निकल गई हवा मतलब तीन दिन खा पीकर आराम से पराठे खाकर एक अच्छी बेड की व्यवस्था करके संसद में बिना किसी पुलिस के देश की राजधानी दिल्ली में नीट विवाद और पेपर लीक को लेकर मचे घमासान के बीच एक नया राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। सोनम वांगचूक के बाद यूपी की नगीना सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी अपना धरना खत्म कर दिया है।
नीट परीक्षा में धांध ली और जंतरमंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भीम आर्मी प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पिछले तीन दिनों से संसद परिसर में अकेले धरने पर बैठे थे।
गुरुवार को अपना धरना खत्म करते हुए चंद्रशेखर ने सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया। चेतावनी देते हुए एक वीडियो संदेश जारी कर मांग रख दी कि सबसे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए और उन पुलिसकर्मियों पर सख्त कारवाई हो जिन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठियां चलाई।
उन्होंने चेताया कि अगर 15 दिनों में मांगे नहीं मानी गई तो यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा। आप कह रहे हैं कि हम यह करेंगे, यह करेंगे फास्ट कोर्ट में तो आपको कौन रोक रहा है? तत्काल लाइए, बिल और बनाइए। कानून कौन रोक रहा है? लेकिन सवाल यह है कानून तो बनेंगे लेकिन इंप्लीमेंट तो आपको ही कराना है ना। कि यह सारी बातें बाद में होंगी। आप पहले धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा होगा और जिन पुलिस के कर्मचारियों ने लाठी बजाई है बहनों पर बच्चियों पे उन पर कारवाई जो है सरकार को करनी होगी। इस बात को भी आप सुन लें। चाहे आप इसे एक कल मान लें, परसों मान लें, एक हफ्ते मान लें, 15 दिन का समय दिया है। देश भर में विरोध प्रदर्शन होंगे। लेकिन चंद्रशेखर के धरना खत्म करते ही इंदौर की रहने वाली एक्टिविस्ट डॉ. रोहिणी घाबरी ने एक वीडियो जारी कर मोर्चा खोल दिया।
खुद को चंद्रशेखर की एक्स गर्लफ्रेंड बताने वाली रोहिणी ने तंज कसते हुए कहा कि निकल गई ना हवा। अनशन तुम्हारे बस की बात नहीं है। तुम तो वहां छिप कर परांठे खा रहे थे। निकल गई हवा। मतलब तीन दिन खा पीकर आराम से पराठे खाकर एक अच्छी बेड की व्यवस्था करके संसद में बिना किसी पुलिस के बिना किसी प्रेशर के और हमारे नेता जी को देखो जैसे ही कल मैंने वीडियो अपलोड करी कि अब आपको गृह मंत्री का इस्तीफा मांगना है और यह वीडियो इन्होंने 5 मिनट के अंदर देखी होगी मैं जानती हूं इस व्यक्ति को इसने देखी होगी इसने बोला कि यार यह तो अब इस चीज का मुद्दा उठा रही है कि लाठी चार्ज करवाने में सबसे बड़ा हाथ किसका था? रोहिणी ने दावा किया कि जैसे ही उन्होंने चंद्रशेखर से गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करने को कहा, वह धरने से उठ खड़े हुए।
रोहिणी घाबवरी ने चंद्रशेखर की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह सच में छात्रों के इतने बड़े हमदर्द थे, तो लाठी चार्ज के वक्त वहां से भागे क्यों? तो छात्रों के मुद्दे को लेकर सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले चंद्रशेखर आजाद अब खुद घिरते नजर आ रहे हैं।
एक तरफ वह सरकार को 15 दिन का समय देकर आगे की रणनीति बता रहे हैं तो दूसरी तरफ उन पर लगे यह आरोप सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। देखना होगा कि चंद्रशेखर इन आरोपों पर क्या सफाई देते हैं।