एक्ट्रेस कंगना रानौत और आशुतोष राणा के बीच बयानबाजी अब चर्चा में है। कंगना के के बाद पहुंचे आशुतोष राणा ने एक बार फिर से टीका टिप्पणी और भाषा की मर्यादा पर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि टिप्पणी करना व्यक्ति पर निर्भर करता है। वह सामने वाले को किस तरह प्रस्तुत करता है। आशुतोष राणा ने पत्रकारिता और पिचकारिता के अंतर को भी अपने अंदाज में समझाया। वहीं टीका और टिप्पणी को लेकर उन्होंने गीता, रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि इन ग्रंथों पर भी टीका और टिप्पणी होती रही है। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हम अपनी बात किस भावना और किस तरीके से रखते हैं। बता दें कि कंगना रानौत ने आशुतोष राणा समेत उन फिल्मी सितारों पर निशाना साधा जिन्होंने उनके बयानों की आलोचना की थी।
कोई व्यक्ति किसी अन्य को मान लीजिए अपशब्द बोलता है तो हमें लगता है अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। और देखिए उसकी बड़ी सकारात्मक प्रतिक्रिया देनी चाहिए। लेकिन जब वही व्यक्ति आपके बारे में अपशब्द बोलने लगे तो क्या उस समय भी हमारा यह विचार रहता है या हमारा व्यवहार रहता है कि नहीं अपशब्द नहीं बोलने चाहिए और हमको इस तरीके से अपने हिसाब से इसका व्यवहार करना चाहिए। तो मेरा अपना यह मानना है कि यह बिल्कुल व्यक्तिगत चीज के ऊपर निर्भर है।