21 साल की उम्र जब ज्यादातर युवा कॉलेज के प्रोजेक्ट्स, नौकरियों की चिंता और करियर के झंझटों में उलझे रहते हैं। उसी उम्र में एक लड़कीने इंडियन सिनेमा के सारे गणित बदल कर रख दिए। नाम है अनुप्रिया नागर।
एक इकोनॉमिक्स और बिजनेस स्कूल की स्टूडेंट जिसने बिना किसी गॉड फादर, बिना किसी बड़े बॉलीवुड स्टार और बिना किसी भारीभरकम बजट के रच दिया है एक ऐतिहासिक महज 2 करोड़ के बजट में बनी नीमकरली बाबा पर आधारित फिल्म हनुमान अंश को रिलीज के वक्त सिर्फ 25 शोज़ मिले थे। बॉलीवुड ने पूरी तरह दरकिनार कर दिया था।
लेकिन आज आज यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। आखिर 25 शोज़ से शुरू हुई यह फिल्म 100 करोड़ का साम्राज्य कैसे बन गई? आइए जानते हैं आज की इस स्पेशल वीडियो में। दोस्तों, अनुप्रिया नागर की यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 21 साल की अनुप्रिया का कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं है। वे एक साधारण छात्र की तरह बिजनेस स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी।
लेकिन उनके दिमाग में चल रहा था एक बड़ा विज़न। एक ऐसी कहानी को दुनिया तक पहुंचाना जो आस्था, अध्यात्म और भरोसे से जोड़ी हो। उन्होंने चुना नीमकरली बाबा का पावन जीवन व्रत। जब अनुप्रिया ने इस प्रोजेक्ट हनुमान अंश को तैयार किया तो सिनेमा की चकाचौंध से भरी दुनिया ने उन पर दांव लगाने से इंकार कर दिया। कोई बड़ा डिस्ट्रीब्यूटर आगे नहीं आया। ना ही कोई बड़ा पीआर कैंपेन चलाया गया।
लेकिन अनुप्रियाको अपनी कहानी और दर्शकों के भरोसे पर पूरा यकीन था। जब हनुमान अंश सिनेमाघरों में रिलीज हुई। देश भर में महज 25 सोच नसीब हुए। आप सोच सकते हैं जिस फिल्म को पूरे देश में सिर्फ 25 शोज़ मिले हो उसके फ्लॉप होने की घोषणा तो पहले ही दिन कर दीजाती है।
बॉलीवुड के बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउसेस ने इसे एक छोटी और बेअसर कोशिश मानकर खारिज कर दिया। लेकिन कहते हैं ना कि जब फिल्म का विषय और भावना सच्ची हो तो दर्शक खुद उसके डिस्ट्रीब्यूटर बन जाते हैं। सिनेमाघरों में जितने भी लोग पहुंचे वे फिल्म देखकर भावुक हो उठे और यहीं से शुरू हुआ असली माउथ पब्लिसिटी का जादू।
25 शोज़ से शुरू हुआ यह सफर देखते ही देखते एक आंधी में तब्दील हो गया। दर्शकों की भारी मांग के बाद थिएटर्स में शोज़ बढ़ाए गए। 25 शोज़ से बढ़कर यह आंकड़ा सीधे 655 शोज़ प्रतिदिन तक पहुंच गया।
आंकड़ों के मुताबिक एक ही दिन में फिल्म 16.25 करोड़ की रिकॉर्ड कमाई दर्ज कर रही थी। और अब ताजा आंकड़ों को सुनेंगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। 2 करोड़ के एक छोटे से बजट में बनी फिल्म ने भारत में 117 करोड़ ग्रॉस और 99 करोड़ नेट का बिजनेस कर लिया है। यानी अपनी लागत का 50 गुना से भी ज्यादा मुनाफा। बिना किसी बॉलीवुड सपोर्ट, बिना किसी विवाद और बिना किसी फुहड़ता के यह फिल्म अब ओवरसीज यानी विदेशों में भी झंडे गाड़ने के लिए तैयार है।
फिल्म जगत के विशेषज्ञ सफलता की तुलना। गुजराती सिनेमा की ब्लॉकबस्टर फिल्म लालो कृष्णा सदा सहायते से कर रहे हैं। जिसने महज 50 लाख के बजट में 122 करोड़ का वर्ल्ड वाइड बिजनेस किया था। अनुप्रिया नागर की हनुमान अंश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि करोड़ों का बजट और बड़े स्टार्स किसी फिल्म के सुपरहिट होने की गारंटी नहीं होते।
अगर आपकी कहानी में ईमानदारी है, जनता का साथ है तो 21 साल का कोई भी युवा इतिहास रच सकता है। अनुप्रिया नागर की यह सफलता सिर्फ एक फिल्म की जीत नहीं बल्कि देश के हर उस युवा के सपने की जीत है जो बिना किसी बैकग्राउंड के अपनी राह खुद बनाना चाहता है। नीमकरली बाबा के प्रति आस्था और कंटेंट के दम पर बनी यह फिल्म आने वाले कई सालों तक केस स्टडी के रूप में याद रखी जाएगी।