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बिना बारिश के कैसे आई नेपाल में बाढ़? सरकार ने क्या चेतावानी दी?

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नेपाल में भोटे कोशी नदी के जल ग्रहण क्षेत्र में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। गुरुवार शाम 5:00 बजे तक चितवन जिले में सबसे ज्यादा 132 शव मिले हैं। करीब 1500 लोगों की तलाश जारी है। जिनमें 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। वहीं 21 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है। जिनमें से 11 की पहचान हो चुकी है। इसी बीच प्रशासन ने भोटे कोसी नदी में फिर बाढ़ के खतरे का अलर्ट जारी किया है। चीन से मिली सेटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ वाली जगह पर नदी का पानी रुकने से एक झील बनने की जानकारी मिली है।

झील में पानी बढ़ रहा है और इसके टूटने का खतरा भी बना हुआ है। भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और बचाव राहत में जुटे लोगों को नदी किनारे और जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक लापता लोगों में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों और राहत कार्य में जुटे सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। सुबह के वक्त आए स्टेज सैलाब में रसुआ, नुआकोट, धादिंग और

चितवन जिलों में बुनियादी ढांचों, घरों, गाड़ियों और प्रमुख पुलों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। इसके चलते एक दर्जन से अधिक जल विद्युत परियोजनाएं ठप हो गई है। भारत ने इस भीषण त्रासदी के बीच तुरंत हाथ बढ़ाते हुए मानवीय सहायता के तौर पर 37.5 टन आपदा राहत सामग्री नेपाल भेजी है। बाढ़ का पानी तिब्बत सीमा के पास लदे नदी के ऊपरी हिस्से से सुबह करीब 9:00 बजे नेपाल के रसुआ में दाखिल हुआ और देखते ही देखते निचले इलाके में फैल गया। क्योंकि रसुआ में पिछले 24 घंटे में 7 मि.मी. से भी कम बारिश दर्ज हुई थी। इसलिए नेपाल के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानी नींद कुमार आर्याल का मानना है

कि यह बाढ़ बारिश जनित नहीं है। विशेषज्ञ इसके पीछे प्रमुख तीन वजह तलाश रहे हैं। एक मलवा जमा होने से बनी अस्थाई झील का टूटना। रसुआगढ़ में करीब 20 किमी दूर पहाड़ से भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानें खिसक कर नदी में गिरने के निशान मिले हैं। आशंका है कि मलबे से नदी का प्रवाह रुका। पीछे पानी का विशाल दबाव बना और बांध टूटने पर सैलाब नीचे आ गया। दूसरा लैंडस्लाइड की घटना। पहले तिब्बत सीमा पर भूकंप के झटके की बात सामने आई थी।

लेकिन अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण यूएसजीएस के अपडेटेड डाटा और सेटेलाइट तस्वीरों से यह स्पष्ट हुआ कि यह कंपन बड़े भूस्खलन की वजह से था। तीसरा ग्लेशियर लेक आउटबस्ट फ्लस्ट यानी जीएलओएफ। ऊंचे हिमालय क्षेत्र में किसी बर्फीली झील के अचानक फटने की आशंका की भी वैज्ञानिक जांच की जा रही है। वहीं नेपाल की यह बाढ़ भारत के लिए सीधी चुनौती बन रही है। नेपाल में त्रिशुली नदी देवघाट में काली गंडक से मिलकर नारायणी नदी बनती है जो भारत की सीमा में वाल्मीकि नगर में प्रवेश कर गंडक कहलाती है। केंद्रीय जल आयोग सी डब्ल्यूसी ने गंडक बेसिन से सटे इलाकों को अत्यधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इस अपडेट पर आपका क्या कहना है? कमेंट कर में जरूर बताएं।

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