दुर्गा खोटे हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में थीं, जिन्होंने मां और मजबूत महिला के किरदारों को नई पहचान दी। उनका सबसे यादगार किरदार 1960 की ऐतिहासिक फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में जोधाबाई का था। फिल्म में उनके सामने सबसे कठिन स्थिति तब आती है, जब उनके पति बादशाह अकबर और बेटे शहजादे सलीम के बीच टकराव तक पहुंच जाता है।
अकबर सलीम के को रोकने के लिए पर जाने का फैसला करते हैं। ऐसे में जोधाबाई के सामने पति और बेटे में से किसी एक का साथ देने की असहनीय स्थिति खड़ी हो जाती है
शुरुआत में वह अकबर को सौंपने से इनकार करती हैं, क्योंकि वह मां बनकर अपने बेटे की रक्षा करना चाहती हैं। लेकिन अकबर अपने बादशाह होने के कर्तव्य पर अडिग रहते हैं।आखिरकार जोधाबाई अकबर को सौंप देती हैं.
यह दृश्य इसलिए यादगार बना क्योंकि उसमें एक मां की ममता और पत्नी के धर्म के बीच का संघर्ष बेहद मार्मिक ढंग से सामने आया। दुर्गा खोटे ने बिना किसी अतिनाटकीयता के उस दर्द को पर्दे पर जीवंत कर दिया। यही वजह है कि ‘मुगल-ए-आजम’ में जोधाबाई का यह प्रसंग आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित दृश्यों में गिना जाता है।