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इस्तीफा तो हुआ लेकिन कॉकरोच पार्टी ने तुरंत कर दी बड़ी गलती..

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नमस्कार बहुत स्वागत आप सभी का। मैं हूं सुशांत सिन्हा। आज की बड़ी खबर यह कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। हालांकि यह इस्तीफा तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था। जब ये कॉकरोच जनता पार्टी पैदा भी नहीं हुई थी तब से हम लोग यूजीसी का मुद्दा वगैरह जब उठा रहे थे तब भी कह रहे थे कि धर्मेंद्र प्रधान को का इस्तीफा होना चाहिए और बड़ी संख्या में कोर बीजेपी समर्थक भी उनसे असंतुष्ट थे। तो फाइनली अब आज ये खबर आई है कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होंने चिट्ठी भेज दी है और कुछ लोग यह भी माहौल बना रहे हैं कि पता नहीं अभी क्या होगा नहीं होगा। हो सकता है इस्तीफा स्वीकार ना हो। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने Twitter बायो से शिक्षा मंत्री हैं वो भी हटा दिया है। तो ये फालतू की बात है कि उनका इस्तीफा जो है वो स्वीकार नहीं होगा और इस तरह की चीजें होंगी। आपकी राय क्या है इस इस्तीफे पे जरूर बताइएगा। लेकिन पहला रिएक्शन जो आया है कॉकरोच जनता पार्टी का वो आपको दिखाता हूं। फिर बताता हूं कि क्या गलती भी हो गई है कुछ लोगों से। ये

अभिजीत दीपके और उनकी टीम का पहला रिएक्शन है। जब ये खबर आएगी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा। धर्मेंद्र प्रधान ने रिजाइन कर दिया है। तो वहां पर जो छात्र बैठे थे उनमें बहुत खुशी थी कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आखिरकार फाइनली हो गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जो है वो सोनम मांगचुक ने भी एक ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि इट्स अ विक्ट्री फॉर डेमोक्रेसी डायरेक्ट डेमोक्रेसी स्ट्रेट फ्रॉम द स्ट्रीट्स। इस तरह की बात उन्होंने भी कही। हालांकि उधर कांग्रेस पार्टी जो है वो इसे राहुल गांधी की जीत बता रही है। वो ये नहीं कह रही कि अभिजीत दीपके या कॉकरोच जनता पार्टी की तरफ से हुआ है की वजह से हुआ है। अब आप अजय राय को सुनिए। वो कह रहे हैं कि यह राहुल गांधी की वजह से हुआ। चाहिए था। मोदी जी को लेना चाहिए था। काफी देर कर दी। मुझे लगता है कि अब निश्चित तौर से एक कारवाई हुई। हम सब की जीत हुई। आदरणीय राहुल गांधी जी की जीत हुई। जो राहुल जी ने लगातार बात उठाई। कांग्रेस की जीत हुई। कार्य बच्चों की जीत हुई और हमारे एक-एक नौजवान साथियों ने जो बात उठाई है उनकी जीत हुई है। मैं आप सबको अपनी तरफ से धन्यवाद देना चाहता हूं और जरूर कहना चाहूंगा मोदी जी अंतोगत तो आपको झुकना पड़ा इस देश की जनता के सामने आपको पूरी तरीके से जनता के सामने आप झुकना पड़ा। हमारे नेता राहुल गांधी जी के सामने झुकना पड़ा और पूरा देश एकजुट है। अब मोदी जी अगली

कारवाई और करिए और जो ऐसे लोग हैं उनके खिलाफ कारवाई करिए और अभी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा। धर्म खिलाफ धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जांच करिए। उनके ऊपर कारवाई करिए। तो अजय राय यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि यह सब राहुल गांधी जो मेहनत कर रहे हैं उसकी वजह से हुआ। देखिए एक बात तो सही है। राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद कॉकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन से पहले से शुरू किया हुआ था। तो उनका क्रेडिट भी बनता है कि उन्होंने पूरा लगातार इस पर दबाव बना के रखा। सोशल मीडिया पे भी बहुत सी बातें चल रही है जिस पर बात करूंगा। लेकिन फिलहाल जंतरमंतर से एक तस्वीर आई है जो बड़ी चिंताजनक है जिसको लेकर लोगों में बड़ा गुस्सा भी है कि रेिग्नेशन हो गया। उसके बावजूद वहां अनप्रवोक कहा जा रहा है कि पुलिस पर पत्थर चले हैं। पुलिस का माथा फाड़ दिया गया है। देखिए एक बार जरा तस्वीर। के अंदर इंस्पेक्टर हैं। घायल हो चुके हैं और खून देखिए किस कदर इनका बहर रहा है। दरअसल अचानक भीड़ इतनी ज्यादा बढ़ गई कि उसने हिंसक रूप ले लिया। पानी की बोतल पत्थर के पानी पानी है। घायल हो चुका है बुरी तरीके से। फिलहाल अभी भी पुलिस की टीमें यहां पर लगी हुई है। भीड़ को यानी कहा ये जा रहा है कि अभी भी वहां पर इस तरह की घटनाएं हो रही और यह बहुत चिंताजनक है कि भाई जो आपका इस्तीफा की डिमांड थी वो मान ली गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पिछले कुछ वक्त से एनटीए के 47 अधिकारी जो है वो हटा दिए गए। शिक्षा मंत्री हटा दिए गए। शिक्षा सचिव हटा दिए गए। प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा कर दी। सजा जो है उसको और कठोर करने के लिए काम हो रहा है।

संसद में चर्चा की बात हो रही है। छात्रों की डिमांड मांग ली गई है। उसके बावजूद अगर इस तरह से पत्थर चल रहे हैं। अगर उसके बावजूद पुलिस को टारगेट किया जा रहा है तो ये जानबूझकर इंस्टिगेट करने का प्रयास है जो कि पहले भी बार-बार हुआ। छात्रों ने नहीं किया लेकिन वहां जो लोग ये चाहते हैं कि कुछ तो माहौल ऐसा बने कि यह आंदोलन जो है वो चलता रहे। वो अब भी यह प्रयास कर रहे हैं और इस वक्त कॉकरोच जनता पार्टी जो है वो यह कह रही है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो हो गया एक करोड़ परिवार वालों को मिलना चाहिए जिन बच्चों ने आत्महत्या की ये सरकार ऑलरेडी संकेत दे चुकी है कि हो जाएगा नो एक्शन अगेंस्ट एनी स्टूडेंट प्रोटेस्टर्स ये भी सरकार कह चुकी है कि ठीक है ये भी हो जाएगा लेकिन पब्लिक अपोलॉजी इनको चाहिए आरएएफ और दिल्ली पुलिस से ये दिल्ली पुलिस से पब्लिक अपोलॉजी मांग रहे हैं ठीक है इस पर भी बात कर लीजिए लेकिन जिन लोगों ने पुलिस का माथा फोड़ा जिन्होंने मीडिया कर्मियों को लिंच करने का प्रया प्रयास किया। उसका क्या हुआ? उस पर यह लोग कुछ नहीं कह रहे हैं। और अभिजीत दीपके कह रहे हैं इसको जिस तरीके से पेश कर रहे हैं वहां वो एक बड़ी गलती कर रहे हैं। एक तो जो बाहर क्राउड है वो तो गलती कर ही रहा है। अभी भी पत्थरबाजी करके माथा फोड़ के। अभिजीत दीपके सुनिए क्या कह रहे हैं। का इस्तीफा तो हो गया है। और ये और ये इस्तीफा गवाह इस बात का अगर आप लोग डरेंगे नहीं अगर आप लोग इस सरकार के सामने झुकेंगे नहीं तो अच्छे चौके इस्तीफे ले सकते हैं हम तो डरना नहीं है डरना नहीं है डेमोक्रेसी है अगर डेमोक्रेसी में बोलने से डरने डर लगने लगे तो कैसी डेमोक्रेसी है डरना नहीं है अगर अपनी आवाज उठाओगे तभी ये लोग लाइन में रहेंगे और इन्हें लाइन में रखना जरूरी है। इन्हें लाइन में रखना जरूरी है। क्योंकि ये जो आज खुद को बादशाह समझ बैठे हैं ना ये हमारी वजह से बैठे हुए हैं। देखिए अभिजीत दीपके और उनका जो पूरा इको सिस्टम है वो यह बता रहा है कि अभी और इस्तीफे हम चाहेंगे तो ले लेंगे। नरेंद्र मोदी तो बादशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं। अगर बादशाह की तरह व्यवहार कर रहे होते या वहां जिस तरीके से नारे लगे कि तानाशाह है नरेंद्र मोदी अगर तानाशाह होते तो इनको कोई अंदाजा नहीं है कि इनके साथ क्या हो रहा होता। ये अभिजीत दीपके और इनकी पार्टी इनका आंदोलन अभी कुछ दिन पहले इनके वीडियोस आ रहे थे कि भीड़ नहीं आ रही। पब्लिक नहीं आ रही। हमको समझ में नहीं आ रहा कि हो क्या रहा है। पब्लिक क्यों नहीं आ रही है। ये ये कह रहे थे कि कोई एक दूसरा रास्ता तो दीजिए कि सोनम मांगचुक जो है उनका अनशन तुड़वाया जा सके। लेकिन सरकार ने भी या जो उनकी थिंक टैंक है उन्होंने गलती की। एक तो जिस तरीके से सोनम वांगचुक को वहां से उठाया गया और उसके बाद संसद सत्र के ठीक पहले जब ये हुआ तो वहां पॉलिटिकल पार्टी उनके नेता उनके लोगों का जमावड़ा लगने लगा। एक नई ऊर्जा जो है वहां पर प्रसारित हुई, प्रचारित हुई। वरना अभिजीत दीप के आज जितने चौड़े में बात कर रहे हैं उस वक्त उनका जोश ठंडा पड़ा हुआ था और अगर ये लोग जो गलती कर रहे हैं मैं सोशल मीडिया पे देख रहा हूं कि इसे यह बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि हमने नरेंद्र मोदी को झुका दिया तो ये लोग बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं क्योंकि आप जैसे ही नरेंद्र मोदी पर इसको लाएंगे कि हमने नरेंद्र मोदी को झुका दिया। देखिए लोगों में एक सेंटीमेंट था कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए। लोग चाहते थे शिक्षा मंत्री जाए ताकि नेतृत्व बदले तो छात्रों का भविष्य बेहतर हो और मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो पिछले कई महीनों से यह बात कह रहा था। लेकिन अगर आप इसे नरेंद्र मोदी को झुकाने का नरेटिव बनाएंगे तो आपको नुकसान होगा। नरेंद्र मोदी का और वोट बढ़ जाएंगे। मैं आपको बता रहा हूं क्योंकि आज की डेट में भी नरेंद्र मोदी को लेकर नाराजगी नहीं है बॉस। आप जिस तरह से बात कर रहे हैं उसकी बात अलग। आप जैसे देखिए ये आरजेडी वाले इन्होंने ट्वीट करके नरेंद्र मोदी ने जो अपना सेल्फी वीडियो डाला था उसमें पूरा काला चेहरा उनका कर दिया है। नास फुला के रात को आना पड़ रहा है। ये तानाशाह बड़ा छलिया और बहरूपिया है। विश्वास नहीं करने का। ये आरजेडी वाले ट्वीट कर रहे हैं। अभिजीत दीपके जो है वो अभी उन्होंने ट्वीट किया है कि गोइंग टू टेक अ नैप सी यू ऑल इन अ लिटिल वाइल। यानी अभिजीत दीप के सोने चले गए। सोने क्या गए होंगे? अपने पूछने गए होंगे ऊपर बाकी लोगों से कि सर अब क्या करना है ये तो मान गए ये तो इस्तीफा ले लिया इन्होंने तो अब आगे की रणनीति क्या है हटना है नहीं हटना है बैठे रहना है क्या करना है ये चर्चा करने गए हैं क्योंकि वहां मंच से तो ये चर्चा हो नहीं सकती तो ये सोने तो क्या ही गए होंगे वो आप समझ लीजिए लेकिन मोटे तौर पर मैं देख रहा हूं जैसे एक राजनाथ सिंह का पुराना बयान 2014-15 का निकाल के सोशल मीडिया पे वायरल किया जा रहा है कि ये इस्तीफे लेने वाली सरकार नहीं है। सुनिए एक बार मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते हैं भैया वो यूपीए गवर्नमेंट नहीं है एनडीए गवर्नमेंट है राजनाथ सिंह जी सर और एक मिनट हम तो ये 2014-15 की बात है। देखिए नरेंद्र मोदी की जो सरकार है उसने जब किसान आंदोलन इतने दिन चला बहुत प्रयास किया समझा दें कि भाई तीन कृषि कानून जो है उसमें कोई जमीन किसी की नहीं ली जानी है। लेकिन नहीं मानने दिया गया तो आखिरकार उन्होंने वापस लिया। तो ऐसा नहीं है कि नरेंद्र मोदी कभी पीछे नहीं हटे। इस बार भी उन्होंने प्रयास किया कि भाई यह कम से कम आपको मैसेज जाए कि हम शिक्षा की व्यवस्था को सुधारना चाहते हैं।

लेकिन उसको ले कुछ नहीं होने दिया गया। तो उन्होंने कहा ठीक है भाई वहां पर जो माहौल बन रहा है जिस तरीके से माथा फोड़ा जा रहा है। जिस तरीके से लिंचिंग की चीजें हो रही है। जिस तरीके से वहां पर खबरें आप देखिए धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में लिखा क्या है? धर्मेंद्र प्रधान ने भी लिखा कि जंतरमंतर पर और देश में जो स्थिति बन गई है उस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं। देश की एकता बनी रहे। भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे। हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं। करियर बनाने पर फोकस करें। इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है। यानी ये साफ-साफ स्थिति दिख रही थी कि वहां पर कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास हो रहा है। और उसमें बच्चे फंस सकते थे। मैंने कल आपको देश की पाठशाला में बताया था कि दिल्ली पुलिस ने जो फेस रिकग्निशन सिस्टम लगा रखा है उसमें दिल्ली के कई वांटेड क्रिमिनल जंतरमंतर पर नजर आए क्योंकि माथा फोड़ने वाले लिंचिंग करने वाले धमकी देने वाले इसको पकड़ के मार दो उसको पकड़ के मार दो ये छात्र तो हो ही नहीं सकते तो यह बात सरकार को भी समझ में आ रही थी कि छात्रों के पीछे छुपकर ये देश में आग लगाने का प्रयास हो रहा है और इसलिए यह इस्तीफा ले लिया गया कि भाई इस्तीफा करो छात्रों से ज्यादा इंपॉर्टेंट कोई नहीं है क्योंकि दिल्ली पुलिस ऐसा नहीं कि खाली भी मार ही खा सकती है। करने को तो बहुत कुछ कर सकती है। लेकिनकि ये लोग छात्रों के पीछे छुप के ये सब कर रहे हैं तो दिल्ली पुलिस भी शांत बैठी हुई है। नरेंद्र मोदी का प्रयास तो दिख रहा है। लेकिन जो लोग सवाल उठा रहे हैं कॉकरोच जनता पार्टी उनसे देखिए वो यूपी और पंजाब इनका अब डिफरेंस देखिए वो बोलते कैसे हैं। यूपी में कह रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ को चैलेंज दे रहे हैं कि वहां भी पेपर लीक हो रहा है। देखिए अभी हम वहां पहुंचेंगे। सुनिए अगर योगी जी बड़ी चिंता करने की जरूरत है। योगी जी थोड़े पेपर लीक अपने प्रदेश में रोक लीजिए। वरना अभी जितने लोग जंतरमंतर पर पहुंचे हैं यूपी से उससे कहीं ज्यादा लोग यूपी में आंदोलन करेंगे। तो ये आपने इनका बयान सुना तरीके से ये चैलेंज दे रहे हैं कि भाई हम ये सब करने वाले हैं। अब जरा पंजाब पर सुनिए। जब इनसे पूछा जाता है कि पंजाब को लेकर आपकी क्या सोच है? पंजाब में भी पेपर लीक हो रहा है। जरा पंजाब पे रिएक्शन देखिए और दोनों को कंपेयर कीजिए। प्लीज पंजाब में रुकिए रुकिए रुकिए पंजाब में पेपर लीक हुआ है आप उसके बारे में क्या बोलेंगे? उसके ऊपर भी एक्शन होना चाहिए। जहां पेपर लीक होता है हर जगह एक्शन होना चाहिए। आम आदमी पार्टी के अभिजीत अभिजीत आम आदमी पार्टी के लीडर जहां पर आते हैं आप उनसे पूछोगे? बिलकुल पूछेंगे बिलकुल पूछेंगे।

रिजाइन मांगोगे क्या? रिजाइन होना चाहिए। आप उनसे रिजाइन मांगोगे? आपके पास ये न्यूज़ नहीं आई कितने पेपर लीक हो गए। क्या एजुकेशन सिस्टम है पंजाब में? तो पंजाब पे कि ठीक है हम उनसे भी इस्तीफा मांगेंगे। अगला सवाल अगला सवाल और यूपी में कह रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ तैयार हो जाइए। हम पहुंच रहे हैं। तो एजेंडा क्या है? लोगों को दिख जाता है। छात्रों का एजेंडा लेकर चल रहे हैं। लेकिन छात्र की कितनी बात कर रहे हैं। पंजाब वाले छात्र पर फोकस नहीं है। वहां केरल में छात्रों पर जो है वो अगर वाटर कैनल चल जाए तो दिक्कत नहीं है। लाठी कहीं और चल जाए तो दिक्कत नहीं है। तो ये समझ में तो आता है। लेकिन देखिए मोटे तौर पर इसने क्या किया? उसने क्या किया? मैं फंसना नहीं चाहता। यह फैसला अच्छा है। छात्रों के हित में है। देश के एजुकेशन सिस्टम के हित में है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। दूसरी बड़ी बात कि भाई इसमें अब विपक्ष जो है उसको भी मिलकर काम करना चाहिए। अपना सुझाव दीजिए। नरेंद्र मोदी को झुका दिया। मोदी को यह कर दिया। वो क्या हो गया? आपने किसान आंदोलन में भी यही नैरेटिव बनाया था कि नरेंद्र मोदी को झुका दिया। उसके बाद भी मोदी फिर अगली बार प्रधानमंत्री बन गए। उसके बाद भी मध्य प्रदेश जीत गए, बिहार जीत गए, बंगाल जीत गए, सब जीत गए। तो सोशल मीडिया पर माहौल बना देने से कि मोदी को हरा दिया उससे आपको कुर्सी हासिल नहीं होगी। विपक्ष को सीरियस दिखना होगा इस मुद्दे पर। प्रियंका वाड्रा का पूरा पुराना बयान है राजस्थान में जब कांग्रेस की सरकार थी कि बहुत प्रयास कर लिए गहलोत जी लेकिन व्यवस्था मिल नहीं रही है। कैसे रोकना है तो खाली एक व्यक्ति का इस्तीफा जो है वो शुरुआत हो सकता है स्यूशन की तरह। लेकिन स्यूशन नहीं है। पीएम अलग-अलग लेवल पर चीजें कर रहे हैं। विपक्ष को भी अपने सुझाव देने चाहिए। अभी राज्यों में कहीं पर अगर मान लीजिए पेपर लीक हो जाएगा छात्र क्या करेगा तो उसको व्यवस्था को ठीक करने पर फोकस होना चाहिए। दूसरी बात कि बीजेपी ने भी कुछ गलतियां की हैं। बीजेपी को अपने अंदर झांकने की जरूरत है और उस पर मैं अलग से वीडियो बनाकर अपनी राय रखूंगा कि बीजेपी ने क्या किया नहीं किया। मोटे तौर पर मुझे एक चीज जो लगती है कि बीजेपी नैरेटिव की लड़ाई हार रही है। बीजेपी की सोशल मीडिया में जो टीम लगी हुई है,

बीजेपी के जो लोग लगे हुए हैं वो नेटिव की लड़ाई हार रहे हैं। आप सोचिए कि इस पूरे आंदोलन के दौरान लिंचिंग करने वालों को भी एक वर्ग सही ठहरा दे रहा है कि देखो ये तो डिर्व ही यही करते हैं इसलिए लिंच किया जा रहा है। अरे भाई तो उस तरह से तो कोई अखलाक की लिंचिंग को भी सही ठहरा देगा कि उस वो भी वही डिर्व करता था। देश भर में जहां लिंचिंग होगी डिर्व कौन करता है क्या करता है उसको लेकर जो है कह दिया जाएगा भाई जो भीड़ लिंच करती है उसको तो यही लगता है कि ये आदमी यही डिर्व करता था हिंसा से देश चलेगा क्या लेकिन नैरेटिव बनाया जा रहा है और मैं आपको एक किस्सा बताता हूं स्पेशली जब ये मैं एक फ्लाइट से दिल्ली आ रहा था तो बड़े राष्ट्रीय पार्टी के एक राष्ट्रीय अध्यक्ष बैठे हुए थे उन्होंने तब चर्चा में कहा था कि हमने जो है एक नई सोशल मीडिया एजेंसी हायर की जो हमारी सोशल मीडिया स्ट्रेटजी देखेगी और उसके बाद आप स्ट्रेटजी देखिए जो बनी जो हो रहा है वो आपको दिखता है कि Instagram पर कोऑर्डिनेटेड तरीके से पिछले कुछ वक्त में एक एक माहौल बनाया गया। बीजेपी की टीम सोई रही। अब प्रधानमंत्री को कहना पड़ रहा है अपने लोगों से कि आप लोग Instagram पर एक्टिव होइए। यह लोग तब सोए रहे। यह इसी माहौल में थे कि अरे हम मोदी हैं। हमको क्या ही होगा। लेकिन ये ये भूल गए कि 12 साल की जब सरकार हो जाती है तो आप कितने ही अच्छे क्यों ना हो। कुछ ना कुछ ऐसी बात होती है जिसको लेकर लोगों के मन के अंदर कई चीजें रहती है। तो अभी भी जैसे ये नितिन गडकरी का बयान कि नहीं नहीं माइलेज देखने नहीं आता है। ये नहीं होता है वो नहीं होता है। कोई माइलेज कम नहीं हो रहा है। इस तरह की चीजें लोगों को अंदर से परेशान कर देती है जो बीजेपी समर्थक भी है। और सोशल मीडिया पर एक माहौल बनाने के लिए जो प्रयास चल रहा है उसका रिजल्ट था कि इस बार Instagram पर कोऑर्डिनेटेड तरीके से जो टारगेटिंग हुई मीडिया की पुलिस वालों की उसको भी ऐसा दिखाया गया कि लोगों में जो गुस्सा है वो बाहर आ रहा है। ये नहीं दिखाया गया कि वहां वांटेड क्रिमिनल्स पहुंचे हुए हैं। अनवांटेड एलिमेंट्स पहुंचे हुए हैं। लेकिन छात्रों का चेहरा बनाकर दिखाया गया कि देखो यही पत्रकार अच्छे हैं और ये वाले खराब है। इसलिए इनके साथ ऐसा हो रहा है। ये बहुत खतरनाक है।

ये एक सोशल मीडिया नैरेटिव की लड़ाई सोशल मीडिया पे चल रही है। जो लोग कहते हैं गोदी मीडिया को देखता ही कौन है? तो देखता ही कौन है तो उनको लिंच क्यों कर रहे हो? जो लोग ये कहते हैं कि तुम तुमने देश को बर्बाद कर दिया, ये कर दिया, वो कर दिया। तो भाई सवाल ये उठता है कि जो लोग YouTube पे तमाशा कर रहे हैं रवश कुमार जैसे कि राहुल गांधी ने बुलेट पे बैठ के उसको हसीन बना दिया। उनसे जाके बोलो कि देश को संभाल लें। वो देख तो लो। उन्हीं को रहे हैं तुम्हारे हिसाब से। उनकी कुंठा यह है रवश कुमार आशुतोष ऐसे पत्रकारों की कुंठा यह है कि भाई हम इतना बोल रहे हैं इतना जहर भर रहे हैं फिर भी जो है वो मोदी जीत कैसे जाते हैं क्यों हम जब कह रहे हैं कि गोदी मीडिया सो कॉल्ड गोदी मीडिया को पब्लिक ने रिजेक्ट कर दिया तब भी पब्लिक उनको देख लेती है उनप भरोसा कर लेती है हम पे नहीं करती इस कुंठा में आज की डेट में यह वामपंथी सोच वाले पत्रकार इतना गिर गए कि लिंचिंग को भी सही ठहराने लग तो यह तो हाल तो इसलिए मैं कह रहा हूं कि देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए एक अच्छा कदम उठाएं। यह जो कॉकरोच जनता पार्टी वाले अति उत्साह में यह माहौल बना रहे हैं कि मोदी की हार है। इसको ऐसे दिखाना है। पॉलिटिकल माइलेज लेना है। यह मत कीजिए। छात्रों के आपको ही नुकसान देगा। मुझे कुछ नहीं करना है कर लीजिए और पब्लिक मोदी से जुड़ जाएगी। दूसरी बात छात्रों के भविष्य के लिए सोचिए। उनके लिए अच्छे प्रयास कीजिए। सिस्टम को बेटर करने पर आप फोकस कीजिए जो कि इस समय की डिमांड है, जरूरत है। आपकी राय क्या कमेंट करके जरूर बताइएगा। नमस्कार।

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