सऊदी अरब ने एक ऐसा खेल कर दिया है जो दुनिया भर के करोड़ों मुस्लिमों को सोने नहीं देगा। भारत के मुस्लिम भी यह खबर देखकर अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाएंगे। कुछ दिन पहले ही आपने देखा होगा कि किस तरह से पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने एक डिफेंस डील की थी। इस डील को भारत और इजराइल के खिलाफ बताया गया था।
लेकिन अब जो दावे हो रहे हैं वो 57 मुस्लिम देशों को हिलाने के लिए काफी हैं। दरअसल एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें 2024 और 26 के बीच सऊदी अरब में पढ़ाई जाने वाली किताबों के कंटेंट की समीक्षा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब ने अपनी स्कूली किताबों में इजराइल, यहूदियों और गैर मुसलमानों के बारे में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को काफी नरम कर दिया है।
दावे के मुताबिक सऊदी अरब में बच्चों को पढ़ाई जाने वाली किताबों में से अब उस लाइन को हटा दिया गया है। जिसमें कहा गया था कि मुसलमान कभी भी यरूशलम नहीं छोड़ेंगे। बताइए फिलिस्तीन की पूरी जंग ही यरूशलम के लिए है। ऐसी खबर देखकर सोचिए कन्व्टेड मुस्लिमों का क्या हाल हो रहा होगा? लेकिन अब इस्लाम का गढ़ कहे जाने वाला सऊदी अरब इजराइल प्रेम में डूब गया है। सऊदी अरब बयानबाजी के लिए फिलिस्तीन का मुद्दा जरूर उठाता है लेकिन सऊदी अरब ने पीछे से इस मुद्दे को छोड़ दिया है।
कुछ समय पहले सऊदी अरब के दुश्मनूती नेता अब्दुल मलिक ने भी कहा था कि सऊदी अरब यहूदियों को खुश करने के लिए कुरान के हिस्सों को भी अपने सिलेबस से हटा रहा है। सऊदी अरब ने इजराइल के साथ संबंधों को सामान्य करने के लिए कुरान की कुछ आयतों को पाठ्यक्रम से हटा दिया है। नेता अब्दुल मलिक के मुताबिक सऊदी अरब ने अपनी किताबों से यहूदी विरोधी आयतों को हटाया है। यह कोई छोटा कदम नहीं है।
ऐसी खबरें आप तक पहुंचती नहीं होंगी। लेकिन दुनिया में बहुत बड़ा खेल चल रहा है। मिडिल ईस्ट मामलों की जानकार डालिया जायदा ने कहा है कि सऊदी अरब तो छोड़िए। संयुक्त अरब अमीरात भी इजराइल को खुश करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो इजराइल के लिए दोस्ती का भाव रखें।
बहरहाल आपको बता दें कि ये दोनों ही मुस्लिम देश यहूदियों के साथ-साथ हिंदुओं को भी खुश कर रहे हैं। इसीलिए आज संयुक्त अरब अमीरात में मंदिर हैं। कुछ समय पहले सऊदी अरब के मदीना में पहली बार भारतीय डेलीगेशन पहुंचा।
इस डेलीगेशन में स्मृति ईरानी साड़ी पहनकर मदीना पहुंची। सऊदी अरब के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात दोनों योगा कर रहे हैं। दोनों देश जानते हैं कि तेल के भरोसे जिंदगी भर नहीं बैठा जा सकता। तेल खत्म तो खेल खत्म। इसीलिए खुद को बदलना होगा। टूरिज्म के लिए अपनी कट्टर सोच से आगे बढ़ना होगा। निवेश के नए क्षेत्र ढूंढने होंगे। बताइए जिस इजराइल और भारत के खिलाफ पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस डील की थी वही सऊदी अरब यहूदियों का दीवाना हो चुका है।