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सस्ते होने वाले हैं मोबाइल फोन? सरकार के पास पहुंच गई कंपनियां!

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हमने आपको पहले ही कहा था कि कुछ दिन रुक जाइए उसके बाद स्मार्टफोन सस्ते होने वाले हैं। अब [घंटी की आवाज़] आप सोच रहे होंगे कि कुछ दिन तो रुक गए लेकिन अब तक स्मार्टफोन सस्ते नहीं हुए तो आपके लिए यह एक बड़ी खबर हो सकती है। भारत में मोबाइल फोन की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों के साथ-साथ कस्टमर्स यानी आपको भी परेशान कर दिया है। यही वजह है कि स्मार्टफोन कंपनियों के संगठन इंडिया सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ने सरकार से मोबाइल फोन पर लगने वाले जीएसटी को 18% से घटाकर 5% करने की मांग की है। तो क्या आने वाले दिनों में मोबाइल फोन यानी स्मार्टफोनस, एंड्राइड फोंस सस्ते होने वाले हैं। दरअसल यह जो संगठन है जिसे आईसीईए कहते हैं जिसे हम कहते हैं

इंडिया सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजा है और इस प्रस्ताव को अपकमिंग जीएसटी काउंसिल की बैठक में रखने की अपील की है। ICA में Apple, Xiaomi, Oppo, Vivo, Dicson, लावा और भगवती जैसे घरेलू और ग्लोबल कंपनियां शामिल हैं। संगठन का कहना है कि मौजूदा टैक्स और बढ़ती लागत की वजह से खासतौर पर जो सस्ते स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहक हैं उन पर ज्यादा बोझ पड़ रहा है। मोबाइल फोन महंगे होने की एक वजह है मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतें। मेमोरी चिप की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आईसीईए के मुताबिक सितंबर 2025 के बाद मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले [संगीत] डीआरएम और एनए एएनडी फ्लैश मेमोरी की कीमत करीब चार गुना बढ़ चुकी है।

दुनिया भर में एआई डाटा सेंटर के लिए मेमोरी की मांग बढ़ने से उपलब्ध क्षमता पर दबाव बढ़ा है। इसका असर भारत में भी दिख रहा है। संगठन के मुताबिक पिछले 1 साल में एंट्री लेवल स्मार्टफोन की कीमतों में अलग-अलग ब्रांड्स के स्तर पर करीब 35 से 45% तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं 10,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की उपलब्धता भी घटी है और 5% से नीचे रह गई है। आईसीईए का तर्क है कि कंपनियां मेमोरी की बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ खुद नहीं उठा सकती और इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचता है। ऐसे में 18% जीएसटी कीमत को और बढ़ा देता है।

संगठन का मानना है जीएसटी को 5% करने से फोन की शुरुआती कीमत कम हो सकती है। जिससे पहली बार स्मार्ट फोन खरीदने वाले ग्राहक, ग्रामीण उपभोक्ता और कम आय वाले परिवारों को राहत मिलेगी। इससे फीचर फोन और 2G इस्तेमाल करने वाले लोगों के स्मार्टफोन की ओर बढ़ने की रफ्तार भी बढ़ सकती है। दिलचस्प बात यह है कि जीएसटी लागू होने के वक्त जुलाई 2017 में मोबाइल फोन को 12% टैक्स स्लैब में रखा गया था। अप्रैल 2020 में इसे बढ़ाया गया और 18% वाले स्लैब में रखा गया। आईसीए अब इसे वापस कम करने की मांग कर रहा है। संगठन ने यह कहा है कि जीएसटी घटने से सरकार के राजस्व में जितनी कमी दिखती है उसकी भरपाई अधिक बिक्री औपचारिक बाजार के विस्तार और मोबाइल डाटा सब्सक्रिप्शन और डिजिटल सेवाओं से मिलने वाले जीएसटी से कुछ हद तक हो सकती है। भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार तेजी से हुआ है। आईसीईए के मुताबिक देश में मोबाइल उत्पादन फाइनेंसियल ईयर 2014 से 15 के लिए ₹18,900 करोड़ से बढ़कर फाइनेंसियल ईयर 2025 से 26 में 6,27,000 करोड़ हो गया है।

इसी अवधि में मोबाइल फोन का निर्यात ₹1,566 करोड़ से बढ़कर 2.60 लाख करोड़ पहुंच गया है। भारत अब मात्रा के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। हालांकि कंपनियों का कहना है कि उत्पादन और निर्यात बढ़ने के बावजूद घरेलू मांग पर दबाव है। ऐसे में जीएसटी में कटौती से कंपनियों को उम्मीद है कि स्मार्टफोन की कीमतें कंट्रोल हो जाएंगी। बिक्री को बढ़ावा मिलेगा और देश में मोबाइल इंडस्ट्री का घरेलू बाजार और मजबूत होगा। तो हो सकता है कि कुछ ही दिनों में सरकार यह फैसला कर ले और आपको स्मार्टफोन या एंड्राइड फोन पर एकदम सस्ती कीमतों में बाजार में यह उपलब्धता हो जाए। वीडियो डेस्क a amjla.com इसी प्रकार की वीडियोस देखने के लिए हमें सब्सक्राइब करना ना भूलें और एस्ट्रोलॉजी से जुड़ी लेटेस्ट जानकारी के लिए डाउनलोड करें my ज्योतिष ऐप।

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