इस नाटकबाज आदमी को पहले अच्छे से देखिए। अरे रे रे, तुम तो महामंडलेश्वर बन गए थे। तुम्हें तो हनुमान जी के दर्शन हो गए थे। अभिनेत्री ममता कुलकर्णी हाल ही में राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में गई थीं। वह वहाँ चीफ गेस्ट थीं और उन्हें वहाँ सम्मानित भी किया गया था। ममता कुलकर्णी के उत्सव के वीडियो सामने आए हैं।
जहाँ ममता कुलकर्णी ने अपने समय के गानों पर वेस्टर्न आउटफिट पहनकर परफॉर्म भी किया। ममता कुलकर्णी एक अभिनेत्री थीं। फिर वह साध्वी बनीं और अब वह फिर से ग्लैमर वर्ल्ड का हिस्सा हैं। ममता कुलकर्णी के इस बदलते रूप पर ही अनुज महाराज ने टिप्पणी की है और एक वीडियो बनाकर कहा है कि ये ढोंगी लोग हैं। ये दल-बदलू लोग हैं।
अनुज महाराज ने क्या कहा है।इस नाटकबाज आदमी को पहले अच्छे से देखिए। अरे रे रे, तुम तो महामंडलेश्वर बन गए थे। तुम्हें तो हनुमान जी के दर्शन हो गए थे। हनुमान जी, मेरी इस 23 साल की तपस्या में दो बार प्रत्यक्ष रूप में मेरे साथ उनका रहना हुआ है। तो फिर यहाँ क्यों मर रहे हैं आप?
अनुज महाराज के इस वीडियो के वायरल होने के बाद ममता कुलकर्णी ने उन्हें कड़ा जवाब दिया है, ममता ने उन्हें जो कहा वो ।ऐसे अशिक्षित, अज्ञानी, अधर्मी केवल वेश के पीछे छिपे हुए ऐसे ठग, जो खुद को साधु कहते हैं, उनसे बचिए। इन्हें देखिए, इनकी वाणी सुनिए, क्योंकि इन्होंने वेश को साधुत्व के साथ और ध्यान व ज्ञान को वेश के साथ जोड़ दिया है। ये वस्त्र और माला पहने हुए लोग हैं और इसी को आप साधु कह रहे हैं।
अब आप सोचिए।मुझे राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में सांसारिक जीवन का पुरस्कार दिया जा रहा था। मैं कोई आध्यात्मिक पुरस्कार नहीं पा रही थी। मैं अपने 15 साल और जो 48 फिल्में की हैं, उसका पुरस्कार पा रही थी। और आप देखिए, मैं एक सांसारिक मंच पर खड़ी होकर अपनी शुरुआत करती हूँ, “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।”
फिर बीच में मैं यह भी कह रही हूँ कि मैंने वेस्टर्न कपड़े पहने हैं, पाश्चात्य कपड़े पहने हैं, फिर भी मेरे मुंह से निकला कि अर्जुन को श्री सामवेद क्या है? सामवेद पूरी तरह से नृत्य और संगीत पर आधारित वेद है। यह महामूर्ख जो मुझे कुछ कह रहा है, पहले खुद को देख; तू है कौन? ढोंग! वेश का ढोंग! साधु, दूर हटो और मैं वहाँ “यदा यदा हि धर्मस्य” कह रही हूँ। फिर मैं उसी मंच पर वंदे मातरम से इस पूरे स्टेज शो को खत्म कर रही हूँ।
यह सब कुछ इस ढोंगी ने नहीं देखा। उसे सिर्फ कपड़ों में ही अधर्म दिखा है। इस भौतिक मंच पर खड़ी होकर मैंने ‘यत्र नार्यस्तु’, ‘यदा यदा हि धर्मस्य’ और वंदे मातरम कह कर उसका समापन किया। लेकिन यह ढोंग है, क्योंकि उसने कभी तपस्या नहीं की। उसने कभी ध्यान नहीं किया। वह जानता ही नहीं कि तपस्या या ध्यान क्या होता है। और अगर उसे नाचने से आपत्ति है, तो महादेव पर भी उसे आपत्ति होनी चाहिए। उसे कहना चाहिए ध्यान मत करो।
क्योंकि महाकाल महादेव से, नटराज स्वरूप से भरतनाट्यम और नृत्य का आगमन हमारी मानव जाति के पास हुआ है।तो इस तरह ममता कुलकर्णी ने अपने ट्रोलर्स को कड़ा जवाब दिया है। कुंभ मेले के बाद से ममता कुलकर्णी मीडिया में सक्रिय हुईं और उसके बाद वह किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं। हालांकि किन्नर अखाड़े में ममता के प्रवेश के बाद काफी झगड़ा-झंझट भी हुआ था।