ओ [संगीत] हंसिनी मेरी हंसिनी [संगीत] 90 के दशक में बॉलीवुड में कई खूबसूरत अभिनेत्रियों ने अपनी किस्मत आजमाई लेकिन उनमें एक चेहरा ऐसा भी था जिसने फिल्मों में आने से पहले ही देश के लाखों युवाओं का दिल जीत लिया था। दीवाना तू है मेरा दीवाना। इन्होंने फेमिना मिस इंडिया का ताज अपने नाम किया। मिस यूनिवर्स के प्रेस्टीजियस मंच पर भारत को रिप्रेजेंट किया और फिर बॉलीवुड में कदम रखते ही अपनी सादगी, खूबसूरती और ग्रेस से लाखों लोगों की पसंद बन गई। आंचल ला चूड़ी ला पायल ला काजल [संगीत] सारी। लेकिन सवाल यह है कि जिस अभिनेत्री के पास ब्यूटी थी, टैलेंट था, स्टारडम पाने का हर मौका था, वो अचानक फिल्मों से दूर क्यों हो गई? मेरी जान पे मेरे हुस्न पे है चार पागल। देख तो जरा मुझको एक नजर भर दूंगी। आज उनकी पहचान एक एक्ट्रेस से ज्यादा साउथ इंडियन सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक महेश बाबू की पत्नी के रूप में ज्यादा होती है। [संगीत] गुंडा [गाना गाने की आवाज़] प्रेमवा लेकिन क्या इन्होंने अपना करियर किसी मजबूरी में छोड़ा था या यह फैसला अपनी खुशी से लिया? आखिर क्यों एक मिस इंडिया जिसने बॉलीवुड में शानदार शुरुआत की वो सिल्वर स्क्रीन से हमेशा के लिए गायब हो गई। नहीं हरगिज़ नहीं। व्हाट डू यू एक्सपेक्ट दद्दू? मैं ऐसी जगह शादी कर लूं जिस कंट्री के बारे में मुझे कुछ नहीं पता। नमस्कार दोस्तों मैं हूं श्वेता जया और आप देख रहे हैं फिल्मी बातें। दोस्तों आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे 90ज की फेमस एक्ट्रेस नम्रता शिरोडकर की। एक जवानी तेरी एक जवानी मेरी दोनों मिले तो बनी नम्रता शिरोडकर का जन्म 2 जनवरी 1972 को महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ था। इनके पापा का नाम नितिन शिरोड़कर और मम्मी का नाम वनीता शिरोडकर था। वैसे नम्रता के लिए फिल्म्स, कैमरा और ग्लैमर की दुनिया कोई नई नहीं थी। इनकी फैमिली कई पीढ़ियों से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़ी हुई थी। यानी एक्टिंग और परफॉर्मिंग आर्ट्स इन्हें विरासत में मिले थे। इनकी ग्रैंड मदर मीनाक्षी शिरोड़कर अपने दौर की मराठी सिनेमा की सबसे चर्चित एक्ट्रेसेस में गिनी जाती थी। साल 1938 में रिलीज़ हुई फिल्म ब्रह्मचारी में उन्होंने स्विम सूट पहनकर पूरे देश में सनसनी मचा दी थी। उस दौर में किसी इंडियन एक्ट्रेस का स्क्रीन पर स्विम सूट पहनना बेहद बोल्ड माना जाता था। इसलिए इस सीन की पूरे देश में खूब चर्चा हुई और मीनाक्षी शिरोडकर अपने समय की सबसे प्रोग्रेसिव एक्ट्रेसेस में गिनी जाने लगी। वहीं नम्रता की बड़ी बहन शिल्पा शिरोड़कर भी आगे चलकर 90ज की पॉपुलर बॉलीवुड एक्ट्रेस बनी और कई हिट फिल्मों में अपनी मजबूत पहचान बनाई। खेत गई बाबा बाजार गई मां अकेले हूं घर मा तू आजा ऐसे फिल्म ओरिएंटेड फैमिली में पली बढ़ी नम्रता ने बचपन से ही कैमरा लाइट और ग्लैमर की दुनिया को बहुत करीब से देखना शुरू कर दिया। नम्रता शिरोडकर की पर्सनालिटी बचपन से ही काफी कॉन्फिडेंट, ग्रेसफुल और अट्रैक्टिव थी। इनकी टॉल हाइट, चार्मिंग स्माइल और कैमरा कॉन्फिडेंस इन्हें बाकी लड़कियों से अलग पहचान दिलाते थे। स्कूल और कॉलेज के दिनों में भी यह कल्चरल इवेंट्स, फैशन शोज़ और ब्यूटी कंपटीशंस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी और फिर धीरे-धीरे इनका रुझान प्रोफेशनल मॉडलिंग की तरफ होने लगा। लुक इट्स 100% [संगीत] प्योर। रियली रिअरिंग राइट? आई स्ट्रांगली रेकमेंड यू गाइस ट्राई इट टू।
उस समय भारत में फैशन इंडस्ट्री भी तेजी से ग्रो कर रही थी और नए मॉडल्स को बड़े-बड़े ब्रांड्स, प्रिंट एडवर्टाइजमेंट्स और कमर्शियल कैंपेन में लगातार मौके मिल रहे थे। नम्रता ने भी कई प्रिंट एड्स, फैशन शोज़, कमर्शियल कैंपेन और ब्रांड प्रमोशन किए। अपनी ब्यूटी, कॉन्फिडेंस, एलगेंट्स और प्रोफेशनल एटीट्यूड की वजह से इन्होंने बहुत कम समय में ही मॉडलिंग इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना ली। लेकिन यह तो बस शुरुआत थी। इनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आना अभी बाकी था। एक ऐसा प्लेटफार्म जिसने इन्हें सिर्फ भारत में ही नहीं इंटरनेशनल लेवल पर भी एक नई पहचान दिला दी। साल 1993 भारत की सबसे प्रेस्टीजियस ब्यूटी कंपटीशंस में से एक फेमिना मिस इंडिया ऑर्गेनाइज हुआ। देश भर से हजारों प्रतियोगियों ने इसमें हिस्सा लिया। हर किसी का सपना था मिस इंडिया का ताज पहनना। इंटेंस कंपटीशन के बाद कुछ ही प्रतियोगी फाइनल तक पहुंची और उन्हीं में से एक थी नम्रता शिरोडकर। इनकी खूबसूरती, सेल्फ कॉन्फिडेंस, शानदार व्यक्तित्व और मंच पर बेहतरीन प्रेजेंटेशन ने जजों का दिल जीत लिया। आखिरकार नम्रता ने फेमिना मिस इंडिया यूनिवर्स 1993 का खिताब अपने नाम कर लिया। व्हाट विल यू रिमेंबर मोस्ट अबाउट व्हाट यू सॉ इन मेक्सिको? आई रिमेंबर आर्कटेकस एंड इट्स कॉलोनियो सिटी। आय मीन द होल ah कॉलोनियल बिल्डिंग्स दैट वी सॉ एंड ऑल इट्स मेमोरेबल आर्किटेक्चर एंड स्कल्प्चर। इस जीत के बाद इन्हें उसी साल मिस यूनिवर्स कंपटीशन में भारत को रिप्रेजेंट करने का मौका मिला और दुनिया भर से आई प्रतियोगियों के बीच नम्रता ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि नम्रता क्राउन तो नहीं जीत सकी लेकिन टॉप सिक्स में रही और इनके प्रदर्शन की काफी सराहना हुई। मिस यूनिवर्स से लौटने तक नम्रता शिरोडकर सिर्फ एक मॉडल ही नहीं बल्कि पूरे देश की पहचान बन चुकी थी। मैगजीन के कवर पर इनकी तस्वीर छपने लगी। टीवी इंटरव्यू के लिए बुलाया जाने लगा। बड़े-बड़े ब्रांड्स इन्हें अपना चेहरा बनाना चाहते थे और बॉलीवुड के नामी फिल्म मेकर्स भी इन्हें अपनी फिल्मों में साइन करने के लिए कांटेक्ट करने लगे। और यहीं से शुरू हुई नम्रता शिरोड़कर के फिल्मी सफर की नई कहानी। लेकिन तब नम्रता शिरोड़कर चाहती थी कि इनकी पहचान सिर्फ एक खूबसूरत चेहरे के रूप में नहीं बल्कि एक बेहतरीन एक्ट्रेस के रूप में बने। यही वजह थी कि इन्होंने करीब 4 साल तक मॉडलिंग, विज्ञापनों और फैशन इवेंट्स पर ही फोकस किया और इस दौरान एक्टिंग की बारीकियां सीखती रहीं। डायलॉग डिलीवरी और बाकी जरूरी आर्ट पर खूब मेहनत की। आखिरकार जब नम्रता को लगा कि अब यह फिल्मों में एक्टिंग के लिए तैयार हैं, तब इन्होंने साल 1998 में फिल्मों के लिए हां करना शुरू किया और इसी साल बॉलीवुड में अपनी पहली फिल्म जब प्यार किसी से होता है से एक्टिंग की शुरुआत की। दीवाना तू है मेरा दीवाना। इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे सलमान खान और ट्विंकल खन्ना। हालांकि नम्रता इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस नहीं थी लेकिन इनका किरदार कहानी का एक बेहद अहम हिस्सा था। इन्होंने पूजा नाम की एक युवती का रोल निभाया। हम एक दूसरे के साथ दो-तीन महीनों से हैं। और इन दो-तीन महीनों में मैंने कम से कम हजार बार तुमसे कहा होगा सूरज आई लव यू। रिलीज के बाद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और नम्रता ने दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। एक जवानी तेरी एक जवानी मेरी दोनों मिले तो बनी। पहली ही फिल्म की सफलता के बाद नम्रता शिरोड़कर के पास फिल्मों के कई ऑफर्स आने लगे। लेकिन इन्होंने फिल्मों की संख्या बढ़ाने के बजाय अच्छी स्क्रिप्ट और मजबूत किरदारों को प्राथमिकता दी। इनका मानना था कि किसी कलाकार की पहचान उसकी फिल्मों की गिनती से नहीं बल्कि उसके निभाए गए किरदारों से बनती है। अगले साल 1999 में निर्देशक महेश मंजरेकर की एक दमदार गैंगस्टर फिल्म रिलीज हुई। वास्तव द रियलिटी। फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे थे संजय दत्त जिनके अपोजिट नम्रता को कास्ट किया गया था। मेरी दुनिया [गाना गाने की आवाज़][संगीत] है तुझ में कहीं। इस फिल्म में नम्रता शिरोडकर को सोनिया का किरदार मिला जो फिल्म में संजय दत्त की प्रेमिका और बाद में उनकी पत्नी बनती हैं। यह कोई ग्लैमरस रोल नहीं था ना ही इसमें सिर्फ गानों पर फोकस था बल्कि इसमें नम्रता ने एक साधारण लड़की का किरदार निभाया जो अपने प्यार का साथ हर अच्छे बुरे वक्त में निभाती है। फिल्म रिलीज़ हुई और दर्शकों के दिलों पर छा गई। वास्तव सिर्फ एक हिट फिल्म नहीं बनी बल्कि आज भी इसे बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन गैंगस्टर फिल्मों में गिना जाता है।
जिसमें संजय दत्त की एक्टिंग के साथ-साथ नम्रता की भी खूब चर्चा हुई। उधर खड़ा रह के देखते रहेगा। लड़की देखी नहीं कभी। चल चल कपड़े उतार। अरे बाबा बहुत देखी है रे बंदूक। आजकल 12 साल का बच्चा भी बंदूक लेकर घूमता है। रख खुद। इस फिल्म में निभाए इनके किरदार के बाद कई फिल्म क्रिटिक्स भी कहने लगे कि नम्रता शिरोडकर बॉलीवुड की अगली बड़ी स्टार बन सकती हैं। वास्तव के बाद नम्रता का करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंचने लगा। अब फिल्म मेकर्स सिर्फ इनकी खूबसूरती की वजह से नहीं बल्कि इंटेंस एक्टिंग को देखकर भी इन्हें अपनी फिल्मों में लेना चाहते थे। इसी साल नम्रता एक और बड़ी फिल्म कच्चे धागे में भी नजर आई। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे अजय देवगन, मनीषा कोराला और सैफ अली खान। हालांकि इस फिल्म में नम्रता का रोल ज्यादा बड़ा नहीं था लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और नम्रता के खाते में एक और हिट फिल्म जुड़ गई। आंख लड़ [संगीत] जाती है। नींद उड़ जाती है आग लग जाती है। साल 2000 में नम्रता की फिल्मों के हिट लिस्ट में शामिल हुई एक और फिल्म जो थी पुकार। इसका डायरेक्शन मशहूर फिल्म मेकर राजकुमार संतोषी ने किया था। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में नम्रता के साथ थे अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित। सुनता है मेरा खुदा दिलो जान से चाहूं। इतने बड़े स्टार्स के साथ अपनी पहचान बनाना किसी भी नई एक्ट्रेस के लिए आसान नहीं होता। लेकिन नम्रता ने यहां भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। इन्होंने पूजा मलप्पा का किरदार निभाया जो अनिल कपूर के किरदार से प्यार करती है। लेकिन हालात दोनों को कभी एक नहीं होने देते। तो तुम यूरोप जा रही हो? कम ऑन जय। ऐसा चांस बार-बार थोड़े ही आता है। आई एम सो एक्साइटेड। जय मैं उनकी मेहमान बनकर जा रही हूं।
मुझे वहां कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। नम्रता ने अपनी शांत और भावनात्मक एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया और कई फिल्म समीक्षकों ने इनके दिल खोलकर तारीफ की। हम राही [संगीत] जब हो मस्ताना मौज में हो दिल दीवाना फिर चलने वाले रुकते [संगीत] हैं कहां। हालांकि पुकार बॉक्स ऑफिस पर तब एवरेज रही लेकिन समय के साथ इसे एक शानदार फिल्म माना गया। इतना ही नहीं इसी दौरान नम्रता ने अस्तित्व जैसी गंभीर फिल्म में भी काम किया। हालांकि इस फिल्म में इनका किरदार छोटा था लेकिन बेहद मजबूत। मैं अदिति को ले जाने आई हूं अपने साथ। अनिकेत अदिति की जिंदगी में हुई घटनाओं की वजह से मैंने अपनी इंगेजमेंट नहीं तोड़ी। आगे इसके अलावा नम्रता ने साल 200 में हेराफेरी और आगाज 2001 में अलबेला और तेरा मेरा साथ रहे। 2002 में मेरे दो अनमोल रतन और हथियार। 2003 में एलओसी करगिल 2004 में इंग्लिश फिल्म ब्राइड एंड प्रजुडिस और हिंदी फिल्म चरस अ जॉइंट ऑपरेशन रोक सको तो रोक लो और इंसाफ द जस्टिस जैसी फिल्मों में अभिनय किया। सर से [संगीत] सरक गई मेरी चुनरी नम्रता एक के बाद एक सक्सेसफुल फिल्में कर रही थी। बड़े-बड़े सितारों के साथ काम बढ़ती हुई लोकप्रियता और हर तरफ चर्चा इनके लिए आम बात थी। ऐसा लग रहा था कि अब इनका करियर और भी ऊंचाइयों तक जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। एक्चुअली जब एक तरफ नम्रता का फिल्मी करियर लगातार आगे बढ़ रहा था। उसी समय इनकी पर्सनल लाइफ में भी एक नई कहानी शुरू हो रही थी और इनकी मुलाकात हुई साउथ फिल्म इंडस्ट्री के एक एक्टर से जो थे महेश बाबू। साल 200 तेलुगु सिनेमा के उभरते हुए अभिनेता महेश बाबू अपनी नई फिल्म वामसी की तैयारी कर रहे थे। फिल्म के निर्माताओं को एक नई खूबसूरत और लोकप्रिय एक्ट्रेस की तलाश थी। तभी उनकी नजर नम्रता पर पड़ी। उस समय तक नम्रता बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी थी। इन्होंने उस फिल्म का ऑफर एक्सेप्ट किया जो नम्रता की पहली तेलुगु फिल्म थी। फिल्म की शूटिंग के दौरान महेश बाबू और नम्रता के बीच अच्छी दोस्ती हो गई जो आगे प्यार में बदल गई और करीब 4 साल तक दोनों एक दूसरे को डेट करते रहे। उस समय महेश बाबू तेलुगु सिनेमा में लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे। वहीं नम्रता बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना रही थी। दो अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री में होने के बावजूद दोनों ने साथ में वक्त बिताना जारी रखा। जिसमें ज्यादातर नम्रता ही महेश बाबू से मिलने के लिए उनके पास या उनकी शूटिंग लोकेशन पर चली जाया करती थी। फिर दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। लेकिन खबरों के मुताबिक तब नम्रता शिरोड़कर के सामने महेश बाबू और उनकी फैमिली ने यह बात रखी कि शादी के बाद उन्हें फिल्मों में काम करना बंद करना पड़ेगा। लेकिन यह एक ऐसा फैसला था जिसे लेना किसी भी सक्सेसफुल एक्ट्रेस के लिए आसान नहीं होता। एक तरफ था तेजी से आगे बढ़ता नम्रता का फिल्मी करियर और दूसरी तरफ प्यार, ससुराल की रिस्पांसिबिलिटीज़ और नई चुनौतियां। अब सवाल था आखिर नम्रता किसे चुनेंगी? दोस्तों, तब उन्हीं लड़कियों को अच्छी संस्कारी महिला माना जाता था जो शादी के बाद परिवार के लिए अपने करियर की कुर्बानी दे दें। पति और ससुराल को करियर से ज्यादा तरजीह दें। और अगर वह कोई ऐसी डिमांड करें तो बिना उफ किए उन्हें एक्सेप्ट करें।
इवन आज भी छोटे शहरों या देश के लाखों परिवारों में इसे ही ग्लैमराइज किया जाता है। तो तब तो यह और सामान्य बात थी। सो नम्रता ने भी वही किया और शर्तों को मानकर शादी के लिए हामी भर दी। 10th फरवरी 2005 को मुंबई के एक होटल में दोनों की शादी संपन्न हुई। शादी के बाद नम्रता ने फिल्मों से दूरी बना ली। जबकि उस समय उनकी उम्र सिर्फ 33 साल थी और उनके पास अभी भी कई फिल्मों के ऑफर थे। बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें अपने इस फैसले का कभी अफसोस नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि हर इंसान की जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब उसे तय करना पड़ता है कि उसके लिए सबसे ज्यादा क्या मायने रखता है और मैंने अपने परिवार को चुना। शादी के बाद नम्रता हैदराबाद शिफ्ट हो गई और पूरी तरह महेश बाबू की फैमिली और उनके करियर के लिए काम करने में जुट गई। कई इंटरव्यू में महेश बाबू ने बताया कि नम्रता ने उनके करियर को शेप देने और फिल्म सिलेक्शन में उनकी काफी हेल्प की। यहां तक कि महेश बाबू से पहले वो ही उनके फिल्मों के स्क्रिप्ट को पढ़ा करती थी। शादी के कुछ साल बाद नम्रता ने दो बच्चों को जन्म दिया। बेटा गौतम कृष्णा और बेटी सितारा और अब यह दोनों भी बड़े हो चुके हैं। आज नम्रता फिल्मों से दूर हैं। अपने फैमिली के साथ महेश बाबू फाउंडेशन के कामकाज को देखती हैं और सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी फैमिली, बच्चों, त्योहारों और ट्रैवल की झलक अपने फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं। दोस्तों, अगर नम्रता शिरोड़कर के पूरे करियर को देखें तो इन्होंने फिल्मों की लंबी लिस्ट नहीं बनाई। लेकिन जितनी भी फिल्में की उनमें अपनी सादगी, ग्रेस और नेचुरल एक्टिंग से अलग पहचान जरूर बनाई। इन्होंने अपनी बड़ी बहन की तरह कभी भी सिर्फ ग्लैमर या बोल्ड इमेज बनाने की कोशिश नहीं की। इनमें काफी संभावनाएं थी लेकिन इन्होंने उसका ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं किया।
शायद यही वजह रही कि 90 के दशक में जब करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, उर्मिला मातोंडकर, काजोल, ऐश्वर्या राय और प्रीति जिंटा जैसी एक्ट्रेसेस अपने करियर के टॉप पर थी तब नम्रता उन्हें कंपटीशन नहीं दे पाई। वरना शायद इस खूबसूरत और टैलेंटेड लड़की की कहानी कुछ अलग होती। आंचल चूड़ी पायल काजल सारी। तो दोस्तों, आपको नम्रता शिरोड़कर की कौन सी फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है? हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा। साथ ही यह भी राय दीजिएगा कि आपको क्या लगता है अगर नम्रता ने शादी के बाद फिल्में नहीं छोड़ी होती तो क्या यह बॉलीवुड में और बेहतर जगह बना सकती थी। तो आज के लिए बस इतना ही। आगे भी हम आपके लिए ऐसी ही दिलचस्प कहानियां और बायोग्राफीस लेकर आते रहेंगे। आप हमारे काम को सपोर्ट करना चाहते हैं तो थैंक्स बटन के जरिए कंट्रीब्यूट कर सकते हैं या चैनल का मेंबरशिप भी ज्वॉइ कर सकते हैं। तो मिलते हैं अगले एपिसोड में कुछ और नए किस्से कहानियों के साथ। तब तक के लिए मुझे दीजिए इजाजत। नमस्कार। [संगीत]