डीएम अंकल मेरा एक काम कर देंगे। यह कहते हुए क्लास थ्री की एक बच्ची जिलाधिकारी के पास पहुंचती है एक मांग लेकर। पहले तो वहां मौजूद लोग बच्ची की बात सुनकर मुस्कुरा देते हैं लेकिन जब मांग सुनी तो लोग रियलाइज करते हैं कि प्रॉब्लम उसकी निजी नहीं थी। वो पूरे शहर के लिए बोल रही थी। समझते हैं कि मामला क्या है। यूपी के हाथरस में हर हफ्ते की तरह जन सुनवाई चल रही थी। लोग अपनी-अपनी शिकायतें लेकर जिलाधारी यानी डीएम अतुल वत्स के पास पहुंच रहे थे। तभी वहां क्लास थ्री में पढ़ने वाली एक छोटी सी बच्ची आश्वी भी एक एप्लीकेशन लेकर वहां पहुंचती है। आश्वी ने डीएम को बताया कि वह रोज ट्यूशन पढ़ने जाती है। रास्ते में एक रेलवे फाटक पड़ता है।
वहां अक्सर लंबा जाम लग जाता है क्योंकि मालगाड़ियों के गुजरने के दौरान फाटक काफी देर तक बंद रहता है। ऐसे में गाड़ियों की लंबी लाइन लग जाती है और उसे भी वहीं इंतजार करना पड़ता है। वो कहती है रेलवे फाटक पर इतना जाम लगता है कि ट्यूशन पहुंचने में देर हो जाती है और फिर डांट पड़ती है। आशी डीएम से कहती है कि अगर रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम का कोई समाधान हो जाए तो उसे और बाकी लोगों को भी राहत मिलेगी। इससे डीएम साहब एकदम इंप्रेस हो गए। क्यों? क्योंकि आशी सिर्फ शिकायत करने नहीं आई थी।
उसने अपनी तरफ से स्यूशन भी सजेस्ट किया। आज तक से जुड़े राजेश सिंघल की रिपोर्ट के मुताबिक छात्रा ने एक एलिवेटेड रेलवे ट्रैक बनाने की मांग की। डीएम अतुल वत्स ने बच्ची की बहुत तारीफ की। उन्होंने और क्या कहा सुनिए। कल जन सुनवाई के दौरान ही अपने पिता के साथ एक छोटी सी बच्ची जो थर्ड क्लास में पढ़ती है आशवी सेंट फ्रांसिस स्कूल है यहां पे उसमें वो आई थी और उसने एक बहुत ही अहम मुद्दा जिसको जनपद हाथरस फेस करता है उसके बारे में हम लोगों को अवगत कराया वो इशू यह है कि जब वो स्कूल से घर आती है और जब ट्यूशन पढ़ने के लिए बाद में जाती है तो एक बिजली कॉटन मिल्क फाटक है उसके ऊपर हमेशा जाम जो रेलवे आपका क्रॉसिंग होता है। उसका जो बैरियर होता है वह बंद हो जाता है। उसकी वजह से एक जाम लगा मिलता है। और उसका अनुरोध यह था कि वहां एक मालगाड़ी रुकती है आके और वो मालगाड़ी लगभग 30 मिनट खड़ी रहती है।
तो 30 मिनट तक बच्चे आवागमन नहीं कर पाते। तो ये उस एंटायरिटी में देखने के बाद उसने कुछ सलूशंस भी दिए इस चीज के लिए। लेकिन एंटायरिटी में देखने देखने के बाद मुझे समझ आया कि हाथर जनपद का एक यह बड़ा इशू है कि जनपद के बीच से ही एक इंपॉर्टेंट रेलवे लाइन जाती है और जनपद लगभग 3/4 एक तरफ और एक चौथाई एक तरफ विभाजित सा हो गया है। एक कृत्रिम विभाजन इस जनपद का हो रखा है।
तो इसका स्यूशन निकालने के लिए और कुछ ऐसे क्रॉसिंग जो जिनके ऊपर अभी ओवरबिज नहीं बन पाया है या फिर रेलवे ओवरबिज नहीं बना हुआ है पैदल आवागमन के लिए तो उसके लिए हम लोगों को एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने की आवश्यकता है और जाम की समस्या क्योंकि रेलवे क्रॉसिंग अगर बंद होगा तो सभी लोग रुकेंगे ही और फिर उससे पीछे ट्रैफिक एक्यूमुलेट होना शुरू हो जाता है। अब ये एक इंपॉर्टेंट रेलवे लाइन है। इसमें से रेलवे जो गाड़ियां है चाहे पैसेंजर ट्रेन हो या मालगाड़ी हो उनका आवागमन काफी है। तो इससे जो जनपद के वासी हैं उनके लिए इशू क्रिएट हो जाता है और यह जेन्युइन इशू है।
जिस निर्भीकता के साथ और जिस कॉन्फिडेंस के साथ उस बच्ची ने अपनी बात रखी और केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि पूरे जनपद को इस समस्या के निजात दिलाने के लिए अपनी बात रखी वो काफी अच्छा था और वो हमारे जो देखिए सरकार कार्यक्रम चलाती है। मिशन शक्ति के ऊपर जोर देती है। बच्चों में कॉन्फिडेंस इंस्टिल करने के बारे में बात करती है। आधी आबादी को उसका हक दिलाने की बात करती है। उन्हें इनफैक्ट आगे ले जाने की बात करती है। तो वो एक चीज मुझे उसमें दिखाई दी इसलिए मैंने उसको प्रोत्साहित करने के लिए कुछ चॉकलेट्स और एक बॉटल दे दी। डीएम ने भरोसा दिलाया कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। रेलवे अधिकारियों से बात की जाएगी और ऐसा समाधान निकालने की कोशिश होगी जिससे लोगों को रोज-रोज़ जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा। यही नहीं उन्होंने आशी को एक छोटा सा गिफ्ट भी दिया।
उसका हौसला भी बढ़ाया। फिर अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी शेयर किया। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक हाथरस में रेलवे फाटक पर लगने वाला जाम कोई नई प्रॉब्लम नहीं है। जब भी मालगाड़ी या दूसरी ट्रेन गुजरती है, फाटक लंबे समय तक बंद रहता है और लंबा जाम लग जाता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इसका एक परमानेंट सलूशन मांगते रहे हैं। वैसे जन सुनवाई में डीएम के सामने बच्चों की ऐसी मांगे कोई नई बात नहीं है। उत्तर प्रदेश के ही लखीमपुर खीड़ी में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान 13 साल के अमिताभ गुप्ता ने डीएम और अधिकारियों के सामने बेबाकी से अपने परिवार की परेशानी रखी। पिता की मानसिक बीमारी, आर्थिक तंगी और घर पर लगे ताले का मुद्दा उठाते हुए उसने प्रशासन की काम करने के अंदाज पर भी सवाल उठाए।