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महाराष्ट्र केस:IPHON नही , मां बाप की इस गलती की वजह से हुई कृणाल की मौ!त,वजह रोंगटे खड़े कर देगी।

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कुणाल एक साल पहले जब वह 10थ स्टैंडर्ड में था तो उसने 92% स्कोर किया था और वह अपनी मम्मी की बड़ी बात मानता था। वो देखिए कैसे अपनी मम्मी की पूजा कर रहा है। उनका पैर धो रहा है और बकायदा अपनी मम्मी की हर बात मानता था। मम्मी जो काम बोलती थी वो करता था।

बहुत ही सीधा, समझा हुआ और सुलझा हुआ लड़का था। लेकिन अचानक से एक खबर आई पूरे सोशल मीडिया पे कि iPhone के लिए कुणाल ने अपनी जान दे दी। यह सुनते ही लगा कि बड़ा बेतुका सा रीजन है। असली कहानी कुछ और है। क्योंकि कुणाल के पास iPhone बहुत पहले से था। मम्मी का मम्मी के पास भी अच्छा फोन था।

तो iPhone के चलते कोई बच्चा ये कदम क्यों उठाएगा जो कि इतना समझदार है। ऐसे में सोशल मीडिया पर जो खबर चल रही है उससे हटकर हमने सच जानने की कोशिश की और सच जो है काफी ज्यादा परेशान करने वाला है। कुणाल को कोई iPhone की जरूरत नहीं थी। कोई उसे iPhone नया नहीं चाहिए था या iPhone की वो ईएमआई नहीं पे कर पा रहा था। ऐसी कोई बात नहीं थी। वो सिर्फ इसलिए परेशान था क्योंकि मम्मी और पापा के बीच में जम नहीं रही थी।

पापा पिछले 3 महीने से मम्मी से अलग रह रहे थे। वो चाह रहा था कि कैसे भी मम्मी पापा एक हो जाए और उस के चलते और घर में जो पहले से लड़ाई झगड़ा चल रहा था उससे बच्चा में था। उस को बच्चे ने झेल नहीं पाया। वो एक सोचा कि एक बार एक आखिरी कोशिश करता हूं। क्या मेरे वजह से मम्मी पापा मान जाए? ये घटना जो थी अपने आप में बहुत चिंता का विषय था। क्योंकि हर पेरेंट्स ये सोच रहे थे कि बच्चे मोबाइल फोन को लेकर इतने ज्यादा एडिक्टिव कैसे हो गए अचानक से फोन को लेकर।

उल्टा बच्चे जो हैं और समझदार हो रहे हैं। उन्हें भी पता है कि किस चीज की कितनी अहमियत है आज के टाइम में। लेकिन डायरेक्टली इस पूरे केस को फोन से जोड़ देना मुझे लगता है सरासर सही नहीं है। इस केस में हम डिटेल में एक-एक चीजों पर बात करेंगे। पूरी लाइफस्टाइल पे बात करेंगे। ये कैसे थे?

कैसे रहते थे? पैसा कहां से आता था? कितना आता था? कितना कमाते थे? क्यों झगड़ा हुआ? क्यों बच्चा में चला गया? सब कुछ बात करेंगे डिटेल में। क्योंकि ये वीडियो हर पेरेंट्स के लिए जरूरी है। अगर वो अपने घर में कोई ऐसी चीजें कर रहे हैं। अगर पति-पत्नी का भी कोई झगड़ा चल रहा है तो उसका असर अपने बच्चों पर तो नहीं हो रहा ये जानना बहुत जरूरी है।

और आपका बच्चा खुश है कि नहीं ये भी जानना बहुत जरूरी है। तो इस वीडियो को अंत तक देखिएगा। पूरी डिटेल है और एक तरह से पूरी कहानी पलट गई। जो पहली कहानी चल रही थी iPhone वाली वो कहानी पूरी तरह से निराधार है और पूरी तरह से iPhone वाली कहानी फेक है।

उस पर तो हमने डीसीपी से भी बात की। डीसीपी ने भी कहा कि ये कहानी जो है वो फेक है, फर्जी है। iPhone वाली कोई बातचीत ही नहीं है। । डीसीपी की बाइट भी ।

अब संभाजी नगर में एक परिवार रहता था। छोटा सा परिवार था और उस परिवार के जो मुखिया थे मुरलीधर चांदगुड़े जिनकी उम्र 48 इयर्स है और उनकी पत्नी है संगीता चांदगुड़े जिनकी उम्र 42 साल है और उनका एक बेटा है जिसका नाम है कुणाल चांदगुड़े जिसकी उम्र 18 साल है। अब पिता जो है वो ड्राइवर की जॉब कर रहे थे और वो बहुत टाइम तक बाहर रहते थे।

फिर घर आते थे क्योंकि वो बड़ी वाली ट्रॉली ट्रक चलाते थे तो उसे उन्हें घर में आना जाना बहुत टाइम लगता था। वो घर पर बहुत लेट-लेट आते थे। कभी तीन दिन बाहर रहना, कभी चार दिन, कभी हफ्ते भर बाहर रहना क्योंकि ट्रक ड्राइवर्स की लाइफ आपको पता है कि काफी ज्यादा हेक्टिक है।

ऐसे में इनकी शादी जो हुई थी संगीता तब बताया जा रहा है कि लव अरेंज थी और इनका एक और बेटा भी था जो कि छोटा था कुणाल से और उसकी हो गई थी एक बीमारी की वजह से। वैसे घर के हालात जो थे वो थोड़े ठीक नहीं चल रहे थे क्योंकि बेटे की के बाद से घर जो था थोड़ा में था। अब ऐसे में जो संगीता है वो हाउसवाइफ थी तो वो सोच रही थी कि कुछ काम करते-करते खुद को एंगेज रखना भी बहुत जरूरी है।

तो उन्होंने खुद का एक चैनल खोला। YouTube चैनल में वो अपने बहुत सारी वीडियोस डालती थी और वो वीडियोस जो उनकी डेली एक्टिविटीज हैं, डेली वॉग्स हैं वो डालती थी। ये देखिए कैसे वो घर में बर्तन धो रही है। कुछ खाने के लिए बना रही है। घर के बाहर पानी बांध रही है। तो पूरी एक्टिविटी डालती है। वो डालती है अपने बेटे की भी फोटो। अपने बेटे के बारे में भी बहुत ज्यादा क्योंकि वो कुणाल से बहुत ज्यादा प्यार करती और कुणाल भी अपनी मम्मी से बहुत ज्यादा प्यार करता क्योंकि मां-ब ही ज्यादा टाइम स्पेंड करते थे।

घर पर ज्यादा टाइम रहते थे एक दूसरे की देखभाल करने के लिए। वहीं जो पिता थे वो थोड़ा घर पर आना जाना उनका जो है हफ्ते एक दो चार दिन बाद ऐसा आना जाना रहता था। अब ऐसे में फैमिली के अंदर सब कुछ नॉर्मल था। वहीं पिछले तीन महीने से फैमिली में थोड़ी सी खटास आ गई थी। जो कुणाल के पिता थे मुरलीधर वो उनकी वाइफ से जम नहीं रहा था संगीता से और वो 3 महीने से सेपरेट हो गए थे। जो पिता थे वो घर पर आना उन्होंने बंद कर दिया था।

कम कर दिया था और इसी बीच दोनों के बीच में थोड़ी बहुत नोकझोंक चल रही थी और लड़ाईयां चल रही थी। ये सब कुछ जो है कुणाल देख रहा था। कुणाल अब इन सब चीजों को देख रहा था, समझ रहा था क्योंकि बड़ा हो गया था। कुणाल ने थोड़े टाइम पहले यानी एक साल पहले उसने 10थ क्लास जो है पास किया था और उसमें उसे 92% आए थे।

तो कुणाल जो था वो पढ़ने में भी स्मार्ट बच्चा था। तो स्मार्ट बच्चा पढ़ने में अच्छा मम्मी की बड़ी केयर करता था। आप ये तस्वीरें देखिए कैसे अपनी मम्मी के पैर धो रहा है और पूजा कर रहा है अपनी मम्मी की। फिर अपनी मम्मी के साथ बैठ के दूसरी वीडियो देखिए। ये कैसे चाय पी रहा है और मम्मी को भी चाय पिला रहा है और वीडियो दिखा रहा है। तो वो मम्मी की बड़ी केयर करता था। एक मम्मी ने अपने जो ब्लॉग में बताया था कि अब वो इतना बड़ा हो गया कि मम्मी को लेकर जाता है ड्रॉप करने।

मम्मी को लेकर जाता है दुकान में। कहीं उन्हें कुछ सामान लेना है तो स्कूटी थी। इनके घर में ये स्कूटी लेकर जाते थे। और इन इन सबके साथ घर में एक और मेंबर था जिसका नाम था शेरू। शेरू एक स्ट्रीट डॉग था। और इनको इन्होंने रेस्क्यू किया था। मतलब उस कुत्ते को इन्होंने उसको रेस्क्यू किया था जब छोटा था और तब से इन्होंने अपने घर पर लाकर उस को पाल लिया था। अब शेरू जब शेरू जो है इनके साथ ही रहता था तो घर का हिस्सा बन गया था। वो भी कई वीडियोस में देखा गया है कि संगीता उनका बहुत ख्याल रखती थी डॉगी का और वो बहुत मानता था सबको घर में। अब ऐसे में घर की स्थिति नॉर्मल थी।

मिडिल क्लास फैमिली थी। कोई दिक्कत थी नहीं। मतलब बहुत ज्यादा पैसे की एक्सपेक्टेशन नहीं थी। कुणाल भी समझदार बच्चा था। मम्मी के पास एक फोन था। उसके पास भी एक फोन था। दोनों ईएमआई पे था। भी प्रॉपर भर दी जा रही थी। कुणाल जो था वो बहुत अच्छे क्लासेस में पढ़ भी रहा था। 11th की उसकी पढ़ाई चल रही थी। ऐसे ही 21 तारीख की रोज कुणाल अपने घर से निकलता है और वो क्लासेस नहीं जाता है। तो क्लासेस से 9:00 बजे मैसेज आता है कि आपका बेटा आज क्लासेस नहीं आया है। अब यह जब मैसेज आता है।

तो मम्मी जो है संगीता फोन करती हैं और उनके बेटे का फोन नहीं लगता। और कुणाल जो है अपने दोस्त को मैसेज करता है और मैसेज कर कर बताता है कि वो अब इस दुनिया में नहीं रहना चाहता और कई ऐसे मैसेज करता है जिससे पता चल रहा था कि वो अपनी जान देने की कोशिश करने वाला है। अब ऐसे में उसका जो दोस्त है वो अपने घर पर बताता है। वो उनकी मम्मी को बताते हैं। तब तक कुणाल खुद अपने पापा को फोन कर देता है।

मुरलीधर को और अपनी मम्मी को भी। दोनों को फोन कर कर बताता है कि मैं इस पहाड़ी पर आकर खड़ा हूं चोटी पर और मुझे अब नहीं जीना। यह बात सुनते ही घर वालों के पैरों तरफ जमी खिसक जाती है। क्योंकि देखिए यह बात किसी को पता नहीं है। लेकिन यह पुलिस भी मान कर चल रही है क्योंकि जिस तेजी से पिता वहां पहुंचे पिता को ये आभास हो गया था या पिता से उसने बता दिया था कि वो इस चोटी पे खड़ा है और वो ये बड़ा कदम उठाने जा रहा है।

अब वो वहां पहुंच गए पिता। पिता भी पहुंच गए। मम्मी भी पहुंच गए। दोनों ने बहुत समझाने की कोशिश की, बात करने की कोशिश की। वो सोचे 10:00 बजे से लेकर 1:00 बजे तक बच्चा वहां खड़ा था। आसपास अलग-अलग जगहों पर जा रहा था, आ रहा था। अलग-अलग अपनी पोजीशन चेहरा था। इस बीच वहां दमकल की गाड़ियां, गांव के सरपंच कई लोग आ गए नीचे हेल्प करने के लिए। बहुत सारे लोग रेस्क्यू करने आ गए।

लेकिन बच्चा जो था बार-बार अपनी जगह को चेंज कर रहा था। ऐसे में जो नेट था नीचे लगाना वो पॉसिबल नहीं था कि कितनी-कित जगह लगाएं। तो वो बहुत बड़ा एरिया था। मम्मी बहुत ज्यादा बच्चे से विनती कर रही थी।

कि बेटा मान जाओ। और बेटा मान नहीं रहा था। और पापा ने फिर बड़ी मुश्किलात के बाद पापा ने सोचा कि मैं बच्चे को खींच लेता हूं। ऐसे में वो बेटे को खींचने गए तब तक बेटे ने जो है पिता की बात नहीं मानी और उसके बाद दोनों की मौत हो गई क्योंकि पिता जो है बेटे को बचाने गया और पिता भी बेटे के साथ गिर गए। अब इसके बाद मम्मी ने पूरा चीजें देखी। मम्मी ने वो देखने के बाद मम्मी भी थोड़ी देर बाद जो है उन्होंने भी अपनी जान दे दी।

अब ये सब चीजें हुई। वो सब चीजें कैमरे पर रिकॉर्ड हुई और यह पूरी घटना के बाद एक खबर सामने आई कि बच्चे ने iPhone की वजह से यह जो है पूरा कृत किया और पूरा परिवार जो है iPhone की वजह से इस दुखद घड़ी में आ गया। लेकिन यह कहानी सच नहीं थी क्योंकि यह बात कहां से उठी पता नहीं।

चला लेकिन कुछ आसपोस के लोगों ने और कुछ जो उनके पहचान वालों थे उन्होंने कह दिया कि iPhone जैसे इन दोनों की परिवार में जो माहौल खराब था इस वजह से और वो बात कहां से आई और मीडिया में कहां आ गई और हर जगह वो खबर छप गई जिसके बाद जो है हर कोई यही मानने लगा कि जो लड़का है वो iPhone के लिए ऐसा कुछ करेगा।

लेकिन कोई इतना समझदार बच्चा तो ये बिल्कुल भी नहीं करेगा iPhone के लिए जो अपने मां-बाप की इतनी बात मानता हो जो अपनी मम्मी से इतना प्यार करता हो। तो जब पुलिस ने इस पूरे केस को स्टडी किया, पूरे केस को इन्वेस्टिगेट किया तो पता चला पुलिस के पास जो इंफॉर्मेशन आई उसमें ये इंफॉर्मेशन आई कि पारिवारिक कलह चल रहा था। मतलब घर में की जो लड़ाई झगड़ा जो घर में चल रहा था, पतिप्नी के बीच में जो क्लेश चल रहा था।

बेटा उसका शिकार हो गया। एक तरह से बेटा डिप्रेशन में चला गया। वो डिप्रेशन में चला गया। तो वो चाहता था कि कैसे भी पापा मम्मी एक हो जाए। पापा मम्मी के बीच में सब सॉल्व हो जाए। बेटा अच्छा सोच रहा था और वो चाहता था कि मम्मी को भी दुख ना मिले और मम्मी ने जो ये पूरी चीजें हुई है उससे एक दिन पहले मम्मी ने एक देखिए सोशल मीडिया पे एक वीडियो डाला और इस वीडियो में वो क्या बता रही है।

वो भी मैं आपको बताता हूं रिलेशनशिप को लेकर प्यार मोहब्बत को लेकर उन्होंने बातें बोली है उसमें मराठी में ही पूरी वीडियो तो उस जो उसका ट्रांसलेशन मैं वो बता रहा हूं वो बोल रही है कि जो व्यक्ति प्यार को महत्व नहीं देता उसके लिए कुछ भी करना कोई मतलब नहीं अपना भाग्य उसी को सौंपे जो आपके प्रेम का सम्मान करे चपाती आती है मतलब रोटी तभी स्वादिष्ट लगती है जब दोनों तरफ से पकाया जाए।

वैसे रिश्ता भी है कि अगर दोनों तरफ से अगर इक्वल ही नहीं है इक्वल मतलब इक्वल देने वाला नहीं है इक्वल लेने वाला नहीं है। ऐसे पता चला आप ही दिए जा रहे हो प्यार में तो ऐसे में आपका प्यार व्यर्थ है और ऐसे प्यार से आपको रिश्ते से बाहर निकल जाना चाहिए। ये इमोशनल वीडियो था और ये इमोशनल वीडियो एक दिन पहले अपने सोशल मीडिया पर उन्होंने डाला था YouTube चैनल पर।

इसके बाद जो है सुबह ये पूरी घटना हो गई। अब इस पूरी घटना को जोड़कर देखें तो यह बात तो समझ में आता है कि संगीता भी जो है कुछ ऐसे फेस से गुजर रही थी जिसमें वह बार-बार बताने की कोशिश कर रही थी अगर आपके प्यार को कोई महत्व नहीं दे रहा है तो बहुत ज्यादा आपको उस प्यार के पीछे भागने की जरूरत नहीं आप उससे निकल जाइए और कहीं ना कहीं यह साफ दर्शाता है कि फैमिली में बहुत सारी चीजें ठीक नहीं थी। अब इस बीच अब फैमिली में एक और मेंबर था शेरू।

शेरू ने देखा कि तीन दिन तक मालिक गायब हैं। तीनों लोग गायब हैं। कोई नहीं है घर पर। तो उसका रो-रो कर बुरा हाल था। वो यहां वहां घर में भागता जो आता उस पर भोकता वो बार-बार ढूंढता दरवाजे पर कोई भी अगर नॉक करता तो भाग कर जाता देखने कि संगीता तो नहीं आ गई कुणाल तो नहीं आ गई क्योंकि संगीता से बहुत ज्यादा शेरू प्यार करता था उसका रोकर बुरा हाल था वो कुछ खा पी नहीं रहा था पूरे सोशल मीडिया पर ये खबर चली और सबने ये खबर देखा तो कहीं ना कहीं जो है शेरू के हेल्प के लिए कई लोग आए एक एनजीओ भी सामने आया और शेरू को जो है रेस्क्यू करके लेकर जाया गया अब सवाल था।

पुलिस की इन्वेस्टिगेशन और जांच में क्या कुछ आया एक बार पहले वो सुनते हैं कि डीसीपी साहब ने क्या कुछ बताया इस पे कि इस केस का लेना देना iPhone से है या जो फैमिली डिस्प्यूट था उसकी वजह से है ये उन्हें सुने 21 अगस्त को हमारे छत्रपति संभाजीनगर शहर पुलिस में जो वास पुलिस स्टेशन है वहां पे ये घटना हुई थी जिसमें अनफॉर्चूनेटली तीन लोगों का हुआ है। ये जो कोर्स ऑफ इंसिडेंट जो हुआ है उसमें ऐसा था कि वो जो बच्चा था कुणाल वो वहां पर अराउंड दोपहर में 12:00 बजे आकर अपना जो एज ऑफ द क्लिफ है वहां पर खड़ा हुआ और में ऐसे उन्होंने हमें उस मतलब पुलिस को और गांव के लोगों को सूचना दी।

पुलिस ने तुरंत रिसोंड किया। वहां पर को भी बुलाया गया और बहुत समझाने का प्रयत्न किया। ऑलमोस्ट डेढ़ से दो घंटा उस बच्चे को समझाने का प्रयत्न किया। बट अनफॉर्चूनेटली लास्ट मोमेंट पे वहां पे जो उनके फादर थे वो जब उन्हें बच्चे को पकड़ने गए। सो वो इमंबैलेंस होकर वहां से नीचे गिर गए और उसी क्षण वहां पर उसकी मदर भी प्रेजेंट थी।

उन्होंने भी ऑल ऑफ अ सडन वहां से। सो इस इंसिडेंट में तीन लोगों की मृत्यु हुई है। प्रिलिमिनरी इन्वेस्टिगेशन जो हमने की है उससे हमें पता चला है कि इसमें फैमिली में थोड़ा सा डिस्प्यूट था। उस डिस्प्यूट के कारण पिछले दो तीन महीनों से घर में थोड़ा सा स्ट्रेस का माहौल था और इसी स्ट्रेस के माहौल से उस बच्चे ने परेशान होकर 21 अगस्त को ऐसा जो है उन्होंने प्रयत्न किया फॉर टाइम बीइंग हम इन्वेस्टिगेशन हमने जो इंक्वायरी कर रहे हैं उसमें और भी तहकीकात कर रहे हैं और प्रयत्न कर रहे हैं कि जो मेन रीजन था जिसके कारण ये इंसिडेंट हुआ उसकी तह तक पहुंचे और उसका हम पता लगाएं।

अब आपने सुना ये डीसीपी साहब थे और यह बता रहे हैं कि कैसे जो है फैमिली डिस्प्यूट के कारण जो है बच्चा में था और डिप्रेशन के कारण उसने ये कदम उठाया। अब दूसरी चीज थी कि अब शेरू बचा था। शेरू का देखभाल कौन करेगा? हर तरफ शेरू की खबर वायरल थी। जो लड़की के पिता हैं यानी बच्चे के नानू वो आ गए थे। लेकिन वो भी उनकी वो भी बहुत बूढ़े थे। वो उस डॉग का कैसे ख्याल रख पाते। ये खबर जब आसपास के लोगों में फैली और जब लोगों ने इसे वायरल किया तो एक एनजीओ थी वो सामने आ गए और उन्होंने बोला हम इसे रेस्क्यू कर कर अपने पास रखेंगे। एनिमल शेल्टर होम और आप वहां आकर देख सकते हो अपने डॉग को। आप उनकी कैसी केयर की जा रही है। तो वह भी वहां पहुंचे और उन्होंने डॉग को रेस्क्यू किया। एक बार उनकी बाइट सुनते हैं।

उन्होंने क्या कुछ कहा। बाबा का कांटेक्ट नंबर हमें मिला और बाबा के मदद से आज हमने शेरू को रेस्क्यू किया है और उसे हम अभी कॉरपोरेशन के शेल्टर पर लेकर जाएंगे और बाबा भी जाके वहां विजिट कर सकते हैं और बाबा से मैं कहूंगी कि जो हुआ वो बुरा हुआ नहीं होना चाहिए था आपकी फैमिली के साथ और जो भी बेजुबान है उसके साथ भी आपका अपना बेटी और आपका दामाद और पोता साथ में जो हुआ वो बुरा है अफसोस की बात है और हम हमारा आपको सहयोग रहेगा कभी भी कुछ भी रहा आप हमें फोन कर सकते हैं बता सकते हैं हम आपको सपोर्ट करेंगे व दूसरी तरफ जो उनके पड़ोसी थे वो कह रहे थे कि बहुत ही अच्छे लोग थे इनकी कोई शिकायतें नहीं थी ये बहुत ही अच्छे से रहते थे सबसे मिलजुलकर रहते थे सबसे बढ़िया बातचीत करते थे अच्छे लोग थे कोई लड़ाई झगड़ा नहीं इनका और ये परिवार बहुत ही सौम्य परिवार था।

एक बार उन्हें भी सुनते हैं पड़ोसी ने क्या कुछ कहा व्यवहार बहुत अच्छा था वो पूरी फैमिली का व्यवहार अच्छा था और मतलब अभी चार महीने से रह रहे हैं तो सोसाइटी में से भी हमको कभी कोई कंप्लेंट नहीं आई उनकी और अच्छा था वो जो मतलब सर थे वो तो ट्रक ड्राइवर थे तो वो मोस्टली बाहर ही रहते थे घर में बस वो मां बेटा दोनों ही रहते थे तो उनसे कभी कोई परेशानी किसी को ही नहीं हुई ना पास पड़ोस वालों को ना हमें घर में कोई पालतू भी शायद जीने की आवाज आ रही है जी जी जी अभी एक पालतू कुत्ता अंदर लॉक है अभी सभी मतलब बाहर है तो वो अंदर लॉक हो गया है तो अभी देखेंगे वो थोड़ा प्रशासन से रिक्वेस्ट करके उसको बाहर निकाल के अभी वैसे तो हमने उसको मतलब बिस्किट्स वगैरह डाला है।

तो देखते हैं अभी रिक्वेस्ट करके। इस पूरी घटना के बाद एक चीज तो साफ हो गई है कि अक्सर जो पेरेंट्स के लड़ाई झगड़े होते हैं उसमें बच्चा बहुत बार पीस जाता है। वो ये नहीं समझ पाते कि वो जिस स्टेटस में है वो जिस स्टेज पर है उसका इफेक्ट बच्चे पर पड़ेगा। और कभी भी मां-बाप सेपरेट होते हैं या कोई भी ऐसी चीज होती है तो बच्चा सबसे मेन कड़ी होता है जो वो सब फेस करता है क्योंकि उसे सब देखना है वो तो दोनों से प्यार करता है फिर उसके पापा अलग हो गए मम्मी अलग हो गए वो उस चीज से कहीं ज्यादा डिप्रेस हो जाता है और वो पढ़ाई पर भी कंसंट्रेट नहीं कर पाता तो बहुत इफेक्टिव होता है अगर एक घर में ऐसा कुछ कलह चल रहा है तो उसका बच्चों पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है तो ऐसे में बहुत ज्यादा जरूरत है कि आप काउंसलिंग कराइए आप बच्चों पर भी ध्यान दीजिए बच्चों पर मेंटल हेल्थ पर उनके असर ना पड़े उनके के जीवन पर कोई इसका असर देखने ना मिले क्योंकि अगर आप ये सब चीजें अगर आप दोनों के बीच में चल रही है और उसका असर आपके बच्चे पे पड़ रहा है तो बहुत ही खराब नतीजा निकल सकता है। तो ऐसे में बच्चे को काउंसलिंग बहुत जरूरी है।

उन्हें समझाना बहुत जरूरी है। जो फेस चल रहा है वो भी समझाना बहुत जरूरी है और वो कैसे उभर पाए उस फेस से कैसे निकल पाए इस पे तो पेरेंट्स का ही पूरा रोल है। लेकिन ऐसा ये पहला मामला नहीं है। ऐसे कई मामले हैं जहां बच्चे जो है पेरेंट्स की लड़ाई झगड़े से परेशान हो गए और उन्होंने ऐसा कुछ कदम उठा लिया। लेकिन सवाल यही है कि बच्चों के मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना बहुत ज्यादा जरूरी है। बच्चे किस कंडीशन में हैं और मां-बाप खुश रहेंगे। उनको अगर बच्चे परेशान देख रहे हैं कि मेरे मम्मी पापा परेशान है तो उसे देखकर वो और ज्यादा परेशानी में जाएंगे। तो ऐसे में आपको बच्चों के साथ तो ऐसा रहना पड़ेगा कि आपको उनकी परेशानियां या तो आपको उन्हें बहुत प्रैक्टिकल बनाना पड़ेगा कि बेटा ये लाइफ का सच है।

ये फेस से बहुत सारे लोग गुजरते हैं। लेकिन बहुत सारे जो बच्चे हैं जो भी नाबालिक हैं वो तो इस फेस को समझ ही नहीं पाएंगे। छोटे हैं जो वो इमोशनली उतने ज्यादा कनेक्टेड होते हैं कि उन्हें लगता है कि हर कोई हमसे दूर जा रहा है। तो ऐसे में बहुत बार कहा जाता है कि ऐसी सिचुएशन आने ही ना दे। अगर आप जब तक संभाल सकते हो संभाल लो। क्योंकि जब वो 20 21 18 साल के ऊपर हो जाता है एक 20 साल की उम्र में पहुंच जाता है तब उसके लिए ये सिचुएशन डाइजेस्ट करना थोड़ी इजी होती है। या तो एकदम छोटेपन में जब वो बच्चे एकदम छोटे लेकिन ये जो बीच वाली ऐज है जो 14 साल से 18 साल की ऐज बहुत आप कह सकते हो कि बहुत ही बच्चे एक्टिव होते हैं।

इमोशनली बहुत ही स्टेबल होते हैं। बहुत सोचने लगते हैं। बहुत ध्यान लगाने लगते हैं। और आज के बच्चे तो हैं भी स्मार्ट। वो हर चीज समझते हैं। आप उनसे कोई झूठ नहीं बोल सकते। तो कुणाल भी बहुत स्मार्ट और अच्छा बच्चा था और मुझे लगता है कि आपस में जो रिलेटिव्स जो है मुझे लगता है सिर्फ शादी में खाना खाने आ जाते हैं और बर्थडे पार्टी में सब में आ जाते हैं। तो मुझे लगता है ऐसे रिलेटिव्स की भी जरूरत नहीं। आज की ग्राउंड रियलिटी ये है कि ऐसे रिलेटिव्स की भी जरूरत नहीं। आप अच्छे 10 दोस्त बनाइए, पांच दोस्त बनाइए, तीन दोस्त बनाइए।

लेकिन आपके आसपास अच्छे तीन-चार दोस्त होने चाहिए जो आपके सुख-दुख में आपके साथ खड़े हो। वो आपके साथ इंगेज रहे। वो आपकी दुख दुविधा को समझे। वो आपके घर में जो परिस्थितियां है उसे समझे और आपकी मदद करें। ऐसे लोग होने चाहिए क्योंकि इनकी शादी में कई लोग आए होंगे। 100 200 लोग आए होंगे। लेकिन वही जब बात परिवार की कोई परेशानी चल रही थी तो उसमें कोई समझाने वाला नहीं था। कोई उसमें काउंसलिंग करने वाला नहीं था। क्योंकि हर कोई दूसरा अगर गिर रहा है तो उसे ज्यादा मजा आता है। अरे देखो ये तो बड़ा ऐसा करते थे। देखो इनके साथ ऐसा हो गया। तो किसी के अंदर संवेदाएं तो बची नहीं और मुझे नहीं लगता बहुत सारे लोग जो है इनसे जुड़े हुए थे। किसी ने कांटेक्ट करने की कोशिश भी की होगी कि क्या चल रहा है इनके फैमिली में कोई कोई ऐसे हालात तो नहीं क्योंकि बहुत बार जो भी लोग हैं वो सोशल मीडिया के जरिए अपनी चीजों को एक्सप्रेस करते हैं।

सैड स्टेटस लगा देते हैं। इसका मतलब ये नहीं है बस दिखावा कर रहे हैं। पूछ भी लो। अगर किसी दोस्त ने सैड स्टेटस लगाया तो पूछ लो उनसे मैसेज करके कि क्या हो गया? सब ठीक है। स्कूल में भी अगर जो बच्चे कॉलेज में जा रहे हैं और वो ये वीडियो देख रहे हैं तो उन्हें भी बहुत ध्यान देना है कि अगर उनके आसपास उनका कोई दोस्त है और कोई इस फेज में है तो आप उनसे बात करिए। आप उन्हें सपोर्ट दीजिए, समझाइए। आप उनके पेरेंट्स से बात कीजिए कि घर और स्कूल में, कॉलेज में जो है बहुत ये निराश रहता है। बहुत शांत रहता है। बहुत रहता है। तो फैमिली को कन्व कीजिए। फैमिली को कई बार नहीं समझता। ऐसा होने लगता है तो नॉर्मल है। उनका बेटा रहता ही ऐसा है। तो इन सब चीजों से निकलने के लिए ये बहुत ज्यादा जरूरी है। और आज के टाइम पे मेंटल हेल्थ इतनी बड़ी चीज है जिस पर कोई ध्यान नहीं देता

लेकिन सबको ध्यान देना चाहिए और अपने आसपास अगर आपका कोई दोस्त है तो उससे जरूर पूछिए तो ठीक है। बस इतना पूछने से भी बहुत चेंजेस आ सकता है और आप यह पूछ कर देखिए। और दोस्तों ढेर सारे कमेंट्स कीजिएगा। बताइएगा क्या आपके लाइफ में ऐसा कुछ चल रहा है? अगर कोई आपके साथ बात करने के लिए नहीं है तो आप उस सिचुएशन से कैसे बाहर निकलें? क्योंकि बहुत सारे लोग जो वीडियो देख रहे होंगे वो वो कमेंट्स भी पढ़ेंगे। तो अच्छे कमेंट्स लीजिएगा। मैं अगली वीडियो में कमेंट्स लूंगा और ये बताने की कोशिश करूंगा कि कैसे इससे बाहर निकला और मैं खुद में रह चुका हूं।

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