तुमसे बस तुम प्यार की धुन आज हम बात करेंगे कपूर परिवार के उस बदनसीब एक्टर की जिसकी किस्मत पक्का चाइनीस पेंसिल से लिखी गई होगी। क्या बात कर रहा है? गम यह है तूने मुझे ना पहचाना। बात तो सही है। जो हैंडसम था, गुड लुकिंग था, टैलेंटेड था, फिर भी बड़ा हीरो नहीं बन पाया। उसने साल की सबसे बड़ी सुपरहिट मूवी दी। लेकिन फिर भी उसकी मूवी में लोगों ने सिर्फ झरने में नहाती हुई हीरोइन को देखा। तू जिसकी खोज में आया है वो जिसने तुझको बुलाया है। और हीरो को देखना ही लोग भूल गए। पर्वत के नीचे है, झरनी के पीछे है। आजा रे आजा ए गाड़ी स्टार्ट कर। मतलब वो कहने को कपूर परिवार का राजकुमार था। लेकिन घर में उसे इज्जत हीरा ठाकुर से भी कम मिलती थी। एक मैं तुम्हें जानता ही हूं कि इस घर में मेरी हैसियत एक नौकर की है। यहां बैठे और उसे अपने ही बाप को साफ बोलना पड़ता था। मैंने कहा सर मैं उनको सर बोल रहा हूं सर। तो हम बात कर रहे हैं राज कपूर के छोटे बेटे, ऋषि कपूर के छोटे भाई और रणबीर कपूर के छोटे चाचा यानी कि राजीव कपूर की। रेग आखिर राजीव कपूर कभी बड़े एक्टर क्यों नहीं बन पाए? क्यों उनके साथ नौकरों जैसा व्यवहार किया जाता था? ऐसा क्या हुआ था कि राजीव कपूर अपने ही पिता राज कपूर से नफरत करने लगे थे। वो कभी खुद बाप क्यों नहीं बन पाए? कपूर परिवार में उन्हें सबसे बदनसीब कपूर क्यों कहा जाता था? और आखिर ऐसा क्या हुआ था कि वो बहुत ही कम उम्र में दुनिया को छोड़कर चले गए। जिद ये झूठी तेरी मेरी जान लेके जाएगी। राजीव कपूर की मौत का सच क्या था? जानेंगे राजीव कपूर के बारे में और भी बहुत कुछ। तो चलिए शुरू करते हैं। मैंने तुझे चुन लिया। तू भी मुझे चुन चुन। राजीव कपूर का जन्म 25 अगस्त 1962 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम है राज कपूर जिसे बॉलीवुड का शो मैन कहा जाता था। वो अलग बात है कि वो शो के नाम पर बस झरने में नहाती हुई अधंगी लड़कियां दिखाते थे। अंग लग जा मां हाय मोरे अंग लग जा की मां का नाम था कृष्णा मल्होत्रा जो इतनी संस्कारी और सीधी शादी थी कि उसके रहते राज कपूर बुढ़ापे तक अफेयर करती रही लेकिन इसने कभी कुछ नहीं कहा। मानो राज कपूर को हीरोइन को बिना कपड़ों के नहाते हुए दिखाने का लाइसेंस इन्हीं ने दे रखा था। वरना पति की क्या औकात जो पत्नी से बिना पूछे किसी लड़की की फोटो लाइक तक करती। बात तो सही है। राजीव कपूर पांच भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उनके दो भाई थे रणधीर कपूर और ऋषि कपूर और दो बहनें थी ऋतू और रीमा। राजीव कपूर का बचपन फिल्मी माहौल में ही बीता। उनका ज्यादातर समय अपने पिता के आर के स्टूडियो में छोटे-मोटे काम करते हुए निकलता था। पूरा कपूर परिवार एक्टिंग, फिल्में और बनावटी माहौल से भरा रहता था। उनके दादा, पिता, चाचा और भाई सिर्फ फिल्मों की ही बातें करते थे। इसके अलावा ना परिवार में कुछ होता था और ना ही कुछ और कोई करने की सोचता था। तो राजीव कपूर के दिमाग में भी बचपन से हीरो बनने की चुलचने लगी थी
। आत्मा पे लिख दूं नाम तेरा। यही कारण रहा कि राजीव कपूर ने सिर्फ 10वीं तक ही पढ़ाई की और इसके बाद उन्होंने पढ़ाई लिखाई छोड़ दी। हालांकि राजीव कपूर के पढ़ाई छोड़ने का एक और कारण भी था। राजीव कपूर बचपन से ही बहुत शर्मीले स्वभाव के थे और वह ज्यादातर समय मुंह में दही जमाए रहते थे। दूसरी बात यह थी कि उनकी शक्ल राज कपूर से नहीं बल्कि शम्मी कपूर से ज्यादा मिलती थी। मतलब राजीव कपूर अपने पिता से ज्यादा अपने चाचा के बेटे लगते थे। अरे साला ये तो अलग ही फ्रॉड चल रहा है। अब शम्मी कपूर तो थे ही सुपरफास्ट तो क्या पता कभी भाभी को भी लपेट दिया हो। साले अब क्योंकि मेरी शक्ल उनके जैसी इतनी लगती है तो हर चीज उनके ही स्टाइल में की जाती थी। तो अब मुद्दा यह था कि शर्मीले राजीव कपूर की शक्ल चाचा से मिलती थी और स्कूल के लौंडो के लिए यह बात दैनिक जागरण से कम नहीं थी। तो बस उन्हें जैसे ही यह पता चला तो वह राजीव कपूर को चिढ़ाने लगे। उन्हें राज कपूर का डुप्लीकेट बेटा कहा जाने लगा और दूसरी ओर उनका निक नेम भी चिंपू था तो उनका खूब मजाक बनाया जाने लगा। यही कारण था कि राजीव कपूर ने स्कूल जाना ही बंद कर दिया। मेरी तरफ देखो। वन टू थ्री फोर जी मैडम। मेरी पैंट पीछे से फट गई है। इसके बाद राजीव कपूर अपने पिता के ही स्टूडियो में काम सीखने लगे। लेकिन राज कपूर भी बड़े सख्त थे। तो उन्होंने राजीव कपूर से कह दिया कि काम सीखना है तो बाप के गल्ले पर मत बैठो। मार्केट में अपनी ऐसी तैसी कराओ। कंपटीशन फेस करो। काम ढूंढो और फिर उसके बाद सीखो। मतलब अगर खुद का पिछवाड़ा घिसकर ही पहचान बनानी है तो फिर राज कपूर के लौंडे होने का क्या फायदा? हां, यह बड़ी अच्छी बात कही आपने। इसके बाद राजीव कपूर राहुल रवेल के असिस्टेंट डायरेक्टर बन गए और एक्टिंग के साथ-साथ फिल्म मेकिंग भी सीखने लगे और जैसे ही राज कपूर जवान हुए, गुड लुकिंग लगने लगे, तो फिर उन्होंने एक्टिंग के मैदान में उतरने का फैसला कर लिया। राजीव कपूर ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 1983 में आई मूवी एक जान है हमसे की थी। और पहली ही मूवी में वो हीरो बनकर हीरोइन के साथ रोमांस करने लगे थे। देखो हां दोबारा ना यह कर ना देता तुम शर्माओ ना जाओ ना जाओ ना लेकिन जैसे ही लोगों ने राजीव कपूर को थरकते हुए देखा तो उनके मुंह से बस यही निकला ये क्या है दिल लगाए आत्मा पे लिख दूं नाम तेरा मतलब लोगों ने कहा यह तो शम्मी कपूर का बेटा है और फिर जनता ने एक बार फिर से उन पर शम्मी कपूर के बेटे का ठप्पा लगा दिया और अब वो हरकतें भी सम्मी कपूर वाले ही करते थे। तुझ पर दिल कुर्बान है। तू ही मेरी जान है दिलबा। तो पब्लिक भी क्या कहती और बहुत कम लोग जानते होंगे कि राजीव कपूर के पीछे भोंपू बजाता यह आदमी असल में धुरंधर का जमील जमाली है। वैसे तो यह मूवी बहुत अच्छी थी लेकिन फिर भी यह कुछ खास नहीं चली। हालांकि इसके गाने बड़े हिट हुए और खासकर मूवी का यह वाला सैड सॉन्ग याद तेरी आएगी मुझको बड़ा सताएगी नाउ ओरिजिनल याद तेरी आएगी मुझको बड़ा सताएगी याद जिसे दो पैक मारकर प्यार में अपना कटवा चुके आशिकों ने इतना सुना कि इसके कैसेट की रील तक घिस गई मर भी गया तो होगा प्यार नहीं कम इसके बाद राजीव कपूर की मूवी आई आई आसमान जिसमें उनकी दो हीरोइन थी। पहली हीरोइन थी दिव्या राणा जो उनकी पहली मूवी की हीरोइन भी थी। हूं मैं अभी हूं। और दूसरी थी अंबानी परिवार की बहू टीना मुनीम जो उस समय आइटम बम थी। मैं हूं मैं गाने में भी और रियल लाइफ में भी। में लगिया वास्ता हो गया लंबिया एक दिन हो गए छोटेछोटे ये मूवी भी बहुत अच्छी थी जो हिट भी हो सकती थी लेकिन फिर से आड़े आई राजीव कपूर की किस्मत और यह भी नहीं चली। इसके बाद राजीव कपूर एक मल्टीस्टारर मूवी में नजर आए। मूवी का नाम था मेरा साथी। यह मूवी बहुत खास थी जिसमें जितेंद्र और जया प्रदा थे जो शुद्ध 80ज वाला रोमांस कर रहे थे। तुम मतलब डायरेक्टर उनका चुंबन नहीं दिखा सकता था तो उसने दो फूलों को बार-बार सटाया मेरे साजन प्यारा बंधन परंपरा प्रतिष्ठा अनुशासन और सच में अगर यह फूल ना होते तो जितेंद्र इमरान हाशमी बन गए होते और जया प्रदा को वो मर्डर वाली मलिका बनाकर ही छोड़ दी। मूवी में सिल्क स्मिता भी थी। अरे वही सिल्क जिस पर विद्या बालम ने डर्टी पिक्चर बनाई थी। ये सब क्या देखना पड़ रहा है। अच्छा है मैं अंधा हूं। इस मूवी में राजीव कपूर की हीरोइन बनी थी मंदाकिनी। और सिर्फ एक गाने में ही मंदाकिनी ने ना राजीव कपूर को इतना कुछ दिखाया कि राजीव कपूर गदगद हो गए। अरे डैडी से तुझको मिलाऊंगी घर अपने ले जाऊंगी। सब तुझे मिलाऊंगी। फिर चाहे डांसिंग कार वाला सीन हो, राजीव कपूर के थम्स अप का टेस्ट हो या फिर साइकिल के बहाने चूमा चाटी हो। और राजीव कपूर को सच में लगा कि इस लड़की को तो अपने पिता से मिलवाना चाहिए। क्या बात है सर। क्या बात है सर। क्या बात है? यह बात है। हालांकि उस समय वो यह नहीं जानते थे कि यह लड़की उनके बाप से मिलने के बाद उनका ही करियर खा जाएगी। का नाम था लावा और डिंपल के साथ राजीव कपूर ने मूछे लगाकर रोमांस किया क्योंकि वो उनके बड़े भाई की हीरोइन थी। दिल क्या है एक शीशा है शीशे में एक तकदीर है। यह मूवी भी बहुत अच्छी थी। जिसमें डिंपल कपाड़िया की खूबसूरती देखकर राजीव कपूर और राज बब्बर का एक साथ लावा फूटा। तस्वीर पे लिखा है तेरा नाम तुझे सलाम। इस मूवी के गाने भी बड़े हिट हुए और खासकर यह वाला सैड सॉन्ग। कुछ लोग मोहब्बत करके हो जाते हैं बर्बाद। जिसे सुनकर वो लौंडे भी सेंटी हो गए जिनके सपने में भी लड़की नहीं आती। कितना याद करेंगे हम तुमको आज के बाद कुछ इसके बाद राजीव कपूर ने 2ाई किलो हाथ वाले के साथ काम किया अब मूवी में सनी देओल थे तो मूवी का नाम भी जबरदस्त रखा गया दूर होगी जाने सजना मर जाऊं तुम हो मेरे हम है मेरे डार्लिंग है ना बोलो है इस मूवी में राजीव कपूर की हीरोइन बनी थी रति अग्निहोत्री और दोनों की जोड़ी भी बड़ी हिट हुई। जब चाहा यारा तुमने आंखों से मारा तुमने होठों से जिंदा। इसके बाद आई राजीव कपूर की एक ऐसी मूवी जिसके लिए आज भी उनकी चर्चा होती है। मूवी का नाम था राम तेरी गंगा मैली और इस मूवी को उनके पिता श्री यानी कि खुदराज कपूर ने बनाया था। यह मूवी बड़ी हिट हुई और हर तरफ इसकी चर्चा हुई। हुस्न पहाड़ों का हो। लेकिन राजीव कपूर के पिता की मूवी का सेंटर कभी हीरो होता ही नहीं था। राज कपूर की मूवी हमेशा लड़की के एंगल से चलती थी। तो इस मूवी में भी पूरा फोकस मंदाकिनी पर ही रहा और राज कपूर ने मंदाकिनी को ऐसे निर्वस्त्र किया कि लोगों की नजरें उनसे हटी ही नहीं। मूवी में ऐसे ऐसे सीन थे, जो कोई उस समय सोच भी नहीं सकता था। फिर चाहे बच्चे को दूध पिलाने का सीन हो, रोमांस वाले सीन हो और राज कपूर का फेवरेट झरने में नहाती हुई अधंगी हीरोइन का सीन हो। कोहरे की चादर लपेटे हैं। पानी में खुद को समेटे हम बाहों के मंदाकिनी ने शरीर पर केवल सफेद साड़ी डालकर झरने में ऐसे नहाया कि पूरे देश का ध्यान खींच लिया। अब जहां हीरोइन कपड़े उतार दें, वहां हीरो को कौन देखता है? बात तो सही है। अब सोचने वाली बात यह भी है कि राज कपूर ने ऐसे सीन शूट कैसे किए होंगे और सच में कैमरामैन को तो मानो जन्नत के दर्शन यहीं हो जाते होंगे। मूवी में मंदाकिनी इतनी चर्चित हुई कि राजीव कपूर मूवी के हीरो नहीं बल्कि एक साइड एक्टर लगने लगे। सुन बदन प्यार की दुनिया। ना तो उन पर फोकस किया गया और ना ही उनके ज्यादा सीन रखे गए और ना ही उनके किरदार को हाईलाइट किया गया। क्या कहना के मारो महीने यहां मौसम मतलब राज कपूर ने अपने ही बेटे को सपोर्टिंग एक्टर बना दिया और उसे हीरोइन से कमजोर साबित कर दिया। इस मूवी के बाद राजीव कपूर को अपने ही पिता राज कपूर से नफरत हो गई। उन्हें लगा कि उनके पिता ने जानबूझकर उन्हें कमजोर दिखाया है और उन पर फोकस नहीं किया। अब बोलो कौन कांप रहा है ठंडी या तुम? मैं मैं कहां कांप रहा हूं? तो फिर उतारो जूते और चले आओ। राजीव कपूर को लगता था कि उनके पिता उन्हें हीरो की तरह पेश करेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। राम तेरी गंगा मैली के बाद राजीव कपूर को लोगों ने सीरियस लेना ही बंद कर दिया था और उन्हें इस मूवी से इतना नुकसान हुआ कि फिर उनका करियर ही सिमट गया। मतलब मूवी आई लवर बॉय जिसमें राजीव कपूर मीनाक्षी शशाद्री के हीरो बनी थी। हे रहा नहीं जाता। तड़प ही ऐसी है। मूवी के गाने भी बड़े हिट हुए और मीनाक्षी के साथ भी राजीव कुमार ने खूब रोमांस किया। मुझे दिल दिया भाई साहब कुछ ज्यादा नहीं हो गया मूवी में आइटम नंबर के लिए अनीता राज को भी लिया गया था जो झरने में नहाती हुई साबुन का ऐड कर रही थी मीनाक्षी ने भी पानी में जिस्म भगाकर हिट होने की खूब कोशिश की लेकिन राजीव कपूर के साथ ऐसी सारेसाती जुड़ चुकी थी कि ना तो अनीता का झरने वाला डांस मूवी को बचा पाया और ना ही मीनाक्षी की खूबसूरती। बंद करो हाथ जोड़ के मैं इसके बाद आई प्रीति जिसमें राजीव कपूर की हीरोइन बनी थी पद्मिनी कोल्हापुरी। लेकिन यह मूवी भी कब आकर चली गई किसी को पता भी नहीं चला। इसके बाद राजीव कपूर एक मल्टीस्टारर मूवी में दिखाई दिए। मूवी का नाम था जलजला जिसमें एक तरफ थे धर्मेंद्र जो खुद से 27 साल छोटी अनीता राज को अपनी पर्सनल हीरोइन बनाकर उसके साथ रोमांस कर रही थी। इस होली का और मजा है ये ना कोई जाने प्यार से ऐसे देखे। दूसरी तरफ थे शत्रुघ्न सिन्हा जो सबको खामोश करते हुए खुद से 20 साल छोटी किमी काटकर के साथ रोमांटिक होली खेल रहे थे। और राजीव कपूर की हीरोइन बनी थी लव स्टोरी वाली विजेता पंडित अंग अंग पे तेरे नया निकाल होली आई रे आई रे ये मूवी भी बहुत अच्छी थी जिसके गाने भी बड़े हिट हुए छू के तुझको ओए फूल बना दूं होए कित तेरे दिल की अरवा पूरी मैं कर दूंगी। अरे घोड़े चढ़ के आना। ओह माय गॉड। वाओ। हालांकि इससे भी राजीव कपूर को कुछ खास फायदा नहीं हुआ। इसके बाद आई हम तो चले परदेश और राजीव कपूर अपने चाचा शशि कपूर के दामाद बन गए। क्योंकि हीरोइन शशि कपूर की बेटी का किरदार निभा रही थी। सुना तुमने? प्रिया कहां चले गए? रिया पापा पापा पापा क्या हुआ? पापा अच्छा इस मूवी में एक बार फिर से उनकी हीरोइन बनी थी राम तेरी गंगा मैली वाली मंदाकिनी और यह मूवी बहुत अच्छी थी जिसमें फोकस राजीव कपूर पर ही किया गया और वो हीरो ही लगी। ऐसा साथी मिठा ना कोई मिला रब तेरा शुक्रिया शुक्रिया इसके बाद राजीव कपूर सैफ अली खान की पहली पत्नी के हीरो बनी। मूवी आई शुक्रिया और अमृता सिंह के साथ भी राजीव कपूर ने बेहतरीन जोड़ी बनाई और भैंस के तवेले में ऐसा रोमांस किया कि अमृता भी पानीपानी हो गई। बरसात की बूंदा बांधी। के संग मूवी अच्छी थी, गाने भी अच्छे थे, बस कुछ अच्छा नहीं था। तो वो थी राजीव कपूर की किस्मत। दिल गरीबों का तोड़ना है अमीरों का काम। इसलिए यह मूवी भी नहीं चली।
1989 में एक बार फिर से राजीव कपूर की हीरोइन बनी मंदाकिनी और इस बार वह दोनों नागनागिन बनकर जंगल में नाचते हुए नजर आए। मेरा दिन नहीं जीना तेरे बिन साथ रात दिन हालांकि मूवी की कहानी वही थी। नाग को कुछ लालची लोगों ने मणि के लिए मार दिया और फिर नागिन उसका बदला लेने लगी। मतलब डायरेक्टर ने पूरी कोशिश की कि राम तेरी गंगा मैली वाली जोड़ी दोबारा हिट करवाई जाए। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यह मूवी भी बॉक्स ऑफिस पर ओंधे मुंगरी और राज कपूर को नाक के किरदार में किसी ने भी पसंद नहीं किया। 1990 में ही राजीव कपूर ने जिम्मेदारी मूवी में काम किया जिसमें एक बार फिर से उन्होंने दो-दो हीरोइन के साथ काम किया। एक तरफ थी किमी काटकर और दूसरी तरफ थी अनीता राज। हालांकि इस मूवी से जुड़ा एक लोचक किस्सा भी रहा। मूवी के क्लाइमेक्स में टॉम अल्टर और किमी काटकर की फाइट थी और किमी काटकर ने असली का मुक्का उनके सीने में दे दिया था और टॉम भारतीय नारी के मुक्के को जिंदगी भर नहीं भूल पाए। लेकिन यह मूवी भी नहीं चली और राजीव कपूर की दूसरी फिल्मों की तरह यह भी पिट गई और अब शायद राजीव कपूर भी समझ चुके थे कि उनकी किस्मत में सफल हीरो बनना लिखा ही नहीं है। इसलिए इसके बाद उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ एक्टिंग से दूरी बना ली। चांदनी रात में लेके दिल हाथ में और एक एक्टर के तौर पर यही राजीव कपूर की आखिरी मूवी भी रही। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग ही छोड़ दी और इसके बाद राजीव कपूर ने फिल्म प्रोडक्शन में कदम रखा। 1991 में राजीव कपूर ने मूवी बनाई हिना जिसमें हीरो थे ऋषि कपूर जो यह गा रही थी। मैं देर करता नहीं देर हो जाती है। हालांकि राजीव कपूर इसके सिर्फ प्रोड्यूसर थे और इसके डायरेक्टर उनके बड़े भाई रणधीर कपूर थे। देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए ना हो जाए कहीं लेकिन उन्होंने भी अपने पिता राज कपूर की ही नकल की और इस फिल्म का कांसेप्ट भी राज कपूर की फिल्मों की तरह ही रहा। अगर आप हिना मूवी को ध्यान से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि पाकिस्तान से अच्छा कोई देश है ही नहीं और वहां के लोग तो मानो फरिश्ते ही है। अच्छी कुल के हाथ की दवाइयां तो तुमने बहुत खाई। आज खीर खा कर देख ले। हम अभी लाई। वाह भाई वाह। आज का दिन तो वाकई मुबारक है। बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखे। लो बेटे। इस मूवी से राजीव कपूर ने एक पाकिस्तानी हीरोइन की बॉलीवुड में एंट्री भी करवाई थी जो कुछ समय तक खूब चर्चा में भी रही। खुश रंग ही प्यारी बेदर्दी तेरे प्यार ने दीवाना कर दिया। मुझे दीवाना। इसके बाद राजीव कपूर ने 1996 में एक और मूवी बनाई जिसके डायरेक्टर और प्रोड्यूसर वह खुद ही थे और इस मूवी का नाम था प्रेम ग्रंथ जिसमें हीरो थे ऋषि कपूर और हीरोइन थी माधुरी दीक्षित। पे जो बन आया जो बनई इस मूवी में भी राजीव कपूर ने राज कपूर का ही पैटर्न इस्तेमाल किया और उसी अंदाज में इसे बनाया। तुम मांगो जान दे दो भाई। यही वो मूवी थी जिसमें राजीव कपूर ने माधुरी दीक्षित पर ऐसा रेप सीन शूट किया कि माधुरी सदमे में चली गई और कई दिनों तक वो उस शूटिंग को भूल नहीं पाई और ना ही वह कभी जिंदगी में इस मूवी को भूल पाएंगी।
मतलब राजीव कपूर ने फिल्मों में भी कुछ खास अलग नहीं किया और यही कारण था कि इस लाइन में भी वह उतने हिट नहीं हो पाए। राजीव कपूर ने 1999 में आई मूवी आ अब लौट चले भी बनाई थी। तेरा दिल तेरा दीवाना मैं तो तुझ पे मरती हूं। सारी दुनिया। हालांकि इसके भी वह सिर्फ प्रोड्यूसर थे और इसे डायरेक्ट किया था ऋषि कपूर ने जो एक डायरेक्टर के तौर पर ऋषि कपूर की पहली और आखिरी मूवी थी क्योंकि इसके फ्लॉप होने के बाद उन्होंने कभी कोई मूवी डायरेक्ट नहीं की और इसके फ्लॉप होने के बाद राजीव कपूर ने भी कभी किसी मूवी में पैसा नहीं लगाया या यूं कहें कि अब उनके पास पैसा लगाने के लिए ही नहीं बचा था। आ अब लौट चलें हो आ इस मूवी के बाद राजीव कपूर ने पूरी तरह से फिल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया और इसके बाद वो सिर्फ पार्टियों में दिखाई देने लगे ना तो कभी किसी मूवी में उन्होंने काम किया और ना ही कभी कोई मूवी बनाई और पूरी तरह से अपनी पर्सनल लाइफ में बिजी हो गई। तो अब हम बात करेंगे राजीव कपूर की पर्सनल लाइफ की। राजीव कपूर की पहली हीरोइन थी दिव्या राणा जिसके साथ उन्होंने कई मूवीज में काम किया और साथ काम करते हुए ही राजीव कपूर दिव्या राणा पर फिदा हो गई थी। तेरे नैन है कैसे मुझे देखना ऐसे मुझे छेड़ना ऐसे। दोनों ने प्यार के समुंदर में डुबकी लगाना शुरू कर दिया और दिव्या भी उनके साथ प्यार की नाव में सवार होकर घूमने लगी थी। हालांकि दोनों का रिश्ता किसी मुकाम पर नहीं पहुंच सका। राजीव कपूर को करियर बनाना था और दिव्या को घर बसाना था। तो फिर दिव्या राणा ने किसी और से शादी कर ली और वह विदेश चली गई। इसके बाद राजीव कपूर की जिंदगी में एक और लड़की आई जिसका नाम था तृष्णा। एक अंधारा हूं मैं अभी हमारा हूं। हालांकि तृष्णा भी उनके लिए मृग तृष्णा जैसी ही रही जो पहले तो लुभावने लगी और बाद में अपने रास्ते पर चली गई। राजीव कपूर का नाम नगमा के साथ भी जुड़ चुका है। हालांकि दोनों ने कभी भी अपने रिश्ते पर कुछ नहीं कहा तो फिर यह खबरें अफवाहें बनकर ही रह गई। इसके अलावा पद्मनी कोल्हापुरी के साथ भी राजीव कपूर सीरियस रह चुके हैं। लेकिन किसी भी हीरोइन के साथ कपूर परिवार के लड़के रिश्ते में रहें। यह राज कपूर को पसंद नहीं था। वो अलग बात है कि खुद राज कपूर की हीरोइन के साथ अफेयर्स की लिस्ट है। कमो जी आप मेरे उस लल्ले की मां बनेगी? राज कपूर ने ही पद्मनी और राजीव कपूर की लव स्टोरी का द एंड करवाया था और उसे किसी मुकाम पर पहुंचने से पहले ही खत्म करवा दिया था। मैंने आपसे कहा था ना मैम साहब कि बड़े-बड़े घरों में लोग खो जाते हैं।
आज आपके घर इस गरीब का सब कुछ खो गया। इसके बाद राजीव कपूर ने सोचा कि अब प्यार नहीं सीधा शादी करूंगा। तो फिर उन्होंने 2001 में आरती सब्रवाल से शादी कर ली और सोचा कि अब वह खुशी-खुशी अपने पारिवारिक जीवन जिएंगे। हालांकि किस्मत ने यहां भी उनका साथ नहीं दिया और यह शादी भी नहीं चली। दोनों के बीच मनमुटाव होने लगा और 2003 में ही राजीव कपूर का अपनी पत्नी से तलाक हो गया। मैं छोड़कर आऊंगा तुम्हें। तुम्हारे बाप के साथ तो बातें भी करनी है मुझे। राजीव कपूर का कोई बच्चा भी नहीं हुआ। मतलब ना तो उन्हें बाप बनने का सुख मिल सका और ना ही बच्चों के साथ हंसने खेलने का। इसके बाद राजीव कपूर ने कभी शादी नहीं की। हालांकि कुछ समय बाद उनका नाम एक औरत से भी जुड़ चुका था जिसका नाम था सुनीता। राजीव कपूर सुनीता के साथ लिविन में रहते थे और दोनों ने शादी ना करने का फैसला किया था। राजीव कपूर ना तो एक सफल एक्टर बन पाए और ना ही कभी एक सफल पारिवारिक आदमी बन पाए। ना वो प्यार मिला, ना शादी चली और ना ही परिवार बना। कुछ लोग मोहब्बत करके कर देते हैं बर्बाद। राजीव कपूर अपने पिता राज कपूर से हमेशा नाराज रहे। वो उन्हें पसंद नहीं करते थे। जिसका कारण यह था कि राजीव कपूर को राज कपूर से कभी पिता वाला प्यार नहीं मिला। वो हमेशा राजीव कपूर को एक नौकर की तरह ट्रीट करते थे। जब वो छोटे थे तो राज कपूर उन्हें सेट पर एक स्पॉट बॉय की तरह इस्तेमाल करते थे और उनसे ही सारा काम करवाते थे। जब वो बड़े हुए तो राज कपूर ने उन्हें लॉन्च करने से मना कर दिया। जबकि ऋषि कपूर और रणधीर कपूर को राज कपूर ने ही लॉन्च किया था। इसके बाद जब राजीव कपूर को लेकर राज कपूर ने एक मूवी भी बनाई तो उसमें भी हीरोइन को सेंटर में रखकर कहानी लिखी और राजीव कपूर को एक सपोर्टिंग एक्टर बना दिया।
लेकिन भगवान के लिए मुझे और मत गिराइए। इसके बाद राजीव कपूर ने राज कपूर से कई बार कहा कि मुझे लेकर एक अच्छी मूवी बनाइए ताकि मेरा करियर सवर जाए। लेकिन राज कपूर ने कभी भी उन्हें लेकर कोई दूसरी मूवी नहीं बनाई और यही सब कारण थे कि राजीव कपूर अपने पिता से नफरत करते थे। वो उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे। और इस नाराजगी का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि जब राज कपूर का निधन हुआ तो राजीव कपूर अपने पिता की अंतिम विदाई में भी शामिल नहीं हुए थे। जय शिव शंकर नमामि शंकर शिव शंकर शंकर वो पूरी जिंदगी एक नाकामयाब आदमी का ठप्पा लेकर ही घूमते रहे। उन्हें सबसे बदनसीब कपूर कहा जाने लगा था। जो कभी भी किसी जगह पर सफल नहीं हो पाया। ना करियर में, ना रिश्तों में और ना ही काम में। और इसी नाकामयाबी को ढोते-ढोते वह थक चुके थे। राजीव कपूर की आखिरी मूवी की बात की जाए तो वह थी जूनियर तुलसीदास जो 2022 में रिलीज हुई थी जिसमें राजीव कपूर लगभग दो दशक के बाद दिखाई दिए थे। हालांकि बड़ी बात यह भी थी कि राजीव कपूर यह मूवी देख नहीं पाए और इसके रिलीज होने से पहले ही वह इस दुनिया से चले गए। सॉरी जूनियर मैं हार गया आज। 9 फरवरी 2021 को राजीव कपूर को दिल का दौरा पड़ा था और 58 साल की उम्र में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। 2020 में ऋषि कपूर का निधन हुआ और 2021 में राजीव कपूर का और इस तरह कपूर परिवार का सबसे छोटा राजकुमार अपने पीछे बिना कुछ छोड़े चला गया। ना उसके बच्चे हैं और ना ही बीवी। तो यह थी कपूर परिवार के सबसे बदनसीब एक्टर रहे राजीव कपूर की कहानी। गरीबों