो लोग अभी तक कैप्टन स्मिथ मछार पर खामोश हैं, वह लोग अमेरिका से आई यह खबर जरूर देख लें। शुरुआत कैप्टन स्मिथ मछार से करते हैं। अमेरिकी संसद के निचले सदन ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मिथ मछार के सम्मान में एक प्रस्ताव पास किया है।
इसे अमेरिका की दोनों पार्टियों ने समर्थन दिया है जिसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियां शामिल हैं। हालांकि भारत में विपक्ष के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी स्मिथ मछार पर अभी तक खामोश हैं। अमेरिका ने स्मिथ मछार के सम्मान में जो प्रस्ताव पास किया है उसमें दुबई विमान वाली घटना को आतंकी हमला बताया गया है। आपको बता दें कि इजराइल पहले ही कैप्टन स्मिथ मछार को सम्मान दे चुका है। अमेरिका से आई इस बड़ी खबर के कुछ समय बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पहली बार एक होश उड़ा देने वाला फैसला ले लिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के पूर्व सैनिक निदाल हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने का आदेश दिया है।
आपको बता दें कि निदाल मलिक हसन अमेरिकी सेना में एक मेजर और मनोचिकित्सक के पद पर तैनात था। लेकिन यह खुद मानसिक तौर पर बेहद कट्टर बन चुका था। निदाल हसन ने 2009 में टेक्सास के एक सैन्य अड्डे पर धार्मिक नारे लगाते हुए गोलीबारी कर दी। इस गोलीबारी में 13 लोगों की मौत हुई थी। निदाल हसन निजी पिस्तौल लेकर अमेरिका के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर पहुंचा। इसने अपनी पिस्तौल निकाली और धार्मिक नारे लगाने शुरू कर दिए। उसके बाद अंधाधुंध गोलियां चला दी। इस हमले में 13 लोगों की मौत हो गई। यह अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुई सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी थी। जिस समय निदाल हसन ने गोलीबारी की उस समय अमेरिका, अफगानिस्तान और इराक में युद्ध लड़ रहा था। शायद यही बात इस सैनिक को पसंद नहीं आई। वैसे ओमान के को-पायलट को भी यह बात पसंद नहीं आई
कि इजराइल हमास के साथ जंग क्यों लड़ रहा है। इसीलिए उसने भी प्लेन क्रैश करने की कोशिश की। वो तो कैप्टन स्मिथ मछार बीच में आ गए। बहरहाल अमेरिका के पूर्व सैनिक निदाल हसन ने कोर्ट में गोलीबारी की बात को स्वीकार कर लिया। उसने कहा कि मुझे कोई पछतावा नहीं है। निदाल हसन ने अमेरिकी सैन्य कोर्ट में यहां तक कह दिया कि सजा मिलने से वह बेहद खुश है क्योंकि वह खुद को शहीद मानेगा। जज के सामने निदाल हसन ने कहा कि मैं अगर अमेरिकी सैन्य अड्डे पर भी मर जाता तब भी मैं शहीद कहलाता। बहरहाल आपको बता दें कि अमेरिकी सेना ने पिछले 65 सालों में किसी भी अमेरिकी सैनिक को मौत की सजा नहीं दी है। आखिरी बार 1961 में एक अमेरिकी सैनिक को फांसी की सजा दी गई थी। अब बारी निदाल हसन की है।