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क्या सच में गाने चुराते थे नदीम-श्रवण? जानिए 90 के दशक के संगीत का सबसे बड़ा सच!

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आज हूं मैं जो कुछ भी वो आपकी इनायत है। नदीम श्रवण 90 के दशक के वो संगीत सम्राट जिन्होंने हमें यह सिखाया कि अगर आपके पास एक अच्छा कैसेट प्लेयर और विदेशी गानों का कलेक्शन हो तो आपको ओरिजिनल धुनें बनाने की मेहनत करने की कोई जरूरत नहीं है। उनकी धुनों में वह खनक थी जो सीधे श्रोताओं के दिलों में उतर जाती थी और शायद इसलिए क्योंकि वह धुनें पहले ही दुनिया के किसी ना किसी कोने में हिट हो चुकी होती थी। जब पूरी दुनिया ग्लोबल विलेज बनने की कोशिश कर रही थी तब नदीम श्रवण ने इसे संगीत के जरिए सच करके दिखाया। उन्होंने सरहदों की परवाह नहीं की। चाहे धुन पाकिस्तानी हो, अरबी हो या खालिस वेस्टर्न हर धुन को उन्होंने अपनी नदीम श्रवण छाप ढोलक और झंकार देकर ऐसा पेश किया कि लोग भूल ही गए कि इस धुन का असली रचयिता कौन था। आज के इस म्यूजिक एपिसोड में हम नदीम श्रवण के ऐसे ही फिल्मी गानों पर विस्तार से चर्चा करेंगे जो चोरी के थुनों से बने हैं। वीडियो की शुरुआत करते हैं साल 1990 में आई उस म्यूजिक हिट फिल्म और उसके गानों से जिसने सही मायनों में नदीम श्रवण को पहचान दिलाई। जी हां, यह फिल्म थी आशिकी जिसके गाने आज भी लोग बड़े चाव से सुनते हैं।

लेकिन आशिकी के मामले में कहानी बिल्कुल उलट थी। यहां पहले गानों का जन्म हुआ और उन गानों की रूह को पर्दे पर उतारने के लिए फिल्म बनाई गई। वर्ष 1989 में टी- सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार संगीतकार जोड़ी नदीम श्रवण के साथ मिलकर एक प्राइवेट पॉप एल्बम तैयार कर रहे थे। यह वह दौर था जब नदीम श्रवण संघर्ष कर रहे थे और गुलशन कुमार कुछ नया करना चाहते थे। इन गानों को बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के केवल एक ऑडियो एल्बम के रूप में रिलीज करने की तैयारी थी। खैर जब इन गानों की रिकॉर्डिंग चल रही थी तब मशहूर फिल्म निर्देशक महेश भट्ट ने उन धुनों को सुना। कहा जाता है कि गानों की सादगी और उनकी गहरी धुनों ने भट्ट साहब को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने तुरंत गुलशन कुमार से संपर्क किया। महेश भट्ट का मानना था कि यह गाने माज एक एल्बम तक सीमित रहने के लिए नहीं बने हैं। उन्होंने गुलशन कुमार को सुझाव दिया कि इन गानों में एक पूरी फिल्म को समेटने की ताकत है। गुलशन कुमार शुरुआत में थोड़े संशय में थे। लेकिन महेश भट्ट ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि वे इन गानों को आधार बनाकर एक ऐसी कहानी बुनेंगे जहां संगीत और भावनाएं एक दूसरे के पूरक होंगे। इस तरह से एक पॉप एल्बम के कुछ धुनों की वजह से फिल्म आशिकी के निर्माण की शुरुआत हुई। लेकिन यहां यह जानना बेहद रोचक है कि महेश भट्ट को जिन गानों के धुनों ने फिल्म बनाने के लिए प्रेरित की असल में वह कोई ओरिजिनल धुनें नहीं थी बल्कि अलग-अलग कई भाषाओं और देशों के लोकप्रिय गानों से कॉपीड थी। शुरू करते हैं इस फिल्म के लोकप्रिय गीत तू मेरी जिंदगी है से जिसकी जड़े 1975 तक जाती है। तू [गाना गाने की आवाज़] मेरी जिंदगी दरअसल साल 1975 के आसपास पाकिस्तान में गजल बड़ी लोकप्रिय हुई जिसे गाया था उस दौर की मशहूर पाकिस्तानी गजल गायिका तसवुर खानुम ने। [संगीत] मेरी जिंदगी है। इसकी लोकप्रियता का यह आलम रहा कि उन दिनों बन रही एक पाकिस्तानी फिल्म मोहब्बत मर नहीं सकती इसे इस्तेमाल करने का विचार किया गया।

फिल्म के निर्माता आमिर अली शाह और निर्देशक अजीजुल हसन ने इस गजल के फिल्मी रूपांतरण की जिम्मेवारी संगीतकार नशद को सौंपी। जिन्होंने गीतकार तस्लीम फाजली के साथ मिलकर इस गाने के दो वर्जन बनाए। इसके मेल वर्जन को मशहूर गायक मेहंदी हसन साहब से गवाया गया। और फीमेल वर्जन मैडम नूरजहां की आवाज में रिकॉर्ड किया गया। यह दोनों वर्जन बेहद शानदार व करण प्रिय बन पड़े। और साल 1977 में जब मोहब्बत मर नहीं सकती नामक यह फिल्म रिलीज हुई तो पाकिस्तानी दर्शकों ने इसे हाथों हाथ लिया और इसका गाना तू मेरी जिंदगी है तो जैसे कल ही बन गई। [संगीत] तू मेरी जिंदगी है। तू मेरी हर खुशी है। तू ही प्यार तू ही [संगीत] चाहत। तू ही बंदगी है। खैर वक्त के साथ पाकिस्तानी संगीत प्रेमी तो इस गीत को पीछे छोड़कर आगे निकल गए। लेकिन अब इसके मोहपाश में बंधने की बारी थी हिंदुस्तानी संगीत प्रेमियों की और उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई संगीतकार जोड़ी नदीम श्रवण ने जिन्होंने इस धुन में आंशिक बदलाव करते हुए इसे एक मॉडर्न इंडियन सॉन्ग में ढाला। इस मॉडर्न वर्जन में मुखड़े की शुरुआती पंक्तियों को तो ज्यों का त्यों रखा गया लेकिन गीतकार समीर अंजान साहब ने इसके अंतरों में अपनी कलम से मानो जान ही डाल दी और शायद यही कारण है कि आज तकरीबन 35 साल गुजर जाने के बाद भी हम इस गीत पर चर्चा कर रहे हैं। बात करें आशिकी फिल्म के एक अन्य गीत जाने जिगर जानेमन की तो इसके धुन के नकल को लेकर भी बड़े दिलचस्प फैक्ट्स निकल कर सामने आए हैं। जाने जिगर जानेमन मुझको है तेरी कसम तू जो मुझे ना मिली [गाना गाने की आवाज़] जाऊंगी मैं रिपोर्ट्स की माने तो एक दिन गुलशन कुमार मशहूर निर्माता निर्देशक प्रहलाद नेहलानी के ऑफिस में बैठे थे जहां प्रहलाद जी ने उन्हें अपनी आगामी फिल्म आंधिया का एक गीत सुनाया जिसके बोल थे दुनिया में तेरे सिवा [संगीत] दुनिया में तेरे सिवा कोई नहीं है मेरा [संगीत] तेरे बिना क्या हूं मैं क्या है मेरी जिंदगी गाना सुनने के बाद पहला नीलानी ने बताया कि बप्पी लहनी ने इस गीत को एक पाकिस्तानी गाने से नकल करके बनाया है जो सुनने में कमोबेश ऐसा ही है।

गुलशन जी को आंधिया का यह गाना बेहद पसंद आया और उन्होंने अगले ही दिन संगीतकार जुड़ी नदीम श्रवण को यह बात बताई और कहा कि हमारी आगामी पॉप एल्बम के लिए भी इसी धुन पर एक गाना बनाओ। इस तरह से नदीम श्रवण ने पहले उस पाकिस्तानी गाने जिसके बोल थे बस एक तेरे सिवा को ढंग से स्टडी किया और फिर उस पर जाने जिगर जानेमन जैसा गीत बनाया। वैसे बताता चलूं कि जिस पाकिस्तानी गीत पर आंधियां और आशिकी के ये दोनों गाने बने थे असल [संगीत] में वो साल 1984 में रिलीज हुई पाकिस्तानी फिल्म दूरियां का गीत थी। बस तेरे [संगीत] सिवा कोई नहीं है मेरा। [संगीत] सच है कि कुछ भी नहीं। तुझ बिन मेरी जिंदगी। इस पाकिस्तानी गीत में आवाजें थी अखलाक अहमद और मेहनाज की तथा इसका धुन बनाया था रॉबिन घोष ने और बोल लिखे थे सैयद गिलानी ने। वैसे क्या यह जानना भी बेहद रोचक है कि रॉबिन घोष ने इस गीत को बनाने की प्रेरणा एक पुराने हिंदी गाने से ली थी। यह गाना है साल 1962 में आई शम्मी कपूर और कल्पना मोहन स्टारर फिल्म प्रोफेसर का जिसके बोल हैं मैं चली मैं चली। आप खुद ही सुनकर अनुमान लगा सकते हैं कि रॉबिन घोष इस गाने से किस हद तक प्रेरित थे। मैं चली मैं चली पीछे पीछे जहां ये ना पूछा [संगीत] कहां भाकरे फिल्म आशिकी के एक अन्य लोकप्रिय गीत धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना की तो इसकी धुन साल 1987 में आए अमेरिकन सिंगर जॉय सिंस के गाने कम इनू माय लाइफ से लिया गया है। आप दोनों ही गानों को सुनकर खुद ही फैसला कर सकते हैं। धीरेधी से मेरी जिंदगी में आना। [गाना गाने की आवाज़] धीरेधी से दिल को चुराना। खैर फिल्म आशिकी के गानों को लेकर यहां यह भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि भले यह चोरी के धुनों से या नकल करके बनाई गई लेकिन आज तक इसकी लोकप्रियता में इस बात का कोई असर नहीं पड़ा। लोग इसे ओरिजिनल गानों की तरह ही सुनते हैं और खूब एंजॉय करते हैं। यहां दिलचस्प बात यह भी है कि जब इस फिल्म के म्यूजिक के ऑडियो कैसेट्स निकाले गए तो इसके 1 करोड़ से ज्यादा कैसेट्स बिके। इनफैक्ट जब यह बिक्री 1 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई तो कंपनी ने आधिकारिक रूप से इसकी काउंटिंग ही रोक दी थी। यहां आपको एक फन फैक्ट भी बताता चलूं कि भले ही फिल्म आशिकी संगीत के मामले में एक बड़ी हिट साबित हुई लेकिन नदीम श्रवण के करियर के लिए साल 1990 में बॉक्स ऑफिस पर इससे भी एक बड़ी सफलता मौजूद थी।

है ना यह चौंकाने वाली बात लेकिन यह शत प्रतिशत सही है। दरअसल उस समय नदीम श्रवण की सबसे बड़ी कमर्शियल हिट आशिक की [संगीत] नहीं थी बल्कि बाप नंबरी बेटा 10 नंबरी थी। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि उस साल बाप नमरी बेटा 10 नंबरी का म्यूजिक एल्बम इतना लोकप्रिय रहा। लेकिन एक संगीत प्रेमी होने के नाते जब मैं अपने दिमाग पर जोर देता हूं तो इसका कोई भी गीत मुझे याद नहीं आ पा रहा है। बताता चलूं कि साल 1991 [संगीत] में आयोजित 36वें फिल्मफेयर अवार्ड्स में फिल्म आशिकी के लिए नदीम श्रवण को उस साल के बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड भी हासिल हुआ था। जहां इन्होंने फिल्म आज का अर्जुन के लिए नॉमिनेट बप्पी लहड़ी तथा बागी और दिल के लिए नॉमिनेट आनंद मिलिंद को हराया था। इतना ही नहीं फिल्म आशिकी के गीत नजर के सामने के लिए समीर अंजान साहब को बेस्ट लिरिसिस्ट का और अनुराधा पडवाल को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का तथा अब तेरे दिन गीत के लिए कुमार सानू को बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का फिल्म फेयर अवार्ड हासिल हुए थे। अब आपको ले चलते हैं साल 1991 में आई अजय देवगन की डेब्यू फिल्म फूल और कांटे की तरफ और बताते हैं इसका सबसे लोकप्रिय गीत मैंने प्यार तुम्ही से किया है। नदीम सरो ने आखिर कहां से कॉपी की थी। [संगीत] असल में इस गीत की धुन पाकिस्तानी गायिका व अभिनेत्री मुसर्रत नजीर के लोकप्रिय गीत सपेरों से मैं छुपती फिल्मों से ली गई है जो साल 1987 में रिलीज हुई थी। आप खुद ही सुनकर पता लगा सकते हैं कि मैंने प्यार तुम्ही से किया है। गीत इससे किस हद तक कॉपीड है। मैंने प्यार तुम्ही से किया है। मुझे देख के दिल बजाए। [संगीत] अब चाहे जो हो जाए मैं दुनिया से [संगीत] अब ना डरूं।

डर है ना पकड़ ले जाए तुझसे मैं [संगीत] प्यार करूं सपरों से मैं चुपके [संगीत] चलिए अब आपको साल 1991 में ही रिलीज नदीम श्रवण के संगीत से सजे एक अन्य फिल्मी गीत के विषय में बताते हैं। जी हां, यह गीत है फिल्म साजन का जिसके बोल हैं बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम। असल में इस गीत का धुन साल 1978 में आई एक पाकिस्तानी फिल्म अब शार से लिया गया है जिसके बोल हैं बहुत खूबसूरत है मेरा सनम। इस पाकिस्तानी गीत को गाया था मेहंदी हसन ने। धुन बनाई थी एम अशरफ ने तथा बोल लिखे थे तस्लीम फाजिली ने। बहुत खूबसूरत है मेरा सनम। खुदा ऐसे मुखड़े बनाता है कम। बताता चलूं कि साल 1992 में आयोजित 37वें फिल्म फेयर अवार्ड्स में फिल्म साजन के लिए नदीम श्रवण को बेस्ट म्यूजिक का फिल्म फेयर अवार्ड हासिल हुआ था। जहां इन्होंने फूल और कांटे के लिए स्वयं को सौदागर के लिए लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को और लेकिन के लिए हृदयनाथ मंगेशकर को हराया था। यहां आपने फिल्म लेकिन का जिक्र सुना जिसके विषय में आम दर्शकों ने कम ही सुना होगा। लेकिन जो दर्शक फिल्म और संगीत की गहरी समझ रखते हैं उन्हें इसका नाम सुनते ही इसके एक गीत यारा सिली सिली की याद आ गई होगी। जिसकी धुन कानों में मिश्री घोल जाती है। सीली की रात चलिए अब आपको नदीम श्रवण के एक और फिल्मी गीत के विषय में बताते हैं। जिसकी धुन किसी अन्य ने वर्षों पहले बनाई थी और वो काफी लोकप्रिय भी रहा था। जी हां, यह गीत है साल 1991 में आई फिल्म सड़क का जिसके बोल हैं तुम्हें अपना बनाने की कसम खाई है। असल में इस गीत की धुन साल 1983 में एक पाकिस्तानी एल्बम मेरी पसंद के एक गीत से लिया गया था। जिसके बोले हैं चले तो कट ही जाएगा सफर आहिस्ता-आहिस्ता। [संगीत] इस गीत को गाया था वहां की एक बेहद ही खूबसूरत अभिनेत्री व गायिका मुसर्रत नजीर ने। चले तो [संगीत] कट जाएगी। [गाना गाने की आवाज़] अब बात करते हैं साल 1991 में आई फिल्म। दिल है कि मानता नहीं के गीतों के बारे में। नदीम श्रवण के तैयार किए गए इस फिल्म के दो गीतों अदाएं भी हैं और तू प्यार है किसी और का की धुन असल में ओरिजिनल नहीं थे। शुरू करें अदाएं भी हैक की धुन से तो इसे अमेरिकन गायिका सेलीबी के साल 1978 में आए गीत फॉर द लव ऑफ माय मैन से कॉपी किया गया था भी है दिल लंबा मन में [संगीत] झपट जी है [संगीत] मेरे महबूब में बात करें इस फिल्म के दूसरे गीत तो प्यारे किसी और का की धुन और बोल की तो इसी साल 1988 में आए नुसरत फतेह अली खान के

एक गजल से लिया गया था जिसे लिखा था मशहूर शायर सलीम कौसर ने। इस गजल के बोलते मैं ख्याल हूं किसी और का और इसे समय-समय पर मेहंदी हसन, गुलाम अली और जगजीत सिंह जैसे अन्य गायकों ने भी अपनी आवाज दी और सारे वर्जन खूब लोकप्रिय रहे। मैं ख्याल [संगीत] किसी और का मुझे सोचता कोई। [संगीत] अब आपको साल 1992 में आई नदीम श्रवण के एक और फिल्म दिल का क्या कसूर के दो गानों के बारे में बताते हैं। जिनके भी धुन कहीं और से लिए गए हैं। पहला गीत है गा रहा हूं इस महफिल में जिसे लिखा था अनवर सागर ने तथा गाया था कुमार सानू ने। असल में इस गीत का धुन साल 1975 में आई पाकिस्तानी फिल्म जंजीर के एक गीत से लिया गया था। जिसके बोल हैं ना कोई गिला है। इस पाकिस्तानी गीत को गाया था मेहंदी हसन ने। बोल लिखे थे मशरूर अनवर ने तथा धुन बनाया था एम अशरफ ने। गा रहा हूं इस महफिल में ना कोई शिकायत है। [गाना गाने की आवाज़] आज हूं मैं जो कुछ भी वो आपकी इनायत है। आपकी इनायत है। फिल्म दिल का क्या कसूर के दूसरे कॉपी सॉन्ग की बात करें तो वो है दिल जिगर नजर क्या है जिसे लिखा था नवाब अर्जुन ने तथा गाया था कुमार सानू ने। इस गीत की धुन साल 1966 में आई अमेरिकन रॉक बैंड द वेंचर्स के इंस्ट्रूमेंटल ट्यून स्केप से लिया गया था। आप खुद इस ट्यून को सुनकर फैसला कीजिए कि दोनों में कितनी समानताएं हैं। जी [संगीत] नजर क्या है मैं तो [संगीत] तेरे लिए जान भी दे दूं। [संगीत] साल 1992 में आई दीवाना फिल्म के लोकप्रिय गीत ऐसी दीवानगी की बात करें तो नदीम श्रवण ने इसकी धुन 1976 की कन्नड़ फिल्म बयालूदारी के गीत कनसालू ने मनसाने से ली थी। बताता चलूं कि इस कन्नड़ गीत को गाया था एसपी बाल सुब्रमण्यम और वाणी जय राम ने तथा धुन बनाई थी राजन नागेंद्र ने। [संगीत] सून ने मनसनी अब आपको बताते हैं साल 1992 में ही आई नदीम श्रवण के एक और कॉपी ट्यून वाले फिल्मी [संगीत] गाने के बारे में। इस गाने के बोल हैं तुम्हारी नजरों में हमने देखा जो फिल्म कल की आवाज का है। यह गीत साल 1977 में आई पाकिस्तानी फिल्म मेरे हुजूर के एक गीत हमारी सांसों में आज तक वो से ली गई धुन से कॉपी करके बनाया गया था। फिल्म में इस गीत के दो वर्जन हैं। इसका मेल वर्जन गाया था मेहंदी हसन ने तथा फीमेल वर्जन गाया था मैडम नूरजहां ने। इस गीत का ओरिजिनल धुन बनाया था मशहूर पाकिस्तानी संगीतकार [संगीत] एम अशरफ ने। तुम्हारी नज़रों में हमने देखा हमारी सांसों में आज तक वो [संगीत] अजब सी चाहत झलक रही है। ना की खुशबू मरक रही। अब आपको बताते हैं साल 1994 में आई फिल्म स्टंट मैन के गीत अम्मा देख तेरा मुंडा बिगड़ा जाए के बारे में। इस गीत की धुन को नदीम श्रवण ने साल 1992 में आई इंग्लिश बैंड एसएल2 के एल्बम ऑन रागा ट्रिप से लिया गया था। आप खुद इस धुन को सुनकर अनुमान लगा सकते हैं। अम्मा देख [संगीत] तेरा मुंडा बिगड़ा जाए देख [

संगीत] मेरा मुंडा बिगड़ा जाए। अब चलते हैं साल 1997 में आई फिल्म जुदाई की तरफ जिसके तीन गीत मुझे एक पल चैन ना आए। मेरी जिंदगी एक प्यास और शादी करके फंस गया यार की धुन। नदीम सरो ने पाकिस्तानी गानों से कॉपी करके बनाया था। शुरू करें मुझे एक पल चैन ना आए से तो इसकी धुन साल 1993 में नुसरत फतेह अली खान के एल्बम महफिल समा के गीत सानू एक पल चैन ना आए से लिया गया था। आप दोनों गानों को सुनकर खुद ही असलियत का अंदाजा लगा सकते हैं। ओ मुझे एक पल चैन ना आए। [संगीत] सू एक पल चैन ना आए। सजना तेरे बिना सजना [संगीत] तेरे बिना बात करें गीत मेरी जिंदगी एक प्यास की तो इसकी धुन साल 1995 में नुसरत फते अली खान के एल्बम मेरी जिंदगी 13 प्यार के शीर्षक गीत से लिया गया था जिसे गाया है मैडम नूरजहां और नुसरत फतेह अली खान साहब ने मिलकर अब मैं आपको दोनों ही गाने सुनाए देता हूं। आप खुद ही सुनकर फैसला कर लीजिएगा। ओ मेरी जिंदगी [संगीत] एक प्यार मेरी जिंदगी [गाना गाने की आवाज़] तेरा प्यार बात करे तीसरे गीत शादी करके फसिया यार की तो इसकी धुन साल 1991 में एक गायक अली हैदर के एल्बम करार के गीत कुंवारा से लिया गया था आप दोनों ही गीत सुनकर स्वयं पुष्टि कर सकते हैं। शादी करके बस गया यार अच्छा खासा था। सारे मुंडे [संगीत] लग गए काम से मैं रह गया कुंवारा। बहरहाल अब वीडियो की लंबाई को देखते हुए मैं इसे यहीं पर रोकने की इजाजत चाहूंगा। हालांकि नदीम श्रवण ने इतने ही गाने कॉपी नहीं किए। अगर वीडियोस बनाए जाए तो इसके एक दो नहीं बल्कि चारप पार्ट्स तो बन ही सकते हैं। खैर आज के इस वीडियो में यहीं तक मिलते हैं ऐसे ही एक और दिलचस्प वीडियो के साथ। तब तक हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए और जीवन का आनंद उठाते रहिए। धन्यवाद। [संगीत] हम्म।

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