क्या होता है जब एक मासूम सी नई एक्ट्रेस को बॉलीवुड का एक सुपरस्टार कैमरे के सामने बेरहमी से चूमता रहता है। और डायरेक्टर के कई बार कट बोलने के बाद भी नहीं रुकता। और आखिर क्यों अपने कटे हुए होठों के साथ रोती बिलखती उस एक्ट्रेस को पूरे ₹1 करोड़ देकर हमेशा के लिए अपना मुंह बंद रखने पर मजबूर कर दिया जाता है। दोस्तों, यह कोई मनगढ़ंत कहानी या फिल्म का डायलॉग नहीं है बल्कि बॉलीवुड के उस सुनहरे दौर का सबसे कड़वा खौफनाक सच है जिसने इंडस्ट्री का काला सच बेनकाब कर दिया था। [संगीत] साल था 1988 जब निर्देशक फिरोज़ खान अपनी फिल्म दयाबान की शूटिंग कर रहे थे। सेट पर एक तरफ थी 21 साल की बेहद खूबसूरत और नई नवेली हीरोइन माधुरी दीक्षित तो दूसरी तरफ थे 41 साल के सुपरस्टार विनोद खन्ना। फिल्म के मशहूर गाने आज फिर तुम पर प्यार आया है के लिए दोनों के बीच एक बेहद इंटिमेट सीन शूट किया जाना था। और फिर कैमरे के सामने जो हुआ उसने वहां मौजूद हर एक इंसान के होश पूरी तरह से उड़ा दिए। क्या हुआ? कैसे हुआ? सब कुछ बताएंगे आपको आज की इस वीडियो में। इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है एक ऐसे इंसान से [संगीत] जिसका पूरा वजूद ही बगावत के धागों से बुना गया था। 6 अक्टूबर 1946 को ब्रिटिश भारत के पेशावर में जन्मे विनोद खन्ना का परिवार बंटवारे के दर्द को अपने सीने में दबाए भारत आ गया था। मुंबई के सिडनहम कॉलेज में कॉमर्स की किताबें पढ़ते हुए इस नौजवान का दिल कभी भी अपने खानदानी बिजनेस में नहीं लगा। स्कूल के दिनों में जब उन्होंने पर्दे पर मुगल आजम और 16 साल जैसी फिल्में देखी,
तो सिनेमा के उस जादू ने उनके अंदर एक ऐसी आग जला दी जो उन्हें एक्टिंग की दुनिया की तरफ पागलों की तरह खींचती चली गई। लेकिन उस दौर में फिल्मों में जाना किसी अच्छे और शरीफ घर के लड़के के लिए कोई गर्व की बात बिल्कुल नहीं मानी जाती थी। जब विनोद ने अपने पिता किशनचंद खन्ना को फिल्मों में हीरो बनने का अपना यह सपना सुनाया, [संगीत] तो उनके रूढ़िवादी बिजनेसमैन पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बात सिर्फ डांट टपट या बहस तक नहीं रुकी बल्कि एक पिता ने अपने ही जवान बेटे के सिर पर लोडेड पिस्तौल तान दी और बहुत ही साफ शब्दों में चेतावनी दे डाली कि अगर उसने फिल्मों का रुख किया तो वो उसे वहीं गोली मार देंगे। सोचिए जिस इंसान के करियर की शुरुआत ही अपनी कनपटी पर रखी मौत की धमकी से हुई हो उसका मिजाज आगे चलकर कितना जिद्दी रहा होगा। आखिरकार घर में काफी हंगामे के बाद मां की ममता आड़े आई और किसी तरह बीच-बचाव करके विनोद को एक्टिंग में किस्मत आजमाने के लिए एक-द साल की मोहलत मिली और वह भी इस शर्त पर कि अगर वह फ्लॉप रहे तो उन्हें चुपचाप लौट कर फैमिली बिजनेस ही संभालना होगा। इसके बाद 1968 में सुनील दत्त साहब द्वारा निर्मित फिल्म मन का मीत से विनोद खन्ना ने बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखा। शुरुआत में मेरा गांव मेरा देश और अचानक जैसी फिल्मों में खूंखार विलेन और
सपोर्टिंग रोल्स निभाकर उन्होंने अपनी ऐसी धाक जमाई कि एक वक्त ऐसा भी आया जब बतौर एक्शन हीरो उनका स्टारडम उस सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को भी कांटे की टक्कर दे रहा था। सफलता उनके कदम चूम रही थी। बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स उनके बंगले के बाहर अपनी फिल्मों की स्क्रिप्ट लेकर लंबी लाइनों में खड़े रहते थे। लेकिन तभी 1982 में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी इंडस्ट्री में एक भयानक भूचाल ला दिया। जब उनका करियर पीक पर था तब विनोद खन्ना ने अपनी करोड़ों की दौलत, अपना स्टारडम और यहां तक कि अपने परिवार को भी पीछे छोड़कर एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको सुन्न कर दिया। वो सब कुछ त्याग कर अचानक ओशो की शरण में चले गए। अमेरिका के ओरेगन में बसे आश्रम में जाकर बॉलीवुड का यह सुपरस्टार अब स्वामी विनोद भारती बन चुका था। जिस इंसान के आगे पीछे दर्जनों मेकअप आर्टिस्ट और असिस्टेंट घूमते थे, वो इंसान वहां एक आम माली की तरह बगीचों में काम कर रहा था। झूठे बर्तन धो रहा था और यहां तक कि आश्रम के टॉयलेट्स भी साफ कर रहा था। 5 साल तक इस सन्यास की जिंदगी जीने के बाद अचानक उनके मन में फिर से पर्दे पर लौटने की हलचल मचने लगी। और 1987 में जब उन्होंने फिल्म इंसाफ से बॉलीवुड में अपना कमबैक किया तो मीडिया ने उन्हें एक नया नाम दिया। सेक्सीी सन्यासी। लेकिन सिनेमा के जानकारों के नजरिए से देखें तो यह वापसी इतनी भी आसान नहीं थी।
एक शांत और वैरागी माहौल से निकल कर अचानक सिनेमा की दुनिया में वापस लौटना विनोद खन्ना के दिमाग पर एक बहुत गहरा इंपैक्ट छोड़ रहा था। सन्यास के उन पांच सालों में उनके अंदर जो इंसानी इच्छाएं और एक स्थापित कलाकार वाला मेल ईगो दबा हुआ था। जब वो दोबारा कैमरा के सामने आया तो उसका सीधा असर उनकी को एक्ट्रेसेस को अपने जिस्म [संगीत] और अपनी रूह पर झेलना पड़ा। जिसने उनके शानदार स्टारडम पर हमेशा के लिए एक बहुत बड़ा और काला धब्बा लगा दिया। वापसी के इस तूफान का पहला शिकार बनी उस दौर की बेहद खूबसूरत अदाकारा डिंपल कपाड़िया। बात है साल 1987 की जब कमबैक के तुरंत बाद महेश भट्ट की फिल्म प्रेम धर्म की शूटिंग चल रही थी। जिसे 5 साल बाद 1992 में मार्ग के नाम से थिएटर्स में रिलीज किया गया था। इस फिल्म में विनोद खन्ना और डिंपल कपाड़िया पर एक बेहद इंटिमेट सीन फिल्माया जाना था। जिसमें दोनों के बीच एक हग और किसिंग सीक्वेंस शूट होना था। जैसे ही महेश भट्ट ने एक्शन कहा, स्क्रिप्ट के हिसाब से विनोद खन्ना ने डिंपल को अपनी बाहों में लिया और सीन की शुरुआत हुई। जैसे ही डायरेक्टर को उनका परफेक्ट शॉट मिल गया। महेश भट्ट ने अपनी भारी आवाज में कहा कट आमतौर पर कट सुनते ही एक्टर्स अपने-अपने स्पेस में चले जाते हैं। लेकिन उस दिन सेट पर कुछ बहुत ही अजीब घट रहा था। विनोद खन्ना ने डिंपल को बिल्कुल नहीं छोड़ा। महेश भट्ट के कट बोलने के बावजूद वो डिंपल को लगातार चूमते रहे। महेश भट्ट हैरान रह गए। उन्होंने एक बार नहीं बल्कि कई बार जोर-जोर से कट चिल्लाया, लेकिन विनोद खन्ना जैसे किसी और ही दुनिया में थे। वह पूरी तरह बहक चुके थे और उन्होंने एक्ट्रेस को अपनी गिरफ्त से आजाद नहीं किया। हालात इतने बेकाबू हो गए कि अंततः महेश भट्ट को खुद चेयर छोड़कर कैमरे के पीछे से भागते हुए आना पड़ा और उन्होंने अपने हाथों से विनोद खन्ना को पीछे की तरफ खींचकर डिंपल से अलग किया
। डिंपल कपाड़िया इस अचानक हुए हमले से इतने गहरे सदमे में चली गई थी कि वह वहां से भागी और सीधे अपने मेकअप रूम में जाकर खुद को अंदर से लॉक कर लिया। पूरे सेट पर एक भारी सन्नाटा पसर गया था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इस सिचुएशन को कैसे हैंडल किया जाए। तब महेश भट्ट ने मामले को रफादफा करने के लिए विनोद खन्ना को डिंपल के मेकअप रूम के बाहर भेजा और उनसे कहा कि वह अंदर जाकर डिंपल से माफी मांगे और यह झूठा बहाना बना दें कि उन्होंने बहुत ज्यादा शराब पी रखी थी जिसकी वजह से नशे में उन्हें कुछ होश ही नहीं रहा। बाद में जब इस विवाद ने तूल पकड़ा तो विनोद खन्ना ने अपनी सफाई में यह दलील दी कि वह इतने लंबे सालों के बाद कैमरे के सामने वापस आए थे। इसलिए वह सीन करते वक्त अपनी भावनाओं में बह गए थे। लेकिन क्या यह सच में सिर्फ इमोशंस का ओवरफ्लो था? या फिर यह बॉलीवुड के उन स्थापित मेल एक्टर्स का वो प्रिविलेज था [संगीत] जिसके नशे में वह कैमरे के सामने किसी भी सीमा को लांघ सकते थे और उन्हें अच्छी तरह पता था कि इसके लिए उन्हें कोई भी सजा नहीं भुगतनी पड़ेगी। डिंपल कपाड़िया के साथ हुए इस वाक्य को गुजरे अभी ठीक से एक साल भी नहीं बीता था कि 1988 में बॉलीवुड के इतिहास का एक और पन्ना हमेशा के लिए दागदार होने जा रहा था। फिरोज खान उस समय तमिल फिल्म नायकन का हिंदी रिमेक बना रहे थे जिसका नाम था दयाभान। इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए फिरोज खान ने अपने पुराने और जिगरी दोस्त विनोद खन्ना को साइन किया था। फिल्म में एक वेश्या का बहुत ही क्रिटिकल किरदार था। जिसके लिए एक 21 साल की बेहद खूबसूरत लेकिन इंडस्ट्री में बिल्कुल नई अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को कास्ट किया गया था। एक तरफ 41 साल के विनोद खन्ना थे जो सुपरस्टार थे और दूसरी तरफ 21 साल की माधुरी दीक्षित थी जो उस वक्त सिर्फ स्ट्रगल कर रही थी। स्क्रिप्ट के मुताबिक फिल्म के गाने आज फिर तुम पर प्यार आया है के दौरान इन दोनों के बीच एक बहुत ही इंटिमेट सीन शूट किया जाना था। उम्र में 20 साल का यह बड़ा फासला और सीन की बोल्ड प्रकृति यह दोनों बातें माधुरी दीक्षित को अंदर ही अंदर असहज कर रही थी और उन्होंने अपनी यह घबराहट डायरेक्टर फिरोज़ खान के सामने जाहिर भी की थी। लेकिन बॉक्स ऑफिस की चाहत में फिरोज़ खान ने इस सीन को किसी भी कीमत पर फिल्म में रखने का पक्का फैसला कर लिया था। यहां तक कि इंडस्ट्री में कई रिपोर्ट्स यह भी दावा करती हैं कि विनोद खन्ना इस खास इंटिमेट सीन को करने के लिए इतने ज्यादा उतावले थे कि उन्होंने इस फिल्म के लिए अपनी फीस में भी कटौती कर दी थी। फाइनली वह मनहूस दिन आ ही गया जब इस सीन की शूटिंग होनी थी। सेट पर लाइट्स ऑन हुई, कैमरा रोल हुआ और विनोद खन्ना एक बार फिर से अपना पूरा नियंत्रण खो बैठे। जैसे ही डायरेक्टर फिरोज खान ने कट बोला, विनोद खन्ना के कानों पर ज तक नहीं रेंगी। वह कट की आवाज को पूरी तरह अनसुना करते हुए माधुरी को लगातार चूमते रहे। इस बार उनका यह वैशीपन इस हद तक बढ़ गया कि उन्होंने उस 21 साल की लड़की के होठों को इतनी जोर से काट लिया कि वहां से लहू तक बहने लगा। जैसे ही माधुरी किसी तरह उनकी उस दरिंदगी भरी पकड़ से आजाद हुई, वो वहां एक पल भी नहीं रुकी और बुरी तरह रोती हुई सीधे अपनी वैनिटी वैन की तरफ भागी। सेट पर उनके आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वो बार-बार खुद को साफ कर रही थी।
लेकिन उनके होठों का लहू उनके दिमाग पर एक गहरा घाव छोड़ चुका था। बाद में हंगामा होने पर विनोद खन्ना ने इस हरकत के लिए माफी जरूर मांगी। लेकिन इस घटना ने माधुरी दीक्षित के मन में एक ऐसा गहरा घाव छोड़ दिया जिसे कोई भी माफी कभी भर नहीं सकती थी। लेकिन इस पूरी घटना का दूसरा पहलू तो इसके बाद शुरू हुआ। जब फिल्म रिलीज होने वाली थी तब माधुरी दीक्षित को इस बात का गहरा एहसास हुआ कि यह एक सीन उनके पूरे करियर और उनकी छवि को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकता है। इसलिए उन्होंने डायरेक्टर फिरोज़ खान के सामने गुहार लगाई और इस सीन को फिल्म से पूरी तरह हटाने की विनती की। लेकिन जब फिरोज़ खान के सिर से बॉक्स ऑफिस का भूत नहीं उतरा था। उन्होंने माधुरी की एक नहीं मानी तो माधुरी ने हार ना मानते हुए उन्हें एक लीगल नोटिस भेज दिया। जिसमें साफ-साफ शब्दों में इस सीन को फिल्म से तुरंत हटाने की मांग थी। अब यहां से शुरू होता है बॉलीवुड का वो गंदा खेल जहां पावर और पैसों के दम पर सच को दबाया जाता है। फिरोज खान अच्छी तरह से जानते थे कि इस तरह के बोल्ड सीन दर्शकों की भीड़ को सिनेमाघरों तक खींच लाने का सबसे बड़ा हथियार होते हैं। उन्होंने उस सीन को हटाने के बजाय एक ऐसा पैतरा चला जिसने पूरी व्यवस्था को ही शर्मसार कर दिया। उन्होंने माधुरी दीक्षित की आवाज को हमेशा के लिए चुप कराने के लिए ₹1 करोड़ की एक भारीभरकम राशि का अतिरिक्त भुगतान किया। जरा सोचिए 80 के दशक में ₹1 करोड़ यह ₹1 करोड़ एक सीन की कीमत नहीं थी बल्कि यह एक्ट्रेस की सहमति को सरेआम खरीदने का एक सीधा सौदा था।
जब फिल्म रिलीज हुई तो जैसा फिरोज़ खान ने सोचा था बिल्कुल वैसा ही हुआ और दयावान बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ी सफल फिल्म साबित हुई। अब एक बहुत बड़ा सवाल उठता है क्या सच में दयावान और प्रेम धर्म के सेट्स पर विनोद खन्ना सिर्फ अपनी भावनाओं में बह गए थे या यह सब सोची समझी हरकत थी? इस घटना के कुछ समय बाद विनोद खन्ना ने एक समाचार पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मैं कोई संत नहीं हूं जहां तक महिलाओं का सवाल है। मुझे भी शारीरिक संबंधों की उतनी ही जरूरत है जितनी किसी आम व्यक्ति को होती है। महिलाओं के बिना हम यहां नहीं होते। तो मेरे महिलाओं के साथ होने पर किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए? यह बयान किसी ऐसे व्यक्ति का बिल्कुल नहीं हो सकता जो अनजाने में शूटिंग करते हुए भावनाओं में बह गया हो। यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि उनकी हरकतें नियंत्रण खोने का परिणाम कम और अपनी इच्छाओं का परिणाम अधिक थी। दशकों बाद रेडियो नशा को दिए गए एक इंटरव्यू में माधुरी ने भी इस घटना पर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय वे बहुत नई थी और उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वो सीन इतना भयानक रूप ले लेगा। उन्होंने कहा, “मुझे इस घटना के बाद बहुत ज्यादा शर्मिंदगीगी महसूस हुई थी। मैंने उसी दिन यह तय कर लिया था कि यह कुछ ऐसा है जो मुझे भविष्य में कभी नहीं करना है। आफ्टर दैट आई वास वैरी एम्बरेस्ड एंड आई डिसाइडेड कि दिस इज समथिंग दैट्स दैट्स नॉट नॉट टू बी डन। यू नो। माधुरी दीक्षित ने अपने संकल्पों निभाया और अपने पूरे करियर में फिर कभी भी पर्दे पर इस तरह का सीन नहीं किया। सबसे जरूरी बात यह रही कि माधुरी ने दयाबान के बाद विनोद खन्ना के साथ फिर कभी काम नहीं किया। अंततः अब आपको क्या लगता है? क्या आज के दौर में कोई एक्टर ऐसी हरकत करके बच सकता है या फिर इंडस्ट्री अब पूरी तरह बदल चुकी है? अपनी राय कमेंट में जरूर दें। [संगीत]