नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश आजकल चर्चा में है। इसकी वजह सिर्फ यह नहीं कि यह फिल्म देश भर में माने जाने वाले मशहूर संत पर आधारित है बल्कि रिलीज के बाद से इस फिल्म का सफर भी बहुत असाधारण रहा है। लगभग ₹ करोड़ से कम के बजट में बनी इस फिल्म ने अब ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। जिससे इसका थिएटर का सफर काफी खास बन गया है। इस कहानी को और भी दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि फिल्म के प्रोड्यूसर 21 साल की अनुप्रिया नागर हैं। जिन्होंने कभी फिल्म बनाने का सोचा भी नहीं था। वह यूके में आराम से इकोनॉमिक्स की डिग्री कर रही थी। तभी कुछ ऐसा हुआ कि वह भारत लौट आई और आखिरकार फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी से मिली और उनके इस सफर की शुरुआत एक ऐसी [संगीत] जगह से हुई जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।
हनुमान अंश के चौथे हफ्ते में जबरदस्त पॉपुलैरिटी हासिल करने के साथ ही अनुप्रिया ने कई इंटरव्यू में अपने अनोखे सफर के बारे में बात की। की दूरदर्शन से बात करते हुए उन्होंने कहा महाराज जी पर फिल्म बनाना एक रिस्क था लेकिन सच कहूं तो मेरा मकसद कभी भी इसे बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के लिए बनाना नहीं था। मुझे खुशी है कि लोग इसे पसंद कर रहे हैं और देख रहे हैं। मैं अभी सिर्फ 21 साल की हूं। मुझे तो यह भी नहीं पता कि इतने सारे पैसों का मैं क्या करूंगी। अपने बैकग्राउंड के बारे में बताते हुए अनुप्रिया ने एबीपी लाइफ को कहा कि फिल्म बनाना कभी उनके प्लान का हिस्सा नहीं था।
उन्होंने यूके में अपनी पढ़ाई पूरी की थी और आर्ट इंडस्ट्री में नौकरी के लिए स्विट्जरलैंड जाने की तैयारी कर रही थी। उन्होंने कहा मैंने यूके से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन [संगीत] किया है। मैं वहां 3 साल तक रही। मैंने पिछले साल ही ग्रेजुएशन पूरा किया है। फिल्म बनाना या भारत लौटना कभी मेरे प्लान का हिस्सा नहीं था। मैं स्विट्जरलैंड जाने का प्लान बना रही थी। जहां मुझे आर्ट्स इंडस्ट्री में एक अच्छी नौकरी मिल गई थी। क्योंकि मैं जिंदगी भर आर्ट के माहौल में ही पली पड़ी हूं। उन्होंने कहा कॉलेज के आखिरी साल में मैं कई टेक कंपनियों के बारे में रिसर्च कर रही थी। मैं यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि Apple और मेटा के फाउंडर को यह आईडिया कहां से मिले। एक आर्टिकल पढ़ते हुए मुझे पता चला कि स्टीव जॉब्स पर नीम करोली बाबा का असर था। कैंची धाम में ही उन्हें दुनिया का पहला कलर कंप्यूटर बनाने का आईडिया आया था।
वो आर्टिकल पढ़कर मुझे हैरानी हुई कि एक भारतीय संत के बारे में मुझे किसी विदेशी से जानकारी क्यों मिल रही है। इसी बात ने मुझे इस बारे में और रिसर्च करने के लिए इंस्पायर किया। फिल्म के जबरदस्त बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस से इसकी युवा प्रोड्यूसर को भी अच्छा आर्थिक फायदा हुआ है। हालांकि अनुप्रिया ने कहा है कि मुनाफा कमाना कभी भी मेरा मकसद नहीं था। आपको बता दें यूनिवर्सिटी बहुत से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई करने वाली अनुप्रिया नागर [संगीत] सोशल मीडिया पर खुद को इकोनॉमिस्ट और आर्टिस्ट और फिल्म प्रोड्यूसर बताती हैं। कला में उनकी काफी दिलचस्पी है।
आर्ट्स में उनकी दिलचस्पी कम उम्र में ही शुरू हो गई थी। उन्होंने 12 साल की उम्र में ही अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाना शुरू कर दी थी और और बाद में यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स आर्ट, डांस और बिजनेस सोसाइटियों में जुड़ी रही। फिलहाल अगर आपने हनुमान अंश देखी है या प्लान बना रहे हैं तो हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।