हाल ही में एक्ट्रेस करिश्मा कपूर को मुंबई के एक चर्च से चुपचाप निकलते हुए देखा गया। [संगीत] उन्होंने सिंपल कपड़े पहने थे और कैप पहनी हुई थी। जिससे लग रहा था कि वह लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना नहीं चाहती थी। लेकिन पैपराजी ने उन्हें तुरंत पहचान लिया और उनकी तस्वीरें लेने के लिए चर्च के बाहर जमा हो गए। सवाल मेरा फिर से वही है कि आप ही लोग पैपजी को बुलाते हो तो फिर भागते क्यों हो?
वो लोग जब आपके फोटो लेने की कोशिश करते हैं तो फिर चेहरा क्यों छुपा लेते हो? अब चर्च के पास कोई बिना इंफॉर्मेशन के पेपरजी अगर आता है यह तो इंपॉसिबल है। कहीं ना कहीं कोई ना कोई आप ही की तरफ से उनको मैसेज किया होगा कि हां भाई करिश्मा कपूर जा रही है चर्च।
जाइए न्यूज़ बनाइए। थोड़ा सा उन्हें भी हाईलाइट कीजिए। अगर मंदिर जाती तो भी ऐसा [संगीत] करती क्या? प्रॉपर तरीके से आती, फोटो खिंचवाती। हां भाई, मैं मंदिर से आ रही हूं। पर यहां चर्च से आते वक्त ऐसा छुप-छुप [संगीत] के भागने की क्या जरूरत है? पता नहीं। लेकिन सोशल मीडिया पे चर्चा है कि आखिर [संगीत] चर्च क्यों? ऐसा होता है कि कई लोग जाते हैं चर्च भी। फ्रेंड्स के साथ चले जाते हैं लोग।
लेकिन ऐसे छुप-छुपा के कैमरा से बचने की कोशिश [संगीत] नहीं करते। तो यह तो पता चल ही जाएगा। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। ऐसे आपको शायद पता ना हो। पर करिश्मा करीना की नानी क्रिश्चियन थी और विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आ गई थी। इसलिए शायद दोनों बहनें लो और बेबुक क्रिश्चियनिटी फॉलो करती हो क्योंकि उनकी मां भी वही फॉलो करती थी।