इतनी निठल्ली है, इतनी निखिष्ट है। क्या बोलूं मैं वहां पे मीडिया के सामने? सोचिए जनता विकास के कामों का इंतजार कर रही है। करोड़ों रुपए का फंड अवेलेबल हो लेकिन जमीन पर काम की रफ्तार इतनी स्लो हो कि सांसद को खुद अधिकारियों से हिसाब मांगना पड़े। मंडी में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है और इस बार कंगना का गुस्सा कैमरे के सामने साफ नजर आया है। दरअसल मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनू दिशा कमेटी की मीटिंग में अधिकारियों पे बुरी तरह से भड़क गई हैं। मुद्दा था एमपी फंड से जुड़े डेवलपमेंट के काम का।
कंगना के मुताबिक करीब ₹11 करोड़ अवेलेबल होने के बावजूद जो रकम है वह बहुत कम खर्च हुई है। रिपोर्ट्स में मंडी में करीब 50 से 60 लाख का खर्च सामने होने की बात आई है। कंगना ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें हर मीटिंग में सिर्फ यही बोला जाता है कि काम हो रहा है। लेकिन ग्राउंड पर काम दिखाई नहीं देता। उन्होंने पेंडिंग प्रोजेक्ट को जल्द ही पूरा करने के लिए उस फंड का इस्तेमाल करने को कहा और इसके साथ ही कहा कि वह रिपोर्ट भी सबमिट करें। लेकिन अब इस पूरे मामले में एक दूसरा एंगल भी गॉसिप का हिस्सा बना है। दरअसल सोशल मीडिया पर कुछ लोग कंगना के इस अग्रेसिव अंदाज को सही ठहरा रहे हैं तो कुछ लोग उन्हें क्रिटिसाइज कर रहे हैं और सवाल कर रहे हैं कि क्या वो जानबूझकर इस तरह का माहौल बना रहे हैं ताकि उनकी पॉलिटिकल इमेज और ज्यादा मजबूत दिखे। यानी सवाल सिर्फ एमपी फंड का नहीं बल्कि कंगना के पॉलिटिकल स्टाइल पर भी बन गया है। अब देखना यह है कि इस गुस्से के बाद मंडी में डेवलपमेंट वर्क में सच में तेजी आती है या यह पूरा मामला कंट्रोवर्सी और ट्रोलिंग तक ही सीमित रहता है। आप भी उस वीडियो को देखिए जो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें कंगना अधिकारियों पे भड़कती दिखाई दे रही हैं। 11 करोड़ दिए हैं और काम एक भी नहीं हुआ। इतनी निठल्ली है, इतनी निखिष्ट है। क्या बोलूं मैं वहां पर मीडिया के सामने कि यहां पे ये सिर्फ तनख्वाह खाने के लिए आते हैं।
हमारे प्रदेश के लोगों के बारे में क्या बोलूं मैं? उनके वर्क एथिक्स के बारे में क्या बोलूं? के महा लेजी महा फूहड किस्म के लोग हैं। जिन्होंने कुर्सियां ली हुई है। इज दैट व्हाट आई शुड से टू द नेशनल मीडिया अबाउट माय ओ अबाउट माय ओनसी एंड अबाउट माय ओन माउंटेन पीपल। जब तक मुझे मैंने मिनिस्ट्री से कितना हम लोगों ने कहा मार्च अप्रैल में मार्च अप्रैल में जब ये सब परफॉर्मेंस आई थी बिकॉज़ मैंने ऑब्वियसली एक संसद का काम होता है पैसे देना जब तक मार्च अप्रैल तक 11 करोड़ में से सिर्फ मंडी में पूरे पूरे क्षेत्र में एक करोड़ भी यूज़ नहीं हुआ था दो सालों में जिसमें से मंडी में 50 से 60 लाख भी यूज़ नहीं हुआ था। 5 करोड़ में से 50 से 60 लाख भी यूज़ नहीं हुआ था। मिनिस्ट्री से मुझे इतने सारे लेटर्स भेजने पड़े। क्या उनको कोई और काम नहीं है क्या? हर दिन मेरे पीए हर दिन मेरे हम लोग मिनिस्ट्री के ऑफिस में बैठते रहते थे। अभी भी मंडी क्षेत्र की सिर्फ मंडी 5 करोड़ का सिर्फ काम है। इतने सारे आप लोग हो मुझे बोले ना मुझे तुम्हारा एक ऑफिस मिले ना एक एक दिन के लिए। मैं एक-एक दिन में ये काम करके दिखाऊंगी।
व्हाट काइंड ऑफ़ पीपल आर यू ऑल? तुम लोगों को सेंटर से लेटर भेजने पड़ते हैं डराने के लिए कि काम करो काम करो और इतना ज्यादा नेगेटिव प्रचार हो रहा है। इतने ज्यादा लोग रील्स बना रहे हैं। उसके बावजूद भी तुम लोग अपने ऑफिस में बैठ के क्या हंसते हो क्या? हा बढ़िया हीरोइन। अगर मैं तुम लोगों की पोल खोलूं तो वो हाउ वुड इट लुक? हाउ वुड इट रिफ्लेक्ट ऑन आस् पीपल? हाउ वुड इट रिफ्लेक्ट ऑन अस? अगर मैं बता दूं आप लोगों का कल्चर टू द होल नेशन। लेकिन जब मेरी जग हंसाई हो रही है देन व्हाट यू गाइस डू? मेरे ऑफिस की तो तुम लोग बात ही नहीं सुनते हो। इन सबके नाम लिखो। ठीक है? एंड मेक जिस चीज की जिस चीज की जो जो ये क्या है ना कि जब इतनों का काम हो जाता है ना तो किसी का भी काम नहीं रहता है। हर एक पर्सन की जो है डिप उसके जो है एरिया से कितने लैगिंग बिहाइंड है। अभी तो 50% ही मनी यूज़ हुआ है। तो नेचुरली ऑन एन एवरेज इन सबका 50-50% काम जो दो साल का है।
इन लोगों ने 40% काम कंप्लीट किया है ये ये कैरेक्टर्स ने और उसमें मुझे नाम क्या आया है? मुझे आया है कि इसको बोल दिया पैसा वापस करने के लिए। इसको हमने ये बोल दिया नो नो आई एम नॉट गना लिसन टू दैट ये जो तुम लोग मुझे अभी सुनाने वाले हो ना आई एम नॉट हियर फॉर दैट क्या वो पैसा अकाउंट में आया है देन ओनली वर्क इज डन देन ओनली इट कैन बी कंसीडर्ड टू बी डन ये जो फालतू के जुमले है ना मुझे मत देना ये मुझे हर दिशा कमेट में जुमले मिल रहे हैं यहां के 5 करोड़ में से जो है आधा अमाउंट यूज़ नहीं हुआ है और उसमें से आधे लोग कुछ ऐसे हैं जो पैसा लेके चले गए हैं और उनको कुछ फिक्र नहीं है। उनके पास कोई परमिशन नहीं है और पैसा रिटर्न नहीं कर रहे हैं। यू गाइस शुड पुट द प्रेशर एंड टेक द पब्लिक मनी बैक फ्रॉम देम। इज इट माय स्कोप ऑफ़ वर्क? शर्म नहीं आती क्या आप लोगों को? इज इट माय स्कोप ऑफ़ वर्क? अभी भी सिर्फ जो पैसा दिया है जबकि अगले साल की सांसद नीति मेरी अनटच पड़ी हुई है।