हिंदी सिनेमा के इतिहास में अशोक कुमार और किशोर कुमार का नाम हमेशा अमर रहेगा। दोनों भाई अपने-अपने क्षेत्र में महान थे। एक ने अभिनय की दुनिया में इतिहास रचा तो दूसरे ने अपनी आवाज से करोड़ों दिलों पर राज किया। लेकिन इन दोनों भाइयों के रिश्ते की कहानी जितनी खूबसूरत थी, उसका अंत उतना ही [संगीत] भावुक कर देने वाला था। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। अशोक कुमार जिन्हें प्यार से दादा मुनि कहा जाता था। उनका जन्म 13 अक्टूबर 1911 को भागलपुर में हुआ था।
उन्होंने लगभग छह दशकों तक हिंदी सिनेमा में काम किया और नायक से लेकर चरित्र अभिनेता तक हर भूमिका में अपनी अलग पहचान बनाई। अपने छोटे भाई किशोर कुमार को लेकर अशोक कुमार के दिल में खास जगह थी। उनकी इच्छा थी कि किशोर कुमार भी उनकी तरह एक सफल अभिनेता बने, लेकिन किशोर कुमार का मन अभिनय में नहीं लगता था। उनका सपना तो महान गायक के एल सहगल की तरह गायक बनने का था। वह बचपन से ही सहगल साहब की आवाज की नकल किया करते थे। बड़े भाई के समझाने पर किशोर कुमार ने फिल्मों में अभिनय तो शुरू किया लेकिन शुरुआती दौर में उनकी कई फिल्में सफल नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने अपनी असली प्रतिभा को पहचाना और गायकी की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने जो इतिहास रचा वो आज भी किसी से छिपा नहीं है।
अशोक कुमार और किशोर कुमार ने फिल्म भाई-भाई में साथ काम भी किया था। दोनों भाइयों की जोड़ी पर्दे पर भी दर्शकों को खूब पसंद आई। लेकिन 13 अक्टूबर 1987 की तारीख इस परिवार के लिए जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन बन गई। यह अशोक कुमार का 76वां जन्मदिन था। बताया जाता है कि किशोर [संगीत] कुमार ने अपने बड़े भाई के लिए एक खास पार्टी रखी थी और फोन पर उन्हें बताया था कि वह जन्मदिन पर एक खास तोहफा देना चाहते हैं। पार्टी में फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे पहुंचे। लेकिन जिस भाई ने पार्टी रखी थी वही वहां नहीं आ सका।
उसी दिन महज 58 साल की उम्र में किशोर कुमार का अचानक निधन हो गया। सोचिए जिस दिन बड़े भाई का जन्मदिन था उसी दिन छोटे भाई की मौत की खबर आ गई। खुशियों का दिन देखते ही देखते जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन गया। अशोक कुमार पहले ही अपनी पत्नी के निधन का सदमा झेल चुके थे। इस दुख से वह पूरी तरह उभर भी नहीं पाए थे कि छोटे भाई किशोर कुमार के अचानक चले जाने ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। कहा जाता है कि इस घटना के बाद अशोक कुमार ने फिर कभी अपना जन्मदिन नहीं मनाया। शायद उनके लिए 13 अक्टूबर फिर कभी जन्मदिन नहीं रहा। वो दिन उन्हें हमेशा उस छोटे भाई की याद दिलाता रहा जिसे वह बेहद प्यार करते थे और जिसके लिए उन्होंने कभी [संगीत] अभिनेता बनने का सपना देखा था। किस्मत का खेल भी कितना अजीब था।
अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर कुमार अभिनेता बने, लेकिन किशोर कुमार ने अपनी आवाज के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया कि दुनिया उन्हें हिंदी सिनेमा के महानतम गायकों में गिनने लगी। एक भाई ने अभिनय की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी, तो दूसरे ने अपनी आवाज से संगीत के इतिहास को अमर कर दिया। आज दोनों भाई हमारे बीच नहीं है। लेकिन जब भी अशोक कुमार का नाम लिया जाएगा उनके शानदार अभिनय की याद आएगी और जब भी किशोर कुमार की आवाज में कोई गीत गूंजेगा तो उनके साथ उस बड़े भाई की याद भी जरूर आएगी जिसने कभी अपने छोटे भाई के लिए बड़े सपने देखे थे। 13 अक्टूबर की वो तारीख हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा हमेशा के लिए एक दर्दनाक संयोग बनकर रहेगी। एक तरफ दादा मुनि का जन्मदिन और दूसरी तरफ उनके छोटे प्यारे भाई किशोर कुमार की अंतिम विदाई। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप [संगीत] सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।