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हे प्रभु ! ऐसा क्या पाप हुआ था कॉमेडियन देवेन वर्मा से जो ऐसा अंत लिख दिया!

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हेलो दोस्तों, फिल्मी स्टोरीज में आपका स्वागत है। पुराने दौर के हिंदी सिनेमा में वैसे तो कई महान हास्य कलाकार थे, मगर अभिनेता देवेंद्र वर्मा जैसा दूसरा कोई कॉमेडियन आया ही नहीं। एक ऐसा कलाकार जो पर्दे पर आते ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ले आता था। जिसकी आंखों के भाव, बोलने का अंदाज और मासूम कॉमेडी उसे बाकी कलाकारों से बिल्कुल अलग बना देती थी। मगर क्या आपको पता है जिसकी सारी जिंदगी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने में बीत गई, उसकी खुद की जिंदगी का कैसा दर्दनाक अंत हुआ था। अगर नहीं तो चलिए हम आपको इस काले सच से रूबरू करवाते हैं। वीडियो पूरा देखिएगा वरना बाद में पछताना पड़ेगा। यह कहानी है देवेंद्र वर्मा की। 23 अक्टूबर 1937 को ब्रिटिश भारत के कच्छ इलाके में एक बच्चे का जन्म हुआ। [संगीत] उसका नाम रखा गया देवेंद्र वर्मा। परिवार साधारण था लेकिन फिल्मों से एक छोटा सा रिश्ता जरूर था। उनके पिता फिल्म वितरण के व्यवसाय से जुड़े [संगीत] थे। शायद यही वजह थी कि बचपन से ही फिल्मों की दुनिया उन्हें अपनी ओर खींचती थी। [संगीत] कुछ समय बाद परिवार पुणे आकर बस गया। यहीं उनकी पढ़ाई पूरी हुई। कॉलेज में वे पढ़ाई के साथ-साथ नाटकों में भी हिस्सा लेने लगे। दोस्तों के बीच उनकी सबसे बड़ी पहचान थी उनकी टाइमिंग। वे बिना किसी कोशिश के लोगों को हंसा देते थे। लेकिन उस समय उन्हें खुद भी नहीं पता था कि यही हुनर एक दिन उनकी जिंदगी बदल देगा। [

संगीत] कॉलेज खत्म हुआ। जेब में बड़े सपने थे। लेकिन कोई पहचान नहीं। वो मुंबई पहुंचे। उस दौर में मुंबई लाखों सपने देखने वालों का शहर था। हर दिन सैकड़ों नौजवान फिल्मों में काम मांगने आते थे। ज्यादातर लोग बिना मौका पाए वापस लौट जाते। देवेंद्र वर्मा भी उन्हीं चेहरों में से एक चेहरा थे। लेकिन किस्मत [संगीत] ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। एक बार की बात है मशहूर एवीएम स्टूडियो नए कलाकारों की तलाश कर रहा था। देवेंद्र वर्मा ने भी स्क्रीन टेस्ट दिया। कैमरे के सामने उनका आत्मविश्वास, सहज अभिनय और मासूम चेहरा देखकर स्टूडियो के लोग प्रभावित हो गए। उन्हें तुरंत 3 साल के अनुबंध पर रख लिया गया। उस समय उन्हें हर महीने ₹1500 वेतन मिलने लगा, जो उस दौर में एक अच्छी खासी रकम मानी जाती थी। इसके बाद उन्हें अभिनय की ट्रेनिंग के [संगीत] लिए मद्रास भेजा गया। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसे कलाकार का सफर जो आने वाले चार दशकों तक हिंदी फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाने वाला था। कुछ समय बाद उन्हें पहली फिल्म मिली धर्मपुत्र एक नए कलाकार के लिए यह बहुत बड़ा मौका था। उन्होंने पूरी मेहनत से अभिनय किया। [संगीत] लेकिन किस्मत ने पहली परीक्षा आसान नहीं रखी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी। कई लोग पहली असफलता मिलने के बाद हार मान लेते हैं। लेकिन देवेंद्र वर्मा उन लोगों में से नहीं थे। [संगीत] उन्होंने खुद से सिर्फ एक बात कही। अगर एक दरवाजा बंद हुआ है तो दूसरा जरूर खुलेगा। और सचमुच [संगीत] कुछ ही समय बाद उनके सामने दूसरा मौका आया। फिल्म थी गुमराह। [संगीत] इस फिल्म में उनका किरदार बड़ा नहीं था। लेकिन जितनी देर वे पर्दे पर रहे दर्शकों ने उन्हें नोटिस करना शुरू कर दिया। उनका अभिनय बिल्कुल अलग था। वे चिल्लाकर नहीं हंसाते थे। वे आंखों के इशारों से, चेहरे के छोटे-छोटे भावों से और अपने संवाद बोलने के अंदाज से लोगों को मुस्कुराने पर मजबूर कर देते थे। यही उनकी [संगीत] सबसे बड़ी ताकत बन गई। धीरे-धीरे फिल्मकारों को एहसास होने लगा कि यह कलाकार साधारण नहीं है। इसके बाद एक-एक करके फिल्मों के प्रस्ताव आने लगे। 60 और 70 का दशक आते-आते देवेंद्र वर्मा हिंदी सिनेमा के सबसे भरोसेमंद कॉमिक अभिनेताओं में शामिल हो चुके थे। लेकिन असली तूफान अभी आना बाकी था।

साल 1975 एक फिल्म रिलीज हुई। चोरी मेरा काम। इस फिल्म में देवेंद्र वर्मा ने ऐसा शानदार अभिनय किया [संगीत] कि पूरा बॉलीवुड उनकी कॉमिक टाइमिंग का दीवाना हो गया। इस भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता पुरस्कार मिला था। [संगीत] यहीं से उनकी जिंदगी बदल गई। निर्माताओं की कतार लग गई। एक समय ऐसा भी आया जब देवेंद्र वर्मा एक साथ 16 फिल्मों की शूटिंग करने लगे। सुबह एक स्टूडियो, दोपहर दूसरे स्टूडियो और रात तीसरे स्टूडियो। इतना व्यस्त कार्यक्रम शायद ही किसी कॉमेडियन के हिस्से में आया हो। [संगीत] लेकिन हैरानी की बात यह थी कि इतनी व्यस्तता के बावजूद उन्होंने कभी अपने अभिनय की गुणवत्ता [संगीत] से समझौता नहीं किया। फिर आया वो दौर जब हर बड़ा अभिनेता अपनी फिल्म में देवेंद्र वर्मा को लेना चाहता था। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, [संगीत] संजीव कुमार, शशि कपूर, अमोल पालेकर, राजेश खन्ना, जितेंद्र, ऋषि कपूर, आमिर खान, शाहरुख खान उन्होंने लगभग हर पीढ़ी के सुपरस्टार के साथ काम किया। अंगूर में बहादुर गोलमाल खट्टामीठा रंग बिरंगी किसी से ना कहना नास्तिक अंदाज अपना-अपना दिल [संगीत] दिल तो पागल है हर फिल्म में उनका किरदार छोटा हो या बड़ा दर्शक उन्हें कभी नहीं भूल पाए क्योंकि देवेंद्र वर्मा अभिनय नहीं करते थे। वे अपने किरदार को जीते थे। देवेंद्र वर्मा की एक और खासियत थी। वह सिर्फ एक शानदार अभिनेता नहीं थे बल्कि एक बेहतरीन इंसान [संगीत] भी थे। बॉलीवुड में जहां हर दिन नई दोस्तियां बनती और टूटती हैं, वहीं देवेंद्र वर्मा अपने शांत स्वभाव और विनम्र व्यवहार के लिए जाने जाते थे। शायद यही वजह थी कि फिल्म इंडस्ट्री का लगभग हर बड़ा कलाकार उनका सम्मान करता था। [संगीत] इसी दौरान उनकी जिंदगी में प्यार ने भी दस्तक दी। उनकी मुलाकात हुई रूपा गांगुली से जो भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार की बेटी थी। दोनों की मुलाकातें बढ़ी, दोस्ती हुई और फिर यही दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। जब शादी की बात अशोक कुमार तक [संगीत] पहुंची, तो उन्होंने देवेंद्र वर्मा को करीब से परखा। उन्हें यह महसूस हुआ कि यह लड़का केवल अच्छा अभिनेता ही नहीं बल्कि बेहद सुलझा हुआ इंसान भी है। इसके बाद परिवार की सहमति से दोनों की शादी हो गई। शादी के बाद देवेंद्र अशोक कुमार के दामाद बन गए। लेकिन उन्होंने कभी इस रिश्ते का फायदा उठाकर काम नहीं मांगा। वे हमेशा कहते थे कि कलाकार की पहचान उसके रिश्तों से नहीं बल्कि उसके अभिनय से होनी चाहिए। [संगीत] देवेंद्र वर्मा और रूपा की कोई संतान नहीं हुई। लेकिन उन्होंने कभी इसका दुख सार्वजनिक रूप से जाहिर नहीं किया। वे एक [संगीत] दूसरे का साथ निभाते हुए बेहद सादगी से जीवन जीते रहे। फिल्मों की चकाचौंध के बीच [संगीत] भी देवेंद्र वर्मा का जीवन बेहद साधारण था।

ना कोई [संगीत] विवाद, ना कोई घमंड, ना कोई दिखावा। यही कारण था कि वे जितने बड़े कलाकार थे उससे कहीं बड़े इंसान माने [संगीत] जाते थे। समय के साथ बॉलीवुड बदलने लगा। कॉमेडी का अंदाज बदल गया। नई पीढ़ी आ गई। लेकिन देवेंद्र वर्मा ने कभी खुद को बदलने की कोशिश नहीं की। उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली और पुणे [संगीत] में शांत जीवन बिताने लगे। उनसे कई बार पूछा गया [संगीत] कि क्या उन्हें फिल्मों की याद आती है? वे मुस्कुरा कर कहते थे मैंने जितना काम करना था कर लिया। [संगीत] अब शांत जीवन ही अच्छा लगता है। लेकिन शायद किस्मत उनके लिए एक और कठिन परीक्षा तैयार कर रही थी। उम्र बढ़ने लगी और शरीर भी पहले जैसा साथ नहीं दे रहा था। फिर एक दिन बदकिस्मती से उनको ऐसी बीमारी लग गई [संगीत] जिसकी वजह से इंसान का दर्दनाक अंत ही होता है। वो थी किडनी की बीमारी। अभिनेता का इलाज शुरू हुआ। दवाइयां बढ़ती चली गई। धीरे-धीरे बीमारी ने उनके शरीर की ताकत छीननी शुरू कर [संगीत] दी। जो कलाकार कभी एक साथ 16 फिल्मों की शूटिंग करता था। अब कुछ कदम चलना भी थका देता था। जो चेहरा करोड़ों लोगों को हंसाता था। अब उसी चेहरे पर [संगीत] बीमारी की थकान और दर्द साफ दिखाई देने लगे। फिर भी उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। ना [संगीत] मीडिया के सामने ना अपने चाहने वालों के सामने। वे चुपचाप अपनी जिंदगी की [संगीत] सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ते रहे। और फिर आ गई 2 दिसंबर 2014 की वो [संगीत] रात। हर तरफ सन्नाटा था। लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि भारतीय सिनेमा का एक मशहूर कलाकार खोने [संगीत] वाला है। उस दिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचा।

डॉक्टरों की टीम ने इलाज शुरू किया। हर संभव कोशिश की [संगीत] गई, लेकिन लंबे समय से किडनी की बीमारी से कमजोर हो चुका शरीर अब जवाब देने लगा था। इसी दौरान उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया। डॉक्टर लगातार उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन जिंदगी की यह जंग अब उनके हाथ से फिसल चुकी थी। [संगीत] रात करीब 2:00 बजे अस्पताल के उस कमरे में मशीनों की आवाजें धीरे-धीरे थम गई। डॉक्टर बाहर आए और उन्होंने वह खबर सुनाई जिसे सुनकर पूरा बॉलीवुड स्तब्ध रह गया। देवेंद्र वर्मा अब इस दुनिया में नहीं रहे। सुबह होते-होते यह खबर पूरे देश में फैल चुकी थी। जिस कलाकार ने पूरी जिंदगी लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी, उनके जाने की खबर ने लाखों आंखों को नम कर दिया। देवेंद्र वर्मा जैसा कलाकार दोबारा पैदा होना बहुत मुश्किल है। आज उन्हें [संगीत] गए कई साल बीत चुके हैं। लेकिन जब भी टीवी पर अंगूर का बहादुर दिखाई देता है। जब भी गोलमाल या खट्टामीठा का कोई दृश्य सामने आता है। जब भी उनकी मासूम मुस्कान पर्दे पर लौटती है तो ऐसा लगता है जैसे देवेंद्र वर्मा आज भी हमारे बीच कहीं मौजूद हैं। क्योंकि कुछ कलाकार सिर्फ फिल्मों में नहीं जीते। वे लोगों की यादों में हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं और देवेंद्र वर्मा ऐसे ही अमर कलाकार थे। दोस्तों, क्या आपने कभी देवेंद्र वर्मा को जाना था? अगर हां, तो उनकी कोई फिल्म या किरदार आपको जरूर याद होगा? हमें कमेंट में जरूर बताइएगा। ऐसी ही [संगीत] और स्टोरीज के लिए आप फिल्मी स्टोरीज को सब्सक्राइब भी कर लेना।

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