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CJP ने अचानक से क्यों मांगा ओडिशा के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा? वजह चौंका देगी।

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सीजेपी ने अब ओसा के शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग कर दी है। दरअसल ओसा में स्कूल की किताबों को लेकर कई हफ्तों से विवाद चल रहा है। इसे लेकर नवनिर्माण छात्र युवा संगठन लगातार आंदोलन कर रहा है। अब इस विवाद में कॉकरोल जनता पार्टी की भी एंट्री हो गई है। सीजेपी के को कन्वीनर सौरभ दास ओसा पहुंचे।

उन्होंने भुवनेश्वर के सरकारी स्कूलों का दौरा किया। स्कूलों की हालत देखी। स्कूलों की हालत देखने के अलावा किताबों में हुई गलतियों को लेकर हो रहे आंदोलन में भी सौरव दास पहुंचे और फिर शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग कर डाली। ओसा की स्कूल की किताबों में क्या गलतियां हैं?

प्रोटेस्ट किस बात को लेकर हो रहा है? पूरा विवाद क्या है? और अब सीजेपी की इस विवाद में एंट्री से क्या बदला है? । इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ समय पहले ओसा की क्लास फर्स्ट से एट तक की किताबों में बहुत सी गलतियां होने की बात सामने आई थी। इन किताबों में कुल 1678 गलतियां थी। कुछ गलतियां जानकारी से जुड़ी थी। कुछ प्रिंटिंग एरर्स थे तो कुछ टाइपिंग मिस्टेक्स थी। इन्हीं गलतियों को लेकर ओसा में छात्र प्रोटेस्ट कर रहे हैं। प्रोटेस्ट की शुरुआत नवनिर्माण युवा छात्र संगठन यानी एनवाईसीएस ने की। जिसके बाद प्रदेश के कई अन्य युवा भी उनके साथ जुड़ गए। एनवाईसीएस ओसा के किसानों के संगठन नवनिर्मा कृषक संगठन का छात्र और युवा विंग है।

नवनिर्माण कृषक संगठन के संयोजक अक्षय कुमार और एनवाईसीएस नेता मनवर अली किताबों के विवाद को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। इसी प्रदर्शन के साथ सॉलिडरिटी दिखाने के लिए सीजेपी के को कन्वीनर सौरव दास प्रोटेस्ट वाली जगह पहुंचे। प्रोटेस्ट कर रहे लोगों से सौरभ दास ने मुलाकात की और उसके बाद उन्होंने कहा सीजेपी एनवाईसीएस के प्रदर्शन का समर्थन करती है। सौरभ दास ने कहा कि किताबों में इतनी बड़ी संख्या में गलतियां मिली हैं। इसीलिए इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। सौरव दास ने बताया कि वह एनवाईसीएस के प्रदर्शनकारियों और कर रहे लोगों से मिलने आई हैं। 5 सितंबर से नवनिर्माण कृषक संगठन के संयोजक अक्षय कुमार ने शुरू की थी।

सौरभ दास जब उड़ीसा पहुंचे तब उन्हें भूख हड़ताल करते हुए 2 हफ्ते से ज्यादा हो चुके थे। सौरव दास ने किताबों की छपाई पर खर्च हुए ₹380 करोड़ का भी मुद्दा उठाया। उनका दावा है कि सरकार ने बच्चों की किताबें छापने पर ₹380 करोड़ खर्च किए। लेकिन इन किताबों में कई गलतियां सामने आ गई। उनका कहना है कि ऐसे में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सौरभ ने वहां पहुंच और क्या-क्या कहा वो भी सुन लीजिए। मैं पोकरो जनता पार्टी की तरफ से मेरे साथ बालकृष्ण शुक्ला हमारे जॉइंट सेक्रेटरी ऑर्गेनाइजेशन है। हम दोनों आए और अक्षय जी के साथ मनवर अली जी के साथ हम और उनके संगठन के साथ हम लोग सॉलिडेरिटी जताने आए, सपोर्ट जताने आए।

जब जंतरमंतर पे आंदोलन हुआ था तब वो लोग भी आए थे। हमारा भी दायित्व बना कि जब वह आंदोलन कर रहे तो हम लोग आके उनका सपोर्ट करें। तो उनका जो डिमांड है कि 380 करोड़ का जो इर्रेगुलरिटी हुआ टेक्स्ट बुक प्रिंटिंग में उसका जांच हो। उसका जो जो मंत्री रिस्पांसिबल है उनका जवाबदेही तय हो। एंड जो नए टेक्स्ट बुक्स प्रिंट हो के बच्चों के पास पहुंचे वो सारे डिमांड्स हम लोग सपोर्ट करते वो तो ऑटोमेटिकली हो जाना चाहिए था। अभी तक 33 दिनों से सरकार ने फोर्स किया इनको रोड पे रहने का। 16 दिन से बैठ बैठ रहे हैं। तब भी सरकार बुला नहीं रही बात करने के लिए या खुद भी चल के नहीं आ रही है। यह तो बहुत अहंकार है सरकार को। ऐसा अहंकारी सरकार आज के टाइम पे नहीं टिक सकता है। हालांकि बीजेपी ने सीजेपी के आरोपों को खारिज किया है। ओसा सीजेपी को

उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी शासित राज्यों में ही ऐसे मुद्दे उठाती हैं और दूसरे राज्यों में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चुप रहती है। उन्होंने सीजेपी के आरोपों को राजनीतिक बताया है। बता दें कि आज इस पूरे मसले को लेकर एनवाईसीएस ने विधानसभा घेराव मार्च भी निकाला था। उसकी भी कई तस्वीरें सामने आई। अब यह भी बात कर लेते हैं कि क्या इस मसले पर सरकार ने कोई कदम उठाया है? जवाब है हां। ओसा सरकार ने किताबों में हुई गलतियों के बाद सुधार शुरू कर दिया है। सरकार ने सुधारी हुई किताबें छापनी शुरू की हैं और इन किताबों को छात्रों तक पहुंचाने का काम भी शुरू किया जा रहा है। ऐसा सरकार की तरफ से कहा गया है। कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए सुधारी हुई किताबें अलग-अलग जिलों में बांटी जा रही है। सरकार ने किताबों की जांच का तरीका भी बदलने की बात कही है।

इसमें किताब छपने से पहले कई स्तर पर उनकी जांच करने की व्यवस्था शामिल है ताकि आगे ऐसी गलतियां दोबारा ना हो। लेकिन सरकार की तरफ से किताबें बदलने का काम शुरू होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ है। अभी भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और किताबों में हुई गलतियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है। सीजेपी भी इस आंदोलन के समर्थन में आ गई है और सौरभ दास ने कहा है कि सीजेपी छात्रों के साथ खड़ी रहेगी। बहरहाल एनवाईसीएस को समर्थन देने के अलावा सौरव दास ने सीजेपी के स्कूल ठीक करो कार्यक्रम के तहत भुवनेश्वर और उसके आसपास के तीन सरकारी स्कूलों का भी दौरा किया था। इसमें एक स्कूल एससी एसटी आश्रम स्कूल भी शामिल था। इन स्कूलों में एससी एसटी आश्रम स्कूल भी शामिल था। दौरे के बाद उन्होंने स्कूल की सफाई और वाहन की इमारतों की हालत पर भी सवाल उठाए।

उनका कहना था कि स्कूलों में सफाई की हालत बहुत खराब है और कुछ जगहों पर बिल्डिंग भी काफी खराब हालत में है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन चीजों को भी ठीक करना चाहिए। खासकर इसलिए क्योंकि खराब सुविधाओं की वजह से लड़कियों की पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है। बता दें कि सीजेपी का यह स्कूल ठीक करो अभियान सिर्फ ओसा तक सीमित नहीं है। इससे पहले सीजेपी की टीम सरकारी स्कूलों का दौरा कर चुकी है। राजस्थान महाराष्ट्र में भी स्कूलों का दौरा किया गया है। आज सौरभ दास खुद ग्रेटर नोएडा में कई स्कूल्स के दौरे पर भी निकले थे।

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