सोचिए बॉलीवुड की एक ऐसी अभिनेत्री जिसे उसकी शालीनता, खूबसूरती और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। वही अभिनेत्री अचानक अपनी फिल्म के सेट [संगीत] पर एक मशहूर अभिनेता के सामने जाती है। वो सबके सामने उसे एक जोरदार थप्पड़ मार देती है। सेट पर सन्नाटा छा जाता है। [संगीत] किसी को समझ नहीं आता कि आखिर हुआ क्या है? वह अभिनेता थी संजीव कुमार। अभिनेत्री थी नूतन। [संगीत] लेकिन सवाल यह है कि नूतन जैसी शांत माने जाने वाली अभिनेत्री ने आखिर संजीव कुमार को थप्पड़ [संगीत] क्यों मारा? उसके पीछे सिर्फ गुस्सा था या फिर कोई ऐसा रिश्ता था
जिसके बारे में उस वक्त [संगीत] पूरा बॉलीवुड कान्हा खुशी कर रहा था। कहानी शुरू होती है। साल 1969 के आसपास। [संगीत] फिल्म थी देवी। इस फिल्म में नूतन और संजीव कुमार साथ काम कर रहे थे। दोनों अपने दौर के बेहद सम्मानित कलाकार थे और सेट पर [संगीत] उनकी अच्छी दोस्ती भी बताई जाती है। लेकिन फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों की दोस्ती [संगीत] को लेकर फिल्मी गलियारों में एक अलग ही कहानी चलने लगी। अफवाह उड़ने लगी कि नूतन और संजीव कुमार के बीच सिर्फ दोस्ती नहीं है बल्कि दोनों के बीच कुछ और चरबखा है।
मुश्किल यह थी कि नूतन उस वक्त शादीशुदा थी और एक बच्चे की मां भी थी इसलिए उनके लिए ऐसी खबरें सिर्फ फिल्मी ग्राफिक्स नहीं थी। इसका असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ सकता था और फिर एक दिन शूटिंग के दौरान नूतन के हाथ एक फिल्म मैगजीन लगी जिसमें उनके [संगीत] और संजीव कुमार के रिश्तों को लेकर खबरें छपी थी। नूतन ने जब यह पढ़ा तो वह बेहद नाराज हो गई। कुछ रिपोर्ट्स [संगीत] के मुताबिक उन्हें लगा कि उनकी और संजीव कुमार की दोस्ती को जानबूझकर अफेयर का रंग दिया जा रहा है। लेकिन कहानी का सबसे विवादी हिस्सा यहीं से शुरू होता है। बात की कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि नूतन को शक था कि इन अफवाहों के पीछे खुद संजीव कुमार की भूमिका है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में [संगीत] यह भी कहा गया कि नूतन और संजीव कुमार के बीच वास्तव में नजदीकियां थी और हालात बिगड़ने के बाद नूतन ने अपने पति के सामने यह साबित करने के लिए संजीव से दूरी दिखाने का फैसला किया। यानी इस कहानी का यह हिस्सा पूरी तरह एक जैसा नहीं मिलता। लेकिन एक बात कई रिपोर्ट्स में समान है। नूतन ने देवी के सेट पर संजीव कुमार को थप्पड़ मारा था और यह थप्पड़ किसी फिल्मी सीन का हिस्सा नहीं था। यह असली [संगीत] था।
बताया जाता है कि सेट पर मौजूद लोग अचानक हुए इस घटनाक्रम से हैरान रह गए। शूटिंग का माहौल बदल गया। और दोनों कलाकारों के बीच भी तनाव पैदा हो गया। लेकिन क्या संजीव कुमार ने सच में नूतन के बारे में अफवाह फैलाई थी? यही इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल है। कुछ [संगीत] रिपोर्ट्स में कहा गया कि नूतन को ऐसा लगा था। वहीं बाद में सामने आए दूसरे संस्करण में संजीव कुमार की बहन गायत्री पंडित और जीवनीकार हनीफ जावेरी के हवाले से बताया गया कि थप्पड़ वाली घटना से एक दिन पहले नूतन और उसके पति के बीच घर पर विवाद हुआ था। संजीव [संगीत] कुमार ने कथित तौर पर स्थिति शांत करने के इरादे से नूतन के [संगीत] पति रजनीश बहल से फोन पर बात की। लेकिन उसने मामला और बिगड़ गया। अगले दिन नूतन ने सेट पर [संगीत] संजीव को थप्पड़ मार दिया। इस संस्करण के मुताबिक उनका मकसद अपने पति के सामने यह साबित करना था कि संजीव कुमार के साथ उनका कोई अफेयर नहीं था। थप्पड़ के बाद शूटिंग तक रोकनी पड़ी और दोनों कलाकार अलग-अलग चले गए। संजीव कुमार अपने दोस्त अश्वी ईरानी के घर चले गए।
उन्हें सलाह दी गई कि इस [संगीत] मामले पर मीडिया में कोई बातचीत ना करें। लेकिन बॉलीवुड में कोई कहानी ज्यादा दिनों तक छिपी कहां रहती है। यह घटना धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई और दिलचस्प बात यह है कि वर्षों बाद नूतन ने खुद 1972 में एक इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र किया था। यानी यह सिर्फ बाद में बनाई गई इंटरनेट की कहानी नहीं थी। थप्पड़ की घटना का उल्लेख नूतन के अपने बयान से भी जुड़ता है। लेकिन क्या नूतन और संजीव कुमार के बीच वास्तव में प्रेम संबंध था? इस सवाल का कोई ऐसा [संगीत] निर्विवाद प्रमाण नहीं है जिसके आधार पर इसे पक्के तौर पर सच कहा जा सके। इतना जरूर है कि दोनों की दोस्ती को लेकर उस दौर में अफवाहएं थी
और इन अफवाहओं ने नूतन की निजी जिंदगी में तनाव पैदा किया और शायद यही वजह है कि एक शांत स्वभाव की अभिनेत्री ने ऐसा कदम उठा दिया जिसकी चर्चा रशों बाद भी होती है। संजीव कुमार बाग में हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में गिने गए नूतन भी अपनी पीढ़ी की महान अभिनेत्रियों में शामिल रही। दोनों ने एक साथ सिर्फ देवी ही नहीं बल्कि गोरी जैसी फिल्मों में भी काम किया। लेकिन देवी के सेट पर हुआ वह एक थप्पड़ उनके करियर से ज्यादा उनके रिश्ते और और उस दौर के बॉलीवुड की गाफी संस्कृति की कहानी बन गया। और इस किस्से में एक बात जरूर सामने आती है। उस दौर में किसी अभिनेत्री के नाम को किसी पुरुष अभिनेता के साथ जोड़ देना [संगीत] सिर्फ अखबार की यह खबर नहीं होती थी। कई बार इसका असर सीधे उसके घर और रिश्तों तक पहुंच जाता था और नूतन के मामले में एक अफवाह ने ऐसा तनाव पैदा किया कि बात कैमरे के सामने नहीं बल्कि कैमरे के पीछे एक थप्पड़ तक पहुंच गई।