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दिल्ली के बाद अब पंजाब की बारी, भगवंत मान पर क्या बोल गए दीपके?

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दिल्ली में 36 दिन तक चला छात्र आंदोलन अब खत्म हो चुका है। लेकिन क्या यह आंदोलन सच में खत्म हुआ है? या अब इसकी अगली लड़ाई किसी और राज्य में लड़ी जाएगी? क्योंकि सीजेपी यानी कॉकर जनता पार्टी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि दिल्ली के बाद अब उनका अगला फोकस पंजाब होगा। वजह है .

हाल ही में सामने आया फार्मेसी भर्ती परीक्षा का मामला जिस पर विपक्ष पेपर लीक का आरोप लगा रहा है। जबकि पंजाब सरकार इसे सिर्फ नकल का मामला बता रही है। अब सवाल यह है कि आखिर पंजाब में हुआ क्या था? सीजेपी की आगे की स्ट्रेटजी क्या है और भगवंत मान सरकार इस पूरे विवाद पर क्या कहरही है? दिल्ली में छात्र आंदोलन खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि अब सीजेपी का अगला कदम क्या होगा? जब सीजेपी के फाउंडर और इस आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे अभिजीत दीपक से यही सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे कोई बड़ा ऐलान नहीं किया।

उन्होंने कहा आंदोलन अभी कल ही खत्म हुआ है। हमें थोड़ा वक्त दे दीजिए। हम जल्द अपनी अगली स्ट्रेटजी बनाएंगे। लेकिन जब उनसे पंजाब में सामने आए कथित पेपर लीक के मामले पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि हम उस मुद्दे पर भी बात करेंगे। अभी उसकी प्लानिंग चल रहीहै।

यानी इतना तो साफ है कि दिल्ली के बाद अब सीजेपी की नजर पंजाब पर है। हालांकि सीजेपी की फिलहाल पहली प्राथमिकता अभी भी वही छात्र हैं जो दिल्ली आंदोलन का हिस्सा थे। अभिजीत दीपक ने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन छात्रों पर केस दर्ज किए गए उन्हें वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं रहना चाहिए क्योंकि इससे उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सरकार के साथ बातचीत भी जारी है। अब बात करते हैं उस पंजाब वाले मामले की जिसे लेकर पूरा विवाद खड़ा हुआ।

19 जुलाई को पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में फार्मेसी ऑफिसरों की भर्ती के लिए बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज की ओर से लिखित परीक्षा कराई गई थी। यह परीक्षा फरीदकोट, कोटकपुरा और फिरोजपुर के कुल 18 परीक्षा केंद्रों पर हुई थी। जिसमें करीब 5000 उम्मीदवार शामिल हुए। परीक्षा के दौरान पंजाब पुलिस, फरीदकोट रेंज पुलिस, फिरोजपुर रेंज पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने एक संयुक्त अभियान चलाया।

इसी कार्यवाही में पुलिस ने एक अंतर राज्यय नकल गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह बेहद हाईटेक तरीके से नकल करवा रहा था। जांच में पता चला कि कुछ उम्मीदवारों के पास ऐसे पेन थे जिनमें छिपे हुए कैमरे लगे [संगीत] थे। इन कैमरों से क्वेश्चन पेपर की तस्वीरें बाहर भेजी जाती थी। इसके बाद वायरलेस डिवाइस और ब्लूटूथ जैसे डिजिटल उपकरणों के जरिए बाहर बैठे लोग सवालों के जवाब उम्मीदवारों तक पहुंचाते थे। पुलिस का दावा है कि इस पूरे रैकेट के जरिए उम्मीदवारों से परीक्षा पास कराने के बदले ₹3.5 लाख से लेकर 13 लाख तक वसूले जा रहे थे। [संगीत] इस मामले में अब तक सात मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। जबकि 28 उम्मीदवारों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा 27 वायरलेस चीटिंग डिवाइस भी बरामद किए गए हैं।

लेकिन जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने एक अहम बात भी कही। पुलिस का कहना है कि अब तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है जिससे यह साबित हो सके कि क्वेश्चन पेपर परीक्षा शुरू होने से पहले लीक [संगीत] हुआ था। शुरुआती जांच के मुताबिक यह मामला पेपर लीक का नहीं बल्कि परीक्षा के दौरान हाईटेक तरीके से नकल [संगीत] करने का है। यही बात पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी लगातार दोहरा रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पिछले 4 साल में पंजाब में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और नकल दोनों अलग-अलग चीजें हैं और इस मामले में पेपर लीक नहीं हुआ था।

भगवान मान ने कहा कि जब कोई छात्र महीनों और सालों मेहनत करता है, दिनरा पढ़ाई करता है और फिर उसे पता चलता है कि पेपर लीक हो गया है तो उसका सपना टूट जाता है। इसलिए पेपर लीक जैसी घटनाएं काफी गंभीर होती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देश के कई हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं। लेकिन पंजाब के इस मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मेसी परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दखल की कोशिश पकड़ ली गई थी।

पुलिस ने तुरंत कार्यवाही की। गिरोह के लोगों को गिरफ्तार किया और जिन उम्मीदवारों ने गलत तरीका अपनाया उनके खिलाफ भी कारवाई की गई। भगवंत मान ने दोहराया कि पंजाब में सरकारी नौकरियां ना पैसे से मिलती है ना सिफारिश से बल्कि सिर्फ मेरिट के आधार पर दी जाती है।

उधर पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बेंस ने भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके विभाग के तहत होने वाली किसी भी परीक्षा में पेपर लीक का कोई मामला सामने नहीं आया है। फार्मेसी भर्ती परीक्षा को लेकर भी उन्होंने साफ कहा कि यह पेपर लीक नहीं बल्कि चीटिंग का मामला [संगीत] था और उसे पकड़ने का काम खुद सरकार ने किया। हरजोत बेंस ने विपक्ष से सवाल भी पूछा कि अगर उनके पास सबूत हैं तो बताएं कि आखिर उनके विभाग [संगीत] के तहत कौन सा पेपर लीक हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब को बेवजह बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। बैंस ने कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों के नतीजे लगातार बेहतर हो रहे हैं। सैकड़ों छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। लेकिन उन उपलब्धियों की चर्चा कोई नहीं करता।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सीजेपी पंजाब पहुंचकर इस मुद्दे को बड़ा आंदोलन बनाएगी? फिलहाल इतना तय है कि दिल्ली के बाद छात्र राजनीति का अगला बड़ा पड़ाव पंजाब बन सकता है। एक तरफ सीजेपी इस मुद्दे को लेकर रणनीति तैयार कर रही है तो दूसरी तरफ पंजाब सरकार लगातार दावा कर रही है कि राज्य में पेपर लीक नहीं हुआ बल्कि नकल की कोशिश को वक्त रहते पकड़ लिया गया।

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