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पूरी फिल्म इंडस्ट्री में क्यों महाकंजूस माने जाते थे संजीव कुमार?

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महान अभिनेता संजीव कुमार, जिन्हें ‘हरि भाई’ के नाम से भी जाना जाता है, जिन्होंने प्रसिद्धि की ऊंचाइयों को छुआ, एक समय अत्यधिक गरीबी में दिन बिता चुके थे। काम की तलाश में उन्हें छोटी बजट की फिल्मों का हिस्सा बनना पड़ा। लेकिन समय बदला और संजीव बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों की पंक्ति में शामिल हो गए। खास बात यह थी कि धन-दौलत आने के बाद भी उनका दिल छोटा नहीं हुआ। उन्होंने अपने दोस्तों की मदद में लाखों रुपये खर्च कर दिए। दोस्तों, वीडियो में आगे बढ़ने से पहले, कृपया मेरे चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन को जरूर दबाएं।

तो आइए दोस्तों, वीडियो की शुरुआत करते हैं।दोस्तों, हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसे सितारे हुए हैं जिनकी अदाकारी ने उन्हें हमेशा के लिए अमर बना दिया। संजीव कुमार उन्हीं नामों में से एक हैं। पर्दे पर कभी गंभीर तो कभी बेहद सहज अंदाज में नजर आने वाले संजीव कुमार ने अपने जीवन में आर्थिक तंगी भी देखी और शोहरत के शिखर पर भी पहुंचे। शुरुआती दिनों में स्थिति यह थी कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें जो भी फिल्में मिलतीं, वे कर लेते थे। लेकिन जब सफलता मिली, तो इस महान अभिनेता ने अपने दोस्तों की मदद के लिए बिना कोई हिसाब-किताब रखे लाखों रुपये देने शुरू कर दिए। असल में वह कंजूस नहीं बल्कि बड़े दिल वाले थे।बॉलीवुड में संजीव कुमार को हरि भाई के नाम से भी जाना जाता था।

उन्होंने ‘शोले’, ‘आंधी’, ‘त्रिशूल’, ‘कोशिश’ और ‘मौसम’ जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी से एक खास पहचान बनाई। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। फिल्म पत्रकार हनीफ जवेरी ने ‘मेरी सहेली’ पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान संजीव कुमार के शुरुआती संघर्ष के बारे में खुलकर बात की। हनीफ जवेरी ने बताया कि जब संजीव फिल्मों में काम तलाश रहे थे, तब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। उनकी मां उनके पिता के घाटे में चल रहे बिजनेस को संभाल रही थीं। संजीव के पास पहनने के लिए सिर्फ दो जोड़ी कपड़े थे।

ऐसे में उन्होंने अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहारा देने के लिए जो भी काम मिला, उसे करने का फैसला किया। हनीफ ने बताया कि संजीव को शायद इस बात का अहसास भी नहीं था कि वह जिन फिल्मों में काम कर रहे थे, वे सी-ग्रेड फिल्में थीं। उस समय उनके लिए काम पाना और पैसे कमाना ज्यादा जरूरी था।संजीव कुमार के बारे में अक्सर यह कहा जाता था कि वह काफी कंजूस थे। लेकिन हनीफ जवेरी ने इस धारणा को गलत बताया। उनके मुताबिक, संजीव ने अपने दोस्तों को करीब 96 लाख रुपये उधार दिए थे, जो उन्हें कभी वापस नहीं मिले। उन्होंने अपने ड्राइवर की शादी का खर्चा भी उठाया था और एक दोस्त को कार भी गिफ्ट की थी। उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं, संजीव कुमार ने अपने ड्राइवर के बेटे की पढ़ाई के लिए अपनी वसीयत में लाखों रुपये अलग से रखे थे। हनीफ ने कहा कि जो इंसान दूसरों पर इस तरह पैसे खर्च करता हो,

उसे कंजूस कहना ठीक नहीं है। संजीव कुमार बस फिजूलखर्ची के खिलाफ थे।संजीव कुमार की शत्रुघ्न सिन्हा से बेहद गहरी दोस्ती थी। जब शत्रुघ्न सिन्हा को पैसों की जरूरत पड़ी, तो संजीव खुद उनकी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने करीब 5 से 7 लाख रुपये दिए थे। उन्होंने यह मदद बिना किसी औपचारिक मांग के की थी। इसी तरह संजीव कुमार ने बोनी कपूर को भी उनके जरूरत के समय पैसे दिए थे। इस लेन-देन के लिए कोई दस्तावेज नहीं बनाए गए थे और यहां तक कि संजीव के परिवार को भी इसकी जानकारी नहीं थी। संजीव कुमार के निधन के बाद बोनी कपूर ने वह रकम उनके परिवार को लौटा दी थी।संजीव कुमार की निजी जिंदगी भी काफी चर्चा का विषय रही। हेमा मालिनी और नूतन के साथ उनके रिश्तों की कहानियां उनके जीवन से जुड़ी रहीं। बाद में सुलक्षणा पंडित को भी उनसे प्यार हो गया। हालांकि, हनीफ जवेरी के मुताबिक,

संजीव सुलक्षणा को पसंद तो करते थे लेकिन उनसे शादी नहीं करना चाहते थे। हनीफ ने बताया कि संजीव कुमार को लगता था कि वह ज्यादा दिन नहीं जिएंगे क्योंकि उनके परिवार के पुरुष 50 साल की उम्र से पहले ही गुजर जाते थे। इसके अलावा, सुलक्षणा से मिलने तक उन्हें दो बार दिल का दौरा भी पड़ चुका था। इसी वजह से उन्हें डर था कि वह भी कम उम्र में ही दुनिया छोड़ देंगे। वह किसी से शादी करके उसकी जिंदगी दुख से नहीं भरना चाहते थे। उन्होंने बताया कि यही सबसे बड़ी वजह थी कि संजीव ने शादी नहीं की।संजीव कुमार ने 6 नवंबर 1985 को महज 47 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। पर्दे पर हर सांस के साथ किरदारों में जान फूंकने वाले इस महान कलाकार की कहानी सिर्फ शोहरत, कामयाबी और तालियों तक ही सीमित नहीं थी। उनकी वास्तविक जिंदगी, संघर्ष के कांटे, रिश्तों की गहराई, बेइंतहा दर्द और उनके द्वारा दिल खोलकर दिया गया प्यार एक ऐसी मिसाल है जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा अमर रहेगी।तो दोस्तों, आज के वीडियो को यहीं खत्म करते हैं। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक के लिए टाटा, बाय-बाय, और आप सभी अपना ख्याल रखें।

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