देखो कोई भी व्यक्ति जिसकी सोच ओछी है घटिया है उसके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना कंगना रनौत और युग गुरु स्वामी रामदेव के बीच चल रही जुबानी एक बार फिर सुर्खियों में है। कंगना के तंज के बाद अब रामदेव ने भी पलटवार किया है। हालांकि इस बार उन्होंने कंगना का नाम नहीं लिया लेकिन उनके बयान से साफ है कि निशाना किस ओर है।
मीडिया के सवालों पर रामदेव ने कहा कि वह विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते और इसलिए कुछ लोगों के बारे में टिप्पणी नहीं करेंगे। अभी क्या बोलूं मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता। स्वामी रामदेव क्या है ये देश जानता है। स्वामी रामदेव का योगदान क्या है? ये देश जानता है। इसलिए मैं ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। थैंक यू।
रामदेव ने कहा कि देश जानता है कि स्वामी रामदेव क्या है और उनका योगदान क्या है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि वह ओझे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। रामदेव का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पिछले कुछ दिनों से दोनों के बीच बयानबाजी लगातार चर्चा में है।
दरअसल विवाद की शुरुआत सरकारी नौकरियों में भर्ती और इंटरव्यू से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर रामदेव के बयान से हुई थी। रामदेव ने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में गड़बड़ियों पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके बाद कंगना रानौत ने उन पर तंज कसा। कंगना के इस बयान के बाद दोनों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। अब रामदेव ने जवाब देते हुए विवाद को आगे बढ़ाने से इंकार किया। लेकिन ओछे लोगों वाली टिप्पणी ने सियासी और सोशल मीडिया गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
सवाल यह भी है कि क्या रामदेव का यह बयान विवाद खत्म करने की कोशिश है या फिर कंगना पर एक और अप्रत्यक्ष देखो कोई भी कोई भी व्यक्ति जिसकी सोच ओछी है घटिया है उसके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना स्वामी रामदेव क्या है स्वामी रामदेव का योगदान क्या है स्वामी रामदेव ने योग के लिए आयुर्वेद के लिए स्वदेशी के लिए क्या किया है पतंजलि के प्रोडक्ट कैसे है दुनिया की वर्ल्ड क्लास लैब्स एक भी प्रोडक्ट पर एक भी कोई प्रश्न चिन्ह नहीं है। बाकी जो ओछी बातें करने वाले लोग हैं, घटिया बातें करने वाले लोग हैं, उनके बारे में कुछ नहीं।
हालांकि बाबा रामदेव की चर्चा सिर्फ कंगना के साथ विवाद को लेकर नहीं हुई। उन्होंने वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी और इसे देश के विकास और शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। बाबा रामदेव के मुताबिक देश में बार-बार चुनाव होने की वजह से साल के कई महीने चुनावी प्रक्रिया में निकल जाते हैं। इसका असर सरकारी कामकाज के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ता है।
चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों और दूसरे सरकारी कर्मचारियों की तैनाती होने से उनका नियमित काम प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि अगर देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो शिक्षकों को बच्चों के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा।
साथ ही सरकारी मशीनरी बार-बार चुनावी जिम्मेदारियों में उलझने के बजाय विकास योजनाओं पर ज्यादा ध्यान दे सकेगी। रामदेव का तर्क है कि वन नेशन वन इलेक्शन से चुनावी प्रक्रिया पर खर्च होने वाले समय और संसाधनों को कम किया जा सकता है। इससे सरकारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर लगातार काम करने का ज्यादा अवसर मिलेगा। यानी एक तरफ कंगना रानौत के साथ जुबानी को लेकर रामदेव का बयान चर्चा में है तो दूसरी तरफ वन नेशन वन इलेक्शन पर उनका समर्थन भी सामने आया है।
अब देखना होगा कि कंगना इस नए बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और क्या दोनों के बीच चल रही बयानबाजी यहीं थमती है या फिर एक नया जवाब सामने आता है।