चॉल के तीन वॉशरूम से स्टारडम तक… जैकी श्रॉफ की ये कहानी दिल छू जाएगी आज जैकी श्रॉफ बॉलीवुड के उन सितारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी सादगी और जमीन से जुड़े अंदाज से करोड़ों दिल जीते हैं। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के बाद भी जैकी मुंबई की तीन बत्ती की एक चॉल में ही रहा करते थे।
फिल्म मिली तो जिंदगी बदलने लगी… लेकिन हालात तुरंत नहीं बदले।जैकी श्रॉफ ने एक इंटरव्यू में उस दौर को याद करते हुए बताया था कि जब उन्हें फिल्म मिली, तब उनके पास अलमारी तक नहीं थी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था—“अलमारी बाद में आई, पहले सूट आया।”जब चॉल में पहली बार अलमारी आई, तो उसे देखने के लिए पूरी चॉल के लोग इकट्ठा हो गए। जैकी कहते हैं कि वह ऐसा दौर था,
जहां उन्होंने जिंदगी में चीजों की असली कीमत सीखी।उस चॉल में करीब 30 लोगों के लिए सिर्फ तीन वॉशरूम थे। फिल्म स्टार बनने के बाद जब प्रोड्यूसर और डायरेक्टर जैकी से मिलने चॉल में आने लगे, तो उन्हें भी वॉशरूम के लिए लाइन में लगना पड़ता था।चॉल के लोगों को यह अच्छा नहीं लगता था। उन्होंने जैकी से कहा—“तुम इतने स्टार बन गए हो… हमें अच्छा नहीं लगता कि तुम या तुम्हारे दोस्त वॉशरूम के लिए लाइन में खड़े हों।”फिर चॉल वालों ने जैकी को एक वॉशरूम ही गिफ्ट कर दिया।
जैकी ने कहा कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं थी और उनके दोस्तों को भी लाइन में खड़े होने में कोई परेशानी नहीं थी। लेकिन चॉल वालों ने उनकी बात नहीं मानी। वह वॉशरूम जैकी के लिए था और उस पर ताला लगा रहता था।सोचिए… एक तरफ जैकी श्रॉफ फिल्मी दुनिया में पहचान बना रहे थे और दूसरी तरफ उनकी जिंदगी की जड़ें अब भी उसी चॉल में थीं।‘स्वामी दादा’, ‘हीरो’, ‘अंदर बाहर’, ‘युद्ध’ और ‘तेरी मेहरबानियां’
जैसी फिल्मों के बाद जैकी तेजी से स्टार बन रहे थे। लेकिन शोहरत बढ़ने के बावजूद उन्होंने उस जगह और उन लोगों को कभी नहीं भुलाया, जहां से उनकी जिंदगी ने करवट ली थी।जैकी ने उस दौर को याद करते हुए यह भी बताया कि उन्हें आज तक याद है कि उनकी मां ने ‘शिव का इंसाफ’ का पोस्टर घर में लगाया था।यही तो असली स्टारडम है…ऊंचाई कितनी भी बड़ी हो जाए, इंसान अपनी जड़ों को न भूले।