तो दोस्तों हिंदी सिनेमा से एक बहुत दुखद खबर है। टीवी जगत और हिंदी सिनेमा के जानेमाने एक्टर मुश्ताक खान अब हमारे बीच नहीं रहे। 31 दिसंबर साल 1969 को मध्य प्रदेश में जन्मे मुस्ताक खान ने आज 24 सितंबर को मुंबई के नानावती हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली। 5 साल पहले उनको कैंसर हुआ था। उसका उनका ट्रीटमेंट चला और वह ठीक हो गए थे। अब दोबारा से कैंसर की वापसी होती है और उनका इलाज शुरू होता है।
फिर करीब पिछले 15 दिन से वह मुंबई के नानावती हॉस्पिटल में एडमिट थे। लेकिन आज यह दुखद खबर आई कि मुस्ताक खान ने महज 56 इयर्स की ऐज में यह दुनिया छोड़ दी। और पीछे छोड़ गए हैं अपनी पत्नी सलमा खान, बेटा अरशद खान और मोहसिन खान। अब कल यानी 25 सितंबर को उनको सुपुरदे खाक किया जाएगा। उनके लिए हम दुआ ही कर सकते हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की साल 1980 में। फिल्म थी थोड़ी सी बेवफा बेवफाई और अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है?
उसके बाद तो उन्होंने हिंदी सिनेमा में करीब 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और बहुत सारे टीवी सीरियल्स में भी अपनी कॉमिक टाइमिंग से लोगों को गुदगुदाया। टेढ़े-मेढ़े सपने भी उनके एक अहम टीवी सीरियल्स में माना जाता है। उनको घर-घर में पहचान मिली साल 2007 की फिल्म वेलकम के इस किरदार से जहां पर वो कहते हैं मेरी एक टांग नकली है। मैं हॉकी का बहुत बड़ा खिलाड़ी था। एक दिन गलती से एक दिन उदय भाई को मेरी किसी बात पर गुस्सा आ गया और मेरी हॉकी से मेरी दोनों टांगों के दो टुकड़े कर दिए। उनके इस बल्लू वाले किरदार को लोगों ने बहुत पसंद किया और वह हर दिल अजीज बन गए थे। उनकी कुछ और यादगार फिल्में हैं।
जैसे साल 1993 की फिल्म हम है राही प्यार के। उसमें उनका साउथ इंडियन लहजे वाला वो भगवती प्रसाद मिश्रा का किरदार। फिल्म आशिकी में दर्दी रफू मास्टर का किरदार। मुझसे शादी करोगी में चुटकी वाले बाबा और फिल्म गदर में गुल खान के किरदार लोगों को बहुत ज्यादा पसंद आए थे। ऐसी ना जाने कितनी फिल्में हैं और न जाने कितने ऐसे प्यारे रोल हैं जो मुस्ताक खान निभाकर आज अमर हो गए हैं। हाल ही के सालों में उनको फिल्म स्त्री और स्त्री 2 में भी देखा गया था।
2024 में एक यह बड़ी खबर आई थी कि मुस्ताक खान को किडनैप कर लिया गया था। उनको किसी अवार्ड फंक्शन के बहाने बुलाया और दिल्ली के एयरपोर्ट पे उनको गाड़ी में बिठाया और किडनैपर्स उनको बिजनौर ले गए। जहां पर उनसे ₹1 करोड़ मांगे गए। मुश्ताक खान ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं है। तब उनको धमकाया गया और 12 घंटे तक उनको कैदी बनाकर रखा गया। सुबह को जब फजर की अजान हुई तब उनको यह रियलाइज हुआ कि आसपास कहीं मस्जिद है और वह किसी तरह से वहां से निकल कर सीधा मस्जिद में पहुंच गए और वहां के लोकल लोगों से मदद मांगी। तब कहीं जाकर वह वापस अपने घर पहुंच पाए थे। इस किस्से को उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में भी बताया था।
तो आज मुस्ताक खान को याद करते हुए उनकी यादों को नमन और आपको मुश्ताक खान का कौन सा डायलॉग कौन सी फिल्म याद है जो कि आप कमेंट करके उनको श्रद्धांजलि देना चाहेंगे तो अब मुश्ताक खान साहब तो हमारे बीच नहीं है अगर हैं तो उनकी वो प्यारी सी मुस्कान और बहुत शानदार हंसी जो कि हमारे दिलों में हमेशा हमेशा एक याद बनकर रहेंगे। तो आज जेट्रोशावेज के यादों के रूहानी किस्से में बस इतना ही। आप सब लोग अपना बहुत-बहुत ख्याल रखें। जय हिंद, जय भारत।