बड़े-बड़े इंजीनियर और वैज्ञानिक भी हो गए फेल। हजारों क्विंटल वजन उठाने वाली कन भी हो गई सरेंडर। चार दिन चार प्रयास पत्थरों को चीर देने वाली मशीन भी 1 इंच नहीं हिला सकी हनुमान जी की मूर्ति। उज्जैन में हुआ ऐसा सनातन का चमत्कार जिसने भी देखा फटी की फटी रह गई आंखें। इंजीनियर हारे तकनीक फेल हो गई। उज्जैन में दो दिन में भी नहीं हिली 170 साल पुरानी हनुमान जी की मूर्ति। जी। इसे कहते हैं चमत्कार और चमत्कार को ही है नमस्कार।
कौन कहता है ईश्वर का वजूद नहीं है? जिसे भी ईश्वर पर डाउट है वो उज्जैन से आई इस खबर को साक्षात देख ले। वह भी ईश्वर के आगे नतमस्तक होने पर मजबूर हो जाएगा। दंडवत प्रणाम करेगा। दरअसल धर्म और आध्यात्म की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के बीच एक बेहद ही अनोखा और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। कंठाल से छतरी चौक मार्ग पर स्थित करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को नए स्थान पर ले जाने के लिए जिला प्रशासन और इंजीनियरों की टीम पिछले दो दिन से जुटी हुई है। लेकिन तमाम आधुनिक तकनीकों के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई।
प्रतिमा ना हटने के कारण प्रशासन ने फिलहाल सुरक्षा के लिए वहां टेंट लगा दिया है। जहां गजानन और हनुमान जी की कृपा से माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है। स्थानीय लोग और श्रद्धालु इसे दैवीय शक्ति और भगवान जी की मर्जी मान रहे हैं। प्रशासन ने मंदिर की चार दीवारी तो ढा दी है लेकिन मूर्ति के ना हिलने पर हिंदू संगठनों और स्थानीय नागरिकों का आक्रोश भड़क उठा है। मंगलवार को मंदिर परिसर में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भव्य महा आरती की। बाल विजय मस्त हनुमान जी के पुजारी सुलभ शांतनु शर्मा और मंदिर समिति के सदस्यों ने कहा कि जब मंदिर के दोनों ओर मार्ग मौजूद है तो प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
मंदिर के पुजारी ने मांग की है कि प्रशासन पहले लिखित में गारंटी दे कि प्रतिमा को बिना किसी क्षति के सुरक्षित रूप से टंकी चौक पर स्थापित किया जाएगा। अन्यथा प्रतिमा को हाथ भी नहीं लगाने दिया जाएगा। उज्जैनी नहीं बल्कि इंदौर से बुलाए गए विशेष इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने दो दिनों तक काफी सावधानी के साथ प्रयास किया ताकि मूर्ति में कोई टूटफूट ना हो। हालांकि शनिवार शाम तक स्थिति जस की तस बनी रही। हनुमान जी की मूर्ति टस से मस नहीं हुई। 1 इंच भी नहीं हिल पाई। दो दिन बाद इसी मार्ग से भगवान महाकाल की राजसीय सवारी निकलनी है। जिससे प्रशासन के पास समय बहुत कम है और तनाव बढ़ता जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल बिना किसी जल्दबाजी के काम करने का निर्णय लिया है। तहसीलदार शेफाली जैन ने बताया कि प्रशासन की योजना प्रतिमा को पूर्ण सम्मान और सुरक्षा के साथ टंकी चौक पर स्थापित करने की है।
प्रतिमा के आधार की स्थिति जांचने के लिए 1ढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है। अपरातत्व विभाग यानी कि आर्कियोलॉजिस्ट की टीम अत्याधुनिक मशीनों से प्रतिमा के आधार, अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही अगली तकनीक पर काम किया जाएगा। यानी कि तमाम इंजीनियर लगा दिए गए। तमाम तकनीक लगा दी गई लेकिन सब कुछ फेल हो गया। भगवान हनुमान यहां से हिलने तक को राजी नहीं है।
ऐसा लगता है कि साक्षात भगवान हनुमान यह चाहते हैं कि उनका यह मंदिर, उनकी यह प्रतिमा यहीं पर बनी रहे। इसीलिए वो यहां से हिलने तक को राजी नहीं है। नहीं तो आज के जमाने में जहां तकनीक एक तरीके से चांद पर पहुंच चुकी है, वहां पर कोई तकनीक एक हनुमान जी की मूर्ति तक हिला नहीं पा रही है। तो सोचिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। ऐसे में आप इस चमत्कार पर क्या कहेंगे? इस पूरे मुद्दे पर जो भी आपकी राय है, हनुमान जी की प्रतिमा को यहीं रहना चाहिए या फिर बड़ी सावधानी के साथ किसी और तकनीक के साथ यहां से हटाया जाना चाहिए और नई जगह पर स्थापित किया जाना चाहिए। जो भी आपकी राय हो कमेंट करके जरूर अपनी राय दें।