रात के ठीक पौ:45 बजे जब पूरा शहर गहरी नींद में था। कोलकाता के एक होटल की खामोशी अचानक चीख पुकार में बदल गई। धुआं इतनी तेजी से फैला कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। सोते-सोते ही कईंदगियां हमेशा के लिए बुझ गई। घटना है कोलकाता के मशहूर मिर्जा गालिब स्ट्रीट की जहां फ्री स्कूल स्ट्रीट के पास बने होटल तैबा में मंगलवार देर रात करीब 2:15 बजे अचानक आग भड़क उठी।
यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले हिस्सों में गिना जाता है। जहां बांग्लादेश से इलाज कराने आने वाले लोग अक्सर ठहरते हैं। आग लगते ही पूरे होटल में घना धुआं भर गया। ज्यादातर मेहमान उस वक्त गहरी नींद में थे और धुएं ने उन्हें सांस लेने तक का मौका नहीं दिया। धम घुटने से एक-एक कर नौ लोगों की जान चली गई जिसमें एक मासूम बच्चा भी शामिल था। छह और लोग बुरी तरह झुलस गए और घायल हो गए। राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि पश्चिम बंगाल फायर सर्विस का मुख्यालय इसी होटल के पास स्थित है।
इसलिए दमकल की टीम मिनटों में मौके पर पहुंच गई। फायर फाइटर्स ने सीढ़ियों के सहारे होटल की खिड़कियां तोड़ी और अंदर फंसे 28 लोगों को जान जोखिम में डालकर बाहर निकाला। सभी को कोलकाता के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। जांच में सामने आया कि मरने वालों में कुछ बांग्लादेशी नागरिक भी थे जो इलाज के सिलसिले में कोलकाता आए थे। इनके अलावा मेघालय और पश्चिम बंगाल के अलीपुर द्वार के रहने वाले लोग भी इस हादसे का शिकार बने। आग किस वजह से लगी, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।
लेकिन शुरुआती जांच में एयर कंडीशनर में हुए विस्फोट को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोलकाता में हुआ अकेला हादसा नहीं है। ठीक दो दिन पहले 17 अगस्त को वीरभूम जिले के तारापीठ मंदिर के पास होटल विदेशनी में भी शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी। जिसमें भी नौ लोगों की जान चली गई थी। यानी सिर्फ 48 घंटों के भीतर पश्चिम बंगाल में आग की दो अलग-अलग वारदातों में कुल 18 लोग अपनी जान गवा चुके हैं। इस खबर पर फिलहाल इतना ही। बाकी तमाम खबरों को जानने के लिए देखते