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ईशान किशन ने क्रिकेट के मैदान में तोड़ा 65 साल पुराना रिकॉर्ड, रचा इतिहास।

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क्रिकेट के मैदान पर एक ऐसा इतिहास रच दिया गया है जिसका किसी ने पिछले 65 सालों में सपना भी नहीं देखा था। सवाल यह है कि आखिर ज़ोन के कैप्टन और विकेटकीपर बैट्समैन ईशान किशन ने ऐसी कौन सी हिस्ट्री बना दी है जो 65 साल की दिलीप ट्रॉफी में किसी ने नहीं देखी थी। क्या ये सिर्फ एक नॉर्मल सेंचुरी थी या फिर डोमेस्टिक क्रिकेट का सबसे बड़ा मास्टर क्लास। आज की कहानी शुरू होती है दिलीप ट्रॉफी के उस हाई प्रेशर फाइनल से जहां एक तरफ खिताब की जंग थी तो दूसरी तरफ थकावट और क्रैं्स को मात देकर एक ऐसी मैराथॉन इनिंग्स खेली गई जिसे सालों तक याद रखा जाएगा। ईशान किशन ने मैदान पर कदम रखा जब टीम मुश्किल में थी। स्कोर था 147 पर तीन विकेट डाउन।

लेकिन उसके बाद जो तूफान आया उसने सभी पुराने रिकॉर्ड्स को तोड़ कर रख दिया। ईशान किशन ने कप्तान के रूप में दिलीप ट्रॉफी के फाइनल में डबल सेंचुरी लगाने का पहला रिकॉर्ड अपने नाम किया और वो वहां पर नहीं रुके। वो सीधा 250 के स्कोर के पार पहुंचे। सोचिए 301 गेंदों का सामना करना जिसमें 27 शानदार चौके और सात गगनचुंबी शामिल थे और स्ट्राइक रेट था 83 का। यह कोई आम पारी नहीं थी। यह कैप्टन की रिस्पांसिबल और एक्सप्लोसिव इनिंग्स थी। जब वह 250 पर रिटायर्ड हर्ट हुए तो वजह चोट नहीं बल्कि सेवियर क्रैंपिंग यानी थकावट और डिहाइड्रेशन का असर था।

हालांकि अच्छी खबर यह थी कि उन्हें इंजरी नहीं हुई। इसका मतलब अगर जरूरत पड़ी तो वह दोबारा मैदान पर लौट सकते हैं और शायद और भी बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं। लेकिन इस रिकॉर्ड की गहराई को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा। इससे पहले दिलीप ट्रॉफी फाइनल में सबसे बड़ा स्कोर रमन लांबा के नाम था। जिन्होंने 1987 में नॉर्थ ज़ोन के लिए वेस्ट ज़ोन के खिलाफ 300 रन बनाए थे। लेकिन वो टीम के कप्तान नहीं थे। वहीं अगर कप्तान के तौर पर सबसे बड़े स्कोर की बात करें तो अरुण लाल ने इस ज़ोन के लिए वेस्ट ज़ोन के खिलाफ 287 रंस बनाए थे। लेकिन वो फाइनल मैच नहीं बल्कि एक सेमीफाइनल मुकाबला था। इसलिए ईशान किशन का ये 250 कप्तान के रूप में फाइनल मैच के अंदर सबसे बड़ा और पहला ऐसा रिकॉर्ड बन गया है जो आज तक कोई इंडियन कैप्टन नहीं कर पाया था।

इस पूरी इनिंग्स की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि शान अकेले नहीं लड़े। जब टीम दबाव में थी तब उन्होंने अलग-अलग बैट्समैन के साथ बेहतरीन पार्टनरशिप बनाई। पहले शिखर मोहन के साथ 94 रन की साझेदारी की। फिर कुमार कुशाग्र के साथ एक जबरदस्त 230 रन की पार्टनरशिप की। एक ऐसी दोहरा अशतकीय पार्टनरशिप और उसके बाद अनुकूल रॉय के साथ भी 140 रन जोड़ दिए। यह पार्टनरशिप सी थी जिन्होंने ईज़ जोन को एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया और अपोजिशन की बोलिंग अटैक को पूरी तरह से धका दिया। एक वक्त था जब ईशान किशन के करियर को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे। उन्हें सिलेक्शन और डोमेस्टिक क्रिकेट में पार्टिसिपेशन को लेकर डिबेट हो रही थी। भैया भारतीय क्रिकेट से भी बाहर निकाल दिया था क्योंकि डोमेस्टिक के अंदर पार्टिसिपेशन नहीं थी।

लेकिन इस एक इनिंग्स ने उन सभी क्राइसिस को, उन क्रिटिक्स को अपने बल्ले से जवाब दिया है। एक कप्तान के तौर पर आगे आकर टीम की अगुवाई करना, मुश्किल वक्त में जिम्मेदारी लेना और एक हिस्टोरिक डबल प्लस स्कोर खड़ा करना यह दिखाता है कि ईशान किशन मेंटल टफनेस और स्किल के मामले में कहां स्टैंड करते हैं और क्यों उन्हें भारत का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माना जाता है।

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