सुप्रीम कोर्ट ने भेजा जानवी कपूर को नोटिस। मुश्किल में फंसे बोनी कपूर, खुशी कपूर। श्रीदेवी का नाम एक बार फिर घसीटा गया। कोर्ट कचहरी के चक्कर काटेगा कपूर परिवार। चिंता में आए जानवी और खुशी के चाहने वाले। कपूर परिवार की मुश्किलें एक बार फिर कोर्ट तक पहुंच गई है।
बोनी कपूर और उनकी बेटियां जानवी कपूर और खुशी कपूर को एक पुराने विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना होगा। कोर्ट ने बोनी जानवी खुशी को एक प्रॉपर्टी मामले में नोटिस जारी कर दिया है। पूरा मामला आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल यह पूरा विवाद चेन्नई में करीब 2.70 एकड़ जमीन का है। इसी जमीन को लेकर दो भाई-बहन ने अपना दावा पेश किया है। उनका कहना है कि विवादित प्रॉपर्टी में उनका भी हिस्सा है। इसी दावे को लेकर मामला पहले मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा और अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। [संगीत] याचिकाकर्ताओं ने खुद को दिवंगत एमसी चंद्रशेखरन का कानूनी वारिस बताया है। जिनसे श्रीदेवी ने जमीन खरीदी थी। अब दोनों भाई-बहन ने प्रॉपर्टी में अपने हिस्से की मांग की है।
उनका दावा है कि जमीन को पांच बराबर हिस्सों में बांटा जाना चाहिए था और उन्हें भी इनमें एक हिस्सा मिलना चाहिए था। यही वजह है कि इतने साल पुराने इस प्रॉपर्टी विवाद में श्रीदेवी का नाम एक बार फिर सामने आया है। हालांकि इस मामले में कपूर परिवार को मद्रास हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी थी। 20 अप्रैल को हाईकोर्ट ने कपूर परिवार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुकदमे को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि 1988 की प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन को चुनौती देने वाला मुकदमा समय सीमा के कारण आगे नहीं बढ़ सकता। यानी कि जिस लेनदेन को इतने साल बाद चुनौती दी गई हो उस पर लिमिटेशन का सवाल उठता है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से दलील दी गई है कि हाईकोर्ट ने कुछ ऐसे जटिल सवालों पर विचार किया जिन्हें मुकदमे के शुरुआती चरण में तय नहीं किया जाना चाहिए था। इनमें कानूनी वारिस होने और चंद्रशेखरन की दूसरी शादी की वैधता जैसे सवाल भी शामिल हैं। वहीं कपूर परिवार की तरफ से पेश सीनियर वकील ने कोर्ट में इस बात पर जोर दिया कि मूल प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन साल 1988 का है। जबकि मौजूदा मुकदमा 2025 में दायर किया गया। यानी कि करीब 37 साल बाद इस लेनदेन को चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले का अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को प्रॉपर्टी को लेकर यथास्थिति बनाए रखने को कहा है। यानी कि जैसी स्थिति है उसे वैसे ही बनाए रखना। साथ ही अदालत ने विवाद को बातचीत या मीडिएशन के जरिए सुलझाने का सुझाव भी दिया है। इसके लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की निगरानी में मीडिएशन कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी। उस दिन कोर्ट मीडिएशन के प्रोसेस की समीक्षा करेगा। यानी कि फिलहाल कपूर परिवार के सामने करीब चार दशक पुराने इस प्रॉपर्टी विवाद की अगली कानूनी कड़ी खुल गई है और अब सबकी नजरें दिसंबर में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है।