प्रेमानंद महाराज के शिष्य के के बाद l है या यह सवाल सभी के जेहन में है। मेरे साथ पुलिस के अधिकारी मौजूद है जो इस पूरे मामले को बड़ी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। क्या अब तक जांच में पाया है? मैं उनसे बात कर लेता हूं। सर अभी तक जो जांच हो रही है वो किस तरफ इशारा कर रही है? अभी तक की जो हम लोगों के द्वारा जांच इसमें की गई है। प्रथम दृष्ट्या का केस अभी तक प्रतीत हो रहा है।
इसके संबंध में जैसा कि आपको जानकारी है कि कल लगभग 10:30 बजे के आसपास हमको एक सूचना प्राप्त हुई कि सर्वोदय अस्पताल में एक व्यक्ति घायल अवस्था में आया है और इस सूचना के बाद से पुलिस की जांच के क्रम में जो जानकारी हुई इनका नाम दीपक लोधी जो कि रसिक दुलारी शरण जी थे मूलत जबलपुर के रहने वाले हैं। तो ये वहां पे गुरु कृपा कुंज आश्रम है।
वहां पर रहते थे और इनके द्वारा जो फोर्थ फ्लोर की के किए जाने की बात प्रकाश में आई थी। जिस तरह से आपको सूचना मिली उसके बाद आपने इन्वेस्टिगेशन किया। सीसीटीवी कैमरा बता रहे हैं कि इसमें कोई रिकॉर्डिंग सामने आई है।
उसमें क्या पाया गया? सीसीटीवी कैमरे और उसके अलावा और भी तमाम एंगलों से जांच की गई है। इसमें जो कैमरे को देखने से जो प्रथम दृष्ट जो तथ्य अभी सामने आया है कि ये छत पे जाके ये वहां से कूदे हैं। सीसीटीवी कैमरे में छत पे जिस समय इन्होंने की है छत पे। ये लेटे भी हैं, बैठे भी हैं। काफी समय इन्होंने बिताया है। तो क्या उस दौरान कोई और छत पे था? नहीं। ये जब ये कूदे हैं छत से तो ये वही थे।
अकेले थे जब ये कोई कैमरे में ऐसी कोई जानकारी नहीं। जिस तरह से परिजन आए हैं उन्होंने कुछ कहा, कुछ बताया, कुछ तहरीर दी है या अभी और कोई इसमें इन्वेस्टिगेशन का अभी बाकी है। अभी जांच के क्रम में जैसा कि आपको हम लोगों ने पहले भी इसमें दिया था कि इसमें टीम के द्वारा जो साक्ष्य एकत्रित किया गया है और परिजन भी इनके आए हुए हैं उनसे भी हम लोग पूछता जांच को हम लोग निष्कर्ष के रूप में ले जाएंगे।
सर एक इंपॉर्टेंट चीज और है। इसमें जो है उसमें बताया जा रहा है कि उसमें कहीं ना कहीं किसी से या किसी चीज से उसमें लगाया गया है। वो क्या है? टीम के निरीक्षण के दौरान जो घटना स्थल है जहां पे रहते थे। एक रूम है छोटा सा जिसमें ए और एक साधक और रहते जहां पे एक ग्राइंडर मिला है तो प्रथम दृष्ट्या लग रहा है कि उसी ग्राइंडर से कटा होगा और इस चीज की भी हम लोग घनता से जानकारी कर रहे हैं। हां तो बिल्कुल है मेरे साथ सीओ सर्किल वृंदावन थे और उन्होंने बताया कि जिस तरह से इस पूरे मामले की जांच की जा रही है।
हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है। हर एंगल से इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। एक्चुअली ये चीज तो हम लोग को पता नहीं है। फोन गया था एक हां। तो हम लोग को इस बारे में पता चला। हां। कि ऐसा-सा हो गया है कि वो हम लोग इधर पहुंचे 3:00 बजे रात को। हां। तो फिर प्रेमानंद महाराज के आश्रम गए। तो उन लोग से पूछे तो उन लोगों ने कुछ नहीं बताया कि बाहर बैठे थे हम लोग। हां। हम लोग बाहर बैठे हुए थे। तो बाहर बैठे थे तो उन्होंने कुछ नहीं बोला कि बैठो सुबह 8:00 बजे के बाद मिलना। 8:00 बजे बैठे रहे थे। किसी ने कुछ नहीं पूछा।
हम लोग को लगभग 9 बज गया हो जाता। उधर से निकले फिर लोग आए तो अभी भी कुछ नहीं बताया उन लोग ने हां फिर एक्चुअली अब आए हैं इधर कब से रह रहे थे यहां पे इधर रह 204 से हां कभी बीच में आप मिलने आते थे मिलने देते थे ये बीच में अभी तो उन्होंने जब से गुरु दक्षिणा ली है जब से मिलने नहीं दिए।
किसी को नहीं मिलने देते थे परिवार वालों को नहीं नहीं किसी को नहीं मिलने दिए जब से गुरु दक्षिणा ली है क्यों नहीं मिलने देते थे वो हम लोग जाते रहे मिलने के लिए तो कुछ भी बोल देते रहे कि रुको एक घंटे दो घंटे रुको सर अभी आते हैं और बता रहे हैं तो बस दिन प्रति कर देते रहे वो लोग तो कभी फोन पे भी बात होती थी कि नहीं मोहल कुछ नहीं चलाता रहा उसने मोहल पहले बस सब बंद कर दिया था अब क्यों की कुछ परिजनों को भी बताते थे कुछ उनके साथ गलत हुआ है ये भी बताने कि उनके चोट है।
वैसे एक्चुअली हम लोग को कुछ ऐसा कुछ नहीं पता है अभी तक ऐसा किसी ने कुछ बताया अभी तक तो क्या लगता है आप लोगों को वो सुसाइड कर सकते थे ऐसे थे कभी बात इस तरह की करते थे परिवार में ऐसा कुछ नहीं है। वो सबसे सही लड़का थे। सबसे सही थे। जी। तो क्या लगता है किसी ने कर दी? दे दिया ऊपर से या और उसके बारे में अभी कुछ बोल नहीं सकते हम। क्या लग रहा है आप लोगों को अभी तक देखा है आप लोगों ने जो प्रेमानंद जी के शिष्य थे वहां गए उनका व्यवहार कैसा रहा आप लोगों को?
अभी तो हम जितने बार उनसे गए हैं जब पहले थे वो पहले मिलने जाते थे तो उन्होंने मिलने नहीं दिया हमको। नहीं मिलने देते थे। तीन दिन तक चक्कर चक्कर काटते तीन-ती दिन तक अब आप लोग यहां पर मौजूद हैं। सब परिवार जन लोग मौजूद है। लेकिन प्रेमंद जी के यहां से कोई नहीं दिख रहा यहां पर। कोई आया उनके यहां का किसी ने बात की आप लोगों से? किसी ने कुछ बात नहीं की। अभी कोई आपके प्रति संवेदना नहीं है उन लोगों की। अब मेरे को इसमें कुछ पता नहीं है। उनको तो आना चाहिए था वैसा किसी ना किसी को लेकिन कोई नहीं आया यहां पे। नहीं।
वृंदावन में जो ऐसी ऐसी घटनाएं साधु संतों के संकट वाली वाली आ रही है दिन प्रतिदिन यह जो है ना सही नहीं है ये संतों के ऊपर बहुत भारी संकट का संगत संदेश दे रही है और जो ये प्रेमानंद जी के महाराज जी के जो शिष्य हैं इन इनको कहा जा रहा है कि आत्महत्या की है तो ये ऐसा लग नहीं रहा है की है। आदमी या संत या कोई भी जो है इंसान हो अपना के बाद में की नहीं सोच सकता है। तो इसकी मैं प्रशासन से विनती करता हूं कि इसकी अच्छे से जांच हो।
अच्छे से जो ना सुनवाई करें इसकी क्योंकि देखो इतने बड़े संत के शिष्य होने के बावजूद उन पे भी जो है ना ये संकट का कारण बन सकते हैं। क्या पता कैसी-कसी साजिशें रचते हैं लोग। एक मिनट का भरोसा नहीं है। आज ऐसा समय आ गया है। तो मैं प्रशासन से हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि इसकी अच्छे से जो ना सुनवाई करके अच्छे से जांच प्रशासन से भी विनती यही है कि अच्छे से जांच करें।
इसकी वृंदावन में एक बहुत बड़ी घटना हुई है। जो वृंदावन में तपस्वी भूमि है जहां साधु संत ही भजन करते हैं। उसी भूमि पर ऐसे ऐसे अपराध हो रहे हैं कि एक बताया गया एक जो हुई है वो प्रेमानंद जी के शिष्य बताए जा रहे हैं। उनकी हो गई है। मारकर उनको तीसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया गया है। और बता रहे हैं कि ऊपर से