एक चेहरा जो कभी ग्लैमर की दुनिया की सबसे [संगीत] चमकती रोशनी में खड़ा था। जिसके पीछे बड़े-बड़े ब्रांड्स, फिल्में और शोहरत भाग रही थी। लेकिन फिर एक दिन उसी चेहरे ने आईने से नजरें फेर ली। बालों का त्याग किया, नाम बदला और दुनिया की भीड़ छोड़कर हिमालय की खामोशी में खो गई। सवाल बस इतना है कि आखिर ऐसा क्या देखा था उसने उस चमकती दुनिया के पीछे? देखिए बात है साल 1990 के दौर की। उस समय इंडिया के प्राइम मिनिस्टर नरसिम्हा राव और फाइनेंस मिनिस्टर मनमोहन सिंह ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया। उन्होंने इंडियन मार्केट को पूरी दुनिया के लिए खोल दिया। अब जरा सोचिए कि इसके बाद क्या हुआ होगा। इंडिया बाहर की हर तरह की कंपनी के लिए बहुत बड़ी मार्केट साबित हुआ। दुनिया की हर एक कंपनी की नजर अब इंडिया पर थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें बहुत सारी फीमेल्स के जो मेकअप से जुड़ी हुई कंपनियां वो भी थी जो अब इंडिया को स्पेशली टारगेट करने लगी थी। यहीं से एक नया बदलाव आता है। यही वो समय था जब इंडिया के लोगों और यहां के दर्शकों को पहली बार मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स ब्यूटी कॉन्टेस्ट के बारे में पता चलता है। अब जरा समझिए इसके अगले कुछ सालों में क्या होता है? इंडिया की दो लड़कियां ऐश्वर्या राय और सुष्मिता सेन मिस वर्ल्ड और मिस यूनिवर्स जीतकर पूरी दुनिया में इंडिया का नाम चमका देती हैं। लेकिन कहानी में एक दिलचस्प मोड़ आता है।
इन दोनों के बिल्कुल साथ एक तीसरी लड़की भी थी जो इन्हें बराबर की टक्कर दे रही थी। उस समय पूरी दुनिया की मल्टीीनेशनल मेकअप कंपनियां इंडिया की तीन टॉप मॉडल्स को खासतौर पर टारगेट कर रही थी। उनमें से दो तो ऐश्वर्या राय और सुष्मिता सेन थी। लेकिन सोचिए यह तीसरी मॉडल कौन थी? इसी लड़की का नाम था बरखा मददान। बरखा मददान पंजाब की रहने वाली थी। 1970 में उनका जन्म पंजाब में हुआ और 1990 आते-आते वो एक टॉप मॉडल मानी जाने लगी। जिस साल ऐश्वर्या राय ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीता था ना, उसी साल पंजाब में जन्मी बरखा मददान ने मिस टूरिज्म का अवार्ड जीता। और इसी साल मिस इंडिया मुकाबले में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया था। बात यहीं पर खत्म नहीं होती। अगले ही साल मलेशिया में ऐसा ही एक बहुत बड़ा इवेंट होता है और उसमें भी बरखा मददान तीसरे स्थान पर रहती हैं। अब पूरी दुनिया के प्रोडक्ट्स बेचने वाली कंपनियां इंडिया की इन तीन लड़कियों के पीछे भाग रही थी। वो हर हाल में इन्हें हायर करने की कोशिश कर रही थी ताकि अपने प्रोडक्ट्स को इंडिया के ग्राहकों तक पहुंचा सकें। ऐश्वर्या राय, सुष्मिता सेन और बरखा मदान। इंडिया की ये तीनों लड़कियां अचानक पूरे देश के टीवी पर बहुत पॉपुलर हो चुकी थी। इन्हें ढेरों टीवी एडवर्टाइजमेंट्स मिलने लगी थी।
अब बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री भी इन मल्टीीनेशनल कंपनियों से कहां पीछे रहने वाली थी। वो भी इन तीनों लड़कियों के खूबसूरत चेहरों की बदौलत अपनी सफलता को कैश करना चाहती थी। और इसी वजह से इन तीनों लड़कियों को अगले कुछ ही सालों में बॉलीवुड की तरफ से अलग-अलग फिल्मों में ऑफर्स आने लगे। देखिए ऐश्वर्या राय और सुष्मिता सेन के बारे में तो आपको काफी चीजें पता होंगी लेकिन आज का अपना यह वीडियो खासतौर पर पंजाब की जन्मी बरखा मददान के ऊपर है। अब हम बात करने जा रहे हैं बरखा मददान को मिली उस पहली फिल्म की। यह वो फिल्म थी जिसने ना सिर्फ बरखा मददान को बल्कि बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार को भी फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया। एक ऐसा नाम अक्षय कुमार के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया और वो नाम था खिलाड़ी। जी हां, यह फिल्म थी खिलाड़ियों का खिलाड़ी। इस फिल्म में अक्षय कुमार, रेखा, रवीना टंडन और बरखा मदान ने काम किया था। लेकिन दो लोगों के लिए यह फिल्म बहुत स्पेशल साबित हुई। पहले तो अक्षय कुमार क्योंकि हमेशा के लिए यह फिल्म उनके नाम के साथ जुड़ चुकी थी और इसी फिल्म ने उन्हें सुपरस्टार का दर्जा दिलाया और दूसरी थी बरखा मददान। सोचिए बॉलीवुड में अपने बिल्कुल स्टार्टिंग करियर में ही अगर किसी को इस तरह की सुपरहिट फिल्म मिल जाती है तो शायद यह फिल्म जगत में काम करने वाले हर लड़के या लड़की का सपना होगा। इसके बाद आती है रामगोपाल वर्मा की एक और फिल्म। फिल्म का नाम है भूत। आप तो जानते ही हैं कि बॉलीवुड में भूत प्रेतों के टॉपिक पर बहुत ज्यादा फिल्म नहीं बनती और अगर बनती भी है तो उन्हें ना बहुत ज्यादा सफलता मिलती है और ना ही किसी क्रिटिक्स का प्यार। लेकिन रामगोपाल वर्मा की भूत इन सब चीजों में एक मील का पत्थर साबित होती है और आपको जानकर हैरानी होगी कि इस फिल्म में बरखा मददान ने खुद उसी भूत का किरदार निभाया था जिससे थिएटर में लोग डर-डर कर बाहर की तरफ भागते थे। आज भी बरखा मददान का निभाया हुआ यह भूत का रोल जो इस फिल्म में मनजीत नाम का कैरेक्टर था हमेशा के लिए याद रखा जा सकता है। इसी साल बॉलीवुड में समय नाम की एक फिल्म बनाई जाती है। जिसमें इंडिया की एक समय की दो टॉप मॉडल्स सुष्मिता सेन और बरखा मददान को एक साथ लाया जाता है। लेकिन बरखा मददान सिर्फ बड़े पर्दे तक ही सीमित नहीं थी। इसके अलावा छोटे पर्दे पर भी उन्हें जो जो रोल्स मिलते रहे वह लगातार करती रही। लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे की असली वजह क्या रही होगी? असल में इसके पीछे कारण था कि बड़े पर्दे के पीछे की एक काली और स्याह दुनिया जिससे वह परेशान हो चुकी थी।
बड़े पर्दे पर दिखने वाले हंसते हुए चेहरे और चमकती रोशनियों के पीछे जो असल जिंदगी थी। देर रात तक चलने वाली पार्टियां, वहां होने वाला नशा और सिर्फ नाम के ही रिश्ते। धीरे-धीरे जैसे-जैसे बरखा मददान इस इंडस्ट्री में आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे उन्हें उस इंडस्ट्री और यहां के लोगों की असलियत का पता चलना शुरू हो गया। और यही वजह थी कि बरखा मददान ने धीरे-धीरे बॉलीवुड से अपना रुख छोटे पर्दे की तरफ कर लिया था। न्याय 1857 क्रांति में बरखा मददान ने रानी लक्ष्मीबाई का रोल निभाया था। और इसके अलावा सात फेरे जैसे बहुत सारे मशहूर सीरियल्स भी किए थे। लेकिन जब बरखा मददान को यह टीवी की दुनिया भी उतनी ज्यादा नहीं जमी तो फाइनल उन्होंने अपना एक प्रोडक्शन हाउस खोला। वो कनाडा गई और वहां सुरखाब नाम की एक फिल्म बनाई। यह फिल्म खासतौर पर उन इंडियन माइग्रेंट्स के ऊपर बनाई गई थी जो पंजाब से या पूरे इंडिया से कनाडा जाते हैं और अलग-अलग तरह के स्ट्रगल्स का सामना करते हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे बरखा मददान का इस पूरी दुनिया से मोह टूटना शुरू हो चुका था। शायद [संगीत] इन सब चीजों से बहुत पहले ही जब वह टीनएज में थी। उसी समय एक तरफ भले ही वह टॉप मॉडल थी लेकिन दूसरी तरफ उनका ध्यान आध्यात्मिकता की तरफ ज्यादा बढ़ने लगा था। धीरे-धीरे उनके दिल में एक सवाल हमेशा उठने लगता था। वो सवाल था कि क्या सिर्फ यही जिंदगी है? क्या इस जिंदगी के अलावा कोई और जिंदगी नहीं है? क्या सिर्फ देर रात तक की पार्टियां, उन पार्टियों में होता नशा या फिर अलग-अलग लोगों के साथ बने हुए नाजायज संबंध। क्या सिर्फ यही चीजें इंसान को खुश रखती हैं? क्या इससे ऊपर उठकर कोई और सच्ची खुशी नहीं है दुनिया में? फाइनली बरखा मदान अपने इन सभी सवालों का उत्तर खोजने के लिए एक दिन सब कुछ छोड़कर अपने बहुत ही स्टेबल प्रोफेशन को छोड़कर धर्मशाला चली जाती हैं। [संगीत] धर्मशाला जिसे बौद्ध धर्म का केंद्र माना जाता है। वहां जाकर सबसे पहले वह कई महीनों तक रहती हैं। आध्यात्मिकता की जो तलाश करती हैं, स्पिरिचुअलिटी को ढूंढने की कोशिश करती हैं और बहुत सारे धर्मों से रिलेटेड जो बुक्स हैं वो पढ़ती हैं। और फिर फाइनली एक दिन उनकी मुलाकात बौद्ध धर्म के सबसे ऊंचे गुरु माने जाने वाले व्यक्ति दलाई लामा से होती है। दलाई लामा के बारे में किताबें तो बरखा मददान बचपन से पढ़ती आ रही थी। शुरू से ही उन्हें बौद्ध धर्म और उनकी शिक्षाओं में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट था और फाइनली कुछ महीनों के इस सफर के बाद बरखा मददान जो एक समय को बहुत खूबसूरत महिला और टॉप मॉडल हुआ करती थी वो अपना सिर मुड़वा लेती हैं।
जी हां, वो अपने बालों का हमेशा के लिए त्याग कर देती हैं। जिन्हें किसी भी औरत की सुंदरता का सबसे पहला साइन माना जाता है। इसके बाद उनका अगला त्याग होता है नॉर्मल इंसानों के कपड़ों का। इन सभी कपड़ों की जगह बरखा मददान बौद्ध भिक्षुओं वाला मेरून रंग का चोला पहन लेती हैं और इसके बाद वह हिमालय की ऊंची चोटियों की तरफ रुख करती हैं। इन बहुत दूरदराज के इलाकों में जो आम लोगों की दुनिया से बहुत ज्यादा दूर थे। वहां बने बौद्ध शिविरों में बरखा मैदान रहती हैं। वो घंटों तक मंत्र जाप करती हैं और दूसरी फिजिकल एक्सरसाइजेस करती हैं। सिर्फ सच्ची खुशी के लिए जो उन्हें कभी मुंबई में मिल ही नहीं सकी। तब से लेकर आज तक बरखा मददान का जीवन बिल्कुल इसी तरह गुजर रहा है। इस पूरे समय के दौरान वह दलाई लामा से कई बार मिल चुकी हैं। वो बहुत सारे टीवी इंटरव्यूज दे चुकी हैं। जिनमें वह आने वाली नस्लों को और यहां तक कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों को जिंदगी के असली मायने और [संगीत] खुशी का राज समझाती हैं। क्योंकि बरखा मददान के मुताबिक बॉलीवुड में ज्यादातर लोग अकेलेपन और डिप्रेशन का शिकार हैं। और देखिए आप सबको वह न्यूज़ तो पता ही होगी जब लद्दाख में कुछ दिन पहले हिंसा फैलती है।
लद्दाख के लोग अपनी आजादी की बात करते हैं और सोनम वांगचूक जो लद्दाख का एक बहुत बड़ा और नामवर चेहरा है। अब क्योंकि बरखा मददान भी उस समय अपनी जिंदगी के पिछले कई सालों से लद्दाख या उससे भी ऊपर की चोटियों पर अपना समय बिता रही थी तो वह भी कई बार सोनम वांगचूक से इसी सिलसिले में मिलती हैं। बरखा मदान ने अब अपना नॉर्मल इंसानों वाली जिंदगी का नाम बदल दिया है। अब उनका नाम बरखा मददान नहीं बल्कि अब उनका नाम ग्लाइल सेन सामतेन हो चुका है। अब वो अपने अलग-अलग इंटरव्यूज में कहती हैं कि फाइनली जिस चीज की तलाश में वह हमेशा रही मतलब एक अंतिम सुख, एक असली खुशी वो फाइनली उन्हें मिल चुकी है। आज भी हम अक्सर ऐसी खबरें देखते हैं कि पुराने बहुत मशहूर एक्टर्स और एक्ट्रेसेस की जो दर्दनाक कहानियां वो हम लोग सुनते हैं जिनका अंत बहुत बुरी तरह से होता है। बहुत सारे लोग अपने फ्लैट्स में, अपने घरों में या तो अपनी जिंदगी के आखिरी पल बहुत बुरी हालत में गुजार रहे होते हैं। या उनकी जिंदगी का अंत ही बहुत ही खौफनाक तरीके से होता है। हमें ऐसे बहुत एक्ट्रेस और एक्ट्रेसेस के नाम पता हैं। या उनकी जो लाइफ के लास्ट मोमेंट्स हैं वो न्यूज़ में हम सुनते हैं। बहुत सारे लोग डिप्रेशन में हैं। बहुत सारे नशों के शिकार हैं और किसी ने तो रिश्तों से तंग आकर अपनी खुद की जीवन [संगीत] लीला ही समाप्त कर ली। यह बॉलीवुड इंडस्ट्री का वो काला और स्याह पक्ष है जिसे बरखा मददान ने अपनी बहुत छोटी उम्र में ही जज कर लिया था। और यही सब कुछ छोड़कर वह हिमालय की चोटियों पर चली गई थी। भगवान की तलाश में और एक असली खुशी की तलाश में। मुझे उम्मीद है कि आपको पंजाब की इस बेटी बरखा मददान की कहानी और उनके इन बड़े फैसलों को देखकर और सुनकर जरूर कुछ अलग महसूस हुआ होगा। साथ ही शायद आपकी जानकारी में भी कुछ हद तक बढ़ोतरी हुई होगी। और यह वीडियो यहीं पर समाप्त होता है।