2 और 3 अक्टूबर की रात, बर्मुडा से बोस्टन जा रहा एक एयर एम्बुलेंस जेट अचानक लापता हो गया। विमान में कुल छह लोग सवार थे—दो पायलट, दो मेडिकल स्टाफ, एक मरीज और एक रिश्तेदार। विमान ने बर्मुडा के एल.एफ. वेड एयरपोर्ट से रात 12:41 बजे उड़ान भरी थी और उसे तड़के लगभग 2:25 बजे बोस्टन के लोगान एयरपोर्ट पहुँचना था।शुरुआत में विमान लगभग 24,000 फीट की ऊँचाई पर उड़ रहा था।
लेकिन उड़ान के लगभग एक घंटे बाद, विमान अचानक तेजी से नीचे आने लगा। महज दो मिनट में इसने लगभग 13,000 फीट की ऊँचाई खो दी। सबसे अहम बात तब सामने आई जब पायलट ने एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) से संपर्क कर कहा कि उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। इसका मतलब था कि विमान को दृश्यता (विजिबिलिटी) की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा था।एटीसी ने पायलट से पूछा कि क्या विमान किसी आपातस्थिति (इमरजेंसी) में है, लेकिन इसके बाद वहां से कोई जवाब नहीं आया। थोड़ी देर बाद विमान का रेडियो और रडार संपर्क भी टूट गया। विमान बोस्टन से करीब 15 मिनट की दूरी पर था। बाद में, जिस इलाके में विमान का मलबा जैसा कुछ देखा गया था, वहां तलाश शुरू की गई।अब यह सवाल उठा: क्या इसका बर्मुडा ट्राइंगल से कोई संबंध है?चूँकि विमान ने बर्मुडा से उड़ान भरी थी, इसलिए सोशल मीडिया और कई खबरों में इसे तुरंत बर्मुडा ट्राइंगल से जोड़ दिया गया। लेकिन उपलब्ध मार्ग के अनुसार, जब विमान का एटीसी से संपर्क टूटा, तब तक वह बर्मुडा ट्राइंगल के मुख्य क्षेत्र से काफी दूर निकल चुका था। उसकी आखिरी लोकेशन अमेरिका के मैसाचुसेट्स के पास बताई गई थी। इसका मतलब था कि विमान अपने गंतव्य बोस्टन के काफी करीब था।
इसलिए, अभी यह कहना कि विमान बर्मुडा ट्राइंगल की किसी रहस्यमयी ताकत के कारण गायब हुआ…… सिर्फ एक दावा ही होगा।बर्मुडा ट्राइंगल आमतौर पर फ्लोरिडा, बर्मुडा और प्यूर्टो रिको के बीच का समुद्री क्षेत्र माना जाता है। कई दशकों से इस इलाके के बारे में ऐसी कहानियाँ सामने आती रही हैं कि यहाँ अचानक जहाज और विमान गायब हो जाते हैं। 1492 में, क्रिस्टोफर कोलंबस ने भी इस इलाके से गुजरते समय अपनी लॉगबुक में असामान्य कम्पास रीडिंग और समुद्र में रोशनी दिखने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया था।इसके बाद कई मशहूर घटनाओं ने इस रहस्य को और हवा दी। सबसे प्रसिद्ध मामलों में यूएसएस साइक्लोप्स और 1945 की ‘फ्लाइट 19’ शामिल हैं। 1945 में अमेरिकी नौसेना के पांच टीबीएम एवेंजर विमान एक प्रशिक्षण मिशन पर निकले थे और कभी वापस नहीं लौटे। उनकी तलाश में गया एक विमान भी संपर्क खो बैठा। इस घटना ने बर्मुडा ट्राइंगल की रहस्यमयी छवि को दुनिया भर में मशहूर कर दिया।यह समुद्री क्षेत्र काफी बड़ा है
और मौसम के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। यहाँ भीषण तूफान, ऊँची लहरें, खराब मौसम और नेविगेशन से जुड़ी समस्याएँ हादसों का कारण बनती हैं। यानी रहस्य की कहानी एक तरफ है और वैज्ञानिक साक्ष्य दूसरी तरफ।अब, बर्मुडा ट्राइंगल को लेकर कुछ सिद्धांत (थ्योरी) दिए जाते हैं: * खतरनाक बादल और तेज हवाएँ: एक सिद्धांत बताता है कि इस क्षेत्र में षट्कोणीय (हेक्सागोनल) आकार के बादल बन सकते हैं। दावा किया जाता है कि इनके आसपास बेहद तेज हवाएँ पैदा होती हैं। यदि कोई विमान या जहाज ऐसी स्थितियों में फंस जाता है, तो उस पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। इसलिए कुछ लोगों ने इसे ‘एयर बम’ जैसी परिघटनाओं से जोड़ा है। * समुद्र के नीचे मीथेन गैस: दूसरी थ्योरी समुद्र के नीचे मौजूद मीथेन गैस से जुड़ी है। दावा है कि अगर समुद्र तल से अचानक बड़ी मात्रा में मीथेन गैस निकलती है, तो यह पानी में कई बुलबुले पैदा कर सकती है। इससे पानी का घनत्व कम हो जाता है, जिससे जहाज की तैरने की क्षमता प्रभावित होती है। बड़ी मात्रा में गैस हवा में पहुँचने पर विमान के इंजनों के प्रभावित होने की संभावना भी जताई गई है। * चुंबकीय प्रभाव (मैग्नेटिक इफेक्ट): बर्मुडा ट्राइंगल से जुड़ा एक पुराना विश्वास यह है कि यहाँ के चुंबकीय क्षेत्र के कारण कम्पास गलत दिशा दिखा सकते हैं। यदि कोई पायलट या नाविक दिशा का गलत अर्थ निकालता है, तो वे रास्ते से भटक सकते हैं। हालांकि, यह कहना सटीक नहीं होगा कि यहाँ कोई असाधारण चुंबकीय बल है जो जहाजों या विमानों को अपनी ओर खींचता है।
इलेक्ट्रॉनिक फॉग और टाइम वार्प: एक और अत्यधिक रहस्यमयी दावा इलेक्ट्रॉनिक फॉग का है। पायलट ब्रूस गर्नन ने दावा किया था कि उड़ान के दौरान उन्होंने एक अजीब बादल या टनल जैसी संरचना देखी, और उसमें प्रवेश करने के बाद उन्होंने अपने उपकरणों में खराबी देखी। बाहर निकलने के बाद, उन्होंने बहुत कम समय में असामान्य रूप से लंबी दूरी तय करने का दावा किया। * 30 मीटर ऊँची प्रचंड लहरें (रॉग वेव्स): समुद्र में अचानक उठने वाली बड़ी और असामान्य लहरें बड़े जहाजों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। यह सुझाव दिया गया है कि बर्मुडा क्षेत्र में तूफानों के टकराने से बहुत ऊँची लहरें बन सकती हैं। यदि कोई जहाज ऐसी लहर से टकराता है, तो वह पलट या डूब सकता है।
बर्मुडा ट्राइंगल के रहस्य को और अधिक सनसनीखेज बनाने के लिए कई अलौकिक (सुपरनैचुरल) दावे भी किए गए हैं। कुछ लोगों का कहना था कि समुद्र के नीचे एलियंस या स्पेसशिप मौजूद हैं जो वहां से गुजरने वाले जहाजों और विमानों को निशाना बनाते हैं। एक अन्य कहानी अटलांटिस के बारे में है। दावा किया जाता है कि अटलांटिस की खोई हुई सभ्यता समुद्र के नीचे मौजूद है और उसकी उन्नत तकनीक आज भी सक्रिय है। लेकिन इन दावों का कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।इस पूरी कहानी में असली मोड़ यह है कि बर्मुडा से उड़ान भरने वाले विमान भले ही लापता हुए हों, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि इसके लिए बर्मुडा ट्राइंगल ही जिम्मेदार है। निष्पक्ष का मतलब न्यूज़ 24।