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बिंदिया का धोखा और रेखा से अधूरी मोहब्बत: दिल के दौरों से क्यों हार गए विनोद मेहरा?

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क्या आपको 70 और 80 के दशक के अद्वितीय ‘चॉकलेट हीरो’ विनोद मेहरा याद हैं? वही विनोद मेहरा जिनकी रीयल लाइफ (व्यक्तिगत जीवन) की चर्चा उनकी रील लाइफ (फ़िल्मी जीवन) से भी ज़्यादा होती थी। वही विनोद मेहरा जिन्होंने तीन शादियां कीं, फिर भी उनका एक भी विवाह सफल नहीं हो सका। उनका जीवन इतने उतार-चढ़ावों से भरा था कि आखिरकार मात्र 45 वर्ष की आयु में उनका दुखद निधन हो गया।विनोद मेहरा का जन्म 13 फरवरी 1945 को अमृतसर, पंजाब में व्यापारी परमेश्वरी दास और उनकी पत्नी कमला के घर हुआ था।

70 और 80 के दशक में विनोद मेहरा ने अपने चॉकलेट लुक्स, मुस्कुराते चेहरे और बेहतरीन अभिनय कौशल से दर्शकों का दिल जीतना शुरू कर दिया था। लेकिन वह यहाँ तक कैसे पहुँचे? आइए आपको बताते हैं।दरअसल, उनके पिता चाहते थे कि वह मुंबई जाकर व्यापार करें। इसी इच्छा के साथ उनका परिवार मुंबई आ गया। विनोद ने अपनी पढ़ाई मुंबई में ही शुरू की। सांताक्रूज़ के सेक्रेड हार्ट बॉयज़ स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज से स्नातक (ग्रेजुएशन) किया। लेकिन बचपन से ही उनका रुझान अभिनय की ओर था।बहुत कम लोग जानते हैं कि उस दौर में विनोद मेहरा की बहन शारदा फ़िल्मों में सहायक भूमिकाएँ निभाया करती थीं। उन्होंने कई फ़िल्मों में काम किया था और विनोद मेहरा ने भी महज़ 13 साल की उम्र में एक फ़िल्म में बाल कलाकार के रूप में काम किया था।

यह फ़िल्म 1958 में रिलीज़ हुई थी और इसका नाम ‘रागिनी’ था।अभिनेता बनने के सपने के साथ, साल 1965 विनोद के जीवन में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। उस साल मुंबई में ‘टैलेंट हंट’ नाम की एक प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें विजेता को बॉलीवुड में सीधी एंट्री मिलने वाली थी। इसमें 10,000 युवाओं ने भाग लिया था, जिनमें विनोद मेहरा भी शामिल थे। कहा जाता है कि वह प्रतियोगिता लगभग जीत ही चुके थे, लेकिन अंतिम क्षण में राजेश खन्ना को विजेता चुना गया और विनोद दूसरे स्थान पर रहे।इसके बाद विनोद ने एक मार्केटिंग कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। लेकिन किस्मत उन्हें एक बार फिर अभिनय की दुनिया में खींच लाई। दरअसल, एक बार विनोद एक रेस्तरां में खाना खा रहे थे। संयोग से उस दौर के मशहूर फ़िल्म निर्माता रूप के. शोरी भी वहाँ मौजूद थे। जब शोरी की नज़र विनोद पर पड़ी, तो वह उनके लुक और स्टाइल से बहुत प्रभावित हुए। शोरी ने विनोद को अपनी फ़िल्म में काम करने का ऑफर दिया

, जिसे सुनकर विनोद ने तुरंत हाँ कर दी।साल 1971 में विनोद की पहली फ़िल्म ‘एक थी रीता’ रिलीज़ हुई। इसके बाद ‘एलाान’, ‘अमर प्रेम’ और ‘लाल पत्थर’ जैसी फ़िल्में आईं। लेकिन 1973 की फ़िल्म ‘अनुराग’ ने विनोद मेहरा की किस्मत पूरी तरह बदल दी। उस फ़िल्म में मौसमी चटर्जी के साथ उनकी जोड़ी को बहुत पसंद किया गया।दोस्तों, विनोद अपनी रील लाइफ में जितने सफल थे, उनका व्यक्तिगत जीवन उतना ही दुखद रहा। जीवन की इसी त्रासदी के कारण उनका असामयिक निधन हुआ। विनोद मेहरा का फ़िल्मी करियर तेज़ी से आगे बढ़ रहा था, लेकिन अब उनकी माँ को उनकी शादी की चिंता सताने लगी थी। विनोद अपनी माँ से बहुत प्यार करते थे और उन्होंने उनकी पसंद की लड़की मीना ब्रोका से शादी कर ली। लेकिन यह शादी सिर्फ चार साल ही टिक सकी, और वह इस कदर तनाव में आ गए कि महज़ 30 साल की उम्र में उन्हें पहला दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा। इसके बाद 1978 में उन्होंने मीना से तलाक ले लिया और अभिनेत्री बिंदीया गोस्वामी से शादी

कर ली।वह बिंदीया से सच्चा प्यार करते थे, लेकिन वहाँ भी उन्हें सिर्फ़ बेवफ़ाई ही मिली। दरअसल, शादीशुदा बिंदीया को फ़िल्म निर्माता जे.पी. दत्ता से प्यार हो गया और वह विनोद को अकेला छोड़कर चली गईं। इस धोखे से वह पूरी तरह टूट गए, जिसने उनके दिल को और भी कमजोर कर दिया था।इन सब के बावजूद फ़िल्मों में विनोद मेहरा का एक अलग ही अंदाज था। इसी वजह से वह हिरोइनों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उस दौर की कई अभिनेत्रियां विनोद के करीब आना चाहती थीं, जिनमें रेखा का नाम भी शामिल है। उनकी केमिस्ट्रि की खबरें सामने आईं, जिससे अफवाहें उड़ीं कि दोनों ने शादी कर ली है। लेखक यासिर उस्मान अपनी किताब “Rekha: The Untold Story” में बताते हैं कि जब रेखा और विनोद उनकी माँ का आशीर्वाद लेने घर पहुँचे, तो उनकी माँ ने रेखा का अपमान किया और उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। हालाँकि, रेखा ने कभी विनोद के साथ शादी की बात स्वीकार नहीं की।फ़िल्म ‘घर’ के अलावा दोनों ने ‘बिंदिया चमकेगी’, ‘ज्योति बने ज्वाला’, ‘खूबसूरत’, ‘कर्तव्य’, ‘हवस’ और ‘एलान’ जैसी फ़िल्मों में साथ काम किया। लेकिन जब रेखा भी उनसे दूर हो गईं, तो वह गहरे सदमे और उदासी में रहने लगे।इसके बाद उन्होंने किरण नाम की लड़की से शादी की, जिनसे उनके दो बच्चे हुए। भले ही विनोद को आखिरकार एक परिवार मिल गया था, लेकिन पिछले कई सालों का तनाव उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। उनकी पत्नी किरण उस समय गर्भवती थीं और अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली थीं। उसी दौरान, 30 अक्टूबर 1990 को विनोद को दिल का दौरा पड़ा और मौके पर ही उनका निधन हो गया। महज़ 45 वर्ष की आयु में उनके निधन ने पूरे बॉलीवुड उद्योग को स्तब्ध कर दिया था।दोस्तों, इस अभिनेता की कौन सी भूमिका आपको सबसे ज़्यादा पसंद है? कमेंट करके अपनी राय ज़रूर साझा करें।

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