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जब सेट पर खाली कुर्सी से बातें करने लगे थे गोविंदा; अंधविश्वास या कुछ और?

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साल 2007 में मॉरीिशस में एक फिल्म मनी है तो हनी है की शूटिंग चल रही थी। तभी सेट पर एक दिन उसके एक्टर गोविंदा ने कहा कि वो लो फील कर रहे हैं और अभी शूटिंग नहीं कर सकते। उन्होंने अपने एस्ट्रोलॉजर से फोन करके पूछा कि वो क्या करें? उस ज्योतिषी ने गोविंदा से कहा कि अभी राहु काल चल रहा है। इसलिए आज तुम्हें पूरी शूटिंग के दौरान अपने साथ एक मुर्गी रखनी चाहिए वरना बेहद बुरा होगा। अब गोविंदा इतने अंधविश्वासी थे कि इन्होंने प्रोडक्शन हाउस को कहा कि जल्दी से एक मुर्गी का इंतजाम करो वरना मैं आगे शूट नहीं करूंगा। कई घंटे तक शूटिंग रुकी रही और मॉरीशस की शॉप वगैरह में खोजकर कहीं से एक मुर्गी मंगाई गई। गोविंदा ने मुर्गी को साथ रखकर शूटिंग की शुरुआत की। लेकिन एडवर्स कंडीशन और गर्मी की वजह से कुछ ही घंटे में बेचारी मुर्गी ने दम तोड़ दिया। लेकिन ज्योतिषी ने मुर्गी साथ रखने को कहा था तो गोविंदा पूरे दिन उस मरी हुई मुर्गी के साथ शूटिंग करते रहे और तमाम क्रू मेंबर्स आपस में बातें करते रहे कि गोविंदा पागल हो गए हैं। लेकिन राहु काल अब तक खत्म नहीं हुआ था। इसीलिए शाम होने तक गोविंदा केप्ट शूटिंग विथ अ डेड मुर्गी इन हिज हैंड। गोविंदा को करीब से जानने वाले बताते हैं कि यही वो वक्त था जब मीडिया में यह खबर सामने आई कि गोविंदा भारी सुपरस्टिशन के शिकार हो गए हैं।

जैसे रन भोला रंग के सेट्स पर एक दिन अचानक गोविंदा के कहने पर एक स्पेशल गेस्ट को लाया गया जिसके सामने चीची ने काफी प्रेयर्स की और उसे फूल पत्ते भी चढ़ाए। पता है वो गेस्ट कौन थी? अरे ये थी एक बकरी। वो भी मैं अनपढ़ आदमी सर फिमलैंड के हाथ में लग गया ना मैं। इसी तरह इनके साथ काम करने वाले कुछ क्रू मेंबर्स ने एक बार यह दावा किया कि यह सेट पर किसी साए से बातें किया करते हैं और अपनी स्वर्गवासी मां के होने का दावा करते हैं। साथ ही बाद में तो गोविंदा उनके लिए अपने बगल में एक चेयर भी लगवाने लगे थे। जिससे इनके साथ काम करने वाले लोग इनसे डरने लगे थे और साथ काम करने से कतराने लगे थे। ब्लैक सनग्लासेस लगाकर आए बैठे हैं और एक खाली चेयर उनके साथ लाकर उनके भाई ने रख दी। खाली चेयर जब लाकर रखी तो गोविंदा इस तरह सनग्लासेस ब्लैक कलर की पहनकर इस तरह बात कर रहे हैं कि हां तो लोग देख रहे हैं। लोग कह रहे हैं यार ये एम्प्टी चेयर से क्या बात करा? तो उनके भाई ने कहा कि ये हमारी मां जी हैं। उनसे बात कर रहे हैं।

उनकी जो रूह है वो इनके पास आती है और ये देख सकते हैं उनको। वहम आ गया। अभी बोले ये यहां से जो है अपना शेलर गिर जाएगा। यहां से तू ऑटो और पता चला कैसे शनिर भी गिर जाता था। तू कादर खान डूब जाएगा। पता नहीं कैसे-कैसे क्या होता है। अब वो 20 फीट ही गए होंगे। वो डूब गई। दोनों दो बोटे थी दोनों बंद हो गई। कैमरा भी डूब गया। कादर खान साहब भी डूब गए। जो जो मेरे थॉट किसी के लिए आया ना वो मैंने मैंने मेरी आंख से वो सत्य होते हुए देखा है। अंधविश्वास में डूब जाना। शूटिंग से पहले सभी के कपड़े बदलवाने के जिद करना, सेट पर देर से आना, बातबात पर झूठ बोलना, डायरेक्टर को परेशान करना, किसी को भी थप्पड़ जड़ देना, सुपरस्टार वाले ट्रम्स दिखाना, एक साथ दर्जनों बी और सी ग्रेट फिल्में साइन कर लेना और उम्र बढ़ने के बावजूद साइड रोल ना करने की ज़िद। अगर कोई फिल्म स्टार इतनी गलतियां करे फिर भी उम्मीद करे कि उसका करियर नहीं डूबेगा तो यह उसकी गलतफहमी ही कही जाएगी। आप अभी तक 90ज के ओरा में मत रहो। आज गोविंदा का प्रॉब्लम क्या हुआ? गोविंदा क्यों नहीं दिख रहा है आज 17 साल से? क्यों गोविंदा की गोविंदा का जो सर्कल है ना वो बहुत गलत सर्कल में है वो। मैं बोलती हूं ची अभी 90ज का वक्त खत्म हो गया। इट्स 2025 आज तुम देखो Netflix oटीt क्या चल रहा है और जो इर्द-गिर्द जो उसका माहौल है वो अच्छा नहीं है। इसकी वजह से वो थोड़ा भटक जाता है। गोविंदा ने अपने करियर में खूब पॉपुलैरिटी देखी। ढेर सारी सुपरहिट फिल्में दी और 90 के दशक में इंडस्ट्री पर राज किया। हमारे जनरेशन के अंदर उससे बेटर ना एक्टर आया है ना एक्टर आएगा और वो है गोविंदा। मेरे हिसाब से लेकिन आज भी वन ऑफ़ द मोस्ट अमेजिंग एक्टर्स। इसकी खासियत तो यह है कि उससे अच्छा एक्टर नहीं है कोई। एक्टिंग में बहुत माहिर है। सलमान खान, शाहरुख खान और ये आमिर खान ये तीन के बराबर एक गोविंदा है। खासकर कॉमेडी फिल्मों के तो यह बादशाह थे। और नाम, शोहरत, इज्जत और पैसा सब कुछ भरपूर कमाया। दिल बहलता है मेरा। आपके आ जाने पर बदलते दौर के साथ इनके करियर का ग्राफ गिरने लगा। गोविंदा ने उसे सही तरीके से एक्सेप्ट नहीं किया और अपने करियर के ढलान के लिए अलग-अलग लोगों को [संगीत] ब्लेम करने लगे। मैं यह क्या डिस्कस करूं आप लोगों से कि इस सिनेमा में ऐसा था, इस सिनेमा में ऐसा था। अरे सिनेमा ही नहीं दिखा रहे हैं। फिल्म तो दिखाइए। मुझे मंच तो प्रदान कीजिए। कभी दूसरे एक्टर्स को, तो कभी डिस्ट्रीब्यूटर्स या प्रोड्यूसर्स को। उस टाइप के लोग मिल गए हैं कि जो नहीं चाहते कि गोविंदा की फिल्म लगे। ये बीमारियां दी गई है। है नहीं कहीं ये हैं। जो लोगों ने दी है। ये अच्छे लोग नहीं है। हालांकि इसमें सच्चाई भी हो सकती है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन आप अपने ही फील्ड के लोगों को परेशान करेंगे। उनकी शूटिंग खराब करेंगे। उन्हें टेंट्रम दिखाएंगे तो वह भी आपके लिए प्रॉब्लम क्रिएट करेंगे ही। फिर भला इसमें शिकायत की क्या बात है? यह तो टिट फॉर टैट वाला हिसाब है। आप शायद ही सपने में सोच पाएंगे।

ऐसा क्यों? ऐसे क्या है? परंतु वो हिस्सा हो सकता है षड्यंत्र का। थोड़ा संभल के रहना चाहिए। लेकिन डूब चुके करियर और इनके साथ काम कर चुके ढेर सारे लोगों के नेगेटिव बयानों के बावजूद आज भी गोविंदा की शेखी बघारने वाली आदत नहीं गई है। पिछले साल जिस वक्त मेरा डिस्कस चल रहा था ना कि गोविंदा के पास काम नहीं है बेचारे के पास। हां आजकल तुम्हारा यही लिखा जा रहा है। ठीक है। मैं 100 करोड़ तुम्हारे ₹100 करोड़ छोड़ चुका था। अच्छा उसमें अच्छा मैं इधर ये सम शीशे के आगे खड़ा रह के ना मैं अपने आप को थप्पड़ मार रहा था। मेरा दिमाग ख़राब हो गया है। इतने पैसे मिलेंगे सब अपने को फाइनेंस कर देता। ना ही यह अब भी झूठ बोलने से बाज आते हैं। कभी किसी पडकास्ट में तो कभी किसी टीवी शो में जैसे हॉलीवुड की एवेटर फिल्म में इन्हें कास्ट करने और इनके मना करने वाला दावा जिसे लेकर सोशल मीडिया पर इनका खूब मजाक भी उड़ा। हां ये मेरे बोले साथ मेरे साथ आया है। आज जेम्स कैमरा है। आओ जी थे आओ। फिल्म कर ले तू। मैंने कहा अच्छा ये क्या कर रहे हैं? तो मैंने शाम में खाने पे बुलवाया साथ में। मैं बोला आइए साथ में डिस्कस करते हैं। तो वो पिक्चर का टाइटल भी मैंने ही दिया था। उसका टाइटल था एविटार। अवतार। अवतार वही जो अवतार बोला तुम एक तो ना अवतार चाह रहे हो और इस टाइप का अवतार चाह रहे हो कि वो अपंग है। और वो ईश्वर का अंश है और वो अपंग है। मैं कहा ये नहीं होगा। और मैं जिस टाइप का आदमी हूं ये 410 दिन तुम चाह रहे हो कि मैं मैं कहा मैं आयुर्वेद पतंजलि का चिकित्सा और क्या-क्या करता रहता हूं और तुम ये कहा मुझे कलर करोगे पूरी बॉडी में मेरे मैं कहा मुझसे नहीं होगा सॉरी तो गोविंदा के करियर के डाउनफॉल के पीछे क्या वजह रही इस बारे में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए थे फिल्म मेकर पहला निहलानी ने जिन्होंने गोविंदा के साथ कई हिट फिल्में दी थी। YouTube पर फ्राइडे टॉकीज से बात करते हुए पहला नेहलानी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि गोविंदा धीरे-धीरे अंधविश्वासी होते गए और कभी सेट पर झूमर गिरने तो कभी कादर खान के डूबने जैसी बातें करके सबको डराने लगे। धीरे-धीरे उसका विश्वास जो है स्पिरिचुअल होता गया। कान का कच्चा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि गोविंदा भविष्यवाणियां करने लगे थे और अंधविश्वास में इस तरह डूब गए थे कि शूटिंग के समय लोगों को तुरंत कपड़े बदलने का आर्डर तक देने लगे। लोगों का विश्वास डेट आज ये है आज मंगल है। आज मैं ये नहीं करूंगा। ऐसे मैंने एक दिन शमी अंकल से कहा अंकल यहां स्विमिंग पूल से उठ जाइए प्लीज। मैं आपको बहुत प्यार करता हूं ना। आप यहां से उठिए अपन वन में चलेंगे। वन में खाना खाएंगे। तो मैं ऐसा ज़िद करके उठा के उनको अंदर लेके गया। मुझे लग रहा था कि उसका वास्तु अच्छा नहीं है। एक बार गोविंदा ने सेट पर पेन लाने पर पाबंदी लगा दी क्योंकि उन्हें लगता था

कि कोई मीडिया पर्सन उनके बारे में कुछ गलत लिख सकता है। पहला आज के मुताबिक यह सब उनकी सुस्ती और भोलेपन के साथ मिलकर उनके डाउनफॉल का कारण बना। मैं मैंने सोचा कि ये 27 नंबर चाहिए। यह मुझे लकी नंबर है क्योंकि टोटल नंबर नाइन आ जाता है। पहला निहलानी ने कहा कि गोविंदा की अभिनय क्षमता बेजोड़ है और वह दिल से अच्छे इंसान हैं। लेकिन उनके साथ काम करना बेहद जोखिम भरा हो गया था क्योंकि वो अनप्रिडिक्टेबल और अनप्रोफेशनल हो गए थे। बोले अरे वो फेंक रहा था गोविंदा। [हंसी] पहला आज निहलानी ने यह भी बताया कि गोविंदा बिना सोचे समझे दर्जनों बी सी ग्रेट मूवीज साइन करने लगे थे। वो एक साथ पांच छह फिल्मों में काम करते थे और किसी को पता नहीं होता था कि वो कब कहां होते थे। जी हां मेरे पास 70 पिक्चर 70 फिल्में हैं। कभी मैं तीन करता हूं शूटिंग। कभी दो करता हूं। कभी चार करता हूं कभी पांच करता हूं। फिल्मों की शूटिंग? हां। चार पांच अलग-अलग फिल्मों की शूटिंग। वो हमेशा लेट पहुंचते और फिर झूठ बोलते थे। जब तक रिश्ते में दम ना हो। करेक्ट। तो वो रिश्ता उसने रखा ही नहीं किसी के साथ में। करेक्ट। क्योंकि लेट जाना, लेट आना और टाइम टू टाइम बड़ी हैवी इंटरेस्ट, हैवी रिस्क तो वो सारी चीजें जो है ना अगेंस्ट द प्रोड्यूसर मतलब कम से कम हम खुद से तो ईमानदार हो जाए यार और किसी का तो बहुत बड़ा पुण्य आत्मा चाहिए। पहला के मुताबिक गोविंदा कहते थे कि वह यह सब पैसों के लिए कर रहे हैं। जिस पर पहला ने उन्हें कहा कि यह सोचने का खतरनाक तरीका है। उसी इंटरव्यू में पहला निहलानी ने कहा कि गोविंदा का यह दावा कि उन्हें जेम्स कैरून की फिल्म अवतार ऑफर की गई थी। यह बिल्कुल भी सच नहीं है। अभिनेता ने हॉलीवुड की हिट फिल्म को अपनी अधूरी हिंदी फिल्म अवतार समझ लिया था। जिसके लिए उन्होंने 40 मिनट तक शूटिंग की थी लेकिन बाद में यह फिल्म बंद कर दी गई। मैं धन्यवाद दूंगा प्रहलाद जी के साथ ये जो शुरुआत हुई है जैसे हम लोगों का वर्क जो है वो हमेशा हम लोग कामयाब रहे हैं। शोला शबनम हो या आंखें हो। आपकी ये जो फिल्म आ रही है अवतार इसके बारे में और अपने कैरेक्टर के बारे में हमें थोड़ा सा बताइए। कैरेक्टर के बारे में तो अभी तो अभी तो फिल्म स्टार्ट हुई है। तो ये तो बात हुई गोविंदा के सुपरस्टिशन और उनके झूठ बोलने की। अब बात करते हैं उनकी लेट लतीफी की। एज अ सीनियर डांट लगा देते थे क्योंकि आपको तो पता है मैं बहुत टाइम पे आया करता था। बिल्कुल [हंसी] मतलब इतना टाइम का पक्का था मैं के बहुत सारे आर्टिस्ट लोग जो है बहुत सारा कामवाम करके आ जाते थे। अच्छा आया। तो जैसे-जैसे वो बड़े स्टार बनते गए उनके टैंड्रम भी आसमान छूने लगे। उस इंसान ने टाइम की कदर नहीं की। आज टाइम [संगीत] ने उसकी कदर छोड़ दी। वो आदमी बड़े मियां छोटे मियां में अमित जी को भारी पड़ गया था। ही इज सो गुड ही इज सो टैलेंटेड। कई डायरेक्टर्स ने उनके साथ काम ना करने के पीछे इसे भी एक बड़ी वजह बताई और कहा कि पूरा फिल्म क्रू सुबह शूटिंग लोकेशन पर पहुंचकर रेडी रहता। घंटों इंतजार करता लेकिन गोविंदा ना ही सेट पर पहुंचते और ना ही लगातार फोन रिसीव करते। वो तो पूरी इंडस्ट्री जानती थी। ये स्वभाव था उनका। वो पता नहीं लेट हो जाता था और फिल्में इतनी कर ली थी उसने तो एक को टाइम देते हुए शायद नहीं पहुंच पाता था वहां। जी। एंड लॉट ऑफ़ पीपल हैड टू वेट। स्विट्जरलैंड में थे हम लोग करीब 75 लोग थे। एक दिन गोविंदा नहीं आए, दो दिन नहीं आए, तीन दिन नहीं आए। तो थर्ड डे मैंने उसको फोन किया। अगर आपको नहीं आना, हम ही वापस आ जाते। सुबह की शिफ्ट में कभी दोपहर को दर्शन देते तो कभी कोई बहाना बनाकर शूट ही कैंसिल कर देते थे। तो गोविंदा की जो है ना बहुत सारी चीजें जो है ना अनसर्टेन थी जो पहली पिक्चर में उन्होंने सबसे 5000 10000 11000 लेके जो है जो हमेशा मतलब जिस तरह से अब आज हम देश में झूठ ही झूठ जो है सुनते रहते हैं तो उस तरह से जो है ना उस टाइम में जो है झूठ गोविंदा की मतलब बहुत चलती थी हम निकल चुका है आ गया इधर है उधर है [हंसी] वो पता चला

सेट पे भी नहीं पहुंचा बोला अभी निकल गया। इससे जहां फिल्म प्रोड्यूसर परेशान होने लगे, वहीं साथ काम करने वाले एक्टर्स भी गोविंदा से चिढ़ने लगे। यहां तक कि कई बार अमिताभ बच्चन को भी इसकी वजह से घंटों सेट पर वेट करना पड़ गया। कि वो रजनी जी और वो तो पहले अमित जी से पंक्चुअल तो कोई है ही नहीं। जी। वहां आउटडोर में भी यह लेट पहुंचता था थोड़ा। तभी इसी बीच एक ऐसी घटना घटी जिसने गोविंदा के वजूद को हिला कर रख दिया। हुआ यह कि हिंदी सिनेमा के खूंखार विलेन कहे जाने वाले अमरीश पुरी साहब गोविंदा के साथ एक फिल्म में काम कर रहे थे। वो वक्त के बेहद पाबंद थे तो वहीं गोविंदा के लिए समय की कोई कीमत नहीं थी। तो कई दिन शूटिंग पर यह सुबह 9:00 बजे के शिफ्ट में शाम के 6:00 बजे पहुंचते थे। गोविंदा की इन हरकतों से अमरीश पुरी बेहद झल्ला गए और उन्होंने जब इसकी शिकायत की तो दोनों में झगड़ा हो गया। गुस्से में अमरीश पुरी ने पूरे क्रू मेंबर्स के सामने गोविंदा को थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना के बाद जैसे सब सन्नाटे में आ गए। हालांकि बीच बचाव करके यह फिल्म तो जैसे तैसे पूरी हुई लेकिन इसके बाद दोनों ने कभी साथ में काम नहीं किया। गोविंदा के लिए यह पहला झटका था लेकिन यह फिर भी नहीं सुधरे और साथ ही इस बीच इनकी 16 फिल्में लगातार फ्लॉप होती चली गई। इसके बाद एक और घटना घटी। साल 1990 में हेमा मालिनी की एक फिल्म आवारगी बन रही थी जिसमें गोविंदा को वो एक्टर लेना चाहती थी तो एक्टर्स वाली इस फिल्म में उन्होंने गोविंदा के साथ अनिल कपूर को भी कास्ट किया था और जब यह बात गोविंदा को पता चली तो इन्होंने फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया इसके बाद महेश भट्ट और हेमा मालिनी ने गोविंदा को समझाने की काफी कोशिश की लेकिन यह बिल्कुल नहीं माने। फिर हेमा मालिनी ने अपने पति धर्मेंद्र को सारा किस्सा सुनाया और उन्होंने गोविंदा को समझाने के लिए अपने घर बुलाया। लेकिन वहां इतनी ज्यादा बात बढ़ गई कि गुस्से में धर्मेंद्र ने भी अपना आपा खो दिया और गोविंदा को थप्पड़ जड़ दिया। हालांकि फिर बीच बचाव हुआ और आखिरकार गोविंदा ने उस फिल्म में काम किया। बताया जाता है कि तब गोविंदा का बिहेवियर काफी इनसेन होने लगा था। इसी सेल्फ ऑब्सेशन और ईगो में इन्होंने कई और लोगों के साथ भी बदतमीजियां कर दी। जिसे मीडिया ने खूब उछाला और गोविंदा पर बदतमीज स्टार होने का ठप्पा लगता चला गया। पिक्चर ज्यादा चल रही थी उन दिनों। तो थोड़ा सा था हवा में था मैं। [हंसी] वैसे तो गोविंदा के चेहरे पर हमेशा मनमोहक मुस्कान रहती थी। लेकिन फैंस आम लोगों और फिल्म क्रू के साथ भी कभी-कभी इनका रवैया बेहद शर्मनाक हो जाता था। वैसे गोविंदा के रूट बिहेवियर के कई किस्से हैं लेकिन हम फिलहाल आपको उनमें से कुछ ज्यादा कंट्रोवर्शियल इंसिडेंस बता रहे हैं। साल 2008 में फिल्म मनी है तो हनी है के सेट पर गोविंदा ने अपने एक फैन के गाल पर जोरदार तमाचा जड़ दिया। उस शख्स का नाम संतोष राय था जिसने गोविंदा को माफ नहीं किया बल्कि उनके खिलाफ मुंबई हाई कोर्ट में केस कर दिया। वहीं पिटीशन रिजेक्ट होने पर संतोष सुप्रीम कोर्ट चले गए। वहां लंबा केस चला और गोविंदा के वकीलों ने कहा कि संतोष शूट पर मौजूद फिल्म क्रू की लड़कियों के साथ बदतमीजी कर रहे थे। इसलिए गोविंदा को गुस्सा आ गया था और थप्पड़ मार दिया। लेकिन महंगे लॉयर्स की टीम अपनी इस थ्योरी को साबित नहीं कर पाई और 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने संतोष के पक्ष में फैसला सुनाया जिसमें गोविंदा को ₹5 लाख का जुर्माना और पीड़ित से माफी मांगने की सजा सुनाई गई और गोविंदा को ऐसा करना भी पड़ गया। पर एक्टर गोविंदा ने मान लिया है कि वह ना सिर्फ माफी मांगेंगे बल्कि 5 लाख का जुर्माना भी देंगे। तस्वीरों में आप देख सकते हैं किस तरह से फैन को उन्होंने थप्पड़ मारा था जो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। यानी उस फैन ने अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट से समझौता नहीं किया और इन्हें मजा चखा कर रख दिया। संतोष राय का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 12 फरवरी की शाम गोविंदा जूहू के एक होटल में उनसे मिले लेकिन उन्होंने माफी का कोई जिक्र नहीं किया। पीड़ित के मुताबिक गोविंदा ने कहा तुम मेरे कारण फेमस हो गए हो। तुम्हें तो हमें ही कुछ देना चाहिए। तो वो कह रहा है पहले जमाने में जैसे राक्षसों को बुलाया करते थे और राक्षस ईश्वर को दौड़ाया करते थे।

ऐसे ही मैंने आपको अभी दौड़ाया है। कैसा लग रहा है? अच्छा बोलो अभी। हां। अभी मेरे को तीन चार करोड़ दो। आप आस्तेआहिस्ते करके मैं आपका लौटा दूंगा। डेफिनेटली। वो तुम रिकॉर्ड करो। मैंने रिकॉर्ड कर लिया। भेज दिया कोर्ट में जब मैंने कोर्ट [हंसी] में भेज दिया तो अब उसका नाम ऐसा था कि ऑल द वुमस वर सेइंग मी कि डोंट उसके साथ में आप और कुछ भी गलत नहीं कीजिए। अच्छा वो उसी उसका नाम संतोष था। संतोष था। सब स्त्रियां मुझसे कहे कि आप गलत नहीं करेंगे। इस इंसिडेंट ने भी गोविंदा के करियर पर काफी बुरा असर डाला और फैंस का एक बड़ा सेक्शन जो गोविंदा को अपने बीच का हीरो मानता था वो इनसे कटता चला गया। इसी बीच गोविंदा ने एक और बड़ी गलती कर दी जो इनके करियर की ताबूत की आखिरी कील साबित हुई। इस बार गोविंदा ने फिल्म डायरेक्टर नीरज बोरा को सरेआम थप्पड़ मार दिया। फिल्म थी साल 2013 में आई रन भोला रन। आर्यन वैध फिल्म में विलेन बने थे और उन्हें गोविंदा से फाइट सीन के दौरान उनकी पिटाई करनी थी। इस सीन के दौरान आर्यन ने गोविंदा को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। ऐसे में गोविंदा ने बिना कुछ सोचे समझे डायरेक्टर नीरज बोरा को तमाचा जड़ दिया। उस समय की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो गोविंदा का कहना था कि डायरेक्टर ने फिल्म में इस सीन को इनकी बेइज्जती करने के लिए जानबूझ कर रखा था। लेकिन इस इंसिडेंट के बाद फिल्म मेकर्स का एक पूरा कुबा इनसे नाराज हो गया और एक तरह से यह बॉयकॉट कर दिए गए। गोविंदा के एक और गलत फैसले की बात की जाए तो साल 2004 में फिल्मी दुनिया छोड़कर इन्होंने राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस पार्टी की सीट से इलेक्शन जीतकर 2003 से लेकर 2005 तक फिल्म इंडस्ट्री से ब्रेक ले लिया। लेकिन सांसद के तौर पर गोविंदा पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुए और इन्हें लोगों की काफी आलोचनाएं झेलनी पड़ी। इन पर इल्जाम लगा कि अपने क्षेत्र के लोगों से मिलते ही नहीं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं। खासतौर पर जुलाई 2005 की बारिश के दौरान जिसमें 450 लोगों की जान चली गई थी। पर गोविंदा घर में आराम फरमाते रहे। मैं बहुत करप्ट आदमी हूं। इसी तरह अपनी लेट लतीफी और आलस के लिए जाने जाने वाले गोविंदा पॉलिटिक्स में टिक नहीं पाए और बाद में इसे अपना गलत फैसला बताया। इसके बाद गोविंदा ने फिर से फिल्मों में वापसी की और 2006 में फिल्म भागमभाग में नजर आए। हालांकि ये फिल्म तो चल गई लेकिन इसके बाद उनकी लगभग सारी फिल्में फ्लॉप हो गई। जैसे मनी है तो हनी है चल चला चल। नॉटी एट 40, रंगीला राजा, हॉलिडे, आ गया हीरो आदि। क्योंकि कंपट्स किया नहीं सर। मेरी चॉइस है फिल्मों की आप देखिए। अदरवाइज मैंने फिल्म ही ऐसी चूज़ की होती हुई थी कि मुझे नेशनल अवार्ड मिल जाते हैं। मुझे वर्ल्ड के बेस्ट अवार्ड मिल जाते हैं। मैंने भी ऑस्कर में जाकर सूट पहन के गया होता मैं। फिर मुझे ऐसा लगा ये नहीं चाहिए भैया। ये सभी चीजें नहीं मांगती है। गोविंदा ने तब कई दोयम दर्जे की फिल्में साइन कर ली। तो कई अच्छी फिल्में सिर्फ इसलिए मना कर दी क्योंकि उनमें गोविंदा का सेकंड लीड था और उम्र ढलने के बावजूद 50 साल के गोविंदा बस सोलो लीड बनना चाहते थे या मल्टीस्टारर मूवीज में अपना रोल सबसे स्ट्रांग चाहते थे। मेरा झगड़ा सिर्फ एक ही बात से होता है। तू काम कर। पब्लिक तुझे मिस कर रही है। मैं बोलती हूं तू वेट लूज कर। ही शुड लूज कम से कम 20 किलोस। यू आर वेस्टिंग योर टाइम बिकॉज़ ऑफ़ द फोर पीपल विथ हुम यू आर सिटींग। उन लोग तुझे अच्छी बात नहीं सिखा रहे। हम्म। सब फालतू बात सिखा रहे हैं। अच्छे लोगों के साथ बैठो, अच्छा काम करो, अच्छा डायरेक्टर लो। अभी 90ज का ओरा चला गया ना आजकल। देखो कहां से कहां चला गया सिनेमा। जबकि फिल्म पार्टनर [संगीत] में

सलमान खान के साथ गोविंदा की जोड़ी को खूब पसंद किया गया था। और गोविंदा ऐसे रोल आगे भी करते तो इससे उनके करियर को फायदा ही होता। दे नख दे सोने लग [संगीत] मेनु दे नख सोने लग। वहीं तब अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और संजय दत्त जैसे इनके कई कंटेंपररी एक्टर्स आराम से साइड रोल करने में बिजी थे और खूब शोहरत भी बना रहे थे। इसके साथ ही साल 2000 के बाद बॉलीवुड में कॉर्पोरेट की एंट्री हुई जो एक्टर्स के हिसाब से नहीं चलते थे बल्कि एक्टर्स को अपने हिसाब से चलाते थे। तब ऐसे कई इंसिडेंट्स हुए कि गोविंदा को साइन करने के बाद इनके टेंट्रम की वजह से इन्हें फिल्मों से आउट कर दिया गया। या नखरे ना झेलने पर इन्होंने कई फिल्में खुद ही छोड़ दी। बॉलीवुड शब्द ही अच्छा नहीं। बॉलीवुड ही गलत शब्द है। शब्द ही अच्छा नहीं। क्या करें? सर [गला साफ़ करने की आवाज़] नहीं सर आई हेट दिस। ये बॉलीवुड नहीं है। बॉलीवुड नहीं होना चाहिए ना ये। गोविंदा ने तब कई फिल्में बनाई भी लेकिन वो भी बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर पड़ी क्योंकि इंडस्ट्री में प्रोड्यूसर बनने के लिए भी एक स्ट्रांग ग्रुप और सपोर्ट की जरूरत होती है जो यह खो चुके थे। इस तरह गोविंदा ने अपने प्रोफेशन में वह तमाम गलतियां की जिससे किसी स्टार का करियर अफेक्ट होता है और नतीजा यह हुआ कि इतने बड़े स्टार को घर बैठना पड़ा और अपना फैन बेस भी खोना पड़ा। फिल्म मेकर्स इनसे नाराज हो गए। डिस्ट्रीब्यूटर्स इनकी फिल्में रिलीज करने से पल्ला झाड़ने लगे और इनके कंटेंपररी एक्टर्स भी कटने लगे। इसी वजह से जब कुछ दिनों पहले गोविंदा के पैर में गोली लगी थी तो कई लोगों ने मजाक उड़ाते हुए कहा था कि इन्होंने अकेलेपन की वजह से खुद ही ऐसा कर लिया होगा। यहां तक इनकी पत्नी ने भी मजाक में कुछ ऐसा ही रिएक्शन दिया था। मैंने बोला इसको कैसे अचानक से लग गया। तो बोलते खुश तो बहुत होगी तुम। [हंसी] पहला खुश तब होती जब सीने पे लगता है बेटा। तो गोविंदा के करियर के डूबने की वजह क्या रही? क्या गोविंदा इसके लिए खुद जिम्मेदार रहे या इनको बर्बाद करने में किसी और एक्टर डायरेक्टर का हाथ रहा? इस तरह के दावे अभी भी लोग करते हैं। बहरहाल आपको क्या लगता है? कमेंट करके जरूर बताइएगा।

मतलब ये वही गोविंदा है जो एक समय पे 49 फिल्में साइन कर लेते हैं और आज ये टाइम है। ये ये जो बदलाव आप देखते हैं मतलब एक समय ऐसा था साइन करने के लिए। तो इसमें इसमें बहुत ज्यादा क्या वो विचार करना है। ये तो समय है। वो तो हर व्यक्ति के साथ होता है। देवताओं के साथ हुआ है। हमारी तो औकात ही नहीं है। थोड़ा सा फिल्म इंडस्ट्री में जेलसी फैक्टर्स जो है मैं तो तारीफ का ही शिकार हुआ हूं हमेशा जिस जितनी ज्यादा तारीफ हुई है मेरी उसकी वजह से मैं आउट हुआ हूं। फिल्म लाइन से कह दिया भैया आपने इनसे अच्छा काम कर दिया या आपने इनसे ज्यादा अच्छा डांस कर दिया या इनसे अच्छा ज्यादा नजर आ गए। तो उसी वजह से मैं आउट हुआ हूं। मैं प्रियंक वाजपेयी हूं आपके साथ। आप देख रहे हैं डार्क बॉलीवुड। आपसे मिलता हूं जल्द अगले एपिसोड में। तब तक के लिए शुक्रिया नमस्कार। प्रयोग करने के लिए, चालाकी दिखाने के लिए मैं बहुत कमाल हूं। मेरी तरफ देखिए मेरे जैसा दूसरा तो कोई हो ही नहीं पाएगा और मैं जो चाह

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