Cli

दो महारानियां, एक इंडस्ट्री और साथ काम न करने का वह अनसुलझा रहस्य

Uncategorized

2018 दिल्ली नेशनल फिल्मफेयर अवार्ड बेस्ट एक्ट्रेस का नाम बुलाया जाता है। तालियां बजती है लेकिन एक्ट्रेस अपनी सीट से नहीं उठी। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार। उसकी जगह दो लड़कियां स्टेज की तरफ बढ़ती है। दोनों उसकी बेटियां है। उसमें से एक ने अपनी मां की साड़ी पहनी हुई थी। अवार्ड उनकी मां का है लेकिन वो उसे लेने के लिए वहां नहीं है। वो अब इस दुनिया में ही नहीं है। लेकिन इस अवार्ड में एक और बात छिपी थी। ऐसी बात जो इस पल को बहुत भारी बना देती है। यह सम्मान बहुत देर से आया। कितना देर से? इसका जवाब जानने के लिए हमें करीब 30 साल पीछे जाना पड़ेगा। उस दौर में जब बॉलीवुड में हर सवाल हर जगह पूछा जाता था। श्रीदेवी या माधुरी दीक्षित। एक पहले से बॉलीवुड की क्वीन थी, दूसरा तेजी से उसकी तरफ बढ़ रही थी। मैगजींस दोनों को आमने-सामने रख रही थी। फैंस लड़ रहे थे। कौन बेहतर एक्ट्रेस है? कौन बेहतर डांसर है? किसकी स्क्रीन प्रेजेंस पड़ी है? और सबसे बड़ा सवाल बॉलीवुड की असली नंबर वन हीरोइन कौन है? स्वागत है आपका फिल्मी जाट गर्ल पर। मैं हूं सुहानी और यार माधुरी और श्रीदेवी की ये लड़ाई थोड़ी अजीब थी क्योंकि फैंस उसे लड़ाई मान रहे थे। मीडिया इसे राइवलरी बना रही थी। लेकिन दोनों एक्ट्रेस की एक तरफ से वैसी लड़ाई कभी दिखी ही नहीं। फिर भी सवाल रहा नंबर वन कौन है? और इससे भी अजीब बात यह है कि इसका जवाब कभी मिला ही नहीं। मैं ख्वाबों के शहजादे प्रेम गली प्रेम गली प्रेम गली [संगीत] में मेरा जिंदगी। सबसे पहले श्रीदेवी को समझो। माधुरी के आने से पहले वो बहुत बड़ा नाम थी और सिर्फ हिंदी सिनेमा में नहीं वो बचपन से काम कर रही थी। तमिल, तेलुगु, मलयालम, हिंदी सिनेमा में उनकी पहचान थी और फिर हिंदी सिनेमा में उनका एक ऐसा दौर आया जब हीरोइन सिर्फ हीरो के साथ खड़ी नहीं होती थी। [संगीत] कई बार फिल्म श्रीदेवी के नाम पर बिकती थी। नगीना, मिस्टर इंडिया, चांदनी, चालवाज हर फिल्म में अलग श्रीदेवी कॉमेडी कर सकती थी, ड्रामा कर सकती थी,

डांस कर सकती थी। डबल रोल में पूरी फिल्म को उठा सकती थी। [संगीत] एटीज खत्म होते-होते उनका नाम किसी हीरो से छोटा नहीं लगता था। और तभी एक गाना आया। एक, दो, तीन। तेजाब ने माधुरी दीक्षित को रातोंरात उस रेस में लाकर खड़ा किया जहां कुछ समय पहले श्रीदेवी लगभग अकेली दिखाई देती थी। माधुरी खूबसूरत थी, डांसर अच्छी थी। कैमरा उन्हें पसंद करता था। ऑडियंस भी उन्हें पसंद करती थी और सबसे बड़ी बात उनका सबसे बड़ा दौर शुरू हुआ था। फिर माधुरी ने रुकने का नाम नहीं लिया। दिल, बेटा, खलनायक फिर आई हम आपके हैं कौन? बॉक्स ऑफिस ने इतिहास पे इतिहास बनाए। माधुरी अब सिर्फ श्रीदेवी की चैलेंजर नहीं थी। वो खुद बॉलीवुड की सबसे बड़ी एक्ट्रेसेस में गिनी जा रही थी। और यहीं से एक मजेदार चीज हुई। जितनी बड़ी माधुरी होती गई उतना ही सवाल पूछा गया। क्या माधुरी ने श्रीदेवी को पीछे छोड़ दिया? लेकिन इस सवाल की एक प्रॉब्लम थी। यह लड़ाई दोनों एक्ट्रेस लड़ ही नहीं रही थी। माधुरी ने बाद में श्रीदेवी के लिए रिस्पेक्ट से बात की। उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि श्रीदेवी उनसे पहले से काम कर रही थी। फिर भी बॉलीवुड को नंबर वन चाहिए था। एक क्वीन थी, एक विनर थी इसलिए हर हिट के बाद हिसाब बदल जाता था। श्रीदेवी की बड़ी फिल्में आती थी तो उनके नाम पर बिक जाती थी। माधुरी की फिल्म आती तो हेडलाइन बदल जाती। लेकिन कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ। और तभी मुकाबला फिल्म से बाहर निकलने लगा। 1996 में श्रीदेवी ने बोनी कपूर से शादी कर ली और उसके बाद उन्होंने फिल्म से लंबी दूरी बना ली। जिस एक्ट्रेस ने सालों तक लगातार काम किया वो लगभग स्क्रीन से गायब हो गई। कुछ साल बाद माधुरी की जिंदगी भी बदली। 1999 में उन्होंने डॉक्टर नैनी से शादी कर ली।

वो अमेरिका चली गई। फिल्म की रफ्तार कम हुई। यानी जिस मुकाबले का बॉलीवुड फैसला करना चाहता था, दोनों एक्ट्रेस धीरे-धीरे उस रेस से बाहर होती चली गई। फिर कहानी में दूसरा राउंड शुरू हुआ। माधुरी वापस आती हैं। 2007 में अजन अचले से कमबैक करती हैं। वैसा बड़ा धमाका नहीं बना जैसा शायद उम्मीद थी। लेकिन माधुरी वापस गायब नहीं हुई। उन्होंने फिल्म्स की, टीवी किया, डांस शोज़ किए, जज किए, जज के रूप में बनी और और फिर स्ट्रीमिंग पर आई। नई जनरेशन के लिए उन्होंने एक दो तीन वाली माधुरी के रूप में नहीं देखा। वो लगातार ऑडियंस के सामने बनी रही। उनका दूसरा दौर धीरे-धीरे बढ़ रहा था और फिर 5 साल बाद दूसरी क्वीन भी वापस ही करती हैं। 2012 में इंग्लिश विंग्लिश के साथ 15 साल की लंबे ब्रेक के बाद श्रीदेवी स्क्रीन पर थी [संगीत] कमबैक के लिए उन्होंने कोई ग्लैमरस सुपरस्टार वाला कैरेक्टर नहीं चुना। शशि बनी एक हाउसवाइफ जिसे इंग्लिश नहीं आती जिसे अपने घर में कई बार कम समझा जाता है। फिल्म चली श्रीदेवी की तारीफ हुई और सडनली लगा कि यह कमबैक सिर्फ नस्टालजिया का नहीं है। श्रीदेवी के पास अभी भी बहुत कुछ बाकी है। अब पुराना सवाल एक नए रूप में आ सकता था। माधुरी की दूसरी इनिंग चल रही थी। श्रीदेवी वापस आ चुकी थी। दोनों अब 90ज वाली हीरोइन नहीं थी। दोनों मैच्योर रोल्स करती थी। दोनों के सामने नई ऑडियंस थी। अगर यह दूसरा लंबा दौर चलता तो कौन क्या करती? कौन से रोल को चुनती, आगे कौन निकलती? पहली बार इस पर बहस का नया चैप्टर शुरू हो सकता था। 2017 में श्रीदेवी ने अपनी अगली फिल्म मॉम की। फिर एक सीरियस रोल, फिर परफॉर्मेंस की तारीफ, श्रीदेवी की दूसरी इनिंग में यह दूसरी बड़ी हिंदी फिल्म थी। इंग्लिश विंग्लिश के बाद मॉम [संगीत] एक ऐसे लग रहा था जैसे उनके लिए एक अलग तरीके की फिल्मों का रास्ता खुल गया। लेकिन मॉम के कुछ ही महीनों बाद [संगीत] कहानी अचानक रुक गई।

24 फरवरी 2018 दुबई श्रीदेवी की एक्सीडेंटल मौत हो जाती है। सिर्फ 54 साल की उम्र में। जिस एक्ट्रेस ने 4 साल की उम्र से कैमरा के सामने अपनी जिंदगी बिताई थी, उसकी कहानी अचानक खत्म हो जाती है और साथ में खत्म हो गया उनकी दूसरी इनिंग का वो हिस्सा जो अभी लिखा जाना था। इंग्लिश विंग्लिश और मॉम के बीच में 5 साल थे। लेकिन अब [संगीत] तीसरी फिल्म आने का सवाल ही नहीं था। माधुरी की कहानी आगे बढ़ती रही। नए शोज़, नई फिल्म्स, नई ऑडियंस मिली। श्रीदेवी की कहानी वहीं रुक गई। और इसीलिए अब पुरानी माधुरी वर्सेस श्रीदेवी की बहस और अजीब हो गई। जिंदगी ने यह तय नहीं किया कि दोनों में से बेहतर कौन थी। जिंदगी ने उस मुकाबले को पूरा होने का मौका ही नहीं दिया। अब वापस आते हैं 2018 की उस सेरेमनी में जिस स्टेज से हमने कहानी शुरू की थी। बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवार्ड मिला था मॉम के लिए। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार फिल्म मॉम के लिए मरणोपरांत श्रीदेवी को दिया जाता है। श्रीदेवी जी को उनकी जगह पर जानवी और खुशी कपूर ये अवार्ड लेने के लिए पहुंची थी। लेकिन एक बात मैंने शुरू में नहीं बताई थी। यह श्रीदेवी का सिर्फ नेशनल अवार्ड नहीं था। यह पूरे करियर का पहला नेशनल अवार्ड था।

सोचो 4 साल की उम्र से एक्टिंग कर रही थी। करीब पांच दशक का करियर था। लगभग अलग-अलग लैंग्वेज में सैकड़ों फिल्म्स थी। सदमा नगीना मिस्टर इंडिया चांदनी चालबाज इंग्लिश विंग्लिश और उनका पहला नेशनल अवार्ड मॉम के लिए जब वो उसे लेने के लिए मौजूद ही नहीं थी। यही वो बात थी जो इस सेरेमनी को इतना भारी बना देती है। ऑडियंस अवार्ड बहुत बड़ा था। लेकिन जिस आवाज को अपना नाम सुनना था वो आवाज वो इंसान वहां था ही नहीं। उसकी जगह उसकी बेटियां थी। मोनी कपूर ने बाद में इसी दर्द की बात की। श्रीदेवी ने इतने लंबे समय तक काम किया। उन्हें यादगार कैरेक्टर दिए। लेकिन नेशनल अवार्ड उनके हिस्से में तब आया जब वो चाह चुकी थी। और जब 90ज में वापस चलो तब सवाल था माधुरी या श्रीदेवी कौन बेहतर डांसर? कौन बड़ी एक्ट्रेस नंबर वन कौन? फैंस के पास जवाब थे, मैगजीनंस के पास सपने थे, लेकिन शायद बॉलीवुड इसका कभी आखिरी फैसला कर ही नहीं पाया। अब फैसला होना और भी मुश्किल हो चुका है। माधुरी की कहानी अभी आगे बढ़ रही है। श्रीदेवी की कहानी 18 में रुक गई। इसीलिए कहना कि किस्मत ने किसी को विनर बना दिया। सही नहीं होगा। हुआ इसका उल्टा। किस्मत ने इस सवाल का जवाब ही हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया। और शायद इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल अब यह नहीं कि माधुरी और श्रीदेवी में नंबर वन कौन थी? मेरे लिए सवाल दूसरा है। जो श्रीदेवी को ऑडियंस दशकों से सुपरस्टार मान चुकी थी। जिस एक्ट्रेस ने हिंदी सिनेमा में हीरोइन की ताकत बदल दी। अपना पहला नेशनल अवार्ड उसे तब क्यों मिला जब वो जा चुकी थी? आप बताइए अगर आप 90ज में यह बहस सुनते तो आपकी नंबर वन कौन होती? माधुरी या श्रीदेवी? और क्या आपको लगता है कि श्रीदेवी को नेशनल अवार्ड उनके करियर में बहुत पहले मिल जाना चाहिए था? मैं हूं सुहानी। चैनल को सब्सक्राइब कीजिएगा। वीडियो को लाइक और शेयर जरूर कीजिएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *