फिरोज खान के लिए शूटिंग पर समय की पाबंदी बेहद अहम थी। इसका एक चर्चित उदाहरण जीनत अमान ने खुद साझा किया था। फिल्म ‘कुर्बानी’ (1980) की शूटिंग के दौरान एक दिन जीनत अमान करीब एक घंटे देर से सेट पर पहुंचीं।
इससे पूरी यूनिट उनका इंतजार कर रही थी।जीनत के मुताबिक, पिछली रात वह एक पार्टी में गई थीं और अगले दिन सुबह जल्दी शूटिंग थी। जब वह सेट पर पहुंचीं तो उन्हें उम्मीद थी कि फिरोज खान नाराज होंगे। लेकिन उन्होंने डांटने के बजाय शांत अंदाज में कहा कि देर से आने की कीमत उन्हें चुकानी होगी।
फिर उन्होंने जीनत की उस दिन की फीस में से उतनी रकम काट ली, जितनी एक घंटे के लिए क्रू के ओवरटाइम में खर्च हुई थी।जीनत ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि फिरोज मजाक कर रहे हैं, लेकिन वह पूरी तरह गंभीर थे।
उन्होंने भुगतान किया और इस घटना के बाद जीनत ने कहा कि वह फिर कभी किसी शूटिंग पर देर से नहीं पहुंचीं।इस किस्से से पता चलता है कि फिरोज खान सेट पर समय और प्रोफेशनल अनुशासन को कितना महत्व देते थे।