यहां तीन तल्ले का बिल्डिंग था। वो स्कूल था। उसका सामने एक मंदिर था और और ये पूरा बाजार था। 1600 बच्चे 1600 बच्चे। हां। हां। स्कूल का तो नामोनिशान नहीं है। उधर। तिब्बत नेपाल बॉर्डर से आए फ्लैश फ्लड के जख्म धीरे-धीरे गहराई के साथ नेपाल के सामने आ रहे हैं। इस सवाई ने जहां 675 से ज्यादा लोगों के सांसों को हमेशा के लिए बंद कर दिया तो वहीं दूसरी तरफ एक मां की गोद उजड़ने से बच गई और शुक्रवार को एक कॉल से वह अपने बेटे से आखिरकार मिल गई।
मां बेटी की इस भावुक मुलाकात ने सभी को हैरान कर दिया। दरअसल 26 अगस्त को जब अचानक आई इस बाढ़ की चपेट में 8 वर्षीय जोयल घाले आ गया था। इस सवाही से अनजान और बेखबर जोयल घाले उस दिन पढ़ने के लिए स्कूल गया था। तभी फ्लैश फ्लड आया तो अचानक से घना अंधेरा छा गया और शांत से खड़ा स्कूल की बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह बह गई। यहां जो है यहां तीन तल्ले का बिल्डिंग था। वो स्कूल था। उसका सामने एक मंदिर था। और और ये पूरा बाजार था। बिल्कुल समतल जहां है वहां स्कूल। हां।
ये जो अभी पानी इधर से बह रहा है ना ये बीच में जो खाली जगह है ना वहां पे तीन मंजिल का वो स्कूल था कितने बच्चे उसमें 1600 1600 बच्चे 1600 बच्चे हां हां और उसी दिन जिस जिस दिन ये हुआ उस दिन यहां से उस सब बच्चे को निकाल के वो टीचर ने सबको यहां से भगा के सबको बचाया अभी जो यहां दिख रहा है नामो निशान नहीं है हां स्कूल का तो नामो निशान नहीं है अभी अभी तो पूरा वो लेके गया और मंदिर भी था वहां मंदिर भी था राम मंदिर था राम मंदिर लेकिन जमीन को देख के लगता है शायद यहां कभी कुछ रहा ना हो बिल्कुल समतल कर दिया गया है नहीं उधर तो दिखाई देता है ना उधर बिल्डिंग्स जो है एकदम वो नीचे का थोड़ा-थोड़ा दिखता है
लेकिन इस तरफ तो कुछ नहीं दिखता है यहां पूरा मंदिर था ये पूरा बाजार था बहुत आदमी यहां से मरे हुए हैं कि यहां का पूरा कितना आदमी का क्या हुआ अभी तक कोई जानकारी नहीं लेकिन ज्यादा हुआ है। जो हुआ ज्यादा हां जी। जैसे इस बात की जानकारी उनकी मां को मिली तो उनका रो-रो कर बुरा हाल हो गया। बेटे जॉयल घाले की जानकारी नहीं मिलने से वह बेचैन हो गई। जानकारी जुटाने की कोशिश भी की तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी। मैं बार-बार सोचती रहती हूं कि आखिर मैं वहां कब पहुंचूंगी। अपने बेटे को अपनी बाहों में कब लूंगी और उसे कब देख पाऊंगी। बेटी के लापता होने के बाद मां को डर था कि वो और उसका भाई स्कूल में बाढ़ की चपेट में आ गए होंगे। अपने बेटों की तलाश में वह उनके स्कूल पहुंची तो वहां का मंजर देखकर वह दंग रह गई। स्कूल की इमारत पूरी तरह से तबाह हो चुकी थी
और इलाका पहचान में भी नहीं आ रहा था। स्कूल उनके घर से महज 15 से 20 मिनट की ड्राइव पर था। उन्होंने कई दिनों तक अपने बच्चों की तलाश की लेकिन उनके ना मिलने के कारण उनकी उम्मीदें टूटने लगी। तभी एक पत्रकार से उनकी बात हुई। फोन पर ही पत्रकार ने घाले के बारे में सारी जानकारी भी दी। यह जानकारी मिलते ही मट्टी माया के मन में उम्मीद की एक किरण जगी। शुक्रवार को उन्होंने फोन पर अपने बेटे से बात की और फिर उसे लेने काठमांडू के अस्पताल पहुंच गई। जहां घाले का उपचार चल रहा था। आखिरकार शुक्रवार का दिन था जब घाले की मां उससे मिल गई। मां की दुआओं के आगे और जोयल घाले सुरक्षित अपनी मां से मिल गया। अब बात कर लेते हैं जोयल घाले ने कैसे अपनी जान बचाई और कैसा था उस दिन का मंजर। दरअसल खबरों की मानें तो जॉयल नेपाल के उत्तरी रासुवा जिले में आई भीषण बाढ़ की चपेट में आया था। बुधवार सुबह जब वो अपने छोटे भाई के साथ स्कूल गया उस समय उसकी मां तमांग घर पर ही थी। कुछ ही देर बाद इलाके में अचानक तेज आवाज सुनाई दी। तमांग ने बताया कि उन्हें आवाज भूकंप जैसी लगी। जब उन्होंने बाहर देखा तो घर और स्कूल के आसपास का पूरा इलाका बाढ़ के पानी, पत्थरों और कीचड़ में बदल चुका था। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि स्कूल की इमारत भी इसकी चपेट में आकर तबाह हो गई। तवांग ने बताया कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था
स्कूल कहां है और बाजार कहां है। हर तरफ सिर्फ पानी पत्थर और मलबा दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि उनके दोनों बच्चे भी बाढ़ में बह गए होंगे। मैंने पूरी तरह उम्मीद खो दी थी। मेरे बच्चे मेरे पास नहीं थे। मैं गहरे दुख से गुजर रही थी और खुद को संभाल भी नहीं पा रही थी। मुझे लगने लगा था कि मेरे जिंदा रहने का भी कोई मतलब है या नहीं। इधर जोयल ने स्कूल से निकलकर अपनी जान बचाने की कोशिश की। उनके मुताबिक बाढ़ आने के समय वह क्लास में था। अचानक चारों तरफ अंधेरा छा गया। वो एक अन्य के साथ स्कूल से बाहर निकला। जंगल की ओर भागा और बाढ़ के पानी से बचने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गया। घायल होने के बावजूद वह पेड़ पर काफी देर सुरक्षित रहा। जब उससे पूछा गया क्या उसे डर लगा था? तो उसने सिर हिलाकर कहा नहीं। बाद में जोयल को पड़ोसी नवाकोट जिले के चक्रव अस्पताल ले जाया गया। गुरुवार सुबह उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिसकर्मी ने उसे अस्पताल चलने के लिए मनाने के दौरान ₹10 ₹1 के दो नोट दिए थे। जिन्हें वह घटना के बाद भी अपने पास पकड़े हुए थे। इसी प्रकार की वीडियोस देखने के लिए हमें सब्सक्राइब करना ना भूलें और एस्ट्रोलॉजी से जुड़ी लेटेस्ट जानकारी के लिए डाउनलोड करें माय ज्योतिष ऐप। को