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सोनम वांगचुक ने क्यों तोड़ा अनशन? खुद बताया सारा सच, जानकर आप चौंक जाएंगे।

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नमस्कार दोस्तों आज 26वें दिन मैं आप लोगों को कुछ खास खबर बताना चाहूंगा। अभी रात के लगभग 12:30 बज रहे हैं। अभी थोड़ी देर पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा साहब और जितेंद्र सिंह साहब यहां आए थे और लद्दाख के एपेक्स बॉडी के शीर्ष नेताग भी यहां आए थे और उससे पहले आप लोगों को मालूम है विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने आकर और हस्ताक्षर देकर हमसे अनशन तोड़ने के लिए कहा और वह संसद में इस मुद्दे पर नीट पेपर्स और परीक्षाओं की प्रणाली पर चर्चा करेंगे। यह आश्वासन दिया और जो सरकार से इस तरफ से मंत्रीगण आए थे उन्होंने भी यह आश्वासन दिया जिसका कि दो दिन से हम बहुत ही कड़ा क्या कहेंगे एक तरह का बारगेन चल रहा था कि मुझे आश्वासन चाहिए और लिखित में चाहिए और इसमें दो दिन लगे और मुझे इसलिए अनशन पर दो दिन और बैठना पड़ा पड़ा और ज्यादा भी बैठ जाता।

तो आखिर में आज उन्होंने लिखकर आश्वासन दिया है स्टेटमेंट फ्रॉम द गवर्नमेंट साइड गवर्नमेंट इस पॉजिटिव ऑन नॉट रजिस्टरिंग केसेस अगेंस्ट दोस प्रोटेस्टिंग पीसफुली एट जंतर मंतर इन दिल्ली एंड दोज़ पार्टिसिपेटिंग इन द मार्च टू द पार्लियामेंट ऑन जुलाई 20 2026 [संगीत] द गवर्नमेंट हैज़ ऑलरेडी एश्यर्ड थ्रेड देर डिस्कशन टू फाइंड सश टू टू पेपर लीक्स एंड एजुकेशनल रिफॉर्म्स फॉर एग्जाम्स इन द पार्लियामेंट। बसाइड्स द गवर्नमेंट इज़ आल्सो पॉजिटिवली कंसीडरिंग सूटेबल कंपनसेशन फॉर द विक्टिम्स ऑफ रीसेंट मीट पीपल पेपर लीग्स। ये हमारे साइड से आई एम ग्रेटफुल गवर्नमेंट हैज़ शोन सेंसिटिविटी टवर्ड्स द चिल्ड्रन बी विक्टिम्स टवर्ड्स द यूथ हु पीसफुली प्रोटेस्टिंग ऑन दोज़ डेट्स एंड दैट्स द रूलिंग पार्टी [संगीत] एंड एमपीस फ्रॉम द अपोजिशन हैव असर्ड मी दैट दे डिस्कशनहैपन ऑन द फ्लोर ऑफ द पार्लियामेंट रिगार्डिंग रिफॉर्म्स इन द एग्जामिनेशन सी एंड अदर्स एंड दैट वी विल आल्सो बी डिस्कसिंग अबाउट द अकाउंटेबिलिटी ऑफ सच लेफ्ट्स एंड दैट वी ऑल मेक श्योर दैट सच थिंग्स नेवर हैपन नो चाइल्ड नो पेरेंट वी हैव टू गो थ्रू व्हाट दीज़ 20 चिल्ड्रन एंड देयर पेरेंट्स टू गो आई एम हैप्पी दैट यू हैवर्ड मी दैट एंड आई एम शोर एस द चिल्ड्रन हैव बीन डिमांडिंग एट द सूटेबल [संगीत] टाइम आई एम नो वन टू डिक्टेट यू विल टेक अकाउंटेबिलिटी इन द मिनिस्ट्री वि द मिनिस्टर।

आल्सो एस अ रेसिबल एंड आई एम शोर यू आर ऑलरेडी कंसीडरिंग एंड वि दी अशोरेंसेस आई एम टच एंड ग्रेटफुल टू द गवर्नमेंट एंड आई वांट टू अपील टू द प्रोटेस्टिंग स्टूडेंट्स टू मेंटेन एटमस्ट पीस टू एक्सप्रेस देर फीलिंग्स इज अ लेजिट थिंग बट आई डू नॉट अप्रूव वायलेंस ऑफ एनी काइंड एंड अलविंग एनी एंटी [संगीत] सोशल एलिमेंट्स टू टेक एडवांटेज ऑफ दिस इज़ नॉट एक्सेप्टेबल टू मी इट शुड बी अ जेन्युइन डिमांड बाय जेनुइनली कंसर्न पीपल इन दिस केस यंगस्टर्स सो वि दैट बींग फुलफ आई एम ग्रेटफुल एंड आई विल बी हैप्पी टू ब्रेक माय थैंक यू आई हैव माय लीडर्स फ्रॉम फ्रॉम द एफक्स ऑफ़ लद्दाख के वर आल्सो हियर एंड दे हैव फ्लोन ऑल द वे फ्रॉम लदाखेट सर आपका मॉनिटर थैंक यू सर थैंक यू थैंक यू जी यू हैव ऑलवेज बीन साइड एंड सपोर्ट एंड आई डोंट वांट टू थैंक यूबट एक्सप्रेस माय फीलिंग सो व्हाट यू हैव सम मिल थैंक यू सर आफ्टर 26 डेज दिस टेस्ट वै गुड बट हंगर डजंट फेस वैरी टू सम पीपल हां माय डॉक्टर्स हियर हैव बीन वेरी वेरी काइंड एंड वेरी डेडिकेटेड आई वांट टू थैंक द होल हॉस्पिटल एंड आल्सो इट्स अप दे वै गुड वै लेडी इशज़ बट एस अ हॉस्पिटल आई डोंट वांट टू गिव अ मैसेज दैट गवर्नमेंट हॉस्पिटल आर एनी डॉक्टर्स आर मोस्ट अनपिटिकल आई सी थैंक यू ऑल डॉक्टर हियर एंड डॉक्टर हॉस्पिटल थैंक यू पाओ उन्होंने लिखकर आश्वासन दिया है।

एक तो यह कि जो हमारे विद्यार्थी और युवा जंतरमंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं या जो 20 जुलाई को संसद चलों में भाग ले रहे थे। उन पर कोई कानूनी कारवाई एफआईआर इत्यादि नहीं करेंगे। ऐसा बहुत होता है ऐसे आंदोलनों में। तो यह हमने आश्वासन लिया है कि ऐसा कुछ नहीं किया जाएगा। दूसरा यह कि जो पेपर लीक के इस हादसे में मृत हुए बच्चे हैं 20 से भी ज्यादा उन सबको उपयुक्त अ कंपनसेशन दिया जाएगा।

मुआवजा दिया जाएगा उनके घरों को। और तीसरा यह कि इस मुद्दे पर और शिक्षा और परीक्षाओं में जवाबदेही सरकार में लाने के बारे में संसद में पूरी तरह से वार्ता होगी, बहस होगी कि आगे से ऐसा ना हो और जो हुआ है उस पे पूरी जवाबदेही हो। अब आप कहेंगे जरूर कि धर्मेंद्र प्रधान जी के इस्तीफे पे क्या हुआ? पहली बात तो इस बात पे वो अभी मुझे कोई आश्वासन नहीं दे पा रहे थे कि ऐसा कब होगा और संसद के फर्श पर तो इस पर चर्चा होगी ही। अब मेरे सामने दो रास्ते थे।

या तो मैं और अनशन पर बैठूं हफ्तों और शायद उसी में खत्म हो जाऊं। फिर आप ही लोगों में से हजारों लोगों ने मुझे आज से दो-तीन हफ्ते पहले से कहते आए हैं कि आपकी जान जरूरी है। आपको संघर्ष आगे रखना है। जिंदा रहना जरूरी है। मगर मैं यह भी नहीं मानता कि हमने यह हासिल नहीं किया है। दोस्तों, मेरा दिमाग अलग तरह से चलता है। अगर वो ऐसा नहीं करते, इस्तीफा नहीं देते तो इससे हानि हमें या बच्चों को नहीं होगा। सरकार को खुद होगा। इस छोटे से मुद्दे को ना टालकर वो खुद अपनी हानि कर रहे हैं।

बल्कि दे देते इस्तीफा तो कब से उनका यह सारा नुकसान रुक जाता। इसलिए मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह बात नहीं थी। इसका तो खुद निपटारा हो जाएगा तमाम तरीकों से। ज्यादा जरूरी मेरे लिए था कि हमारे बच्चों पर कोई ऐसे केसेस ना लगे। आपको नहीं पता है। मैंने देखा है लद्दाख में कैसे सालों जीवन भर उन्हें एफआईआर के चक्कर में अपने भविष्य को बिगाड़ना पड़ता है। ऐसा कुछ नहीं होगा। यह हमने उनसे हासिल किया है। इसकी मुझे खुशी हैl

और जो बच्चों के परिवार हैं उन्हेंउचित मुआवजा दिया जाएगा। इसकी मुझे खुशी है और भारत के लोकतंत्र की सबसे उच्च मंदिर मैं कहूंगा जो कि हमारी संसद है वहां पर इस मुद्दे पर और जवाबदेही पर भी पूरी बहस होगी। तो इसके साथ मैं आप सबके भी बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं कि आप लोगों ने समर्थन दिया इस आंदोलन का। जय हिंद।

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