एक इंसान की कीमत आखिर कितनी हो सकती है? करोड़ों की दौलत, महंगी गाड़ियां, आलीशान जिंदगी, या फिर वह सपने जिनकी कोई कीमत लगाई ही नहीं जा सकती। अब जरा सोचिए अगर किसी ऐसे शख्स की जिंदगी के पन्ने अचानक खुलने लगे, जिसे दुनिया सिर्फ एक फिल्म स्टार समझती थी और उन पन्नों के अंदर आपको पैसे से कहीं ज्यादा बड़ी दुनिया दिखाई दे। तो क्या आप उस कहानी को सिर्फ एक सेलिब्रिटी की कहानी कहेंगे? यह कहानी उस शख्स की है जिसने जिंदगी को सिर्फ पर्दे पर नहीं जिया। उसके दिमाग में विज्ञान था। आंखों में अंतरिक्ष था और दिल में ऐसे सपने थे जो शायद उसकी उम्र से भी कहीं बड़े थे। लेकिन उसकी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा उसकी कामयाबी नहीं। बल्कि वह सवाल हैं जो उसके जाने के बाद पीछे रह गए। उसके पास आखिर कितना था? उसने अपनी कमाई कहां लगाई? कौन सी चीजें उसके लिए सिर्फ ऐशो आराम नहीं बल्कि उसके सपनों का हिस्सा थी। और फिर ऐसा क्या हुआ कि एक चमकती हुई जिंदगी के पीछे छिपे कई सवाल आज भी लोगों को बेचैन करते हैं। आज हम इसी अनदेखी तस्वीर को समझेंगे जहां दौलत के आंकड़ों के पीछे एक ऐसा इंसान दिखाई देता है जिसकी सोच शायद उसके स्टारडनम से कहीं ज्यादा बड़ी थी। पूरे 6 साल बाद सुशांत सिंह राजपूत की संपत्ति पर हुआ सबसे बड़ा खुलासा। आखिर कैसे सुशांत के पास इतने सारे पैसे आए और क्या है सुशांत की संपत्ति का असली सच? दोस्तों, आज का यह स्पेशल वीडियो सिर्फ एक मशहूर एक्टर की नहीं है बल्कि उस जिंदा दिल इंसान की है जिसने बड़े-बड़े सपनों को देखने की हिम्मत की और उन्हें अपने दम पर पूरा भी किया। लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा मोड़, सबसे रहस्यमई पहलू और सबसे बड़ा सस्पेंस तब आता है जब उनकी छोड़ी हुई अथा संपत्ति का सच दुनिया के सामने एक-एक करके खुलकर बाहर आता है।
एक ऐसा सितारा जिसके पास मुंबई के सबसे पौश और महंगे इलाके में करोड़ों का आलीशान घर था। जिसके पास पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री का इकलौता ऐसा रिकॉर्ड था जिसने चांद पर अपने नाम की जमीन खरीदी थी। और जिसके पास अंतरिक्ष को नापने वाले बेहद महंगे और साइंटिफिक लेवल के उपकरण थे। आखिर उनकी इस पूरी संपत्ति का असली सच क्या है? उनके बैंक खातों से लेकर उनकी कंपनियों और उनके विज़न में फैले उस बड़े साम्राज्य का पूरा राज क्या था? आज की इस वीडियो में हम सुशांत सिंह राजपूत की संपत्ति के एक-एक गुप्त और अनदेखे पहलू का पूरा खुलासा करने वाले हैं। इसलिए इस बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले सफर पर हमारे साथ अंत तक जरूर बने रहिए। सुशांत सिंह राजपूत की संपत्ति को अगर आप सिर्फ एक आम बॉलीवुड स्टार की कमाई या बैंक बैलेंस के नजरिए से देखेंगे तो आप बहुत बड़ी भूल करेंगे। उनकी संपत्ति सिर्फ महंगी गाड़ियों या मुंबई के बड़े-बड़े किराए के पेंट हाउस तक सीमित नहीं थी बल्कि उनकी संपत्ति उनके उस दिमाग का आईना थी जो हमेशा से इस दुनिया से 10 कदम आगे की सोचता था। अगर हम शुरुआत से उनकी कुल संपत्ति के आंकड़ों को देखें तो आधिकारिक जांचों, ईडी की फाइलों और रिपोर्ट्स के अनुसार सुशांत के पास लगभग 30 से 50 करोड़ की लिक्विड कैश, म्यूचुअल फंड्स और फिक्स्ड डिपॉजिट्स मौजूद थे। जब सुशांत ने टीवी इंडस्ट्री के मशहूर शो पवित्र रिश्ता से निकलकर बॉलीवुड के बड़े पर्दे पर कदम रखा था, तो उनकी पहली फिल्म कापोचे के लिए उन्हें बहुत ही मामूली फीस मिली थी। लेकिन जैसे-जैसे उनकी फिल्में जैसे एमएस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी, छिछोरे और केदारनाथ बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित होती गई, उनका मार्केट वैल्यू आसमान छूने लगा था। अपने करियर के सबसे बेहतरीन दौर में वह एक फिल्म करने के लिए लगभग 5 से 7 करोड़ की भारी-भरकम फीस लेते थे। इसके अलावा ब्रांड्स की दुनिया में भी उनके नाम का डंका बचता था। किसी भी बड़े ब्रांड का विज्ञापन करने के लिए वह एक से ₹ करोड़ प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज करते थे। लेकिन सुशांत की सबसे खास बात यह थी कि वह अपनी इस मेहनत की कमाई को सिर्फ बैंक खातों में सड़ाने के लिए या ब्याज खाने के लिए नहीं छोड़ते थे। उन्होंने अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को बेहद स्मार्ट तरीके से डिजाइन किया हुआ था। उन्होंने अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार ने, टेक्नोलॉजी और भविष्य की तकनीकों में इन्वेस्ट कर रखा था। वह जानते थे कि पैसा कैसे काम करता है और उस पैसे का इस्तेमाल अपनीत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कैसे किया जाता है। उनकी संपत्ति का सबसे जादुई, अविश्वसनीय और ऐतिहासिक पहलू वो था जिसकी कल्पना
भी कोई दूसरा बॉलीवुड एक्टर आसानी से नहीं कर सकता। सुशांत सिंह राजपूत भारत के उन चुनिंदा लोगों और पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री के इकलौते ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने आसमान के खूबसूरत चांद पर अपने नाम की जमीन खरीदी थी। साल 2028 में सुशांत ने अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल लूनर लैंड रजिस्ट्री के जरिए चांद के खास हिस्से में जमीन खरीदी थी। चांद का यह इलाका मारे मस्कोवियंस यानी सी ऑफ मस्कोवी के नाम से जाना जाता है। यह चांद का वो हिस्सा है जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता जिसे द फार साइड ऑफ द मून भी कहा जाता है। अब आपके मन में सवाल उठ सकता है कि क्या कानूनी रूप से चांद पर जमीन खरीदना संभव है? सुशांत के लिए यह सिर्फ किसी कागजी दस्तावेज या पैसे के दिखावे की बात नहीं थी। इसके पीछे उनका स्पेस, एस्ट्रोनॉमी और ब्रह्मांड के प्रति वह अटूट और सच्चा प्यार था जो उन्हें इस आम दुनिया से पूरी तरह अलग बनाता था। उन्होंने जब यह प्रॉपर्टी अपने नाम कराई तो उन्हें बकायदा एक लूनर डीड, क्लेम सर्टिफिकेट और फोटोग्राफिक मैप दिया गया था। सुशांत अक्सर अपने दोस्तों और करीबियों से कहा करते थे कि भले ही दुनिया उन्हें एक एक्टर के रूप में जानती हो, लेकिन उनका दिल हमेशा अंतरिक्ष में बसता था। वह अक्सर अपने घर की बालकनी में बैठकर रात के सन्नाटे में उस चांद के टुकड़े को देखा करते थे। जिसे उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के पैसों से खरीदा था। लेकिन दोस्तों, सिर्फ चांद पर जमीन खरीद लेना ही सुशांत के लिए काफी नहीं था। उस चांद के टुकड़े को ब्रह्मांड की विशालता को और अंतरिक्ष के रहस्य को अपनी आंखों से देखने के लिए उनके पास जो उपकरण था, वह उनकी कुल संपत्ति का एक और सबसे बड़ा और अनोखा आकर्षण था। सुशांत के पास 42 इंच का मेड एलेक्स 600 नाम का एक बेहद एडवांस और साइंटिफिक ग्रेड का टेलिस्कोप था। यह कोई आम बच्चों का खिलौना या सजावटी सामान नहीं था बल्कि यह एक ऐसा अत्याधुनिक टेलिस्कोप था जिसका इस्तेमाल बड़े-बड़े खगोल शास्त्री और वैज्ञानिक अपनी रिसर्च के लिए करते थे। इस विशालकाय टेलिस्कोप की कीमत उस समय लगभग 55 लाख से भी ज्यादा थी। दोस्तों, बॉलीवुड के दूसरे कलाकारों के घरों और गैराजों में जहां सिर्फ महंगी लग्जरी गाड़ियां, इंपोर्टेड शराब की बोतलें और लेट नाइट पार्टियों का सामान हुआ करता था, वहीं सुशांत सिंह राजपूत के बांद्रा वाले घर में यह विशाल टेलिस्कोप एक मुख्य केंद्र बिंदु के रूप में लगा हुआ था। सुशांत रात-रात भर जागकर इस टेलिस्कोप के सामने बैठते थे। वह बृहस्पति ग्रह के उपग्रहों, शनि ग्रह की खूबसूरत रिंग्स, नेब्यूला और चांद के गहरे गड्ढों को निहारा करते थे। वे इस टेलिस्कोप के जरिए तारों की गति को ट्रैक करते थे और उनके फोटोग्राफ्स लिया करते थे। यह 55 लाख का टेलिस्कोप उनकी संपत्ति का वह हिस्सा था जो यह साबित करता था कि सुशांत सिंह राजपूत दिल और दिमाग से एक एक्टर से कहीं ज्यादा एक वैज्ञानिक सोच रखने वाले इंसान थे। अब अगर बात करें सुशांत सिंह राजपूत के प्रॉपर्टी कलेक्शन और उनके मुंबई वाले घर की तो उनकी जीवन यात्रा किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। जब सुशांत अपने सपनों को पूरा करने के लिए पटना से दिल्ली आए और फिर दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज छोड़कर मुंबई पहुंचे तो उन्होंने मुंबई के मलाड इलाके में एक साधारण दो बीएचके अपार्टमेंट में अपने सफर की शुरुआत की थी। लेकिन जैसे-जैसे उनकी फिल्में सुपर डुपर हिट होती गईं और सफलता उनके कदम चूमने लगी। उन्होंने अपने रहने के अंदाज को भी एक बिल्कुल अलग लेवल पर पहुंचा दिया। सुशांत ने मुंबई के सबसे महंगे इलाके बांद्रा वेस्ट जोगर्स पार्क और पॉली हिल के पास स्थित कैप्रीहाइड्स इमारत में एक बेहद विशाल और आलीशान डुप्लेक्स पेंट हाउस लीज़ पर लिया था। इस अपार्टमेंट की कुल प्रॉपर्टी मार्केट वैल्यू लगभग 20 से ₹25 करोड़ के आसपास आंकी जाती थी। जिसके लिए वह हर महीने लगभग ₹4.5 लाख का भारी भरकम किराया चुकाते थे। इस घर का इंटीरियर किसी आम सेलिब्रिटी के घर जैसा भड़कीला या सिर्फ चमकधमक वाला नहीं था। सुशांत का यह पेंट हाउस, एक साइंटिफिक म्यूजियम, एक विशाल लाइब्रेरी और एक आर्ट गैलरी का अद्भुत संगम था। जैसे ही आप उनके घर में कदम रखते, आपको चारों तरफ दुनिया भर की दुर्लभ किताबें देखने को मिलती थी। उनकी अलमारियां अल्बर्ट आइंस्टाइन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी, क्वांटम मैकेनिक्स, न्यूरोसाइंस, दर्शनशास्त्र और ग्रीक माइथोलॉजी की किताबों से भरी पड़ी थी। दीवारों पर नासा के मिशनों के पोस्टर्स, हाथ से लिखे गए गणित के फॉर्मूले और विंटेज आर्ट वर्क सजे हुए थे। सुशांत के इस फ्लैट का माहौल देखकर उनके घर आने वाले मेहमान हैरान रह जाते थे। जहां आम सेलिब्रिटी अपने घर की सजावट ट्रॉफियों और महंगे शोपीस से करते हैं, वहां सुशांत की दीवारें, कॉम्प्लेक्स मैथमेटिकल इक्वेशंस और फिजिक्स की थ्योरी से भरी रहती थी। उनके पास दुनिया भर के रेयर बुक्स का एक पर्सनल कलेक्शन था। वह आधी रात को भी चाय के कप के साथ बैठकर दुनिया की सबसे कठिन किताबों को पढ़ने के शौकीन थे। इस बांद्रा वाले पेंट हाउस के अलावा सुशांत ने लोनावला के खूबसूरत और शांत पावना लेक के किनारे एक बहुत बड़ा और बेहद खूबसूरत फार्म हाउस लीस पर ले रखा था। इस फार्म हाउस का किराया ही हर महीने लाखों रुपए में हुआ करता था। इस फार्म हाउस में सुशांत अपना खाली समय बिताने जाते थे। वहां उन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग, बोटिंग, गिटार बजाने और नाइट स्टार गेजिंग के लिए पूरा सेटअप तैयार कर रखा था।
यह फार्म हाउस उनके लिए भागदौड़ भरी मुंबई की जिंदगी से दूर सुकून पाने का एक ठिकाना था। सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ किताबों और तारों की दुनिया में ही नहीं खोए रहते थे। बल्कि उन्हें रफ्तार यानी स्पीड से भी बहुत गहरा और पुराना लगाव। उनके पास गाड़ियों का जो कलेक्शन था उसमें उनकी शाही पसंद साफ नजर आती थी। उनकी गैरेज की सबसे बड़ी शान थी उनकी ड्रीम कार मेसरा क्वत्रपोते। यह एक इटालियन लग्जरी स्पोर्ट्स कार है। जिसकी ऑन रोड कीमत उस समय करीब ₹1 करोड़ से भी ज्यादा थी। सुशांत को इस कार से इतना प्यार था कि जब उन्होंने यह कार खरीदी थी तो उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा था कि यह कार उनका बचपन का सपना थी। जब भी वह मुंबई की सड़कों पर अपनी इस नीले रंग की मैसर को लेकर निकलते थे तो लोगों की निगाहें उन पर टिक जाती थी। mसरे के अलावा लंबी दूरियों के सफर और अपनी टीम के साथ ट्रैवल करने के लिए उनके पास एक बेहद सुरक्षित और पावरफुल लग्जरी एसयूवी Rang Rover EVO भी थी जिसकी कीमत लगभग 70 से ₹80 लाख थी। इसके साथ ही दो पहियों की रफ्तार के शौकीन होने के नाते सुशांत के पास सुपर बाइक्स का भी बेहतरीन कलेक्शन। उनके गैरेज में BMW SS1 1000 RR जैसी खूंखार सुपर बाइक मौजूद थी। जिसकी कीमत लगभग 25 से ₹ लाख थी। कॉलेज के दिनों में दिल्ली की सड़कों पर सेकंड हैंड बाइक चलाने वाले सुशांत ने अपनी मेहनत की कमाई से जब यह सुपर बाइक खरीदी थी तो वह अक्सर देर रात मुंबई की सीलिंग रोड पर हेलमेट पहनकर राइड के लिए निकल जाया करते थे। लेकिन दोस्तों सुशांत सिंह राजपूत की संपत्ति का सबसे बड़ा सबसे रणनीतिक और सबसे गुप्त राज छुपा हुआ था। उनकी उन तीन प्रमुख कंपनियों में जो उनके एक दूरदर्शी बिजनेसमैन होने का सबूत देती थी। साल 2018 में सुशांत ने अपनी पहली स्टार्टअप कंपनी की शुरुआत की थी जिसका नाम था insite वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड। यह कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और 3D टेक्नोलॉजी जैसे एडवांस डोमेनस पर काम कर रही थी। जरा सोचिए साल 2018 और 19 में जब भारत में आम जनता ने एआई या चैट जीपीटी जैसी चीजों का नाम भी ठीक से नहीं सुना था तब सुशांत सिंह राजपूत इस टेक्नोलॉजी में करोड़ों रुपए इन्वेस्ट कर रहे थे वो एi के जरिए सिनेमा एजुकेशन और हेल्थ केयर में क्रांति लाना चाहते थे। उनकी दूसरी कंपनी का नाम था विवन फोर्स इंडिया वेंचर। यह कंपनी पूरी तरह से पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में काम करने के लिए बनाई गई सुशांत चाहते थे कि वह अपनी इस कंपनी के जरिए ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार करें जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना देश का विकास कर सके। उनकी तीसरी कंपनी थी फ्रंट इंडिया फॉरवर्ड फाउंडेशन। यह एक एनजीओ थी जिसे सुशांत ने समाज के गरीब, पिछड़े और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए बनाया था। इस कंपनी का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा और भुखमरी से लड़ना था। सुशांत अपनी फिल्मों से होने वाली कमाई का एक निश्चित हिस्सा सीधा इन कंपनियों और अपने चैरिटेबल ट्रस्ट्स में ट्रांसफर किया करते थे। सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ अपने ऊपर या अपने ऐशोआराम पर पैसा खर्च करने वाले इंसान बिल्कुल नहीं थे। उनकी संपत्ति का एक बहुत बड़ा और बेहद खूबसूरत हिस्सा सोशल कॉज, चैरिटी और बच्चों की शिक्षा में जाता था। उन्होंने अपने स्तर पर एक खास पहल शुरू की थी जिसका नाम था सुशांत फॉर एजुकेशन। इस प्रोग्राम के तहत वह बिहार और देश के अलग-अलग राज्यों से बेहद गरीब लेकिन बेहद होनहार बच्चों को चुनते थे। सुशांत उन बच्चों का पूरा खर्च, उनके हवाई जहाज के टिकट से लेकर रहने, खाने और ट्रेनिंग तक का पूरा खर्चा अपनी जेब से उठाते थे और उन्हें अमेरिका की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा के एस्ट्रोनॉमी कैंप्स में भेजा करते थे। वह चाहते थे कि जो सपने उन्होंने देखे हैं, देश के छोटे-छोटे गांव में रहने वाले बच्चे भी उन सपनों को जी सकें। इतना ही नहीं जब भी देश में कोई आपदा आती थी, सुशांत गुप्त दान करने में सबसे आगे रहते थे। केरल और नागालैंड में आई भीषण बाढ़ के समय सुशांत ने बिना किसी पब्लिसिटी के करोड़ों रुपए की राहत राशि डोनेट कर दी थी। जब मीडिया को यह बात पता चली तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था कि अगर ऊपर वाले ने मुझे देने के लायक बनाया है तो यह मेरा फर्ज बनता है कि मैं अपने देशवासियों के काम आ सकूं। इसके अलावा सुशांत के पास अपनी एक बहुत ही मशहूर डायरी थी जिसे वह अपनी 50 सपनों की डायरी कहते थे। इस डायरी में उन्होंने अपने जीवन के उन 50 सबसे बड़े लक्ष्यों को हाथ से लिखा था जिन्हें वह अपनी संपत्ति और अपनी मेहनत से पूरा करना चाहते थे। उस डायरी के पन्नों में लिखा था 100 बच्चों को नासा के स्पेस कैंप में भेजना, यूरोप की सबसे बड़ी साइंस लैब सर्न का दौरा करना और वहां के वैज्ञानिकों के साथ काम करना, 1000 पेड़ लगाना। दिल्ली आईआईटी के छात्रों के साथ एक पूरा हफ्ता बिताना और उन्हें कोडिंग सिखाना, अंधे लोगों को कंप्यूटर कोडिंग सिखाने के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करना, उल्टे हाथ से क्रिकेट और टेनिस खेलना सीखना। भारतीय सेना के जवानों के साथ एक पूरा दिन बिताना और अपनी खुद की एक पूरी एस्ट्रोनॉमी ऑब्जरवेटरी स्थापित करना। यह डायरी इस बात का जिंदा सबूत थी कि सुशांत के पास जो संपत्ति थी, उसका मकसद सिर्फ दौलत का ढेर लगाना नहीं था बल्कि दुनिया को एक बेहतर जगह बनाना था।
अब सवाल यह उठता है कि इतना शानदार साम्राज्य खड़ा करने वाला, इतनी अथा संपत्ति का मालिक और इतने महान सपने देखने वाला 34 साल का एक हंसता खेलता इंसान अचानक इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कैसे कह गया। यहीं से इस पूरी कहानी में वह सबसे बड़ा ड्रामा, विवाद और कानूनी मोड़ आता है जिसने सिर्फ बॉलीवुड को ही नहीं बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया था। साल 2019 के मध्य में जब सुशांत अपने पार्टनर रिया चक्रवर्ती के साथ यूरोप ट्रिप पर गए थे तो वहां से लौटने के बाद उनके जीवन में एक अजीब और रहस्यमय मोड़ आया। इटली के फ्लोरेंस शहर में 600 साल पुराने एक हेरिटेज होटल में रुकने के दौरान एक बहुत ही अजीब बात सामने रखी गई। दावा किया गया कि सुशांत वहां कमरे की दीवार पर टंगी एक डार्क पेंटिंग को देखकर अचानक बहुत बुरी तरह घबरा गए थे और उनका दिमागी संतुलन बिगड़ने लगा था। लेकिन सुशांत को करीब से जानने वाले उनके दोस्त, उनका परिवार और उनके फैंस इस बात को कभी मान नहीं सके। जो इंसान फिजिक्स के मुश्किल सिद्धांतों को खेल-खल में समझा देता हो जो ब्रह्मांड के रहस्यों से प्यार करता हो वो एक मामूली पेंटिंग से कैसे डर सकता है? यूरोप ट्रिप से वापस लौटते ही सुशांत के आसपास का पूरा माहौल अचानक बदल दिया गया। उनके सालों पुराने वफादार स्टाफ जिनमें उनका पुराना रसोइया, बॉडीगार्ड्स, उनके पर्सनल ड्राइवर और उनके पुराने मैनेजर शामिल थे। उन्हें एक-एक करके नौकरी से हटा दिया गया और उनकी जगह नए लोगों को तैनात कर दिया गया। इतना ही नहीं सुशांत का उनकी अपनी बहनों और उनके पिता से संपर्क धीरे-धीरे सीमित कर दिया गया। इसी बीच उनके बैंक खातों से अजीबोगरीब और भारीभरकम ट्रांजैक्शंस होने की बातें भी मीडिया और जांच एजेंसियों के सामने आने लगी। उनके खातों से बिना उनकी स्पष्ट जानकारी के लाखों करोड़ों रुपए ट्रांसफर किए जा रहे थे। सुशांत की कंपनियों का बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स अचानक से बदल दिया गया और रिया चक्रवर्ती व उनके परिवार के लोगों को कंपनी में अहम पद दे दिए गए। यह साफ दिखने लगा था कि बैकग्राउंड में सुशांत की उस अथा संपत्ति, उनकी कंपनियों के मालिकाना हक और उनके करियर को पूरी तरह से कंट्रोल करने की एक बहुत बड़ी साजिश रची जा रही थी। फिर आती है जून 2020 की वह खौफनाक रात जिसने इस पूरे मामले में बारूद का काम किया। 8 जून 2020 की रात को मुंबई के मलाड़ इलाके में स्थित एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने की वजह से दिशा सालियान नाम की एक युवा टैलेंटेड मैनेजर का संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो जाता है। दिशा सालयान सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर रह चुकी थी और ठीक इसी 8 जून की रात को रिया चक्रवर्ती अचानक सुशांत का बांद्रा वाला पेंट हाउस छोड़कर अपना सारा सामान लैपटॉप और गहने समेटकर वहां से चली जाती हैं। दिशा साल्यान की अचानक हुई इस घटना ने सुशांत सिंह राजपूत को अंदर तक हिला कर रख दिया था। सुशांत बेहद डरे हुए और चिंतित हो गए थे। उन्होंने अपने करीबी लोगों से यह डर जताया था कि कुछ बेहद ताकतवर और प्रभावशाली लोग उन्हें इस मामले में जबरन घसीटने की कोशिश कर रहे हैं और उनका करियर, उनका नाम और उनकी संपत्ति सब कुछ तबाह कर दिया जाएगा। वह इतने परेशान थे कि उन्होंने लगातार इंटरनेट पर दिशा साल्यान से जुड़ी खबरें सर्च करना शुरू कर दिया था। 13 जून 2020 की पूरी रात सुशांत जागते रहे। उन्होंने देर रात अपने कुछ दोस्तों और परिचितों को फोन मिलाने की कोशिश की। लेकिन किसी वजह से किसी का फोन नहीं उठा और फिर आती है 14 जून 2020 की वो काली और मनहूस सुबह जब बांद्रा के उसी आलीशान पेंट हाउस के बंद कमरे में सुशांत सिंह राजपूत का पार्थिव शरीर मिला। संगीत। इस खबर ने पूरे देश को एक ऐसा झटका दिया जिससे लोग आज तक उभर नहीं पाए हैं। शुरुआत में इस पूरे मामले को मुंबई पुलिस द्वारा एक साधारण घटना और डिप्रेशन का रूप देकर दबाने की पुरजोर कोशिश की गई थी। लेकिन सुशांत के करोड़ों फैंस और उनके परिवार ने हार नहीं मानी। सोशल मीडिया पर एक ऐसा जन आंदोलन खड़ा हुआ जैसा भारत के इतिहास में किसी एक्टर के लिए कभी नहीं देखा गया था।
और सालों के लंबे इंतजार के बाद हाल ही में साल 2026 में इस पूरी कहानी में एक ऐसा ऐतिहासिक और भूचाल ला देने वाला कानूनी यूटर्न आया जिसने पूरे सिस्टम के होश उड़ा दिए हैं। जब दिशा साल्यान के पिता ने सालों तक अपनी बेटी के लिए इंसाफ की गुहार लगाने के बाद आखिरकार बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो अदालत ने जो रुख अपनाया उसने पुरानी जांच की धज्जियां उड़ाकर रख दी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को दिशा साल्यान मामले में एक फ्रेश एफआईआर दर्ज करने और बिल्कुल जीरो से नई सिरे से निष्पक्ष जांच शुरू करने का कड़ा आदेश दे दिया है। अदालत ने अपनी सुनवाई के दौरान पुरानी पुलिस जांच में ऐसी पांच बड़ी और गंभीर खामियों को उजागर किया जिन्हें सुनकर कानून के जानकार भी दंग रह गए। पहली खामी घटना घटने के तुरंत बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्पॉट पंचनामा नहीं बनाया और कागजों पर पंचनामा बनाने में पूरे 9 घंटे की देरी की गई। दूसरी खामी पुलिस के कागजों में दर्ज घटना की रिपोर्ट का टाइम और दिशा के पिता के अस्पताल पहुंचने और बयान दर्ज कराने के समय में घंटों का बहुत बड़ा और संदेह अंतर था। तीसरी खामी सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा गया कि मामला आधिकारिक रूप से पुलिस डायरी में दर्ज होने से काफी पहले ही पुलिस की गाड़ियां घटना स्थल के आसपास घूमती नजर आ रही थी। जबकि स्टेशन डायरी में उनका कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं था। चौथी खामी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि 14वीं मंजिल से गिरने के बावजूद मृतिका के चेहरे या सिर की एक भी हड्डी का ना टूटना मेडिकल साइंस के हिसाब से बहुत बड़ा संदेह पैदा करता है। साथ ही पुलिस का यह दावा कि बारिश की वजह से लहू के निशान धुल गए। कोर्ट रिकॉर्ड्स में झूठा साबित हुआ क्योंकि उस वक्त कोई बारिश नहीं हो रही और पांचवी सबसे बड़ी खामी। घटना के बाद इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और लैपटॉप को पुलिस ने तुरंत जब्त करने के बजाय 8 दिनों तक एक बाहरी दोस्त के पास रहने दी जिससे डाटा डिलीट करने का पूरा मौका मिला। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब सुशांत सिंह राजपूत के केस की फाइलों पर भी सीधा असर पड़ना तय हो चुका है। कानून के जानकारों का मानना है कि दिशा सालयान की घटना और
सुशांत सिंह राजपूत के निधन की टाइमलाइन उनके पीछे के किरदार और जांच करने वाली टीम बिल्कुल सेम थी। सीबीआई अब यह खंगाल रही है कि क्या इन दोनों मामलों के तार किसी हाई प्रोफाइल राजनीतिक और बॉलीवुड सिंडिकेट से जुड़े हुए थे जो सुशांत की संपत्ति, उनकी पेटेंट टेक्नोलॉजीस और उनके बढ़ते कद से खतरा महसूस कर रहे थे। कोर्ट के इस फैसले से आज यह देश के सामने साफ हो चुका है कि जांच प्रक्रियाओं में किस कदर लापरवाही बरती गई। अब जब सीबीआई नए सिरे से इस पूरे आपराधिक नेटवर्क, वित्तीय हेरफेर और साजिशों की जांच करेगी तो वह सारे राज एक-एक करके बाहर आएंगे। जिन्हें हमेशा के लिए फाइलों के नीचे दफन समझ लिया गया था। सुशांत सिंह राजपूत की यह विशाल संपत्ति, उनकी गाड़ियों का कलेक्शन, उनका 55 लाख का टेलीिस्कोप, उनका चांद पर खरीदा हुआ टुकड़ा, उनके 50 अधूरे सपने और साल 2026 का यह नया कानूनी यूटर्न हमें एक बहुत बड़ी बात सिखाता है।
असली संपत्ति सिर्फ बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपए या कागजों पर दर्ज जमीनें नहीं होती बल्कि असली संपत्ति वह विचार, वह ज्ञान, वह प्रेरणा और वह इंसानियत होती है जो आप इस दुनिया को देकर जाते हैं। सुशांत ने भले ही इस दुनिया को कम उम्र में अलविदा कह दिया हो, लेकिन उन्होंने चांद पर जमीन खरीद कर गरीब बच्चों को नासा भेजकर और करोड़ों लोगों को सपने देखना सिखाकर एक ऐसी संपत्ति बनाई है जो कभी खत्म नहीं हो सकती। किसी इंसान के पास कितनी दौलत थी यह आंकड़ों में लिखा जा सकता है। लेकिन उसने अपने सपनों और अपनी सोच से दुनिया को कितना दिया? इसकी कोई कीमत तय नहीं की जा सकती। इस कहानी में मौजूद दावों और सवालों को लेकर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि इस मामले से जुड़े बाकी सवालों के जवाब भी कभी पूरी तरह सामने आएंगे? कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए। अगर आपको वीडियो पसंद आई हो, तो लाइक करें, इसे शेयर करें और ऐसे ही दिलचस्प कहानियों के लिए चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें। साथ ही बैल आइकन जरूर दबाएं ताकि अगली वी