फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी की के 8 साल के बाद उनकी एक संपत्ति को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। संपत्ति एक शानदार बीच हाउस है जो बहुत बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ है। चेन्नई में है संपत्ति। क्या है विवाद और सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर क्या कहा है? क्या कुछ होगा इस मामले में आगे?
यह पूरा विवाद है चेन्नई के शोलिंग नल्लूर इलाके में ईस्ट कोस्ट रोड के पास की एक संपत्ति को लेकर। बिल्कुल समुद्र के तट पर है यह संपत्ति और इसे लेकर ही एक विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 1988 में जब श्रीदेवी अपने करियर के पीक पर थी। हिंदी फिल्मों में, तमिल फिल्मों में, तेलुगु फिल्मों में तमाम फिल्मों में एक से बढ़कर एक काम कर रही थी तब उन्होंने एक संपत्ति खरीदी जो कि समुद्र तट के किनारे थी चेन्नई में और बाद में वहां पर एक शानदार बीच हाउस का निर्माण किया गया। 2018 में श्रीदेवी की मृत्यु हो गई। इसके बाद 2023 में राजस्व रिकॉर्ड में उनके पति बोनी कपूर और बेटियों जानवी कपूर और खुशी कपूर का नाम इस संपत्ति के सामने दर्ज कर दिया गया।
इसके बाद शुरू हुआ एक विवाद। 2025 में तीन लोगों ने चेंगल पट्टू की सिविल कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर दी। यह तीन लोग थे एमसी शिवकामी, उनके भाई एमसी नटराजजन और उनकी मां चंद्रभानु। इनका कहना था कि उनका उस पूरी संपत्ति में 1/5 हिस्सा है और 1988 में जो बिक्री हुई थी वह बिक्री ही गलत है क्योंकि उनका हिस्सा था और उसे दरकिनार करके यह बिक्री नहीं हो सकती थी जमीन की।
इस दावे के पीछे उन्होंने जो कारण बताए वो यह बताए कि एमसी मुदलियार नाम के व्यक्ति ने 1943 में यह जमीन खरीदी थी। एमसी संबंधा मुदलियार उनका नाम था और उनके बेटे थे एमसी चंद्रशेखरन। अब इस संपत्ति का 1960 में बंटवारा हुआ और चंद्रशेखरन के हिस्से में आई 1/ 5 जमीन। ऐसा याचिका में बताया गया। इन लोगों का कहना था कि हम चंद्रशेखरन से जुड़े हुए हैं। चंद्रभानु जो हैं उनकी पत्नी हैं और शिवकामी और नटराजजन उनके बच्चे हैं। ऐसे में जो जमीन के मूल मालिक थे.
एमसी संबंदा मुदिलियार उनके परिवार के कुछ लोगों ने श्रीदेवी को संपत्ति बेच दी। वह ऐसा नहीं कर सकते थे। अब जो सिविल कोर्ट थी उसने याचिका को स्वीकार कर लिया और नोटिस जारी हुआ बोनी कपूर, जानवी कपूर और खुशी कपूर को। इन लोगों ने निचली अदालत में आकर मांग की कि वह याचिका को खारिज कर दे क्योंकि याचिका का कोई आधार नहीं है।
जो सिविल जज थे जो इस मामले को सुन रहे थे उन्होंने कहा कि बिल्कुल थ्रेशहोल्ड पर यानी कुछ भी सुने बिना खारिज करना मुश्किल है। मुझे थोड़ा सा मामला समझने दीजिए और उसके बाद विचार किया जा सकता है कि इस मामले में क्या करना है। लेकिन बोनी कपूर, जानवी कपूर और खुशी कपूर इससे संतुष्ट नहीं हुए और पहुंच गए मद्रास हाई कोर्ट। यह जो संपत्ति है यह 2.7 एकड़ जमीन में फैला हुआ शानदार बीच हाउस है। बिल्कुल समुद्र के सामने कपूर परिवार इसे छुट्टियों में एंजॉय करता है। इस प्रॉपर्टी को वहां जाता है और बहुत सारी गतिविधियां वहां पर चल रही हैं। जो कुछ कमर्शियल गतिविधियां भी हैं।
शायद में भी अह इसको लिस्टेड किया गया है इस संपत्ति को। तो एक तरह से कपूर परिवार की यह संपत्ति है और उनका यह कहना था कि इसे लेकर इतने सालों के बाद लगभग चार दशक के बाद कोई विवाद कर रहा है यह उचित नहीं है। हाईकोर्ट में उन्होंने तमाम बातें कही और हाईकोर्ट ने क्या किया? हाईकोर्ट ने इस साल मई में एक आदेश दिया और जो याचिका निचली अदालत में दाखिल की गई थी उसे खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि लगभग 40 साल के बाद याचिका दाखिल करना लिमिटेशन के यानी कि जो कानूनी रूप से एक सीमा होती है समय सीमा किसी बात को चुनौती देने की उसके परे जाकर है।
इसके अलावा जो यह दावा कर रहे हैं कि एमसी संबंधा मुदलियार के बेटे चंद्रशेखरन से चंद्रभानु की शादी हुई यह शादी ही विवादित है और यह शादी कानूनी रूप से वैध नहीं है। इसके अलावा यह भी कि जो शिवकामी और नटराजजन का दावा है कि वह वंशज हैं उनके और संपत्ति के वारिस हैं। यह दावा पहले खारिज हो चुका है। ऐसे में इनकी याचिका सुनी नहीं जानी चाहिए थी।
हाईकोर्ट ने यह कहते हुए बिल्कुल डिसमिस कर दिया। निचली अदालत की कारवाई को बंद करा दिया। अब शिवकामी नटराजजन और चंद्रभानु पहुंच गए सुप्रीम कोर्ट और मामला सुनवाई के लिए लगा जस्टिस केबी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच के सामने। कपूर परिवार की तरफ से भी वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए और उन्होंने प्रयास किया कि याचिका को सुनवाई से पहले ही डिसमिस करा दिया जाए। लेकिन जज इससे सहमत नहीं हुए। उन्होंने दूसरे पक्ष की यानी जो याचिकाकर्ता पक्ष है इस मामले में उसकी बातों को भी सुना।
उन्होंने क्या कहा? उस पक्ष का यह कहना था कि ठीक है मान लीजिए कि हम वारिस नहीं हैं। हमारा दावा गलत है। तमाम बातें हो सकती हैं। पर कम से कम ट्रायल तो होने देते। बातों को रखने तो देते निचली अदालत में। एक तरह से हाईकोर्ट ने मिनी ट्रायल कर दिया और सारी बातों पर विचार कर लिया। शादी वैध थी कि अवैध थी, हम वारिस हैं या नहीं हैं।
ऐसी तमाम बातों को हाईकोर्ट ने कंसीडर कर लिया और सीधे खारिज कर दिया। यह अति सक्रियता थी। हाईकोर्ट को इतनी सक्रियता नहीं दिखानी चाहिए थी। अगर हम गलत हैं तो निचली अदालत भी हमारा दावा खारिज कर सकती थी। हाईकोर्ट ने इतनी सक्रियता दिखाते हुए इस तरह से मिनी ट्रायल क्यों किया? यह गलत था और हमें निचली अदालत में बात रखने का मौका मिलना चाहिए था। सिंघवी जो कि कपूर परिवार की तरफ से पेश हुए थे। उन्होंने अपनी बातें रखने की कोशिश की और बताया कि किस तरह से इनका दावा गलत है। लेकिन जजों ने कहा कि क्या इस बात से इंकार किया जा सकता है कि चंद्रशेखरन जो संबंधा मुदलियार के बेटे थे उनका संपत्ति में हिस्सा था।
अब बात यह होती है कि क्या उन्होंने इनसे शादी की थी? उनके यह बच्चे हैं, वारिस हैं या नहीं हैं? यह तो बहुत सारी बातें हैं। लेकिन फिलहाल तो सवाल यह उठता है कि उनका संपत्ति में हिस्सा था या नहीं। जजों ने कहा कि हमें लगता है कि आप लोगों को मध्यस्था के लिए जाना चाहिए। हम हाईकोर्ट के एक पूर्व जज को नियुक्त करेंगे। वहां पर आप लोग जाइए। अपनी बातों को रखिए और वह हाईकोर्ट के पूर्व जज जो हैं वो देखेंगे। अगर कोई समाधान निकल सकता है इस विवाद का, कोई समझौता हो सकता है आप लोगों में तो इन बातों को देखा जाएगा और हम अब दिसंबर के महीने में इस मामले को सुनेंगे। 16 दिसंबर को इस मामले को दोबारा सुनवाई के लिए लगाया जाए तब तक आप लोग प्रयास करें अगर कोई सुलह सफाई हो सकती है तो। अब देखिए इस मामले में क्या होना है आगे। एक तो यह हो सकता है कि कोई भी पक्ष आकर कह सकता है कि नहीं हमें मध्यस्था नहीं चाहिए।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या निचली अदालत में जिस कारवाई को बंद करवा दिया था हाई कोर्ट ने उसे रिवाइव किया जाए और पहले वहां भेजा जाए। सिविल जज यह मामले को सुने और तय करें कि किसका हिस्सा बनता है नहीं बनता है। जो सेल डीड है 1988 की जिसे अब चुनौती दी जा रही है उस चुनौती पर विचार होना है या नहीं होना है।
तो एक बात तो यह हो सकती है कि अगर मध्यस्था को लेकर सहमति नहीं बनती है और तब सुप्रीम कोर्ट को देखना पड़ेगा कि सिविल कोर्ट के पास मामले को वापस भेजें या हाई कोर्ट की तरह सुप्रीम कोर्ट भी यह कह दे कि नहीं यह मामला नहीं बन रहा है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट लेगा। अब आगे अगर मध्यस्था के दौरान कोई समझौता हो जाता है दोनों पक्षों के बीच में और उन्हें लगता है यानी कि कपूर परिवार को लगता है कि ठीक है यह जो दावा कर रहे हैं इसके मुताबिक इनका कुछ हिस्सा हो सकता है या जो विवाद हो रहा है इस व्यर्थ के विवाद से बचने के लिए हम कुछ रकम इन्हें दे देते हैं और इस रकम को लेने पर सहमत हो जाता है यह परिवार जो कि यहां दावा करते हुए पहुंचा है तो भी एक समाधान निकल सकता है तो जो मध्यस्थ जो होंगे जो हाई कोर्ट के पूर्व जज वह अपनी एक रिपोर्ट देंगे सुप्रीम कोर्ट को।
हो सकता है वो इन बातों पर भी विचार करें कि इनका दावा सही है या नहीं, यह वारिस हैं या नहीं और इन बातों पर भी सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दें। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट में जो भी होगा वो दिसंबर के महीने में होगा और तब यह पता चलेगा कि क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता हुआ है या यह जो शिवकामी नटराजजन और चंद्रभानु का दावा है उसको खारिज कर दिया जाएगा या मामले को सिविल कोर्ट के पास वापस भेजा जाएगा। यह तमाम बातें दिसंबर में पता चलेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर कह दिया है कि संपत्ति को लेकर अभी स्टेटस को रहेगा। यानी यथास्थिति बनी रहेगी। कोई भी अल्टरेशन नहीं होगा। यानी आज की तारीख में कपूर परिवार ऐसा नहीं कर सकता कि वह इस संपत्ति को यह समझकर कि विवादित है बेच दे या कोई और कुछ करे। वहां कोई दखल अंदाजी करे।
संपत्ति को लेकर फिलहाल कुछ नहीं होगा। दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई करेगा। तब तक मध्यस्थ जो जज हैं उनकी एक रिपोर्ट आ चुकी होगी। अगर मध्यस्था को और आगे बढ़ाने की जरूरत होगी तो सुप्रीम कोर्ट उसका भी आदेश दे देगा। जो कुछ भी होगा दिसंबर में होगा। फिलहाल एक शानदार प्रॉपर्टी जो 2.7 एकड़ में फैली हुई है। बीच हाउस है। बिल्कुल समुद्र के किनारे है। जिसका अपना एक प्राइवेट बीच है। वो संपत्ति विवादों में है। और यह सुप्रीम कोर्ट में तय होगा कि संपत्ति किसकी है। किसका उसमें हिस्सा बनता है या हिस्सा नहीं बनता है।