साथियों नमस्कार मैं हरिश्चंद्र बंडवा एचबी श्स में आप सभी का स्वागत करता हूं। दोस्तों एक दिलचस्प कहानी पढ़ी है मैंने और मुझे लगा कि आपको जरूर बताना चाहिए। क्या आप ऐसे किसी सुपरस्टार को जानते हैं जिसने अपने जीवन के आखिरी में जब वो उनका देहांत होता है तब वो यह लिख कर जाते हैं कि मेरी जितनी भी जमा पूंजी है वो सब मेरी नौकरानी को दे दिया जाए। जी हां। क्या आपको यह कहानी पता है? मैंने पढ़ी तो एकदम से चौंक गया मैं कि अच्छा ऐसा है। अब आप सोचिए जिस मैं सुपरस्टार की बात करने जा रहा हूं उसके तीन बच्चे हैं। पूरा घर परिवार है। उसके पास करोड़ों की संपत्ति है। सैकड़ों हिट फिल्में हैं।
लेकिन उसने किया दोस्तों। और उससे भी बड़ी बात क्या है कि उसका जो बेटा है उसने कोई आपत्ति नहीं की। ठीक है? पिताजी ने लिखा है वो सारे जितने भी करोड़ हैं दे दिए जाए नौकरानी को। मैं किसकी बात कर रहा हूं दोस्तों जरा ध्यान से देखिए। यह तेलुगु सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंगनाथ हैं। 46 साल का करियर था। 300 से अधिक फिल्में टीवी धारावाहिक और फिल्मों में आने से पहले वो भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर थे। 2009 में इनकी पत्नी चैतन्य का निधन हो गया और यह परिवार के लोग अलग-अलग शहरों में रहते थे।
पत्नी का निधन हो गया। यह बेचारे एकदम अलग पड़ गए। अवसाद में पड़ गए। फिल्मों के ऑफर टुकराने लगे। इनका पसंदीदा खेल टेनिस था उसको भी छोड़ दिया। एकदम अलग। और इन इन्होंने जो है आत्महत्या की थी दोस्तों 66 साल की उम्र में। मैं डेट बताता हूं। 19 दिसंबर 2015 को हैदराबाद स्थित अपने घर में रंगनाथ फंदे से लटके मिले। पुलिस को कोई औपचारिक सुसाइड नोट नहीं मिला। लेकिन रसोई की दीवार पर डेस्टिनी लिखा हुआ मिला। मौत से कुछ घंटे पहले उन्होंने अपने एक दोस्त को गुड बाय का एसएमएस भी भेजा था। और आखिरी इच्छा कैसे पता चली वो भी आपको बताता हूं। रसोई की दीवार पर अलमारी पर उन्होंने लिखा था कि उनके बैंक डिपॉजिट और बोंड्स जो घरेलू सहायिका है नौकरानी पीन मीनाक्षी को सौंप दिया जाए और अंग्रेजी में दो-तीन शब्द और लिखा था डोंट ट्रबल हर उसे परेशान मत करना यह कहानी है दोस्तों अब आगे की भी कहानी सुन लीजिए भाई रंगनाथ की दो बेटियां एक बेटा है और इसके बाद भी वो कह रहे हैं कि जो
भी मेरी जमा पूंजी है मेरी नौकरानी को दे दिया जाए। दरअसल इसके पीछे की कहानी यह है दोस्तों कि जब आखरी के छ साल गुजरे तो उस घरेलू सहायिका ने ही उनका सबसे अधिक साथ दिया था उस अवसाद के समय में। और जब वो लिख के चले गए तो मैं आपको बताऊं उनका बेटा है तिरुमला नागेंद्र कुमार। उन्होंने बाकायदा सार्वजनिक रूप से कहा कि वे अपने पिता की अंतिम इच्छा का सम्मान करेंगे और उनकी जमा पूंजी मीनाक्षी को सौंप देंगे।
इसमें कोई कानूनी विवाद हुआ हो ऐसा कुछ मुझे रिसर्च में नहीं मिला। दो बेटियां हैं उनका भी कुछ नहीं मिला कि किसी ने कोई विरोध किया हो, कोई लीगल केस हुआ हो, कुछ भी नहीं मिलता। और जो जानकारी मैंने देखी दोस्तों, रंगनाथ की कुल संपत्ति 10 से 20 करोड़ के करीब रही होगी। हालांकि इसका भी कोई खुलासा नहीं हुआ कि कितनी संपत्ति थी, कितनी दी गई। लेकिन बड़ी बात यह है दोस्तों कि उम्र के आखिरी पड़ाव में जब रंगनाथ अवसाद में चले गए तो उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी अपने घरेलू सहायिका को सौंप दी। उसके नाम कर दिया और बेटों ने विवाद भी नहीं किया। बेटे ने विवाद भी नहीं किया। तो यह एक सुपरस्टार की कहानी है दोस्तों। मुझे बहुत ही इंटरेस्टिंग लगी। इसीलिए आपके साथ शेयर किया है। आप जरूर बताइएगा दोस्तों कि इस तरह की कहानियां आप देखना चाहते हैं या नहीं। आप अगर इस तरह की कहानियां देखना और पसंद करेंगे तो जरूर आपको दिखाऊंगा। बने रहिए, जुड़े रहिए। बहुत-बहुत धन्यवाद। जय सियाराम। [संगीत]