का पहला बयान पेपर लीक घिनौना पाप सख्त सजा मिले यह प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से कहा गया है। नीट पेपर लीक को लेकर यह पहला बयान सामने आया। सख्त सजा दिलाने में वरिष्ठ वकील सरकार का साथ दें। पेपर लीक सिर्फ एक राज्य और केंद्र का मामला नहीं है। फुल प्रूफ सिस्टम बनाने में सबका सहयोग मिले। एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक को लेकर नीट पेपर लीक को लेकर यह बयान दिया है। कल एक बार नीट के एग्जाम के बारे में आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि जब पेपर लीक का खबर आए तुरंत सरकार ने कारवाई किया और 13ों लोगों को अरेस्ट करके जेल में डाल दिया गया है
और साथसाथ जो छात्र हैं, स्टूडेंट्स हैं उनका भविष्य को नुकसान ना हो इसलिए री एग्जामिनेशन नीट का प्राथमिकता दिया गया और री एग्जामिनेशन को सक्सेसफुली सफलतापूक कंडक्ट किया गया और उसका रिजल्ट निकालने में कोई विलंब नहीं किया। तो दोबारा इस तरह का पेपर लीक ना हो इसके लिए सख्ती से कदम जो उठाया गया है जिन्होंने पेपर लीक धंधे में जो लिफ्ट है जो लोग दोषी पाए गए हैं जिसको अरेस्ट किया गया है उसको जेल में डाल करके प्रधानमंत्री जी ने अपील भी किया है कि उनका जो सजा है उसको शक्ति से सख्ती सजा कैसे दिया जाए उसमें सारा टॉप क्लास के वकील लोग भी साथ दें ताकि जो पेपर लीक जैसे पाप काम किया है उन लोगों को घोर सख्त सजा मिले
और आगे पेपर लीक नहीं होने के लिए सख्ती से जो कदम उठाया गया है उसके बारे में भी प्रधानमंत्री जी ने जानकारी दिया और प्रधानमंत्री जी ने यह भी कहा कि पेपर लीक सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है। सिर्फ केंद्र सरकार का मामला नहीं है। पूरा देश का हर एक राज्य में जहां-जहां पेपर लीक करने में जो लोग लिफ्ट हैं, जो लोग इस धंधे में इनवॉल्व है, जिन्होंने काम इस तरह का घिनौना किया है, पाप काम किया है, उनको सजा देने के लिए सब एकजुट होना चाहिए। यह कोई दलगत राजनीति का विषय नहीं है। यह देश तो संसदीय कार्य मंत्री को आप सुन रहे उन्होंने बताया कि इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से नीट पेपर लीक को लेकर क्या कहा गया। हमारे साथ हमारे सहयोगी दिनेश भी जुड़े हुए हैं। दिनेश सहमति कैसे बन पाएगी क्योंकि अपोजिशन इस मुद्दे को लगातार धार देता हुआ दिखाई दे रहा है।
अपोजिशन की तरफ से साफ तौर पर कहा जा रहा है कि इस मुद्दे पर बात होनी चाहिए और इस वजह से कल भी हमने देखा हंगामा हुआ। आज भी हंगामा हो रहा है। ऐसे में बातचीत हो ही नहीं पा रही है। छह बार कल दोनों सदन स्थगित करने पड़े और आज भी [संगीत] यही दिखाई दे रहा है कि शोरशराबा और हल्ला हंगामा इस कदर है कि थोड़ी-थोड़ी देर बाद फिर यह यहां पर भी फैसले लेने पड़ रहे हैं आज भी कि स्थगित करना ही एक चारा है। लेकिन विधाई कार्य ऐसे में कैसे होंगे? वह जो सरकार ने तय किया है इस सत्र के लिए जो महत्वपूर्ण सरकार के नजरिए में और जिसको लेकर लिस्टिंग हुई है, वह काम कैसे आगे बढ़ाए जाएंगे? यह बड़ा चैलेंज है। तो अब इसमें समाधान तभी बन सकता है जब कोई बीच का रास्ता निकाला जाए। क्योंकि आप देख रहे हैं विपक्ष इस बात पर आमादा है कि पहले सब कुछ रोक कर इस पर बातचीत की जाए। स्थगित करके इसके इसके संदर्भ में नोटिस भी दिया गया विपक्ष की तरफ से कि स्थगन के तहत वो चर्चा चाहते हैं नीट मामले में या एजुकेशन मामले में। अ लेकिन इधर सरकार अपनी स्ट्रेटजी बना रही है। जाहिर है अगर वो इसमें थोड़ा भी डिफेंसिव होती है तो फिर विपक्ष पूरी तरह से आक्रामक है। तो सरकार को इसमें डिफेंसिव भी नहीं होना है।
विधायकारियों को भी आगे बढ़ाना है। ये एक बड़ी टाइट रोप वॉक है और इसमें जाहिर है बड़ी मशक्कत लगेगी और इसीलिए आप मीटिंग्स का दौर देख रही हैं। जहां सुबह आज पहले एनडीए का संसदीय दल मिला वहां पर जो प्रधानमंत्री ने बातें कही उसको उसको बताया गया कि सरकार पूरी तरह से संवेदनशील है। एक्चुअली सरकार संदेश दे रही है। सरकार यह भी बता रही है कि हम इस पर कार्रवाई भी कर रहे हैं। आगे आने वाले दिनों में भी इस पर जो ज़रूरी होगा वह करेंगे। लेकिन वह बिल्कुल भी यह नहीं दिखाई देना चाहती कि विपक्ष के दबाव में वो यह काम कर रही है। वो वो स्वयं अपने इनिशिएटिव पर काम कर रहे हैं। ये तो वो दिखाना चाहते हैं लेकिन यह दिखाना नहीं चाहते कि विपक्ष पर विपक्ष के लाए दबाव की वजह से वो यह करने के लिए मजबूर हुए। लिहाजा एक रास्ता ऐसा निकालना पड़ेगा। अगर अगर अह संसद को स्थाई रूप से अह आगे सुचारू चलाना है तो कोई एक बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा। और मुझे लगता है कि हो सकता है इसके इसके संदर्भ में आने वाले वक्त में लीडर ऑफ अपोज़िशन आज आज जैसे वो मिले थे स्पीकर से आज भी वो मिले उन्होंने कहा कि हम इसको लेकर बहुत ज्यादा संजीदा हैं। हो सकता है इस तरीके की कोई मुलाकात ही आगे संसद के स्थाई सुचारू चलने का कोई रास्ता बना सके। लेकिन फिलहाल ये अभी आसान दिखाई दे नहीं रहा है। बिल्कुल और दिनेश हम बात ही कर रहे हैं। इस बीच एक बड़ी खबर आ गई है। दोनों सदन की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। यानी कि हंगामा