यार आज ना एक ऐसे [गला साफ़ करने की आवाज़] एक्टर के बारे में बात करने वाली हूं जो हर उस इंसान का साथी रहा है जिसने कभी प्यार किया हो। जिसका दिल टूटा हो जो रात में अकेले बैठकर गाने सुनता हो। सोचो वो पल जब पहली बार किसी को मोहब्बत हुई होगी तो तू ही मेरी शब है कानों में बजा होगा। या वो पल जब किसी को धोखा मिला होगा तो फिर आओ वाला रिपीट मोड़ पर सुना होगा। या वो रात का अकेलापन इतना भारी लगा होगा तब उसने सुना होगा जाने क्यों मोहब्बत वाला गाना सुना होगा। ये सब सुनकर आंखों में आंसू आ जाते हैं। अब गाने किसने दिए हमें? इमरान हाशमी ने। मर्डर की वो वाली केमिस्ट्री आवारापन का वो दर्द आज भी महसूस होता है। गैंगस्टर में या सुनकर सबको एकदम से रन सी हो जाती है। झलक दिखला जा पर जो मस्ती आई थी हमारी अधूरी कहानी में जो रोना आया था ये सब इमरान हाशमी ने दिया था। खास बात यह कि केवल दर्शक ही नहीं प्रोड्यूसर्स भी इमरान हाशमी से खुश थे।
लगातार कम बजट वाली मूवीज हिट हो रही थी। म्यूजिक गारंटेड हिट था। मतलब सोचो यार 2004 से 2012 के बीच बॉलीवुड में सबसे ज्यादा प्रॉफिटेबल स्टार कौन था? शाहरुख खान नहीं था, सलमान नहीं था, आमिर नहीं था बल्कि इमरान हाशमी था। तो लेकिन फिर क्या हुआ कि वो कभी सुपरस्टार ही नहीं बन पाए। क्यों? इतना सब देखने के बाद भी इमरान हाशमी कभी सलमान खान क्यों नहीं बन पाए? शाहरुख खान क्यों नहीं बन पाए? सुपरस्टार क्यों नहीं बन पाए? आज इसी सवाल का जवाब ढूंढने वाली हूं। यार जितना मैंने इमरान हाशमी के करियर को देखा उतना मुझे एक बात समझ में आई। इमरान हाशमी की सबसे बड़ी सक्सेस ही उनकी सबसे बड़ी फेलियर बन गई। कैसे? आओ बताती हूं। तू ही मेरी शब [संगीत] है सुबह है तू तो फिर आ। पहले वो टाइम याद करो जब इमरान हाशमी ने धमाका किया था। है ना? 2003 फुटपाथ से डेब्यू किया। फिल्म फ्लॉप हुई। लेकिन क्रिटिक्स ने कहा कि इस लड़के में कुछ तो है। 2004 में मर्डर आती है। मल्लिका शेरावत के साथ पूरी इंडस्ट्री हिल जाती है। उस जमाने में बॉलीवुड में इतनी बोल्डनेस किसी ने नहीं दिखाई थी। फिल्म सुपरहिट हुई और उसी वक्त एक लेबल मिला। ये तो सीरियल किसर है यार। इसके बाद जो हुआ वो एक के बाद हिट था। आशिक बनाया आपने हिट गस्टर हिट किया अली। आज भी किसी ना किसी दिल को छू जाता है। तो इमरान की याद आती है।
आवारापन 2007 में आई बॉक्स ऑफिस पर एवरेज परफॉर्म रही। लेकिन फिर तो आओ ऐसे गाने थे कि हर टूटे दिल वाले इंसान की प्लेलिस्ट में शामिल थे। जिन्नत हिट होती है और डर्ट पिक्चर हिट होती है। हमारी अधूरी कहानी एवरेज बॉक्स ऑफिस लेकिन आगे चलकर आपको और मुझे सबको रुलाती है। अब मैं तुमसे एक सवाल पूछती हूं। इन फिल्मों में लोग सबसे ज्यादा क्या याद करते हैं? इमरान हाशमी या उसके सॉन्ग्स तू ही मेरी शब है। आशिक बनाया आपने या अली। हां या झलक दिखला जा। यही प्रॉब्लम यहीं से शुरू होती है। यही प्रॉब्लम है। ऑडियंस फिल्म देखने जाती थी लेकिन थिएटर से बाहर निकलती थी। सिर्फ गाने सुनती थी। स्टार धीरे-धीरे पीछे छूट गया। [संगीत] म्यूजिक कहीं आगे चला गया। इसको समझने के लिए अब जरा शाहरुख खान को देखो। लोग सिर्फ डीडीएलजे नहीं देखते हैं। वो राज भी बनना चाहते हैं। सलमान को लोग चिलबुल पांडे बनता हुआ देखना चाहते हैं। गाने नहीं सुनना चाहते। सिर्फ उनके आमिर के साथ रेंचू बनना चाहते हैं। लेकिन इमरान के साथ वो हमेशा आदमी बने जिससे लोग कनेक्ट तो करते थे। लेकिन वैसा बनना नहीं चाहते थे। एक गैंगस्टर, एक सीरियल लवर, चीटर, मर्डर, करने वाला, डार्क हीरो, ब्रोकन मैन। यह कैरेक्टर इंटरेस्टिंग तो थे, लेकिन एस्पिरेशनल नहीं थे। यही एक सुपरस्टार और एक सक्सेसफुल एक्टर का फर्क पैदा होता चला गया। अब जरा और आगे बढ़ो। अब आती है दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत महेश भट्ट। लोग कहते हैं महेश भट्ट कैंप ने इमरान हाशमी को बनाया। मैं कहती हूं बिल्कुल बनाया। लेकिन यही उन्हें रोक भी दिया। जरा सोचो अगर हर फिल्म चलती है तो प्रोड्यूसर क्या करेगा? वही फार्मूला दोहराएगा। थ्रिलर, डार्क, रोमांस, बोल्ड सीन हर बार वही तरीके के कैरेक्टर, वही तरीके के गाने इमरान हाशमी के साथ भी यही हुआ। प्रोड्यूसर खुश थे, ऑडियंस खुश थी लेकिन एक्टर धीरे-धीरे एक फार्मूला बनके रह गया और बॉलीवुड फार्मूला बदलना पसंद नहीं करता है। इसको और समझते हैं।
अब सलमान खान को देखो, रोमांस किया, कॉमेडी की, एक्शन किया, फैमिली फिल्म्स की, इमोशनल हिट हुई, शाहरुख खान विलेन भी बने, रोमांटिक हीरो भी बने, कोच भी बने, साइंटिस्ट भी बने। शाहरुख ने यशराज के साथ काम किया, धर्मा के साथ काम किया। रेड चिल्ली एंटरटेनमेंट खुद बनाया। उनकी रेंज डवोर्स थी। आमिर हर फिल्म में एक नया करैक्टर सामने ले आते थे। लेकिन इमरान हाशमी हर बार उसी दुनिया में लौटते थे। पर शायद ये उनकी चॉइस कम बॉलीवुड इंडस्ट्री की चॉइस ज्यादा बन गई थी और फिर वो सीरियल केसर वाला लेवल जो उन्हें मिला था वो उनकी जंजीर बन गया। यार ये बात खुद इमरान ने भी मानी है। उनका एक पडकास्ट है। उसमें उन्होंने खुलासा किया। सीरियल केसर का लेवल एक्चुअली एक प्लांट पिया स्ट्रेटजी था। महेश भट्ट को यह आईडिया पसंद था। इमरान खुद इससे खुश नहीं थे। लेकिन महेश भट्ट के सामने कुछ नहीं बोल सकते थे। इमरान ने खुद रणबीर अलाबादिया के पॉडकास्ट पर कहा, उस लेबल की वजह से मुझे हिट फिल्में मिली। मैं यह झूठ नहीं बोलूंगा। लेकिन एक वक्त था जब यही लेवल मेरे लिए सबसे बड़ी रुकावट बन गया। मैं कुछ अलग करना चाहता था। लेकिन धीरे-धीरे लोग मेरे पास वही पुराना फार्मूला लेकर आते थे। लोगों को लगता था यही हिट होगा। और फिर ऐसे में आता है ओटीटी और यहां से सब कुछ बदल जाता है। जो इमरान हाशमी की सबसे बड़ी ताकत थी। अब वही आम चीज बन गई। [संगीत] क्राइम थ्रिलर, डार्क कैरेक्टर्स, ग्रे हीरोज़, साइकोलॉजिकल स्टोरीज ये सब कुछ देखने के लिए थिएटर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। अब हर फ्राइडे ओटीटी पर मिल जाता था। यानी जिस जोनर पर इमरान हाशमी का करियर बना था, वही जॉनर अब धीरे-धीरे कंपटीशन वाला बन गया था। जबकि यार इमरान हाशमी की आखिरी सोलो सक्सेसफुल फिल्म राज 3 थी जो कि 2013 में आई उसके बाद एक के बाद एक फ्लॉप रॉय फ्लॉप असर एवरेज रही चीज इंडिया फ्लॉप मुंबई सागा एवरेज इमरान के पास कमबैक का मोमेंट अभी तक नहीं आया है। ओटीडी पर ही हग जैसी शानदार फिल्म दी लेकिन वो कमबैक वाली नहीं थी। फिर जिंदगी ने एक और इम्तिहान लिया। उनके बेटे को कैंसर हो गया। एक एक्टर करियर छोड़ सकता है। लेकिन एक बाप अपने बच्चे को नहीं छोड़ सकता। उन्होंने वही किया जो इस समय एक पिता को करना चाहिए था। काम पीछे चला गया। परिवार आगे रह गया।
और सच बोलूं? इस फैसले पर कोई सवाल नहीं [संगीत] उठाया जा सकता। लेकिन सच्चाई यह भी है कि बॉलीवुड किसी का इंतजार नहीं करता। अब बाबा रफ 2 आ रही है। 19 साल बाद लोग एक्साइटेड हैं। इनफैक्ट मेरे आसपास लोग इस बारे में बात कर रहे हैं कि हमें यह फिल्म देखनी है। लेकिन सवाल यह नहीं है कि फिल्म हिट होगी या फ्लॉप। सवाल यह है कि इमरान हाशमी को आखिरकार वो पहचान मिलेगी। जिसके वो हकदार थे। और यार इस पूरी कहानी के बाद एक बात जरूर कहूंगी। इमरान हाशमी कभी शाहरुख खान नहीं बने। सलमान नहीं बने लेकिन शायद उन्हें बनना ही नहीं था क्योंकि उन्हें दर्शकों को हार्ट ब्रेक की आवाज दी। उन्हें उनकी तन्हा रातों का साउंड ट्रैक दिया और शायद यही उनकी सबसे बड़ी जीत है और सबसे बड़ी हार भी। उन्होंने हिट दी क्योंकि बॉलीवुड ने उन्हें बदलने नहीं दिया और शायद यही वजह है कि आज भी जब कोई रात में अकेला बैठकर [संगीत] तो फिर आओ या फिर तू ही मेरी शब्द सुनता है तो सबसे पहले इमरान हाशमी की याद आती है। तो इमरान हाशमी के अगर तुम फैन हो तो मुझे कमेंट करके जरूर बता देना। बट पर्सनली मैं चाहती हूं कि आवारा बन टू हिट हो और इमरान हाशमी का एक तगड़ा कमबैक हो। उनका एरा वापस आए। मैं तुम्हें नेक्स्ट वीडियो में मिलूंगी। तब तक तुम चैनल को सब्सक्राइब कर लेना। वीडियो को लाइक और शेयर करना और प्लीज बेल आइकॉन दबाना।