छोटा यार क्या हुआ [संगीत] दिल का गया प्यार किया नहीं जाता है [संगीत] आज हम बात करने जा रहे हैं भारतीय हिंदी सिनेमा के उस सुनहरे दौर की एक ऐसी अभिनेत्री की जिसकी खूबसूरती मासूमियत और शानदार अभिनय ने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया था। मोहब्बत है क्या चीज [संगीत] हमको बताओ जिंदगी प्यार का गीत है [संगीत] इसे हर दिल वह ऐसा दौर था जब उनकी एक झलक पाने के लिए लोग घंटों लंबी कतारों में खड़े रहते थे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बड़े-बड़े सितारों के बीच भी उनका नाम सबसे अलग चमकता था। क्या ये यहां आना ना दोबारा अब अपनी तुम सोचो हम तो है भैया लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि जिस अभिनेत्री ने आगे चलकर हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई उन्होंने महज 6 साल की उम्र में ही फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया था। यशोमती मैया [संगीत] से बोले नंदलाला इसके पीछे कोई शौक नहीं बल्कि उनकी दादी की आखिरी इच्छा थी। बचपन से ही कैमरे के सामने रहने वाली यह बच्ची जब बड़ी हुई तो 80 के दशक में उन्होंने ऐसा स्टारडम हासिल किया जिसने उस दौर की कई बड़ी अभिनेत्रियों को भी पीछे छोड़ दिया। इस रास्ते से हमको वापस [संगीत] सारी हमारी तू बन गई। वह बन गई हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और सफल अभिनेत्रियों में से एक। प्यार करो प्यार [संगीत] करो प्यार करो। आंखें जब होता यार मेरे प्यार लेकिन पर्दे पर दिखाई देने वाली इस खूबसूरत और संस्कारी अदाकारा की निजी जिंदगी उतनी आसान नहीं थी। उनके करियर के सुनहरे दौर में एक ऐसा विवाद सामने आया जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया। एक फिल्म के सीन को लेकर उन्हें जबरदस्त आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और देखते ही देखते वह चर्चा और विवादों के केंद्र में आ गई। बस अब और मत उतरवाओ। मुझे ऐसे ही चलने दो। इसके बाद उनकी जिंदगी में एक और ऐसा अध्याय आया जिसने देश ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक विदेशी राजकुमार के साथ सार्वजनिक रूप से हुई एक घटना ने अखबारों की सुर्खियां बटोर ली और हर तरफ सिर्फ उन्हीं की चर्चा होने लगी। लेकिन असली सवाल तो उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा था।
आखिर ऐसी क्या परिस्थिति आई कि इस अभिनेत्री को अपने परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर शादी करने का फैसला लेना पड़ा? कौन था वह शख्स जिसके प्यार में उन्होंने अपने करियर तक को दांव पर लगा दिया? और क्या आप जानते हैं कि अपनी शादी को बचाने के लिए उन्हें आखिरकार हिंदी सिनेमा से हमेशा के लिए दूरी बनानी पड़ी। कभी अपनी दादी की उस अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए कैमरे के सामने आने वाली इस अभिनेत्री ने आखिर ऐसा फैसला क्यों लिया जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी। इस पूरी कहानी में उनकी मां की भूमिका भी बेहद खास रही। अपनी बेटी को एक सफल अभिनेत्री बनाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी, अपने सपने और अपनी सुख सुविधाओं तक का त्याग कर दिया। उन्होंने बेटी के सपनों को अपना सपना बना लिया और हर मुश्किल में उसके साथ खड़ी रही। लेकिन वक्त के साथ हालात बदलते गए और एक ऐसा मोड़ आया जहां करियर, परिवार और प्यार तीनों के बीच उन्हें एक बेहद कठिन फैसला लेना पड़ा। कोई परदेसी आया, परदेस में। हो [संगीत] गोरी तो आखिर कौन थी यह अभिनेत्री? उनके बचपन से लेकर स्टारडम तक का सफर कैसा रहा? किस विवाद ने उनके करियर पर सवाल खड़े किए? किस प्रेम कहानी ने उन्हें परिवार और फिल्मी दुनिया से दूर कर दिया? और आखिरकार क्यों उन्हें अपने जीवन के सबसे बड़े फैसलों में से एक लेना पड़ा? आज हम उनकी जिंदगी से जुड़ी इन्हीं अनसुनी और दिलचस्प पहलुओं को सिलसिलेवार तरीके से जानेंगे। इसीलिए इस रहस्यमई और भावनात्मक कहानी को जानने के लिए वीडियो के अंत तक हमारे साथ जरूर बने रहिए। आपको जो पूछना हो जल्दी से पूछ लीजिए। फिर हम जाएंगे। [संगीत] इनका नाम है पद्मिनी कोल्हापुरी। लता मंगेशकर और आशा भोंसले की भतीजी। तो चलिए जान लेते हैं कौन थी पद्मिनी कोल्हापुरी? कहां से आई थी? क्या था इनका पारिवारिक बैकग्राउंड? कौन-कौन से विवादों ने इन्हें घेरा और कैसे मिली इन्हें जबरदस्त सफलता। इन सब पर बात करेंगे विस्तार से। लेकिन सबसे पहले एक नजर डालते हैं पद्मिनी कोल्हापुरी के परिवार और उनकी पढ़ाई लिखाई पर।
हे लाख तू पाए चाहे जान भी अब मेरे हमरा ही है मेरे संग तू पद्मिनी कोल्हापुरी का जन्म 1 नवंबर 1965 को मुंबई में हुआ। उनके पिता शास्त्रीय गायक और वीणा वादक थे। जबकि मां एयर इंडिया में कार्यरत थी। इस मध्यमवर्गीय परिवार में पद्मिनी के अलावा दो बहनें और थी शिवांगी और तेज्विनी जिन्होंने भी हिंदी सिनेमा और संगीत में अपना नाम कमाया। पद्मिनी का संबंध सीधे मंगेशकर [संगीत] परिवार से है। उनकी दादी लता मंगेशकर और आशा भोसले के पिता [संगीत] पंडित दीनाना मंगेशकर की सौतेली बहन थी। इस रिश्ते से लता और आशा उनकी बुआ लगती हैं। पद्मिनी का पालन पोषण संगीत के माहौल में हुआ। जहां उनके पिता उन्हें और उनकी बहनों को गायन सिखाते थे। [संगीत] असल में पद्मिनी की पहली इच्छा गायिका बनने की थी। मगर उनकी दादी चाहती थी कि वह एक सफल अभिनेत्री बने। इसी [संगीत] चाह के चलते दादी ने पद्मिनी को फिल्मी दुनिया में लाने के लिए अपनों से सिफारिशें करनी शुरू कर दी। 7 साल की उम्र में साल 1972 [संगीत] में उन्हें एक फिल्म एक खिलाड़ी बावन पत्ते में चाइल्ड आर्टिस्ट का रोल मिला। 1973 में उन्हें अपनी बहन शिवांगी के साथ फिल्म यादव की बारात में गाना गाने का मौका मिला और वहीं से पद्मिनी की यात्रा संगीत और अभिनय दोनों ही दिशाओं में शुरू हो गई। यादों की बारात निकली है आज दिल के द्वार। अब आते हैं उस मोड़ पर जिसने पद्मिनी के करियर को एक नई दिशा दी। एक दिन जब आशा भोसले अभिनेता देवानंद के लिए गाना रिकॉर्ड कर रही थी तो उन्होंने देवानंद से कहा मेरी भतीजी है पद्मिनी बहुत टैलेंटेड है अगर कोई रोल हो तो एक बार जरूर देख लेना देवानंद उस समय फिल्म इश्क इश्क इश्क बना रहे थे और उन्हें एक चाइल्ड आर्टिस्ट की तलाश थी। उन्होंने पद्मिनी को देखा और अपनी फिल्म में कास्ट कर लिया। इस फिल्म में उनके अभिनय की सराहना हुई। उस पहाड़ी के पीछे हमारा होटल है। वहां सब लोग आते हैं। तुम भी आना। इसके बाद पद्मिनी एक स्कूल प्ले में परफॉर्म कर रही थी। जहां उन्हें देखने पहुंचे खुद सोमैन राज कपूर। राज कपूर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपनी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम जो 1977 में रिलीज हुई थी में जीनत अमान के बचपन का रोल ऑफर किया। फिल्म हिट हुई और पद्मिनी का नाम एक बार फिर छा गया। [संगीत] अब पद्मिनी एक जानी पहचानी चाइल्ड आर्टिस्ट बन चुकी थी। उन्होंने जिंदगी, ड्रीम गर्ल, हमारा संसार, साजन बिना सुहागन जैसी फिल्मों में काम किया। [संगीत] लेकिन अब बारी थी पद्मिनी के बाल कलाकार से एक नायिका बनने की। [संगीत] साल 1980 में उन्होंने फिल्म गहराई साइन की।
इस फिल्म में एक दृश्य ने पद्मिनी को सीधे विवादों में ला खड़ा किया। यह सीन अमरीश पुरी के साथ था जिसमें पद्मिनी ने एक बोल्ड और विवादित रोल निभाया। इस सीन को लेकर समाज में भारी बहस हुई। किसी ने उनकी आलोचना की तो किसी ने साहस की सराहना की। फिल्म हिट हुई लेकिन पद्मिनी अब सिर्फ एक कलाकार नहीं रही बल्कि एक विवादित चेहरा भी बन गई। इसी साल 1980 में पद्मिनी एक और फिल्म में नजर आई इंसाफ का तराजू। इस फिल्म में अभिनेता राज बब्बर के साथ उन्होंने एक और बेहद बोल्ड और भावनात्मक सीन किया जिसने दर्शकों को झकझोर दिया। यह फिल्म और पद्मिनी दोनों ही सुर्खियों में आ गए। उनका अभिनय इतना प्रभावशाली था कि उम्र के उस मोड़ पर भी वे परिपक्व किरदार निभा रही थी। लेकिन इन विवादों के बाद पद्मिनी ने एक फैसला लिया। अब वे कभी भी ऐसी असलीलता नहीं करेंगी जो समाज के लिए गलत मिसाल बने। लेकिन हिंदी सिनेमा में उनके अभिनय की खूब सराहना की गई और उन्हें इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किया गया। यह वह दौर था जब पद्मिनी को एक नायिका के रूप में फिल्मों में कदम रखना था।कि वह पहले ही फिल्मफेयर पुरस्कार जीत चुकी थी और लोकप्रियता भी प्राप्त कर चुकी थी। अतः [संगीत] इसी कड़ी में उन्हें उनकी पहली फिल्म आहिस्ता-आहिस्ता मिली जिसमें उन्होंने मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई। मगर वर्ष 1981 में रिलीज हुई यह फिल्म दर्शकों के बीच अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सकी और पद्मनी को इस फिल्म से वह सफलता नहीं मिल सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। [नाक से की जाने वाली आवाज़] लेकिन इसके बाद उनकी जिंदगी में एक ऐसी फिल्म आई जिसने उन्हें रातोंरात एक सुपरस्टार बना दिया और हिंदी सिनेमा [संगीत] की अग्रणी अभिनेत्रियों की पंक्ति में ला खड़ा किया। वह फिल्म थी राज कपूर की क्लासिक कृति प्रेम रोग। साल 1982 में आई इस फिल्म में पद्मिनी के साथ ऋषि कपूर, शमी कपूर, नंदा, [संगीत] कुलभूषण खरबंदा और राजा मुराद जैसे दिग्गज कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई।
इस फिल्म में पद्मिनी के प्रभावशाली और गहरे अभिनय को पूरे देश ने सराहा और यह फिल्म अपने समय की एक बहुत बड़ी सुपरहिट साबित हुई। कभी [संगीत] हमने ही याद कर लिया होता। अच्छा तो हम चले गए। फिल्म में उनके दमदार और यादगार अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्री बना दिया और इस फिल्म [संगीत] के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। इतनी कम उम्र में ऐसा प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करना उस समय की कई अन्य अभिनेत्रियों के लिए चिंता का विषय बन गया था। इसके बाद तो मानो सफलता उनके कदम चूमने लगी। बड़े-बड़े निर्माता निर्देशक विशाल बजट की फिल्मों के प्रस्ताव लेकर उनके पास आने लगे। उस दौर में पद्मनी श्रीदेवी और अनीता राज के बाद सबसे ज्यादा फिल्में साइन करने वाली तीसरी सबसे बड़ी अभिनेत्री बन गई। अपनी लोकप्रियता और सफलता के उस सुनहरे काल में पद्मिनी ने दर्द का रिश्ता [संगीत] विधाता सौतन वो सात दिन बेवफा बेवफाई स्वर्ग से सुंदर प्यार झुकता नहीं जमाने [संगीत] को दिखाना है दाता और मजदूर जैसी हिट और सुपरहिट फिल्मों से हिंदी सिनेमा को समृद्ध किया और अपने नाम की शोहरत को दिन दुगनी रात चौगुनी बढ़ाया। यह पद्मिनी कोल्हापुरी के नाम और अभिनय का वह सितारा था कि वे उस दौर के हर बड़े अभिनेता की पहली पसंद बन गई [संगीत] थी। उन्होंने राजेश खन्ना, दिलीप कुमार, संजीव कुमार, जितेंद्र, धर्मेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, [संगीत] राज बब्बर, संजय दत्त, अनिल कपूर और सुनील दत्त जैसे महान कलाकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अभिनय किया। दोस्तों, [संगीत] यह तो था पद्मिनी कोल्हापुरी का चमकदार फिल्मी सफर जिसे [संगीत] हमने आपके सामने पेश करने की कोशिश की। लेकिन अब बात करते हैं उनके जीवन से जुड़ी उन विवादों की जिनकी वजह से पद्मिनी आज भी सोशल मीडिया और लोगों के बीच [संगीत] चर्चित और लोकप्रिय हैं। पहला विवाद प्रिंस चार्ल्स को किस [संगीत] करना। साल 1980 में जब पद्मिनी कोल्हापुरी अपनी फिल्म आहिस्ता-आहिस्ता की शूटिंग कर रही थी। उसी समय ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस चार्ल्स भारत दौरे पर आए हुए थे। प्रिंस चार्ल्स भारतीय फिल्मों से बहुत प्रभावित थे और हिंदी फिल्मों की शूटिंग देखना चाहते थे। उन्हें मुंबई के राजकमल स्टूडियो ले जाया गया जहां पद्मिनी की फिल्म की शूटिंग चल रही थी। जब प्रिंस चार्ल्स शूटिंग सेट पर पहुंचे तो भारतीय परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उन्हें कलाकारों से मिलवाया गया। लेकिन जैसे ही प्रिंस चार्ल्स पद्मनी के पास पहुंचे पद्मिनी अचानक भावुक होकर उनके गले लग गई और सबके सामने उन्हें किस कर लिया। उस दौर में खुलेआम किसी को किस करना समाज में सामान्य बात नहीं मानी जाती थी। वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। यह खबर आग की तरह फैली और पद्मनी का यह किस उस [संगीत] समय की मैगजीनंस और अखबारों की सुर्खियां बन गया। यह चर्चा केवल भारत में ही नहीं बल्कि ब्रिटेन तक जा पहुंची। [संगीत] वहां की मीडिया ने भी इस खबर को प्रमुखता से दिखाया। इस एक किस की वजह से पद्मिनी अचानक विवादों के घेरे में आ गई और आलोचनाओं का शिकार हुई। आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में यह किस्सा सबसे विवादित और चर्चित घटनाओं में से एक है। दूसरा विवाद राज कपूर से दूरी। पद्मिनी कोल्हापुरी को हिंदी सिनेमा में पहचान दिलाने में महान फिल्मकार राज कपूर का बड़ा हाथ था। [संगीत] उन्होंने पद्मिनी को अपनी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम में मौका दिया था और वह उन्हें अपनी पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक मानते [संगीत] थे। राज कपूर अपनी फिल्म राम तेरी गंगा मेली हो गई के लिए पद्मिनी को ही लेना चाहते थे। [संगीत] लेकिन जब पद्मिनी ने इस फिल्म के कहानी सुनी तो उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया क्योंकि फिल्म में कुछ बोल्ड दृश्य [संगीत] थे और पद्मिनी पहले ही अपने करियर में इस तरह के दृश्यों को लेकर आलोचना झेल चुकी थी। वे अब अपनी छवि और भविष्य को लेकर सतर्क थी। इसीलिए [संगीत] उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। राज कपूर को पद्मिनी का यह इंकार अच्छा नहीं लगा और इसके बाद दोनों के बीच रिश्तों में [संगीत] खटास आ गई। एक समय जिनके बीच गहरी समझदारी थी, वह रिश्ता [संगीत] धीरे-धीरे खत्म हो गया। तीसरा विवाद उनकी शादी। पद्मिनी कोल्हापुरी की शादी भी कम विवादों में नहीं रही।
उन्होंने फिल्म निर्देशक प्रदीप शर्मा उर्फ़ टी राजेंद्र से शादी [संगीत] की जो एक समय पर फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित निर्माता निर्देशक थे। लेकिन शादी के बाद पद्मिनी की निजी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए। यह रिश्ता भी चर्चा में रहा और इसे लेकर भी मीडिया में कई तरह की बातें उठी। कई बार उन्हें अपने व्यक्तिगत जीवन में दुख और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। इन सभी विवादों के बावजूद पद्मनी कोल्हापुरी ने खुद को एक मजबूत और सफल अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया और आज भी लोग उनके अभिनय व्यक्तित्व और संघर्ष को याद करते हैं। साल 1986 में पद्मिनी कोल्हापुरी फिल्म [संगीत] ऐसा प्यार कहां कि शूटिंग कर रही थी। इसी फिल्म के सेट पर उनकी मुलाकात निर्माता प्रदीप शर्मा से हुई। पहली ही मुलाकात में दोनों के बीच एक खास रिश्ता बन गया। कुछ मुलाकातों और बातचीत के बाद दोनों ने एक दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला कर लिया। लेकिन यह प्यार की राह आसान नहीं थी। पद्मिनी और प्रदीप दोनों अलग जाति और समाज से थे और यही वजह थी कि पद्मिनी के परिवार ने इस रिश्ते को मंजूरी नहीं दी। परिवार को मनाने की लाख कोशिशें की गई। लेकिन जब कोई रास्ता नहीं बचा तब पद्मिनी ने एक बड़ा फैसला लिया। 15 अगस्त 1986 को पद्मिनी ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर घर से [संगीत] भागकर प्रदीप शर्मा से शादी कर ली। इस फैसले ने उनकी मां का दिल तोड़ दिया। वो मां जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर बेटी के सपनों को उड़ान दी थी। उसे दिल से पाला था। उसी मां का विश्वास टूट गया। [संगीत] शादी के बाद पद्मिनी ने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। उन्हें [संगीत] एक बेटा हुआ जिसका नाम प्रियांक शर्मा रखा गया। प्रियांक अब हिंदी सिनेमा में सक्रिय हैं। जहां पद्मिनी ने प्रदीप शर्मा से शादी की, वहीं उनकी बहन शिवांगी कोल्हापुरी ने बॉलीवुड के मशहूर विलेन शक्ति [संगीत] कपूर से विवाह कर लिया। इस तरह श्रद्धा कपूर जो शक्ति कपूर की बेटी है पद्मिनी की भतीजी लगती है। शादी के बाद पद्मिनी ने अपने अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा किया और फिर परिवार की खातिर अपने पति की खुशी के लिए उन्होंने हिंदी सिनेमा को अलविदा कह दिया। [संगीत] यह वही वक्त था जब पद्मिनी अपने करियर के चरम पर थी। लेकिन उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन को प्राथमिकता दी। [संगीत] वर्षों बाद 1999 में पद्मिनी ने फिल्म रॉकफोल्ड के जरिए निर्माता के रूप में वापसी की। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे प्रियांक के साथ एक मराठी फिल्म चिमनी पाखर में काम किया। यह फिल्म मराठी सिनेमा की एक बेहतरीन कृति बनी और इसके लिए पद्मनी को पुरस्कार भी मिला।
बाद के वर्षों में उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में अभिनय किया और उनके अभिनय की खूब तारीफ भी हुई। अब भले ही वह बड़े पर्दे पर कम नजर आती हो, लेकिन छोटे पर्दे और टीवी शोज़ के माध्यम [संगीत] से वह दर्शकों से जुड़ी रहती है। टीवी पर वह अपने जीवन के सुनहरे पलों को साझा करती हैं और दर्शकों को अपने अनुभवों से रूबरू कराती हैं। पद्मिनी ने प्रेम विवाह कर उस वक्त फिल्मों से किनारा कर लिया था जब उनका करियर बुलंदियों पर था। अगर वह उस वक्त हिंदी सिनेमा से दूरी ना बनाती तो शायद आज वह बॉलीवुड की सबसे चर्चित और शीर्ष अभिनेत्रियों में से एक होती। [संगीत] लेकिन नियति के आगे किसी की नहीं चलती जो किस्मत में लिखा है वही होता है। अपने छोटे लेकिन शानदार करियर में पद्मिनी ने कई पुरस्कार और मानसान अर्जित किए। [संगीत] एक अभिनेत्री के तौर पर उन्होंने हिंदी सिनेमा की गरिमा को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके अभिनय, सौंदर्य और व्यक्तित्व ने उन्हें सदा के लिए यादगार बना दिया। [संगीत] दोस्तों, आपने पढ़ा पद्मिनी कोल्हापुरी का जीवन एक ऐसी अभिनेत्री जो अपने दौर की सबसे चमकती हुई शख्सियतों में से एक थी। उनके जीवन के विवाद, उनकी प्रेम कहानी, शादी, संघर्ष और वापसी हर पहलू में एक सच्ची नायिका की झलक मिलती है। अब हम आपसे जानना चाहेंगे क्या आपको लगता है कि पद्मिनी के जीवन में जो विवाद हुए, वह जानबूझकर थे या हालात की वजह से? क्या उनका विवाह उनके फिल्मी करियर के लिए सही था? या वह एक भावनात्मक भूल थी? क्या आपने भी कभी कोई ऐसा अनुभव देखा या सुना है
जो पद्मिनी से जुड़ा हो? अपने विचार और अनुभव हमें कमेंट्स में जरूर बताएं। अगर आपको पद्मिनी कोल्हापुरी की यह कहानी पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक, शेयर और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें। आज भले ही पद्मिनी कोल्हापुरी फिल्मों से दूर हो लेकिन इस बायोग्राफी के जरिए हमने उनकी जिंदगी, संघर्ष, उपलब्धियों और उस सुनहरे सफर को एक बार फिर आपके सामने लाने की कोशिश की है। आज पद्मिनी कोल्हापुरी मुंबई में अपने परिवार के साथ एक शांत और सुकून भरी जिंदगी जी रही है। अभिनय से दूरी के बावजूद कला से उनका रिश्ता आज भी कायम है और वह डांस से जुड़ी अपनी गतिविधियों में सक्रिय रहती है। हिंदी सिनेमा में उनके शानदार योगदान और यादगार किरदारों के लिए उन्हें हमारा दिल से सलाम। तो दोस्तों आज के लिए बस इतना ही। बहुत जल्द फिर मुलाकात होगी एक और ऐसी ही शानदार सितारे की अनसुनी और दिलचस्प कहानी के साथ। तब तक आप अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिए, खुश रहिए और सुरक्षित रहिए। मिलते हैं अगले वीडियो में। थैंक यू सो मच। यार क्या हुआ? [संगीत] दिल का प्यार किया नहीं जाता [संगीत] है दिल मोहब्बत है क्या चीज हमको बताओ जिंदगी प्यार का गीत है इसे [संगीत] हर दिल को ये गलियां ये दोारा यहां आना ना दोबारा अपनी [संगीत] तुम सोचो हम तो है मैया