फ्लाई दुबई की फ्लाइट में हुए उस खौफनाक घटनाक्रम को लेकर अब ईरान की तरफ से बड़ा बयान आया है। ईरान ने फ्लाई दुबई के विमान में हुई घटना को लेकर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान को इस घटना से जोड़ने के लिए कथित तौर पर फर्जी सबूतों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बघाई ने इन दावों को एक तरह का फॉल्स फ्लैग बताया और कहा कि ईरान के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद है। तो आखिर फ्लाई दुबई की फ्लाइट में हुआ क्या था? ईरान का नाम इस मामले में क्यों जोड़ा गया और अब ईरान ने क्या सफाई दी है?
आइए पूरा मामला आसान भाषा में समझते हैं। दरअसल 30 सितंबर को फ्लाई दुबई की फ्लाइट एफ जेड 1073 दुबई से तेल अवी के लिए रवाना हुई थी। फ्लाइट के दौरान विमान के कॉकपिट में एक बेहद गंभीर घटना हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक ओमान के को पायलट हमाम अल हमामी ने विमान के भारतीय कैप्टन इस्मत मछुार पर हमला किया और विमान का कंट्रोल लेने की कोशिश की। इस दौरान विमान की ऊंचाई में भी अचानक बड़ी गिरावट आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान करीब 34,000 फीट की ऊंचाई से लगभग 16,600 फीट तक नीचे आ गया था। स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और इमरजेंसी सिग्नल भी भेजा गया।
लेकिन इसी दौरान कैप्टन स्मिथ मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू ने को पायलट को काबू करने में मदद की। विमान में मौजूद दो अतिरिक्त पायलटों ने फिर फ्लाइट का कंट्रोल संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया। यानी एक बड़ी हवाई घटना और दुर्घटना को टाल दिया गया। इस घटना के बाद से सबसे बड़ा सवाल उठा कि आखिर को पायलट ने ऐसा किया क्यों? और क्या इस घटना का किसी संगठन या देश से कोई संबंध था? इसी जांच के बीच ईरान का नाम भी चर्चा में आया। कुछ दावों में इस घटना को ईरान के जोड़ने की कोशिश की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बिना कोई सार्वजनिक सबूत पेश किए को पायलट के ईरान से संभावित संबंध की बात कही थी।
व इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नितिन याहू ने शुरुआत में कहा था कि इस स्तर पर यह तय करना जल्दबाजी होगी कि ईरान की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं। बाद में इजराइली अधिकारियों की ओर से भी कहा गया कि को पायलट ने संभवत अकेले ही यह कदम उठाया। अब ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि उनके देश पर केवल कथित तौर पर फर्जी सबूतों के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इजराइल और कुछ यूरोपीय देशों पर पहले ही फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। बघाई ने यह भी कहा कि इस तरह के आरोप एक पुरानी रणनीति है और ईरान को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
ईरान की तरफ से यह भी कहा गया कि ऐसे आरोप गाजा और ईरान से जुड़े दूसरे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। हालांकि दूसरी तरफ इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है। यूएई इस घटना की जांच का नेतृत्व कर रहा है। यूएई के अधिकारियों ने पहले कहा था कि शुरुआती जांच में को पायलट की कार्यवाही को आतंकवादी कृत के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और इजराइल की एजेंसियां भी को पायलट की पृष्ठभूमि और उसके संभावित संपर्कों की जांच कर रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि हमाम अल हमामी पहले ओमान एयर से जुड़ा था और उसके कथित चरमपंथी विचारों को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि इन तमाम दावों और जांच के बीच यह साफ करना जरूरी है कि ईरान से सीधा संबंध होने की बात अभी एक सत्यापित तथ्य नहीं है।
ईरान इसे पूरी तरह खारिज कर रहा है और आरोपों को फर्जी सबूतों पर आधारित बता रहा है। वहीं अलग-अलग एजेंसियां इस घटना की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश भी की जा रही है कि आखिर फ्लाइट में इस तरह की घटना क्यों हुई और इसके पीछे असल वजह क्या थी।
तो कुल मिलाकर फ्लाई दुबई की फ्लाइट में हुई घटना अब सिर्फ विमान सुरक्षा का मामला नहीं रह गई है। इसके तार अंतरराष्ट्रीय राजनीति से भी जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। ईरान ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि उसके खिलाफ झूठे सबूतों के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं। अब सबसे अहम बात होगी कि जांच पूरी होने के बाद इस घटना के पीछे की असल वजह क्या सामने आती है और क्या इस मामले में ईरान का कोई कनेक्शन साबित होता है या नहीं? यह आने वाला समय बताएगा।