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दुनिया से जाते-जाते 4 जिंदगियां बचा गया! हमेशा के लिए कैसे अमर हुआ इंदौर का बेटा?

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यह लोग कहां से आते हैं? सैल्यूट दिल से। जय हिंद सर। आप सदा-सदा के लिए अमर हो गए। आपको हमेशा याद किया जाएगा। यह कुछ रिएक्शन हैं जो इंदौर के गौरव दवे के लिए सोशल मीडिया पर लिखे गए हैं। गौरव को कोई रियल हीरो कह रहा है तो कोई फरिश्ता बता रहा है। गौरव उन छह लोगों के लिए भी भगवान की तरह हैं जिनकी जान बची है। गौरव के अंगों ने उनको नया जीवन दिया है। इंदौर के खजूरी बाजार में रहने वाले 25 साल के गौरव दवे अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन वह अमर हो गए हैं। गौरव का सपना पर्दे पर एक सफल एक्टर बनने का था। वह फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम करते थे। आज वह इस दुनिया से विदा हो चुके हैं। लेकिन उनका दिल अब भी धड़क रहा है।

उनको सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी जा रही है। देश ही नहीं विदेश में भी गौरव की चर्चा है। दरअसल इंदौर में खजूरी बाजार के रहने वाले सतीश दवे और कविता दवे के 25 साल के बेटे गौरव को 13 जुलाई को अचानक ब्रेन हेमरेज हुआ। उन्हें राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने इलाज किया लेकिन गौरव की हालत नहीं सुधरी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत दो बार मेडिकल चेकअप के बाद स्पेशलिस्ट टीम ने गौरव को रविवार रात ब्रेन डेड घोषित कर दिया। जवान बेटे के खोने के दर्द के बीच ही दबे परिवार ने ऐसा फैसला लिया जिसने कई लोगों की जिंदगी में नई उम्मीद जगा दी। परिवार की सहमति से गौरव का हार्ट, लीवर, किडनियां और आंखें दान की गई।

इसके लिए सोमवार को इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। परिवार के इकलौते बेटे गौरव फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग डायरेक्टर का काम करते थे। वह एक्टर भी बनना चाहते थे। पिता सतीश दवे सरकारी नौकरी से रिटायर्ड हैं। मां हाउसवाइफ हैं। छोटी बहन वैदेही की शादी हो चुकी है। ब्रेन डेड की कंफर्मेशन होने के बाद गौरव की बहन वैदेही राठी, बहनोई पलकेश राठी और भाई रतिका चावरे ने माता-पिता को संभाला। उनसे गौरव के अंगदान करने को लेकर बातचीत की। माता-पिता ने इसके लिए सहमति दे दी। अंगदान की प्रक्रिया में मुस्कान परमार्थिक ट्रस्ट के सेवादार जीतू बंगानी, संदीप आर्य और लकी खत्री ने दबे परिवार का सहयोग किया। आर्य ने बताया कि डॉक्टरों ने परिवार को ब्रेन डेथ और अंगदान के बारे में समझाया। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट का प्रोसेस शुरू किया गया। सोमवार सुबह गौरव का लीवर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती 42 साल की मरीज को ट्रांसप्लांट किया गया। हार्ट ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद में मौजूद यूएन मेहता हॉस्पिटल भेजा गया। जहां 28 साल के युवक को लगाया जाएगा। उनकी दोनों किडनियां चौथ राम हॉस्पिटल में भर्ती 22 और 52 साल की दो महिला मरीजों को ट्रांसप्लांट की गई।

जबकि आंखें शंकरा आई बैंक के माध्यम से दान की गई हैं। गौरव के साथ फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली ड्रीम वर्ल्ड मूवीज एंड प्रोडक्शन की एच ओडी महक राज ने कहा करीब 4 साल पहले बीकॉम करने के बाद गौरव इंडस्ट्री से जुड़ गए थे। इंदौर में रहकर ही काम करते थे। वह अपनी मेहनत ईमानदारी और मिलनसार स्वभाव के कारण सभी के काफी प्यारे थे। महक ने कहा गौरव को बचपन से ही ब्रेन की बीमारी मोयामोया थी। जो पूरी दुनिया में अब तक सिर्फ आठ और भारत में तीन ही लोगों को हुई है।

उन्हें 13 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां दो दिन बाद ब्रेन सर्जरी की गई। दो स्टंट डाले गए थे। इसके बाद गौरव को आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन लेकिन अगले ही दिन उनकी हालत बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर पर लिया गया। इसके बाद वह होश में नहीं आए। वहीं मुस्कान परमार्थिक ट्रस्ट के संदीप आर्य ने कहा दवे परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर जो फैसला लिया वो समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है। फिलहाल आप क्या कहना चाहेंगे गौरव दवे के बारे में? कमेंट सेक्शन में हमें लिखकर जरूर बताएं। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।

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