सुपरस्टार दिलीप कुमार को देखकर शायद ही किसी को यकीन होगा कि फिल्मी दुनिया में आने से पहले उन्हें अंग्रेजों की जेल में एक रात बितानी पड़ी थी। यह घटना उस समय की है, जब वह अभिनेता नहीं बने थे और पुणे में ब्रिटिश आर्मी की कैंटीन में काम करते थे।दिलीप कुमार ने अपनी ‘दिलीप कुमारः द सब्सटेंस एंड द शैडो’ में इस घटना का जिक्र किया है।
बताया जाता है कि एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ और भारत की आजादी के समर्थन में भाषण दिया। भाषण खत्म होते ही वहां मौजूद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।उन्हें यरवदा जेल ले जाया गया, जहां कई सत्याग्रही पहले से बंद थे। जेल में ऐसे लोगों को ‘गांधीवाला’ कहा जाता था।
दिलीप कुमार ने बताया कि उन्होंने वहां कैदियों के साथ भूख हड़ताल में भी हिस्सा लिया।दिलचस्प बात यह रही कि अगले दिन एक परिचित आर्मी मेजर की मदद से उन्हें रिहा कर दिया गया। बाहर आने के बाद उन्होंने इस अनुभव को जिंदगी की ऐसी घटना माना, जिसे वह कभी नहीं भूले।फिल्मों में आने से पहले ही दिलीप कुमार की जिंदगी में आजादी के दौर का यह अध्याय जुड़ चुका था।